बीएएमएस (बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी) कोर्स भारत में आयुर्वेदिक चिकित्सा का एक प्रोफेशनल ग्रेजुएट मेडिकल कोर्स है, जिसे राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग (NCISM) द्वारा रेगुलेटेड किया जाता है। इस कोर्स में आयुर्वेदिक सिद्धांत, रोग निदान, औषधि विज्ञान, पंचकर्म, जीवनशैली चिकित्सा और शल्य तंत्र की बुनियादी अवधारणाओं और प्रक्रियाओं का अध्ययन कराया जाता है, जो मुख्यतः आयुर्वेदिक सिद्धांतों पर आधारित होता है।
इस कोर्स को पूरा करने के बाद और राज्य आयुर्वेदिक मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण प्राप्त करने पर आप आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में कार्य कर सकते हैं। इस लेख में आपको बीएएमएस कोर्स की पात्रता, एडमिशन प्रक्रिया, फीस, सिलेबस, करियर विकल्प, सैलरी और वास्तविक करियर स्थिति समझने में मदद करेगी, ताकि आप सही निर्णय ले सकें।
This Blog Includes:
- बीएएमएस कोर्स का ओवरव्यू
- बीएएमएस कोर्स क्या है?
- बीएएमएस कोर्स चुनने के प्रमुख कारण
- बीएएमएस कोर्स में एडमिशन की पात्रता
- बीएएमएस कोर्स की अवधि और फीस
- BAMS कोर्स का सिलेबस
- बीएएमएस में शीर्ष स्नातक कॉलेज का चयन कैसे करें?
- बीएएमएस कोर्स पूरा करने के बाद करियर के अवसर
- बीएएमएस बनाम एमबीबीएस में अंतर
- बीएएमएस के बाद उच्च शिक्षा
- BAMS डॉक्टर कैसे बनें? स्टेप-बाय-स्टेप गाइड
- स्टेप 1 – 12वीं कक्षा को PCB विषयों के साथ पास करें
- स्टेप 2 – NEET परीक्षा के लिए आवेदन करें
- स्टेप 3 – NEET परीक्षा में क्वालिफाई करें
- स्टेप 4 – काउंसलिंग प्रक्रिया में भाग लें
- स्टेप 5 – BAMS कोर्स में एडमिशन लें
- स्टेप 6 – कोर्स के दौरान पढ़ाई और प्रशिक्षण
- स्टेप 7 – इंटर्नशिप पूरी करें
- स्टेप 8 – रजिस्ट्रेशन और प्रैक्टिस शुरू करें
- FAQs
बीएएमएस कोर्स का ओवरव्यू
यहाँ बीएएमएस कोर्स का ओवरव्यू दिया गया है, जिसके माध्यम से आप इस कोर्स के बारे में संक्षिप्त रूप से जान सकते हैं –
| विषय | विवरण |
| कोर्स नाम | बीएएमएस (बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी) |
| रेगुलेटरी बॉडी | यह कोर्स राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग (NCISM) द्वारा नियंत्रित और मान्यता प्राप्त होता है। |
| अवधि | कुल 5.5 वर्ष (4.5 वर्ष शैक्षणिक अध्ययन + 1 वर्ष अनिवार्य इंटर्नशिप) |
| एडमिशन प्रक्रिया | प्रवेश केवल NEET-UG स्कोर के आधार पर होता है, इसके बाद ऑल इंडिया या स्टेट AYUSH काउंसलिंग से सीट मिलती है। |
| पात्रता | 12वीं PCB (फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी) अनिवार्य, न्यूनतम आयु 17 वर्ष, NEET क्वालिफाई जरूरी। |
| पढ़ाई का फोकस | आयुर्वेद सिद्धांत, शरीर रचना, द्रव्यगुण, रोग निदान, पंचकर्म, क्लिनिकल ट्रेनिंग और जीवनशैली चिकित्सा। |
| प्रैक्टिस नियम | कोर्स पूरा करने के बाद राज्य आयुर्वेदिक मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन जरूरी होता है। |
| करियर विकल्प | आयुर्वेदिक डॉक्टर, मेडिकल ऑफिसर, पंचकर्म विशेषज्ञ, रिसर्च, फार्मास्यूटिकल और निजी क्लिनिक। |
| उच्च शिक्षा | MD/MS (Ayurveda), MSc, PhD या स्पेशलाइजेशन कोर्स के विकल्प उपलब्ध। |
बीएएमएस कोर्स क्या है?
