BSMS कोर्स डिटेल्स: आवश्यक योग्यता, सिलेबस, फीस, कॉलेज और करियर स्कोप

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BSMS (बैचलर ऑफ सिद्ध मेडिसिन एंड सर्जरी) कोर्स आयुष मंत्रालय द्वारा मान्यता प्राप्त अंडरग्रेजुएट डिग्री है, जो भारत के पारंपरिक सिद्ध चिकित्सा तंत्र पर आधारित है। यह कोर्स लगभग 5.5 वर्ष तक चलता है जिसमें औपचारिक शिक्षा और अस्पताल में इंटर्नशिप शामिल होती है। देखा जाए तो पिछले कुछ वर्षों में सिद्ध चिकित्सा की प्रैक्टिकल उपयोगिता और आयुष स्वास्थ्य सेवाओं की ज़रूरत के कारण BSMS की डिमांड धीरे-धीरे बढ़ी है। इस ब्लॉग में आपके लिए BSMS कोर्स के लिए योग्यता, करियर स्कोप और रोज़गार के अवसरों की जानकारी दी गई है।

पैरामीटरविवरण
कोर्स की फुल फॉर्मबैचलर ऑफ सिद्ध मेडिसिन एंड सर्जरी (BSMS)
कोर्स लेवलग्रेजुएशन डिग्री (प्रोफेशनल मेडिकल कोर्स)
कोर्स ड्यूरेशन5.5 वर्ष (4.5 वर्ष अकादमिक अध्ययन और 1 वर्ष अनिवार्य इंटर्नशिप)
रेगुलेटरी बॉडीनेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन
एडमिशन प्रोसेसNEET-UG अनिवार्य; अखिल भारतीय/राज्य स्तरीय काउंसलिंग के माध्यम से प्रवेश
योग्यता12वीं कक्षा PCB (फिजिक्स, केमेस्ट्री, बायोलॉजी) के साथ और न्यूनतम आयु 17 वर्ष
करिकुलम स्ट्रक्चरसेमेस्टर वाइज थ्योरी, प्रोजेक्ट्स व इंटर्नशिप
प्रमुख जॉब प्रोफाइलआयुष चिकित्सक, सिद्ध मेडिकल ऑफिसर, रिसर्च असिस्टेंट, निजी क्लिनिक प्रैक्टिशनर
रोजगार के क्षेत्रआयुष विभाग, सरकारी अस्पताल, निजी सिद्ध क्लिनिक, वेलनेस सेंटर, शोध संस्थान

BSMS कोर्स क्यों करें?

नीचे दिए गए बिंदुओं में बीएसएमएस कोर्स करने के प्रमुख कारण बताए गए हैं:

  • अगर आप डॉक्टर बनना चाहते हैं लेकिन नेचुरल तरीके से इलाज सीखना पसंद करते हैं, तो BSMS आपके लिए अच्छा ऑप्शन हो सकता है।
  • इस कोर्स में आप दवाइयों के साथ-साथ जड़ी-बूटियों और पारंपरिक इलाज के तरीके सीखते हैं, जो आजकल लोगों को ज्यादा पसंद आ रहे हैं।
  • BSMS करने के बाद आप खुद का क्लिनिक खोल सकते हैं या अस्पताल और आयुष सेंटर में काम कर सकते हैं।
  • इसमें आप सिर्फ बीमारी ठीक करना नहीं, बल्कि लोगों की ओवरऑल हेल्थ और लाइफस्टाइल सुधारना भी सीखते हैं।
  • जिन छात्रों को मेडिकल फील्ड में कुछ अलग करना है और नेचुरल हीलिंग में रुचि है, उनके लिए यह पढ़ाई ज्यादा समझ आने वाली और इंटरेस्टिंग लगती है।
  • समय के साथ वैकल्पिक चिकित्सा की डिमांड बढ़ रही है, इसलिए इस फील्ड में भविष्य के मौके भी अच्छे माने जाते हैं।

