मेडिकल लैब टेक्नीशियन (MLT) स्वास्थ्य प्रणाली में एक सहायक लेकिन तकनीकी भूमिका निभाते हैं। इनका मुख्य कार्य पैथोलॉजी और डायग्नोस्टिक जांचों के माध्यम से डॉक्टरों को सटीक रिपोर्ट उपलब्ध कराना होता है। इस प्रोफेशन में करियर बनाने के लिए विशेष ट्रेनिंग और कोर्स की जरूरत होती है, जो आपको लैब टेस्टिंग, रिपोर्टिंग और उपकरणों के सही इस्तेमाल की आवश्यक जानकारी देते हैं। यह लेख लैब टेक्नीशियन बनने की वास्तविक प्रक्रिया, शैक्षणिक योग्यता, और भारत व विदेश में करियर विकल्पों को तथ्यात्मक रूप से समझाता है।
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लैब टेक्नीशियन कौन होता है?
लैब टेक्नीशियन वह विशेषज्ञ होते हैं जो अस्पताल या मेडिकल लैब में मरीजों के अलग-अलग सैंपल की जांच करते हैं। इनके काम से ही डॉक्टर को बीमारी की सही जानकारी मिलती है और इलाज तय करना आसान होता है। इसी कारण, लैब टेक्नीशियन को मेडिकल टीम की रीढ़ भी कहा जाता है।
लैब टेक्नीशियन की प्रमुख जिम्मेदारियां:
- रक्त, मूत्र और अन्य जैविक नमूनों की जांच के मरीजों से सुरक्षित तरीके से सैंपल इकट्ठा करना।
- माइक्रोस्कोप और आधुनिक मशीनों का उपयोग करके पैथोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी टेस्ट करना।
- सटीक और स्पष्ट टेस्ट रिपोर्ट तैयार करना और रिपोर्टिंग के लिए डेटा तैयार करना।
- लैब के उपकरणों की देखभाल और नियमित सफाई करना, साथ ही लैब उपकरणों का सुरक्षित रूप से संचालन करना।
- सुरक्षा मानकों का पालन करना ताकि संक्रमण का खतरा न हो।
- नई तकनीक और टेस्टिंग विधियों की जानकारी लगातार अपडेट रखना।
नोट – इन सभी प्रक्रियाओं का पालन अस्पतालों और डायग्नोस्टिक लैब्स में NABL (National Accreditation Board for Testing and Calibration Laboratories) जैसे गुणवत्ता मानकों के अनुरूप किया जाता है।
लैब टेक्नीशियन बनने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया
लैब टेक्नीशियन बनने के लिए कुछ खास चरणों का पालन करना जरूरी है। नीचे हमने स्टेप-बाय-स्टेप पूरी प्रक्रिया बताई है, जिससे आप आसानी से समझ सकते हैं कि इस क्षेत्र में करियर कैसे बनाया जा सकता है।
स्टेप 1. आवश्यक योग्यता और स्किल्स पूरी करें
लैब टेक्नीशियन बनने की शुरुआत 12वीं कक्षा पूरी करने के बाद होती है। इसके लिए आम तौर पर फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी (PCB) स्ट्रीम जरूरी है, लेकिन कुछ कॉलेजों में मैथ्स वाले छात्रों को भी लिया जाता है। अधिकांश संस्थानों में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक होना आवश्यक है और आयु सीमा कम से कम 17 साल रखी जाती है, जबकि अधिकतम आयु कॉलेज या राज्य के नियमों पर निर्भर करती है। एडमिशन से पहले कॉलेज की आधिकारिक वेबसाइट या प्रॉस्पेक्टस से पात्रता अवश्य जांचें।
इसके अलावा छात्रों के पास कुछ स्किल्स होने चाहिए, जैसे कि छोटी-छोटी चीजों पर ध्यान देना, अनुशासन और समय का पालन करना, धैर्य रखना और विवरणों को ठीक तरह से संभालने की क्षमता रखना। अगर आपको विज्ञान में रुचि है, प्रयोगशालाओं में काम करना पसंद है, मशीनों और उपकरणों को सही तरीके से चलाना और रिपोर्ट बनाना व डेटा संभालना अच्छे से कर सकते हैं, तो यह करियर आपके लिए उपयुक्त है।
