हथेली पर सरसों उगाना मुहावरे का अर्थ और इसका वाक्यों में प्रयोग

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hatheli par sarso ugana muhavare ka arth
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[UPSC सिविल सेवा (मुख्य) परीक्षा, 2025 हिंदी अनिवार्य पेपर]

हथेली पर सरसों उगाना मुहावरे का अर्थ होता है – असंभव या अत्यंत कठिन कार्य की अपेक्षा करना अथवा अव्यावहारिक ज़िद करना।

स्पष्टीकरण:
जब कोई व्यक्ति, संस्था या परिस्थिति बिना पर्याप्त समय, तैयारी या संसाधनों के किसी कठिन या लगभग असंभव कार्य को तुरंत पूरा करने की अपेक्षा करे, तो उसे “हथेली पर सरसों उगाना” कहा जाता है। यह मुहावरा अधीरता, अव्यावहारिक अपेक्षा और अवास्तविक सोच को दर्शाता है।

हथेली पर सरसों उगाना मुहावरे का वाक्यों में प्रयोग

  1. औपनिवेशिक काल में यह अपेक्षा करना कि सीमित संसाधनों के बावजूद भारतीय उद्योग तुरंत ब्रिटेन से प्रतिस्पर्धा कर लेंगे, हथेली पर सरसों उगाने जैसा था।
  2. जटिल अंतरराष्ट्रीय विवादों के तात्कालिक समाधान की आशा करना हथेली पर सरसों उगाने के समान है।
  3. मोहन बता रहा था कि उसके मैनेजर को किसी प्रोजेक्ट के लिए हाँ करवाना हथेली पर सरसों उगाना है।
  4. बिना निवेश बढ़ाए पाँच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की उम्मीद करना हथेली पर सरसों उगाना है।
  5. तुमने अभी किताब खोली भी नहीं और कह रहे हो कि टॉप करोगे… ऐसा नहीं होता, ये तो हथेली पर सरसों उगाने वाली बात है।
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