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BSMS कोर्स स्ट्रक्चर और मोड

BSMS (बैचलर ऑफ सिद्ध मेडिसिन एंड सर्जरी) 5.5 साल का फुल-टाइम ग्रेजुएशन लेवल मेडिकल कोर्स है, जिसमें 4.5 साल की पढ़ाई और 1 साल की अनिवार्य इंटर्नशिप शामिल होती है। यह कोर्स सिद्ध चिकित्सा पद्धति पर आधारित है और इसे NCISM द्वारा रेगुलेट किया जाता है। इसमें एडमिशन NEET-UG के जरिए होता है और यह केवल रेगुलर मोड में ही कराया जाता है, यानी इसे ऑनलाइन या डिस्टेंस से नहीं किया जा सकता।

कोर्स की शुरुआत में एनाटॉमी, फिजियोलॉजी और सिद्ध चिकित्सा के बेसिक सिद्धांत पढ़ाए जाते हैं, जिससे मानव शरीर और पारंपरिक चिकित्सा की नींव समझ में आती है। आगे के वर्षों में पैथोलॉजी, फार्माकोलॉजी, टॉक्सिकोलॉजी और सिद्ध मटेरिया मेडिका जैसे विषय शामिल होते हैं, जबकि अंतिम वर्ष में मेडिसिन, सर्जरी, स्त्री एवं प्रसूति रोग और बाल रोग जैसे क्लिनिकल विषय सिद्ध दृष्टिकोण से पढ़ाए जाते हैं।

अंतिम 1 साल की रोटेटिंग इंटर्नशिप के दौरान छात्रों को सिद्ध अस्पतालों में मरीजों की देखभाल, दवा निर्माण और क्लिनिकल ट्रेनिंग का प्रैक्टिकल अनुभव मिलता है। यह कोर्स मुख्य रूप से दक्षिण भारत, खासकर तमिलनाडु के कॉलेजों में अधिक उपलब्ध है।

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BSMS कोर्स की योग्यता

BSMS कोर्स में एडमिशन के लिए पात्रता शर्तें कॉलेज या यूनिवर्सिटी के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती हैं, इसलिए आवेदन करने से पहले संबंधित संस्थान की आधिकारिक जानकारी जरूर देखनी चाहिए। सामान्य तौर पर योग्यता इस प्रकार होती है:

  • शैक्षणिक योग्यता: उम्मीदवार का 12वीं या समकक्ष परीक्षा किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से पास होना जरूरी है। 12वीं में भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान (PCB) अनिवार्य विषय होने चाहिए।
  • न्यूनतम अंक: ज्यादातर कॉलेजों में कम से कम 50% अंक आवश्यक होते हैं। आरक्षित वर्ग के छात्रों को नियमों के अनुसार अंकों में छूट मिल सकती है।
  • आयु सीमा: एडमिशन वर्ष में उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 17 वर्ष होनी चाहिए। कुछ संस्थानों में अधिकतम आयु से जुड़े नियम भी लागू हो सकते हैं।
  • चयन प्रक्रिया: BSMS कोर्स में प्रवेश के लिए NEET-UG क्वालिफाई करना अनिवार्य होता है। NEET स्कोर के आधार पर ऑल इंडिया या राज्य स्तरीय काउंसलिंग के जरिए सीट अलॉटमेंट किया जाता है।

BSMS कोर्स के लिए प्रमुख प्रवेश परीक्षाएं 

बीएसएमएस कोर्स में एडमिशन के लिए भारत की प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं की सूची इस प्रकार है:

प्रवेश परीक्षा / प्रक्रियापरीक्षा का प्रकारसंचालित संस्थासंभावित तिथि (2026)
NEET-UGराष्ट्रीय स्तर (CBT/Offline)नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA)03 मई 2026
AACCC UG कॉउंसलिंगऑल इंडिया कोटा (15% सीटें)आयुष एडमिशंस सेंट्रल कॉउंसलिंग कमिटीअगस्त – सितंबर 2026
TN हैल्थ आयुष कॉउंसलिंगराज्य कोटा (85% सीटें – तमिलनाडु)सेलेक्शन कमिटी, डायरेक्टरेट ऑफ इंडियन मेडिसिनसितंबर – अक्टूबर 2026
KEAM (आयुष केरल)राज्य कोटा (केरल)कमिश्नर फॉर एंट्रेंस एग्जामिनेशंस (CEE)जून – जुलाई 2026

