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उत्तर: A, इस प्रश्न का सही उत्तर है। हिन्दी भाषा में दीर्घ स्वर के मुख्यतः 7 भेद होते हैं।
इस प्रश्न का विस्तृत उत्तर:
स्वर वे ध्वनियाँ होती हैं जिन्हें बिना किसी अन्य अक्षर की सहायता से स्वतंत्र रूप से बोला और लिखा जा सकता है। स्वर का उच्चारण करते समय शुद्ध और सीधी हवा निकलती है, जो आवाज पैदा करती है। यही कारण है कि स्वर को भाषा का आधार भी कहा जाता है। बता दें कि हिंदी भाषा में मुख्यतः दो प्रकार के स्वर होते हैं, जिनके नाम “ह्रस्व स्वर” और “दीर्घ स्वर” हैं।
- ह्रस्व स्वर: ये ऐसे स्वर होते हैं जिनका उच्चारण कम समय में होता है। इनका उच्चारण करते समय मुख से ध्वनि थोड़े समय तक निकलती है।
- दीर्घ स्वर: इन स्वरों का उच्चारण अपेक्षाकृत अधिक समय तक होता है। बोलते समय यह स्पष्ट रूप से लंबे समय तक खिंचते हैं। उदाहरण – आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ।
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