स्टेप 2. मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी (MLT) कोर्स चुनें
12वीं के बाद सही कोर्स चुनना ज़रूरी होता है। अगर आप मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी (MLT) में करियर बनाना चाहते हैं, तो आपके पास ये मुख्य विकल्प हैं:
| स्टेज / लेवल | कोर्स विकल्प | अवधि | क्या सीखेंगे |
| 10वीं के बाद | डिप्लोमा / सर्टिफिकेट | 6 महीने – 2 साल | -लैब उपकरण और तकनीक का बेसिक ज्ञान, खून, यूरिन और अन्य टेस्ट करना सीखना, एंट्री-लेवल जॉब्स के लिए तैयार होना |
| 12वीं के बाद (PCB/PCM) | BMLT / B.Sc. | 3 साल | माइक्रोबायोलॉजी, पैथोलॉजी, बायोकैमिस्ट्री जैसी विषयों की जानकारी, डायग्नोस्टिक टेस्ट करने की क्षमता, रिसर्च और उच्च शिक्षा / विदेश में करियर के अवसर |
| उच्च शिक्षा / विशेषज्ञता | M.Sc. / स्पेशलाइजेशन | 2 साल | एडवांस लैब तकनीक और शोध कौशल, सीनियर और मैनेजमेंट रोल्स के लिए तैयारी |
| अतिरिक्त विशेषज्ञता | सर्टिफिकेशन कोर्स (हिस्टोपैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, हेमेटोलॉजी आदि) | 6 महीने – 1 साल | विशेष लैब टेस्ट और तकनीक में विशेषज्ञता |
नोट – सरकारी मेडिकल कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के कोर्स आमतौर पर UGC और राज्य स्वास्थ्य शिक्षा निकायों के दिशा-निर्देशों के तहत चलते हैं।
स्टेप 3. एडमिशन प्रक्रिया पूरी करें
नीचे हमने MLT में एडमिशन लेने की पूरी प्रक्रिया समझाई है। इसमें आवेदन, जरूरी दस्तावेज़, फीस, सही कॉलेज चुनने के टिप्स और एडमिशन के स्टेप्स शामिल हैं।
1. आवेदन: MLT कोर्स में एडमिशन लेने के लिए सबसे पहले आपको आवेदन फॉर्म भरना होगा। आप इसे ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों तरीके से भर सकते हैं। आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज़ हैं:
- 10वीं और 12वीं की मार्कशीट
- पहचान पत्र (जैसे आधार कार्ड, पासपोर्ट)
- पासपोर्ट साइज फोटो
2. एडमिशन का आधार: कई कॉलेज एडमिशन दो तरीके से देते हैं:
- मेरिर्ट बेस्ड: आपके 12वीं के अंकों के आधार पर एडमिशन मिलता है।
- एंट्रेंस एग्जाम बेस्ड: कुछ कॉलेज अपना एंट्रेंस टेस्ट लेते हैं। इस टेस्ट में पास होना जरूरी है।
3. फीस स्ट्रक्चर: MLT कोर्स के लिए सरकारी और निजी संस्थानों की फीस और चयन प्रक्रिया अलग-अलग हो सकती है। हालाँकि ये सामान्यतः निम्नलिखित रेंज में हो सकती है –
- डिप्लोमा (DMLT): ₹50,000 – ₹1,50,000
- B.Sc. / BMLT: ₹1,00,000 – ₹3,00,000
- सर्टिफिकेट कोर्स: ₹20,000 – ₹50,000
4. सही कॉलेज कैसे चुनें: कॉलेज चुनते समय इन बातों पर ध्यान दें-
- कॉलेज को स्टेट पैरामेडिकल काउंसिल या संबंधित यूनिवर्सिटी से मान्यता प्राप्त हो।
- कॉलेज में आधुनिक लैब और उपकरण उपलब्ध हों।
- इंटर्नशिप / हॉस्पिटल एक्सपोज़र मिले।
- अनुभवी और योग्य शिक्षक पढ़ाएं।
- कॉलेज अच्छे प्लेसमेंट और जॉब गाइडेंस प्रदान करता हो।
5. एडमिशन पूरा करने के स्टेप्स
- इच्छित कॉलेज से आवेदन फॉर्म प्राप्त करें।
- फॉर्म सही ढंग से भरें और आवश्यक दस्तावेज़ अपलोड करें।
- फीस जमा करें।
- मेरिट लिस्ट या एंट्रेंस एग्जाम के परिणाम का इंतजार करें।
- सेलेक्शन होने पर एडमिशन कंफर्म करें।
- ओरिएंटेशन और क्लासेज शुरू होने तक सभी दस्तावेज़ कॉलेज में जमा कर दें।