BSMS कोर्स का एप्लीकेशन प्रोसेस 

BSMS कोर्स में एडमिशन की प्रक्रिया मुख्य रूप से NEET-UG और आयुष काउंसलिंग के माध्यम से पूरी होती है। आसान भाषा में स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस इस प्रकार है:

  • सबसे पहले NTA की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर NEET-UG के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करें, क्योंकि BSMS में एडमिशन NEET के बिना संभव नहीं है।
  • इसके बाद NEET-UG परीक्षा दें और अपनी कैटेगरी के अनुसार क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल हासिल करें।
  • ऑल इंडिया कोटा (15% सरकारी सीटें) या राष्ट्रीय संस्थानों में एडमिशन के लिए AACCC आयुष काउंसलिंग पोर्टल पर अलग से रजिस्ट्रेशन करना होता है।
  • राज्य कोटा (लगभग 85% सीटें), खासकर तमिलनाडु के कॉलेजों के लिए, संबंधित राज्य की काउंसलिंग वेबसाइट जैसे TN Health पोर्टल पर आवेदन करना पड़ता है।
  • काउंसलिंग के दौरान लॉगिन करके अपनी पसंद के सिद्ध मेडिकल कॉलेजों को प्राथमिकता (choice filling) के अनुसार चुनें।
  • सीट अलॉट होने के बाद चुने गए कॉलेज में जाकर दस्तावेज सत्यापन और एडमिशन प्रक्रिया पूरी करें, जिसमें 10वीं-12वीं मार्कशीट, NEET स्कोरकार्ड, आईडी और कैटेगरी सर्टिफिकेट आदि जमा करने होते हैं।

BSMS कोर्स में एडमिशन के लिए जरूरी दस्तावेज

यहां उन प्रमुख दस्तावेजों की सूची दी गई है, जो एडमिशन के समय आमतौर पर वेरिफिकेशन के लिए कॉलेज/संस्थान द्वारा मांगे जाते हैं। अलग-अलग विश्वविद्यालयों के अनुसार इसमें थोड़ा बदलाव हो सकता है:

  • 10वीं और 12वीं की मार्कशीट तथा पासिंग सर्टिफिकेट
  • NEET-UG स्कोर कार्ड
  • फोटो आईडी प्रूफ (जैसे आधार कार्ड/पैन कार्ड)
  • पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ्स
  • जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)
  • मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट
  • निवास/डोमिसाइल प्रमाण पत्र (जहाँ आवश्यक हो)
  • माइग्रेशन सर्टिफिकेट (दूसरे बोर्ड/विश्वविद्यालय से आने पर)
  • ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) – कई कॉलेजों में अनिवार्य होता है
  • अन्य शैक्षिक प्रमाण पत्र (यदि कोई अतिरिक्त योग्यता हो)

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भारत में BSMS कोर्स के लिए प्रमुख संस्थान और अनुमानित फीस

भारत में मान्यता प्राप्त सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों में बीएसएमएस कोर्स उपलब्ध है। इसकी फीस संस्थान के प्रकार, राज्य, सीट श्रेणी और प्रवेश प्रक्रिया के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है। सामान्यतः सरकारी कॉलेजों में फीस अपेक्षाकृत कम होती है, जबकि प्राइवेट संस्थानों में यह अधिक रहती है। नीचे दी गई टेबल में कुछ प्रमुख कॉलेजों के आधार पर बीएसएमएस कोर्स की अनुमानित फीस केवल एक सामान्य जानकारी के रूप में दी गई है:

सरकारी संस्थान

संस्थान का नामस्थानअनुमानित वार्षिक फीस (INR)
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सिद्ध (NIS)चेन्नई, तमिलनाडुINR 15,000 – INR 25,000
गवर्नमेंट सिद्ध मेडिकल कॉलेज (GSMC)पलायमकोट्टई, तमिलनाडुINR 10,000 – INR 12,000
गवर्नमेंट सिद्ध मेडिकल कॉलेज (GSMC)चेन्नई, तमिलनाडुINR 10,000 – INR 15,000
शांतिकुंज सिद्ध मेडिकल कॉलेजहरिद्वार (आयुष वि.वि.)INR 25,000 – INR 40,000
गवर्नमेंट आयुर्वेद एवं सिद्ध कॉलेजकेरल (तिरुवनंतपुरम)INR 12,000 – INR 18,000

प्राइवेट संस्थान 

संस्थान का नामस्थानअनुमानित वार्षिक फीस
श्री साईराम सिद्ध मेडिकल कॉलेजचेन्नई, तमिलनाडुINR 1,50,000 – INR 2,50,000
वेलु मयिल सिद्ध मेडिकल कॉलेजश्रीपेरंबुदूर, तमिलनाडुINR 1,25,000 – INR 2,00,000
एटीएसवीएस सिद्ध मेडिकल कॉलेजकन्याकुमारी, तमिलनाडुINR 1,40,000 – INR 2,20,000
आरवीएस सिद्ध मेडिकल कॉलेजकोयंबटूर, तमिलनाडुINR 1,50,000 – INR 2,30,000
एक्सेल सिद्ध मेडिकल कॉलेजनमक्कल, तमिलनाडुINR 1,60,000 – INR 2,50,000

नोट: टेबल में दी गई फीस केवल अनुमानित है और समय-समय पर बदल सकती है। सटीक और नवीनतम फीस की जानकारी के लिए संबंधित कॉलेज/विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट अवश्य देखें।

BSMS कोर्स का सिलेबस

भारत के अलग-अलग विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में BSMS कोर्स का सिलेबस कुछ हद तक भिन्न हो सकता है, क्योंकि प्रत्येक संस्थान अपना करिकुलम और पेपर स्ट्रक्चर स्वयं निर्धारित करता है। इसलिए आप एडमिशन से पहले संबंधित कॉलेज/विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध नवीनतम सिलेबस अवश्य जांच लें।

नीचे दिया गया सिलेबस जिसे राष्ट्रीय आयुष आयोग (NCISM) की आधिकारिक वेबसाइट के आधार पर एक सामान्य रेफरेंस के रूप में दिया गया है, ताकि आपको पढ़ाए जाने वाले प्रमुख विषयों का स्पष्ट अंदाजा हो सके:

पहला वर्ष
सिद्ध चिकित्सा के मूल सिद्धांत (History & Principles of Siddha)मानव शरीर रचना (Anatomy)
शरीर क्रिया विज्ञान (Physiology I & II)जैव रसायन विज्ञान और कम्युनिकेटिव इंग्लिश (Biochemistry & Communicative English)
औषधि विज्ञान (Pharmacognosy)प्राकृतिक स्रोत (Natural source)
माइक्रोबायोलॉजी की मूल बातें (Microbiology Basics)
दूसरा वर्ष
रोग विज्ञान – सिद्ध दृष्टिकोण (Siddha Pathology)आधुनिक पैथोलॉजी सिद्धांत (Modern Pathology Principles)
औषधि क्रिया विज्ञान (Pharmacology I & II)जीव और पादप जगत का विश्लेषण (Animal and Plant Kingdom Analysis)
औषध निर्माण (Pharmaceuticals)अनुसंधान पद्धति की मूल बातें (Research Methodology Basics)
तीसरा वर्ष
विशेष चिकित्सा तकनीक (Varmam Therapy)विष विज्ञान एवं फोरेंसिक चिकित्सा (Toxicology & Forensic Medicine)
स्त्री रोग (Obstetrics & Gynaecology)दंत रोग और हड्डी जोड़ने की सर्जरी की मूल बातें (Dental Diseases & Bone Setting Surgery Basics)
बाल चिकित्सा (Pediatrics)समुदाय स्वास्थ्य (National Health Policies & Hygiene)
चौथा और पाँचवाँ
उन्नत सिद्ध उपचार (Advanced Siddha Treatments)पारंपरिक और आधुनिक चिकित्सा सिद्धांत (Clinical Integration)
जटिल केस अध्ययन (Complex Case Studies)निवारक एवं सामुदायिक चिकित्सा (Preventive & Community Medicine)
इंटर्नशिप (1 वर्ष)
अस्पताल में रोटेशनल क्लिनिकल प्रशिक्षण (Rotatory Clinical Training in Hospital)आपातकालीन देखभाल अवलोकन (Emergency Care Observations)
मेडिसिंस की तैयारी और रोगी सलाह (क्लिनिकल प्रैक्टिस)