बीएएमएस एक 5.5 वर्ष का प्रोफेशनल मेडिकल कोर्स है, जिसमें 4.5 वर्ष की अकादमिक पढ़ाई और 1 वर्ष की अनिवार्य इंटर्नशिप शामिल होती है। यह कोर्स आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली पर आधारित है, जिसमें शरीर, मन और जीवनशैली को समग्र रूप से समझकर उपचार किया जाता है। कोर्स में आयुर्वेद के साथ कुछ आधुनिक चिकित्सा विषयों की बुनियादी जानकारी भी दी जाती है।
बीएएमएस कोर्स चुनने के प्रमुख कारण
बीएएमएस कोर्स चुनने के प्रमुख कारणों को समझने के लिए आप निम्नलिखित बिंदुओं को ध्यानपूर्वक पढ़ सकते हैं –
- आयुर्वेद आधारित प्रोफेशनल मेडिकल करियर: बीएएमएस एक मान्यता प्राप्त मेडिकल डिग्री है, जिसे राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग (NCISM) नियंत्रित करता है। यह कोर्स आपको आयुर्वेदिक चिकित्सा, रोग निदान, औषधि विज्ञान और पंचकर्म की वैज्ञानिक पढ़ाई करवाता है, जिससे आप पंजीकृत आयुर्वेदिक चिकित्सक बन सकते हैं।
- NEET के माध्यम से पारदर्शी प्रवेश प्रक्रिया: बीएएमएस में प्रवेश NEET-UG परीक्षा के आधार पर होता है, इसलिए एडमिशन प्रक्रिया मेरिट आधारित और पारदर्शी होती है। इससे छात्रों को मान्यता प्राप्त सरकारी या निजी कॉलेज में पढ़ने का अवसर मिलता है।
- सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में रोजगार के अवसर: कोर्स पूरा करने और राज्य मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन के बाद आप सरकारी आयुष विभाग, आयुर्वेदिक अस्पताल, हेल्थ सेंटर, रिसर्च संस्थान या निजी क्लिनिक में काम कर सकते हैं। कुछ राज्यों में आयुर्वेदिक मेडिकल ऑफिसर की नियमित भर्तियाँ भी होती हैं।
- समग्र (हॉलिस्टिक) स्वास्थ्य प्रणाली की पढ़ाई: बीएएमएस केवल दवा तक सीमित नहीं है, बल्कि आहार, जीवनशैली, रोग-निवारण और प्राकृतिक चिकित्सा पर भी ध्यान देता है। इससे मरीजों की लॉन्ग टर्म हैल्थ केयर स्वास्थ्य देखभाल में भूमिका निभाने का अवसर मिलता है।
- उच्च शिक्षा और विशेषज्ञता के विकल्प: बीएएमएस के बाद MD/MS (आयुर्वेद), पंचकर्म, योग या रिसर्च में विशेषज्ञता लेकर अकादमिक, क्लिनिकल या शोध क्षेत्र में आगे बढ़ा जा सकता है। यह लंबे समय का स्थिर करियर मार्ग प्रदान करता है।
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बीएएमएस कोर्स में एडमिशन की पात्रता
बीएएमएस कोर्स करने के लिए आपको कुछ नियम और शर्तें पूरी करनी पड़ती हैं। नीचे हमने जरूरी जानकारी जैसे शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा और एडमिशन प्रक्रिया को बताया है:
शैक्षणिक योग्यता
बीएएमएस में एडमिशन लेने के लिए आपको 12वीं साइंस स्ट्रीम से पास होना चाहिए। आपके पास फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी (PCB) विषय होने जरूरी हैं।
- जनरल कैटेगरी के लिए कम से कम 50% अंक होने चाहिए।
- OBC/SC/ST छात्रों के लिए 12वीं PCB में लगभग 45% अंक आवश्यक होते हैं (राज्य/संस्थान के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है), जबकि NEET-UG में क्वालिफाइंग कट-ऑफ 40% होता है।
- कई कॉलेज इंग्लिश को भी जरूरी मानते हैं।
न्यूनतम आयु सीमा
इस कोर्स में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु 17 साल होनी चाहिए और अधिकतम आयु सीमा नहीं है, क्योंकि NEET-UG में वर्तमान में अप्पर ऐज लिमिट समाप्त कर दी गई है, इसलिए BAMS या संबंधित मेडिकल/पैरामेडिकल कोर्स में किसी भी वर्ग के लिए उम्र की सीमा या छूट लागू नहीं होती।
प्रवेश प्रक्रिया (NEET आदि)
