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उत्तर – इस कथन का आशय यह है कि परशुराम अपने क्रोधी और उग्र स्वभाव के लिए सारे संसार में प्रसिद्ध हैं। लक्ष्मण व्यंग्यपूर्वक कहते हैं कि संसार जानता है कि आपने पिता की आज्ञा मानकर अपनी माता का वध कर दिया था। इस क्रिया से आप माता-पिता दोनों के ऋण से उऋण हो गए। यह घटना आपके स्वभाव को स्पष्ट रूप से प्रकट करती है।
इस पाठ के अन्य प्रश्न
- इस पूरे प्रसंग में व्यंग्य का अनूठा सौन्दर्य है। उदाहरण के साथ स्पष्ट कीजिए।
- निम्नलिखित पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार पहचान कर लिखिए- (क) बालकु बोलि बधाँ नहि तोही। (ख) कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा।
- “सामाजिक जीवन में क्रोध की ज़रूरत बराबर पड़ती है…” इस कथन के आधार पर क्रोध के पक्ष या विपक्ष में अपना मत स्पष्ट कीजिए।
- अपने किसी परिचित या मित्र के स्वभाव की विशेषताएँ लिखिए।
- दूसरों की क्षमताओं को कम नहीं समझना चाहिए इस विषय पर कहानी लिखिए।
- उन घटनाओं को याद करके लिखिए जब आपने अन्याय का प्रतिकार किया हो।
- लक्ष्मण के वचनों से बढ़े हुए परशुराम जी के क्रोध को किसने और कैसे शान्त किया?
- ‘दोहा’ नामक छंद के लक्षण लिखिए।
- लक्ष्मण को परशुराम को मारने पर पाप और अपयश की सम्भावना क्यों थी?
- क्रोध पर विनय और व्यंग्य का अलग-अलग प्रभाव कैसे पड़ता है? ‘राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद’ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
- “आयेसु काह कहिअ किन मोहि।” श्रीराम की इस बात को सुनकर परशुराम ने प्रतिक्रियास्वरूप क्या कहा?

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