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स्टेप 4. पढ़ाई और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग करें
एडमिशन के बाद पढ़ाई की शुरुआत होती है, जिसमें थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों शामिल होते हैं। थ्योरी क्लास में छात्रों को माइक्रोबायोलॉजी, पैथोलॉजी, बायोकैमिस्ट्री और लैब टेक्नोलॉजी जैसे विषयों का ज्ञान दिया जाता है, वहीं लैब ट्रेनिंग के दौरान सैंपल की जाँच करना, विभिन्न मशीनों का संचालन करना और जांच के आधार पर रिपोर्ट तैयार करना सिखाया जाता है।
स्टेप 5. इंटर्नशिप करें
MLT कोर्स पूरा करने के बाद कई संस्थानों में क्लिनिकल इंटर्नशिप अनिवार्य होती है, जिससे वास्तविक लैब एक्सपोज़र मिलता है। कोर्स के अंत में छात्रों को इंटर्नशिप करनी होती है, जो आमतौर पर 6 महीने से 1 साल तक की होती है। इस दौरान उन्हें अस्पतालों, डायग्नोस्टिक लैब या ब्लड बैंक में काम करने का मौका मिलता है।
इंटर्नशिप के दौरान छात्रों को सैंपल की जाँच करना, मशीनें चलाना, रिपोर्ट तैयार करना और मरीजों से जुड़े वास्तविक काम करने का अवसर मिलता है। इंटर्नशिप में अनुभवी डॉक्टरों और लैब स्टाफ के साथ काम करने से छात्रों को अच्छा प्रैक्टिकल अनुभव मिलता है, जो आगे नौकरी करने या करियर बनाने में बहुत मदद करता है।
स्टेप 6. रजिस्ट्रेशन और सर्टिफिकेशन कराएँ
इंटर्नशिप पूरी करने के बाद आपको संबंधित पैरामेडिकल काउंसिल या मेडिकल बोर्ड में रजिस्ट्रेशन कराना ज़रूरी होता है। रजिस्ट्रेशन से आपको एक सर्टिफिकेट और यूनिक रजिस्ट्रेशन नंबर मिलता है। इसके बाद आप कानूनी रूप से एक क्वालिफाइड प्रोफेशनल माने जाते हैं और किसी भी अस्पताल या लैब में काम कर सकते हैं।
स्टेप 7. नौकरी शुरू करें या आगे की पढ़ाई करें
रजिस्ट्रेशन के बाद आप अपनी पसंद के हिसाब से आगे का रास्ता चुन सकते हैं:
- नौकरी: अस्पताल, पैथोलॉजी लैब, डायग्नोस्टिक सेंटर, ब्लड बैंक या रिसर्च लैब में काम शुरू कर सकते हैं।
- आगे की पढ़ाई: M.Sc. MLT, मास्टर्स या किसी खास विषय (जैसे माइक्रोबायोलॉजी या पैथोलॉजी) में स्पेशलाइजेशन करके उच्च स्तर की पढ़ाई कर सकते हैं।
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भारत में लैब टेक्नीशियन के लिए करियर अवसर
भारत में लैब टेक्नीशियन का करियर तेजी से बढ़ रहा है क्योंकि मेडिकल, डायग्नोस्टिक और रिसर्च सेक्टर में योग्य टेक्नीशियनों की मांग लगातार बढ़ रही है। सही जानकारी होने पर इस क्षेत्र में अच्छी नौकरी, स्थिर करियर और लंबे समय तक ग्रोथ पाना आसान हो जाता है। नीचे लैब टेक्नीशियन करियर से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियाँ व्यवस्थित रूप से दी गई हैं।
1. सरकारी नौकरियाँ: लैब टेक्नीशियन के लिए सरकारी नौकरियाँ सबसे सुरक्षित और स्थिर विकल्प मानी जाती हैं। इसके लिए उम्मीदवार के पास DMLT, BMLT या MMLT जैसी योग्यताएँ और राज्य पैरामेडिकल काउंसिल का रजिस्ट्रेशन होना आवश्यक है। आयु सीमा सामान्यतः 18 से 30 वर्ष होती है, जबकि कुछ पदों पर अनुभव की भी आवश्यकता होती है। सरकारी फॉर्म AIIMS, ICMR, NHM, राज्य स्वास्थ्य विभाग, रेलवे और ESIC द्वारा नियमित रूप से जारी किए जाते हैं। चयन प्रक्रिया आमतौर पर CBT परीक्षा, प्रैक्टिकल स्किल टेस्ट और डॉक्यूमेंट वेरीफिकेशन पर आधारित होती है। इसके अलावा आपको बता दें कि सरकारी नौकरी का वेतन ₹25,000 से ₹70,000 तक हो सकता है और इसमें प्रमोशन, भत्ते और सुरक्षा भी शामिल हैं।