BSMS कोर्स करने के बाद रोजगार के क्षेत्र 

आप बीएसएमएस कोर्स पूरा करने के बाद इन प्रमुख क्षेत्रों में अपना सुनहरा भविष्य बना सकते हैं:

रोजगार क्षेत्रजॉब प्रोफाइल्समुख्य कार्य
सिद्ध / आयुष क्लीनिक और अस्पतालसिद्ध चिकित्सक/डॉक्टरमरीजों को सिद्धा चिकित्सा के अनुसार डायग्नोसिस और ट्रीटमेंट देना।
अनुसंधान संस्थान (रिसर्च इंस्टीट्यूशंस)क्लीनिकल रिसर्चर / रिसर्च साइंटिस्टसिद्धा औषधियों की प्रभावशीलता पर शोध करना, नए फॉर्मूले विकसित करना।
शिक्षा एवं अकादमिक संस्थानशिक्षक / प्रोफेसरसिद्धा चिकित्सा विषय पढ़ाना, छात्रों को प्रशिक्षण देना, व्याख्यान देना।
फार्मास्यूटिकल कंपनियाँक्वालिटी कंट्रोल एनालिस्टसिद्धा दवाओं की क्वालिटी को चेक करना और तैयार दवाओं के बैच की गुणवत्ता सुनिश्चित करना।
स्वास्थ्य सलाहकार सेवाएँहैल्थकेयर / सिद्ध कंसल्टेंटमरीजों और हेल्थ-सेवा केंद्रों को प्राकृतिक/सिद्धा देखभाल सलाह देना।
सामुदायिक स्वास्थ्य और सरकारी योजनाएँपब्लिक हेल्थ ऑफिसर / कंसल्टेंटराष्ट्रीय आयुष मिशन जैसी योजनाओं में भागीदारी, हेल्थ प्रोग्राम लागू करना।
स्वयं का क्लिनिक तथा उद्यमिताक्लिनिक ओनरअपनी सिद्धा क्लिनिक खोलना, प्राकृतिक औषधियाँ/उत्पाद बेचना व प्रचार करना।
प्रबंधन एवं प्रशासनहैल्थकेयर एडमिनिस्ट्रेटर / मैनेजररेगुलेटरी अफेयर्स स्पेशलिस्टहॉस्पिटल, क्लीनिक के संचालन, रणनीति, प्रबंधन कार्य संभालना।सिद्धा उत्पादों के मानक/नियमों का पालन सुनिश्चित करना।
वेलनेस/हेल्थ सेंटरवैलनेस कंसल्टेंट / थेरेपिस्टस्पा, वेलनेस सेंटर में सिद्धा आधारित उपचार और सलाह देना।

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BSMS कोर्स करने के बाद जॉब प्रोफाइल और सैलरी

बीएसएमएस कोर्स के बाद सैलरी आपके एक्सपीरियंस, जॉब सेक्टर, कंपनी और शहर के अनुसार भिन्न हो सकती है। यहां कुछ प्रमुख जॉब प्रोफाइल के साथ सैलरी रेंज AmbitionBox पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार नीचे दी गई है:

जॉब प्रोफाइलअनुमानित वार्षिक सैलरी (INR)
आयुष मेडिकल ऑफिसर4.2 लाख – 4.9 लाख
हेल्थकेयर कंसल्टेंट7.8 लाख – 8.7 लाख
क्लिनिकल रिसर्च असोसिएट4.6 लाख – 5.1 लाख
ड्रग सेफ्टी ऑफिसर3.5 लाख – 3.9 लाख 

BSMS कोर्स करने के बाद हायर स्टडी और प्रतियोगी परीक्षा के विकल्प 

आप बीएसएमएस कोर्स करने के बाद अपनी रूचि और करियर फील्ड के अनुसार इन विकल्पों को चुन सकते हैं:

विकल्पकोर्स / परीक्षा का नामपात्रता स्थितिमहत्वपूर्ण जानकारी
पोस्टग्रेजुएट डिग्रीMD (सिद्ध)BSMS अनिवार्य3 वर्ष का PG कोर्स, NEET-PG (AYUSH) के माध्यम से इसमें प्रवेश मिलता है।
PG प्रवेश परीक्षाAIAPGET (ऑल इंडिया आयुष पीजी एंट्रेंस टेस्ट)BSMS मान्यआयुष PG कोर्स में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा को क्वालीफाई करना होता है।
शोध क्षेत्रPhD in Siddha / अलाइड हेल्थ साइंसेजM.D. (सिद्ध)रिसर्च और अकादमिक करियर हेतु रिसर्च फील्ड में जाना आपके लिए उपयोगी हो सकता है।
सरकारी सेवाआयुष मेडिकल ऑफिसरराज्य/केंद्र पात्रता अनुसारराज्य लोक सेवा आयोग के माध्यम से भर्ती प्रक्रिया का हिस्सा बनकर आप अपने करियर की शुरुआत आकर सकते हैं।
सिविल सेवाUPSC CSEकिसी भी मान्यता प्राप्त ग्रेजुएशन डिग्रीप्रशासनिक सेवाओं में प्रवेश के लिए सिविल सर्विसेज एग्जाम देकर आप अपने करियर की शुरुआत कर सकते हैं।
राज्य PSCस्टेट पब्लिक सर्विस कमीशनग्रेजुएशन डिग्री मान्यराज्य स्तरीय प्रशासनिक पदों पर जॉब पाकर भी आप अपने करियर की शुरुआत कर सकते हैं।
नेट/लेक्चररUGC-NET (कुछ विषयों में)विषयानुसार पात्रताइस कोर्स के बाद आप अकादमिक करियर के लिए नेट करके लेक्चरर बन सकते हैं।

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BSMS बनाम BAMS कोर्स में अंतर

BSMS बनाम BAMS दोनों ही मेडिकल फील्ड के अध्ययन से जुड़े कोर्स हैं, लेकिन इनका उद्देश्य, मान्यता और करियर स्कोप अलग-अलग होता है। नीचे दी गई टेबल में दोनों कोर्स के बीच मुख्य अंतर आसान भाषा में समझाया गया है –