बीएएमएस में दाखिला लेने के लिए NEET-UG एग्जाम देना जरूरी है। इस एग्जाम में आपका स्कोर और रैंक देखकर कॉलेज अलॉट किया जाता है। इसके बाद स्टेट या ऑल इंडिया लेवल की काउंसलिंग होती है। काउंसलिंग के बाद ही आपको कॉलेज में सीट मिलती है।
बीएएमएस कोर्स की अवधि और फीस
BAMS कोर्स का उद्देश्य छात्रों को आयुर्वेद और हेल्थ साइंस की सही जानकारी देना है। यह कोर्स आमतौर पर कुल 5½ साल का होता है, जिसमें 4½ साल की शैक्षणिक पढ़ाई और 1 साल की इंटर्नशिप शामिल होती है। NCISM के नवीनतम पाठ्यक्रम के अनुसार शैक्षणिक वर्षों की संरचना अपडेटेड मॉडल पर आधारित है। कॉलेज और यूनिवर्सिटी के हिसाब से फीस अलग होती है। सरकारी कॉलेजों में यह सामान्यतः INR 10,000 से INR 40,000 प्रति वर्ष होती है, जबकि कुछ प्राइवेट कॉलेजों में INR 3 लाख से INR 7 लाख प्रति वर्ष तक हो सकती है।
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BAMS कोर्स का सिलेबस
BAMS पाठ्यक्रम सभी विश्वविद्यालयों में लगभग समान है और इसे केंद्रीय आयुर्वेदिक परिषद द्वारा निर्धारित किया गया है। यहाँ प्रथम वर्ष से चौथे वर्ष तक के मुख्य विषयों को सरल भाषा में बताया गया है:
| वर्ष | मुख्य विषय | विवरण |
| 1 | पदार्थ विज्ञान | आयुर्वेद की मूल बातें, सिद्धांत और दार्शनिक पृष्ठभूमि का परिचय। |
| आयुर्वेद इतिहास | आयुर्वेद का इतिहास, इसके विभिन्न संप्रदाय और परीक्षण के तरीके। | |
| संस्कृत | आयुर्वेदिक पुस्तकें अक्सर संस्कृत में होती हैं, इसलिए भाषा सीखना जरूरी है। | |
| क्रिया शरीर | शरीर क्रिया विज्ञान के आयुर्वेदिक सिद्धांत और अंगों के कार्य। | |
| आधुनिक शरीर क्रिया विज्ञान | शरीर की विभिन्न प्रणालियों जैसे श्वसन, तंत्रिका, जठरांत्र की जानकारी। | |
| रचना शरीर | शरीर रचना विज्ञान, भ्रूण विज्ञान और मानव शरीर की संरचना। | |
| 2 | द्रव्यगुण विज्ञान | विभिन्न औषधियों, फार्माकोलॉजी और उनकी विशेषताओं का अध्ययन। |
| रोग निदान | विभिन्न रोगों, संक्रमणों और परजीवियों की पहचान और कारण। | |
| रसशास्त्र | औषधि बनाने की पद्धतियाँ और उपकरणों का परिचय। | |
| भैषज्य कल्पना | औषधियों का निर्माण, भंडारण और उपकरणों का प्रयोग। | |
| 3 | अगदतंत्र | विष और विषाक्तता के समय किए जाने वाले उपचार। |
| स्वस्थवृत्त | शारीरिक, मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य, जीवनशैली। | |
| योग | आसनों और मुद्राओं के लाभ और उनके सिद्धांत। | |
| निसर्गोपचार | मिट्टी चिकित्सा, जल चिकित्सा, सूर्य स्नान आदि। | |
| प्रैक्टिकल | योग, मौखिक परीक्षा, जर्नल कार्य आदि में प्रैक्टिकल अनुभव। | |
| प्रसूति तंत्र | गर्भावस्था, मासिक धर्म, महिला स्वास्थ्य। | |
| स्त्री रोग | महिलाओं के रोग, जैसे बांझपन, रजोनिवृत्ति। | |
| कौमारभृत्य परिचय | बाल चिकित्सा और बाल स्वास्थ्य की शुरुआत। | |
| बालरोग | बच्चों में सामान्य रोग, जैसे खसरा, चिकनपॉक्स, टाइफाइड। | |
| 4½ | कायाचिकित्सा | नींद, एलर्जी, अल्जाइमर और अन्य विकारों का प्रबंधन। |
| पंचकर्म | रोगों से बचाव, स्वास्थ्य बनाए रखना, सावधानियाँ। | |
| व्यावहारिक/नैदानिक प्रशिक्षण | क्लिनिकल पोस्टिंग, प्रायोगिक और मौखिक परीक्षा। | |
| शल्य तंत्र | सर्जरी, एनेस्थीसिया और आधुनिक उपकरणों का प्रयोग। | |
| नेत्र रोग | आंखों की जांच, सामान्य दृष्टि विकार और उपकरण। | |
| शिरा-कर्ण-नासा-मुख रोग | सिर, कान, नाक और मुंह के रोग। | |
| अनुसंधान क्रियाविध | मेडिकल सांख्यिकी और शोध प्रक्रिया की जानकारी। |
बीएएमएस में शीर्ष स्नातक कॉलेज का चयन कैसे करें?