2. प्राइवेट सेक्टर में भूमिका: प्राइवेट सेक्टर में लैब टेक्नीशियनों की भूमिका काम करने के स्थान के अनुसार अलग-अलग होती है। डायग्नोस्टिक लैब में तकनीशियन को उच्च मात्रा में आने वाले सैम्पलों को ऑटोमेशन मशीनों पर विश्लेषण करना होता है, जबकि अस्पताल या क्लिनिक में तकनीशियन को ICU, इमरजेंसी और OPD से आने वाले विविध सैम्पलों का परीक्षण करना पड़ता है। ब्लड बैंक में काम करने वाले तकनीशियन को ब्लड ग्रुपिंग, और डोनेशन कैम्प जैसी जिम्मेदारियाँ निभानी होती हैं, जबकि रिसर्च लैब में PCR, DNA/RNA एक्सट्रैक्शन, सेल कल्चर और क्लिनिकल ट्रायल्स जैसे एडवांस कार्य किये जाते हैं।
3. वर्कफ्लो और वास्तविक कार्य वातावरण: लैब टेक्नीशियन के वास्तविक कार्य वातावरण में एक्यूरेसी और टाइम मैनेजमेंट अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। सुबह 9 से 12 बजे तक सैम्पलों की संख्या सबसे अधिक होती है, जिससे काम का दबाव बढ़ जाता है। अस्पतालों में नाइट शिफ्ट्स आम होती हैं, क्योंकि इमरजेंसी और ICU से रात में भी परीक्षण आते रहते हैं। वहीं डायग्नोस्टिक लैब में नाइट शिफ्ट्स कम होती है, जबकि रिसर्च लैब में आमतौर पर डे-शिफ्ट रहती है।
4. करियर ग्रोथ: लैब टेक्नीशियन का करियर समय के साथ लगातार बढ़ता है। शुरुआत लैब असिस्टेंट के रूप में होती है, जहाँ बेसिक तकनीकें सीखी जाती हैं। इसके बाद टेक्नीशियन, सीनियर टेक्नीशियन और लैब सुपरवाइज़र के पद आते हैं। अनुभव और कौशल बढ़ने पर व्यक्ति लैब मैनेजर, टेक्निकल मैनेजर या NABL क्वालिटी मैनेजर जैसे उच्च पदों तक पहुँच सकता है। रिसर्च लैब में करियर आगे बढ़ाकर वैज्ञानिक सहायक (Scientist Assistant) या रिसर्च कोऑर्डिनेटर तक पहुँचना भी संभव है।
5. विभिन्न क्षेत्रों में सैलरी: अस्पतालों और क्लिनिक में टेक्नीशियन की सैलरी सामान्यतः ₹12,000 से ₹20,000 तक होती है, जबकि डायग्नोस्टिक लैब में भी सैलरी लगभग इसी सीमा में होती है। ब्लड बैंक में कार्य की संवेदनशीलता के कारण यहाँ ₹12,000 से ₹25,000 तक का वेतन मिलता है। रिसर्च लैब और फार्मा सेक्टर में कार्य अधिक तकनीकी और एडवांस होने के कारण यहाँ ₹25,000 से ₹60,000 तक सैलरी मिल सकती है। सरकारी नौकरी में यह वेतन और भी अधिक तथा स्थिर होता है। ध्यान रहे कि ये डिटेल्स अनुमानित हैं और वास्तविक सैलरी अनुभव, कौशल, शहर, संस्थान और कार्यभार के अनुसार बदल सकती है।
विदेश में करियर बनाने की प्रक्रिया
भारत के लैब टेक्नीशियन विदेश में भी अच्छी नौकरी पा सकते हैं, लेकिन इसके लिए सिर्फ कोर्स पूरा कर लेना काफी नहीं होता। अलग-अलग देशों में योग्यता, लाइसेंस, भाषा और अनुभव की आवश्यकताएँ भिन्न होती हैं। नीचे हमने विस्तार से बताया है कि विदेश में लैब टेक्नीशियन के रूप में करियर बनाने की प्रक्रिया क्या है:
- सबसे पहले भारत या किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से DMLT, BMLT, MLT या B.Sc. इन मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी की डिग्री होना आवश्यक है, क्योंकि अधिकतर देशों में न्यूनतम योग्यता के रूप में MLT या B.Sc. डिग्री स्वीकार की जाती है। इसके साथ ही कई देशों, जैसे कनाडा, UK, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी आदि में लैब टेक्नीशियन के रूप में काम करने के लिए संबंधित देश की लाइसेंसिंग परीक्षा पास करनी होती है, जैसे DHA (दुबई), प्रोमेट्रिक (क़तर/ओमान/सऊदी), HCPC (यूके), CSMLS (कनाडा) आदि।
