गोपियों ने उद्धव के सामने तरह-तरह के तर्क दिए हैं, आप अपनी कल्पना से और तर्क दीजिए।

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गोपियों ने उद्धव के सामने तरह-तरह के तर्क दिए हैं आप अपनी कल्पना से और तर्क दीजिए
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उत्तर- गोपियों ने उद्धव के समक्ष अनेक प्रकार के तर्क प्रस्तुत किए हैं। कल्पना के आधार पर कुछ और तर्क इस प्रकार हो सकते हैं—

  1. हे उद्धव! हमने कृष्ण के प्रेम में पड़कर लोक-लाज और कुल-मर्यादा तक का त्याग कर दिया है। अब उनके बिना जीना हमारे लिए संभव नहीं है।
  2. कृष्ण का अब हमारे प्रति प्रेम नहीं रहा है। वे तो अब कुब्जा और अपनी बाँसुरी के वश में हो चुके हैं। उनका मन हमसे हट चुका है।
  3. कृष्ण की प्रवृत्ति अब भौंरे जैसी हो गई है—जहाँ मधुर रस दिखा, वहीं जाकर रुक गए। उनका प्रेम हमारी तरह एकनिष्ठ नहीं है।
  4. उद्धव! संभवतः तुम्हारा ज्ञान ही कृष्ण पर प्रभाव डाल गया है, तभी तो उन्होंने प्रेम-संदेश भेजने के स्थान पर हमें योग-संदेश भेजा है।
  5. हम गोपियाँ प्रेम की भावना में डूबी हुई हैं। हमारे लिए निर्गुण ब्रह्म की उपासना करना संभव नहीं है, क्योंकि हमने कृष्ण को साकार रूप में प्रेम किया है।
  6. उद्धव! तुम ही बताओ—जो व्यक्ति प्रेम रूपी मीठी खाँड का स्वाद चख चुका हो, वह योग रूपी कड़वी निंबौरी को कैसे स्वीकार करेगा?
  7. हे उद्धव! योग-साधना कठिन मार्ग है। हम कोमल मन और तन वाली गोपियाँ इस मार्ग का पालन कैसे कर सकती हैं?
  8. गोकुल में तो सब लोग कृष्ण की भक्ति में लीन रहते हैं। अष्टांग योग जैसे कठोर साधनाएँ करने वाले तो काशी जैसे तीर्थ स्थलों में रहते हैं, यहाँ नहीं।

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