प्रकाश ऊर्जा का वह रूप है जिसकी सहायता से हम वस्तुओं को देख पाते हैं। जब किसी वस्तु पर प्रकाश पड़ता है, तो वह वस्तु से परावर्तित होकर हमारी आँखों में प्रवेश करता है। यह परावर्तित प्रकाश आँख के भीतर जाकर रेटिना पर दृष्टि की संवेदना उत्पन्न करता है, जिससे वस्तु हमें दिखाई देती है।
दिए गए चित्र में दिखाया गया है कि किसी वस्तु से निकलने वाली प्रकाश किरणें आँख में प्रवेश करती हैं। ये किरणें आँख के लेंस से होकर गुजरती हैं और अंततः रेटिना पर फोकस होती हैं। रेटिना पर प्रकाश पड़ते ही मस्तिष्क को संकेत मिलता है और हमें वस्तु का आभास होता है। यदि प्रकाश आँख तक न पहुँचे, तो वस्तु दिखाई नहीं देती।

भौतिकी के अनुसार प्रकाश एक विद्युतचुंबकीय तरंग है। इसका अर्थ यह है कि प्रकाश विद्युत और चुंबकीय क्षेत्रों के आपसी परिवर्तन से बनता है और इन्हीं के कारण आगे बढ़ता है। इसी कारण प्रकाश को चलने के लिए किसी भौतिक माध्यम की आवश्यकता नहीं होती और यह निर्वात में भी संचरित हो सकता है।
निर्वात में प्रकाश की चाल बहुत अधिक और निश्चित होती है, जिसका मान
3×108ms/s
है। किसी पदार्थीय माध्यम जैसे काँच या जल में प्रकाश की चाल कम हो जाती है, लेकिन निर्वात में यह सदैव समान रहती है।
इस प्रकार प्रकाश न केवल देखने का साधन है, बल्कि परावर्तन, अपवर्तन और वर्ण विक्षेपण जैसी अनेक प्रकाशीय घटनाओं का आधार भी है।
अर्थात प्रकाश की परिभाषा है – प्रकाश ऊर्जा का वह रूप है जो मानव नेत्र के रेटिना पर दृष्टि की संवेदना उत्पन्न करता है, जिससे वस्तुएँ दिखाई देती हैं।
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