- कई देशों में कार्य अनुभव दिखाना जरूरी होता है, इसलिए भारत में की गई इंटर्नशिप, लैब प्रैक्टिकल्स, NABL लैब में अनुभव या अस्पताल में 6-12 महीने का क्लिनिकल वर्क विदेश में नौकरी पाने की प्रक्रिया को और आसान बना देता है। वहीं कुछ देश जैसे कनाडा, यूके, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड भाषा परीक्षा जैसे IELTS/TOEFL की भी मांग करते हैं। जर्मनी जैसे देशों में जर्मन लैंग्वेज (A2–B1 स्तर) तक सीखना अनिवार्य हो जाता है।
- जब ये सभी योग्यता पूरी हो जाती है, तब आपको जिस देश में जाना है, उसके अनुसार वर्क वीज़ा या स्टडी-टू-वर्क वीज़ा लेकर नौकरी करनी होती है। इसके लिए डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन, डिग्री ईवैल्युएशन, मेडिकल टेस्ट और पुलिस क्लियरेंस जैसी प्रक्रियाएँ भी पूरी करनी पड़ती हैं। इसके बाद आप हॉस्पिटल, डायग्नोस्टिक लैब, रिसर्च सेंटर, ब्लड बैंक या पब्लिक हेल्थ लैब में आवेदन करके अपना करियर शुरू कर सकते हैं। कई देशों जैसे UAE, क़तर, ओमान में फ्रेशर्स को भी नौकरी मिल सकती है, जबकि कनाडा, यूक और ऑस्ट्रेलिया में अनुभव रखने वाले उम्मीदवारों को अधिक प्राथमिकता दी जाती है।
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FAQs
हाँ, DMLT पास करने के बाद भी अच्छी नौकरी और बढ़िया ग्रोथ मिल सकती है। शुरुआत में सैलरी थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन यदि आपकी प्रैक्टिकल स्किल्स मजबूत हैं, तो आप 1-2 साल में सीनियर तकनीशियन या टीम लीडर तक पहुँच सकते हैं।
विदेश में नौकरी करने के लिए ज़्यादातर देश BMLT या B.Sc. MLT डिग्री को ज्यादा महत्व देते हैं, क्योंकि ये उनके नियम और मानकों के हिसाब से सही मानी जाती हैं। गल्फ देशों (जैसे दुबई, कतर, सऊदी) में DMLT वाले भी जा सकते हैं, लेकिन उसके लिए आपके पास 1–2 साल का काम का अनुभव होना जरूरी है। कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और यूके जैसे देशों के लिए आपको इंग्लिश टेस्ट (IELTS/OET) और वहाँ की लाइसेंसिंग परीक्षा पास करनी पड़ती है। लगभग हर देश में इंटर्नशिप और आपके काम का अनुभव बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।
इस कोर्स के लिए सामान्यतः 12वीं (विज्ञान – PCB) पास होना ज़रूरी है। कुछ डिप्लोमा कोर्स में 12वीं (साइंस) के अलावा बेसिक मेडिकल नॉलेज भी मदद करती है।
हाँ, कोर्स में थ्योरी के साथ-साथ प्रैक्टिकल ट्रेनिंग भी होती है। इसमें लैब मशीनें चलाना, टेस्टिंग करना और रिपोर्ट तैयार करना सिखाया जाता है।
रजिस्ट्रेशन से आपको प्रमाण पत्र और यूनिक रजिस्ट्रेशन नंबर मिलता है। यह कानूनी तौर पर यह दिखाता है कि आप क्वालिफाइड प्रोफेशनल हैं और किसी भी लैब में काम कर सकते हैं।
हमें उम्मीद है कि इस लेख से आपको लैब टेक्नीशियन बनने की पूरी जानकारी मिल गई होगी। ऐसे ही अन्य करियर से संबंधित लेख पढ़ने के लिए Leverage Edu के साथ बने रहें।
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