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उत्तर:
- तुलसीदास रससिद्ध कवि हैं जिनकी भाषा शुद्ध साहित्यिक अवधी है।
- उन्होंने अपनी भाषा को प्रौढ़ता, कलात्मकता और सहजता प्रदान की है।
- संवाद-योजना में पात्रानुकूल कोमल, मधुर और व्यंग्यात्मक भाषा का सुंदर प्रयोग किया है।
- तत्सम-तद्भव शब्दों का समन्वय कर उन्होंने श्रुति-माधुर्य उत्पन्न किया है।
- चौपाई और दोहा छन्दों का प्रयोग कर भाषा को सरस और लोकप्रिय बनाया है।
- छन्दों में दीर्घ वर्णों का प्रयोग कर नाद-सौन्दर्य को और बढ़ाया है।
- उनके काव्य में अनुप्रास, रूपक, उपमा, उत्प्रेक्षा आदि अलंकार सहज रूप से मिलते हैं।
- वीर और हास्य रस का प्रभावशाली प्रयोग भाषा में प्राण फूंकता है।
- मुहावरों, लोकोक्तियों और सूक्तियों का प्रयोग भाषा को और सजीव बनाता है।
- तुलसी की भाषा शैली भाव, अर्थ और कला का सुंदर समन्वय है जो उनके काव्य को कालजयी बनाती है।
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