बीएएमएस पढ़ाई के लिए सही कॉलेज चुनना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि इससे आपके करियर का सीधा असर पड़ता है। कॉलेज चुनते समय इन बातों का ध्यान रखें:
- कॉलेज NCISM (National Commission for Indian System of Medicine) से मान्यता प्राप्त हो।
- कॉलेज का प्लेसमेंट रिकॉर्ड और पुराने छात्रों का फीडबैक देखें।
- फीस और हॉस्टल जैसी सुविधाओं की तुलना करें।
- कोशिश करें कि ऐसे कॉलेज का चुनाव करें जहां से आपको इंटर्नशिप और क्लिनिकल एक्सपोज़र अच्छे से मिले।
बीएएमएस कोर्स पूरा करने के बाद करियर के अवसर
BAMS पूरा करने के बाद छात्रों के लिए आयुर्वेद और हेल्थकेयर क्षेत्र में कई अच्छे करियर अवसर मिलते हैं। आप सरकारी अस्पतालों, प्राइवेट क्लीनिक, आयुर्वेदिक अस्पतालों, पंचकर्म सेंटर, रिसर्च लैब्स और फार्मास्यूटिकल कंपनियों में नौकरी कर सकते हैं। जो छात्र पढ़ाई आगे बढ़ाना चाहते हैं, वे MD/MS in Ayurveda, MSc या PhD जैसी उच्च शिक्षा भी कर सकते हैं।
कई BAMS ग्रेजुएट अपना खुद का क्लिनिक या पंचकर्म वेलनेस सेंटर भी शुरू करते हैं, जो आज के समय में काफी लोकप्रिय विकल्प है। अलग-अलग पदों पर मिलने वाली सैलरी शहर, अनुभव और संस्था पर निर्भर करती है, इसलिए नीचे दी गई सैलरी अनुमानित है।
| क्षेत्र | नौकरी की भूमिकाएँ | अनुमानित सैलरी (प्रति वर्ष) |
| सरकारी सेक्टर | आयुर्वेदिक मेडिकल ऑफिसर, सरकारी अस्पताल डॉक्टर, रिसर्च ऑफिसर | INR 4 लाख – INR 6 लाख |
| प्राइवेट सेक्टर | क्लिनिक/हॉस्पिटल डॉक्टर, वेलनेस सेंटर कंसल्टेंट, हेल्थकेयर मैनेजर | INR 3 लाख – INR 8 लाख |
| रिसर्च और उच्च शिक्षा (MD/MS) | PG कोर्स (MD/MS), लेक्चरर/प्रोफेसर, रिसर्चर | INR 5 लाख – INR 10 लाख |
| स्व-रोज़गार (Self-Practice) | खुद का क्लिनिक/आयुर्वेदिक फार्मेसी खोलना | INR 6 लाख – INR 12 लाख (अनुभव और प्रैक्टिस पर निर्भर) |
बीएएमएस बनाम एमबीबीएस में अंतर
यहाँ बीएएमएस बनाम एमबीबीएस में अंतर को संक्षेप में निम्नलिखित टेबल के माध्यम से समझाया गया है –
| आधार | बीएएमएस (BAMS) | एमबीबीएस (MBBS) |
| पूरा नाम | बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी | बैचलर ऑफ मेडिसिन एंड बैचलर ऑफ सर्जरी |
| चिकित्सा पद्धति | आयुर्वेद आधारित, समग्र (होलिस्टिक) उपचार, जड़ी-बूटी, पंचकर्म, जीवनशैली प्रबंधन | आधुनिक एलोपैथिक चिकित्सा, दवाइयाँ, सर्जरी, डायग्नोस्टिक तकनीक |
| कोर्स अवधि | 5.5 वर्ष (4.5 वर्ष पढ़ाई + 1 वर्ष इंटर्नशिप) | 5.5 वर्ष (4.5 वर्ष पढ़ाई + 1 वर्ष इंटर्नशिप) |
| प्रवेश प्रक्रिया | NEET-UG के माध्यम से, AYUSH काउंसलिंग | NEET-UG के माध्यम से, MCC/State काउंसलिंग |
| पढ़ाई का फोकस | आयुर्वेद सिद्धांत, द्रव्यगुण, पंचकर्म, कायचिकित्सा, आयुर्वेदिक फार्माकोलॉजी | एनाटॉमी, फिजियोलॉजी, मेडिसिन, सर्जरी, फार्माकोलॉजी, क्लिनिकल साइंस |