विशेषताBSMSBAMS
पूरा नामबैचलर ऑफ सिद्ध मेडिसिन एंड सर्जरीबैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी
कोर्स की लोकप्रियतामुख्य रूप से तमिलनाडु और दक्षिण भारत में अधिक लोकप्रिय/प्रचलित है।ये कोर्स पूरे भारत में व्यापक रूप से मान्यता और अवसर प्रदान करता है।
चिकित्सा प्रणालीसिद्ध चिकित्सा (AYUSH की प्रणाली)आयुर्वेद (AYUSH की प्रणाली)
अवधि5.5 वर्ष (वर्ग और 1 वर्ष इंटर्नशिप)5.5 वर्ष (वर्ग और 1 वर्ष इंटर्नशिप)
प्रवेश परीक्षा (एंट्रेंस)NEET-UG आवश्यकNEET-UG आवश्यक
आवश्यक योग्यता12वीं में PCB (50% से अधिक अंक)12वीं में PCB (50% से अधिक अंक)
रेगुलेटरी बॉडीनेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिननेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन
मुख्य विषयसिद्ध सिद्धांत, सिद्ध औषधि, प्राचीन रोगशास्त्रआयुर्वेदिक सिद्धांत, पंचकर्म, द्रव्य गुण विज्ञान
करियर विकल्पसिद्ध चिकित्सक, शोध, शिक्षणआयुर्वेद चिकित्सक, शोध, शिक्षण
करियर की डिमांडइसे करके आप दक्षिण भारत के क्षेत्रीय स्तर पर अपना क्लिनिक खोल सकते हैं।इसके बाद आप भारत के अधिकांश राज्यों में आपके पास प्रैक्टिस करने की अपॉर्च्युनिटीज होती है।
करियर ग्रोथ के अवसरक्षेत्रीय स्तर पर होने से कम्पटीशन काम लेकिन क्षेत्रीय अवसर अधिक मिलते हैं।इसे करने के बाद व्यापक कैरियर विकल्प और प्राइवेट प्रैक्टिस ग्रोथ के अवसर अधिक मिलते हैं।
किसके लिए सही है?यदि आप पारंपरिक सिद्ध चिकित्सा में विशेष रुचि हो और दक्षिण भारत में प्रैक्टिस करना चाहते हैं तो ये कोर्स आपके लिए उपयोगी हो सकता है।यदि आप पैन-इंडिया करियर, वैलनेस इंडस्ट्री और प्रैक्टिस के व्यापक अवसर चाहते हैं तो ये कोर्स आपके लिए उपयोगी हो सकता है।

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FAQs 

बीएसएमएस डॉक्टर क्या होता है?

बीएसएमएस डॉक्टर वह चिकित्सक होता है जिसने “बैचलर ऑफ सिद्धा मेडिसिन एंड सर्जरी” की डिग्री प्राप्त की हो। यह पद्धति पारंपरिक सिद्ध चिकित्सा पर आधारित है। ऐसे डॉक्टर जड़ी-बूटी, खनिज और प्राकृतिक उपचार से रोगों का इलाज करते हैं।

BSMS के बाद अपने नाम के आगे डॉक्टर लिखा जा सकता है क्या?

BSMS पूरा करने और राज्य चिकित्सा परिषद में पंजीकरण कराने के बाद व्यक्ति सिद्ध चिकित्सक के रूप में कार्य कर सकता है। उन्हें सिद्ध चिकित्सा पद्धति के डॉक्टर के रूप में मान्यता मिलती है।

क्या BSMS में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा जरूरी है?

हाँ, अधिकतर सरकारी और कई निजी संस्थानों में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय स्तर की चिकित्सा प्रवेश परीक्षा का अंक मान्य होता है। राज्य स्तर पर काउंसलिंग के माध्यम से सीट आवंटन किया जाता है।

BSMS में प्रवेश कैसे मिलता है?

भारत में BSMS में प्रवेश मुख्य रूप से नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट के अंकों के आधार पर होता है। परीक्षा पास करने के बाद कॉउंसलिंग प्रक्रिया के माध्यम से कॉलेज आवंटित किया जाता है।

क्या BSMS पूरे भारत में मान्य है?

BSMS भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त पारंपरिक चिकित्सा पाठ्यक्रम है। इस कोर्स को पूरा करके संबंधित परिषद में पंजीकरण के बाद सिद्ध चिकित्सा देश के विभिन्न राज्यों में कार्य कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए राज्य नियमों का पालन करना आवश्यक होता है।

आशा है कि इस लेख में आपको बीएसएमएस कोर्स की सभी आवश्यक जानकारी मिल गई होगी। इसी तरह अन्य कोर्स गाइड्स Leverage Edu पर उपलब्ध हैं।

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