| प्रैक्टिस का अधिकार | आयुर्वेदिक चिकित्सा; एलोपैथिक दवा लिखने के नियम राज्य अनुसार सीमित | पूर्ण एलोपैथिक चिकित्सा और सर्जरी का अधिकार |
| करियर विकल्प | आयुर्वेदिक डॉक्टर, पंचकर्म विशेषज्ञ, आयुष मेडिकल ऑफिसर, रिसर्च, प्राइवेट क्लिनिक | डॉक्टर, सर्जन, स्पेशलिस्ट, हॉस्पिटल प्रैक्टिस, PG सुपर-स्पेशलिटी |
| फीस (भारत) | सरकारी कम, प्राइवेट मध्यम | सरकारी कम, प्राइवेट बहुत अधिक |
बीएएमएस के बाद उच्च शिक्षा
बीएएमएस के बाद उच्च शिक्षा के लिए आप निम्नलिखित कोर्सेज को कर सकते हैं –
MD (आयुर्वेद)
बीएएमएस के बाद एमडी आयुर्वेद तीन वर्ष का स्नातकोत्तर कोर्स है, जिसमें आयुर्वेद की किसी विशेष शाखा जैसे कायचिकित्सा, पंचकर्म, द्रव्यगुण या रोग निदान में गहन अध्ययन कराया जाता है। प्रवेश सामान्यतः AIAPGET परीक्षा के माध्यम से होता है। कोर्स में क्लिनिकल ट्रेनिंग, रिसर्च और थीसिस शामिल रहती है, जिससे विशेषज्ञ चिकित्सक, शिक्षक या कंसल्टेंट में करियर बन सकता है।
MS (आयुर्वेद)
एमएस आयुर्वेद शल्य तंत्र और शालाक्य तंत्र जैसी सर्जिकल शाखाओं में विशेषज्ञता प्रदान करता है। अवधि तीन वर्ष होती है और प्रवेश AIAPGET मेरिट से मिलता है। इसमें ऑपरेटिव प्रक्रियाओं की आयुर्वेदिक अवधारणाएँ, प्री और पोस्ट ऑपरेटिव केयर, क्लिनिकल केस प्रबंधन तथा शोध कार्य शामिल रहते हैं, जिससे सर्जिकल आयुर्वेद विशेषज्ञ, अस्पताल चिकित्सक या अकादमिक क्षेत्र में अवसर मिलते हैं।
MSc / PhD
बीएएमएस के बाद एमएससी या पीएचडी रिसर्च आधारित उच्च शिक्षा विकल्प हैं, जो आयुर्वेद, फार्माकोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, पब्लिक हेल्थ या संबंधित विषयों में की जा सकती है। एमएससी सामान्यतः दो वर्ष और पीएचडी तीन से पाँच वर्ष की होती है। इनमें रिसर्च मेथडोलॉजी, डेटा विश्लेषण, प्रकाशन और थीसिस पर जोर दिया जाता है, जिससे शोधकर्ता, वैज्ञानिक या करियर बन सकता है।
PG Diploma in Panchakarma / Yoga
पीजी डिप्लोमा इन पंचकर्म या योग अल्पकालिक स्पेशलाइजेशन कोर्स हैं, जिनकी अवधि सामान्यतः छह महीने से एक वर्ष होती है। इन कार्यक्रमों में पंचकर्म प्रक्रियाएँ, थेरेप्यूटिक योग, रोगानुसार उपचार योजना और वेलनेस मैनेजमेंट सिखाया जाता है। यह कोर्स क्लिनिकल प्रैक्टिस, वेलनेस सेंटर, योग प्रशिक्षक या पंचकर्म विशेषज्ञ के रूप में कौशल बढ़ाने और रोजगार अवसर सुधारने में सहायक होता है।
BAMS डॉक्टर कैसे बनें? स्टेप-बाय-स्टेप गाइड
BAMS डॉक्टर बनने के लिए आप निम्नलिखित स्टेप-बाय-स्टेप गाइड को फॉलो कर सकते हैं, ताकि आप सही दिशा में निरंतर आगे बढ़ सकें और अपने करियर की सफल शुरुआत कर सकें –
स्टेप 1 – 12वीं कक्षा को PCB विषयों के साथ पास करें
BAMS डॉक्टर बनने के लिए सबसे पहला स्टेप है 12वीं कक्षा को फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी (PCB) विषयों के साथ पास करना। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, BAMS कोर्स में एडमिशन के लिए बायोलॉजी अनिवार्य है। सामान्य वर्ग के छात्रों को कम से कम 50% अंक और आरक्षित वर्ग को लगभग 40% अंक लाने होते हैं। इस स्तर पर बायोलॉजी की मजबूत समझ आगे की पढ़ाई और प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए बेहद जरूरी होती है।
स्टेप 2 – NEET परीक्षा के लिए आवेदन करें
BAMS कोर्स में प्रवेश के लिए नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) देना अनिवार्य है। यह परीक्षा नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित की जाती है। आवेदन ऑनलाइन होता है और इसमें बायोलॉजी, केमिस्ट्री और फिजिक्स के प्रश्न पूछे जाते हैं। अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए NCERT आधारित तैयारी जरूरी होती है, क्योंकि अधिकतर प्रश्न इन्हीं पुस्तकों से आते हैं और मेरिट में स्थान पाने के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा होती है।
स्टेप 3 – NEET परीक्षा में क्वालिफाई करें
सिर्फ NEET देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसमें क्वालिफाई करना जरूरी है। हर साल कटऑफ अलग होती है, जिसे NTA द्वारा जारी किया जाता है। BAMS में प्रवेश के लिए सामान्यत: मध्यम रैंक भी स्वीकार की जाती है, लेकिन सरकारी कॉलेज के लिए अच्छी रैंक आवश्यक होती है। क्वालिफाई करने के बाद आपका नाम मेरिट लिस्ट में आता है, जिससे आप काउंसलिंग प्रक्रिया में भाग लेने के पात्र बनते हैं और आगे के स्टेप के लिए योग्य माने जाते हैं।
स्टेप 4 – काउंसलिंग प्रक्रिया में भाग लें
NEET क्वालिफाई करने के बाद आपको काउंसलिंग में भाग लेना होता है, जिसे आयुष एडमिशंस सेंट्रल कॉउंसलिंग कमिटी (AACCC) और राज्य स्तर की एजेंसियां आयोजित करती हैं। इसमें आप अपनी रैंक के अनुसार कॉलेज और कोर्स का चयन करते हैं। सरकारी और निजी दोनों कॉलेजों के विकल्प मिलते हैं। सही कॉलेज चुनना महत्वपूर्ण होता है, इसलिए आधिकारिक वेबसाइट पर सीट मैट्रिक्स और पिछले साल की कटऑफ जरूर जांचनी चाहिए।
स्टेप 5 – BAMS कोर्स में एडमिशन लें
काउंसलिंग के बाद जब आपको सीट अलॉट हो जाती है, तो आपको निर्धारित समय में कॉलेज में रिपोर्ट करना होता है और एडमिशन प्रक्रिया पूरी करनी होती है। BAMS एक 5.5 साल का कोर्स है, जिसमें 4.5 साल की पढ़ाई और 1 साल की इंटर्नशिप शामिल होती है। यह कोर्स सेंट्रल कॉउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन (CCIM) द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित किया जाता है।
स्टेप 6 – कोर्स के दौरान पढ़ाई और प्रशिक्षण
BAMS कोर्स के दौरान आपको आयुर्वेद से संबंधित विषय जैसे संस्कृत, शरीर रचना (Anatomy), शरीर क्रिया (Physiology), द्रव्यगुण, पंचकर्म आदि पढ़ाए जाते हैं। साथ ही प्रैक्टिकल और क्लिनिकल ट्रेनिंग भी दी जाती है, जिससे छात्र मरीजों के इलाज की प्रक्रिया समझते हैं। यह प्रशिक्षण सरकारी या मान्यता प्राप्त अस्पतालों में होता है, जिससे छात्रों को वास्तविक चिकित्सा अनुभव मिलता है और वे एक योग्य आयुर्वेदिक डॉक्टर बनने की दिशा में आगे बढ़ते हैं।
स्टेप 7 – इंटर्नशिप पूरी करें
BAMS कोर्स के अंतिम चरण में 1 साल की अनिवार्य इंटर्नशिप करनी होती है। इसमें छात्रों को विभिन्न विभागों (जैसे – ओपीडी, आईपीडी और पंचकर्म यूनिट) में काम करने का अवसर मिलता है। इंटर्नशिप के दौरान आप सीनियर डॉक्टरों के साथ काम करके मरीजों के इलाज का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करते हैं। यह स्टेप बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यहीं से आपकी असली मेडिकल प्रैक्टिस की शुरुआत होती है।
स्टेप 8 – रजिस्ट्रेशन और प्रैक्टिस शुरू करें
कोर्स और इंटर्नशिप पूरी करने के बाद आपको राज्य आयुष परिषद में रजिस्ट्रेशन कराना होता है। इसके बाद ही आप कानूनी रूप से आयुर्वेदिक डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस कर सकते हैं। आप चाहें तो अपना क्लिनिक खोल सकते हैं या किसी अस्पताल में नौकरी कर सकते हैं। इसके अलावा, आगे की पढ़ाई जैसे MD (आयुर्वेद) भी कर सकते हैं, जिससे आपके करियर के अवसर और भी बेहतर हो जाते हैं।
FAQs
बीएएमएस पूरा करने के बाद छात्र अपना क्लिनिक या आयुर्वेदिक क्लिनिक खोल सकते हैं। शुरुआत में अनुभव और स्थानीय लाइसेंस की जरूरत होती है, लेकिन सही मार्केटिंग और विशेषज्ञता से सफल प्रैक्टिस बन सकती है।
हाँ, बीएएमएस पूरा करने के बाद छात्र MD (Ayurveda), MSc, PhD या स्पेशलाइजेशन कोर्स कर सकते हैं।
बीएएमएस में न्यूनतम आयु 17 साल है। यदि आपकी उम्र 17 साल से कम है, तो आप अभी एडमिशन नहीं ले सकते। आप अगले वर्ष NEET पास करके आवेदन कर सकते हैं।
हाँ, लेकिन इसके लिए उस देश की मेडिकल अथॉरिटी की शर्तें और लाइसेंसिंग एग्ज़ाम पास करना जरूरी होता है।
नहीं, बीएएमएस में प्रवेश के लिए बायोलॉजी अनिवार्य है। PCM वाले छात्रों को अधिकांश कॉलेज प्रवेश नहीं देते।
भारत में BAMS डॉक्टरों को सीमित प्रकार की सर्जरी करने की अनुमति होती है, लेकिन यह अनुमति राज्य और संबंधित मेडिकल काउंसिल के नियमों पर निर्भर करती है। कुछ राज्यों में आयुर्वेद डॉक्टरों को विशेष प्रशिक्षण के बाद जनरल सर्जरी, ENT, और डेंटल प्रक्रियाएं करने की अनुमति दी गई है।
हाँ, भारत में BAMS में प्रवेश के लिए NEET अनिवार्य है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय और NMC के नियमों के अनुसार, सभी सरकारी और निजी आयुर्वेद कॉलेजों में एडमिशन NEET स्कोर के आधार पर ही होता है।
BAMS (बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी) डॉक्टर की शुरुआती सैलरी आमतौर पर INR 20,000 से INR 35,000 प्रति माह के बीच होती है। यह सैलरी सरकारी या प्राइवेट सेक्टर, लोकेशन और संस्थान के अनुसार बदल सकती है।
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