भारतीय गायिकाओं में बेजोड़ लता मंगेशकर

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भारतीय गायिकाओं में बेजोड़ लता मंगेशकर Class 11

सुर कोकिला लता मंगेशकर भारतीय संगीत जगत की एक बेहतरीन गायिका जिनके सुरीली आवाज़ किसी के भी कानों में पड़ती हैं तो उसे एक अलग ही अनुभूति का एहसास होता है। लताजी ने भारतीय संगीत के स्तर को एक अलग की मुकाम पर पंहुचा दिया जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की होगी। इन्होने हर तरह के गानों को बड़े ही बेहतरीन ढ़ंग से गाया हैं। अपनी मनोहर आवाज़ से चाहे ” ऐ मेरे वतन के लोगों ज़रा आंख में भर लो पानी” या फिर ” दीदी तेरा देवर दीवाना “ गाना हो सबकी गानों से लोगों के दिलों में छाप छोड़ने में सफल हुई है। हिंदी कक्षा 11 “वितान के  भाग-1” के पाठ-1 “भारतीय गायिकाओं में बेजोड़ लता मंगेशकर Class 11″के बारे में पढे़गे। इस कहानी का सार, कठिन-शब्दों के अर्थ , लेखक के बारे में और NCERT की पुस्तक के अनुसार प्रश्नों के उत्तर, इन सभी के बारे में जानेंगे। तो चलिए जानते हैं Bhartiya Gayikao me Bejod Lata Mangeshkar कहानी के बारे में Leverage Edu के साथ।

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लेखक परिचय

नाम और  परिचय  कुमार गंधर्व, उनका पूरा नाम शिवपुत्र सिद्धरामैया कोमकाली था। पुणे में प्रोफेसर देवधर और अंजनी बाई मालपेकर संगीत शिक्षा प्राप्त की थी। कालिदास के बाद कुमार गंधर्व मालवा के सबसे दिव्य सांस्कृतिक विभूति  है।     
जन्म               सन् 1948, वर्धा महाराष्ट्र  
प्रमुख रचनाएँ           उड़ जाएगा हंस अकेला, बौर चैता, झीनी झीनी चदरिया,सुनता है गुरु ज्ञानी आदि।  
 पुरस्कार         पदम विभूषण पुरस्कार । 
 मृत्यु  सन् 12 जनवरी 1992

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Bhartiya Gayikao me Bejod Lata Mangeshkar

भारतीय गायिकाओं में बेजोड़ लता मंगेशकर
Source: Pinterest

भारतीय गायिकाओं में बेजोड़ लता मंगेशकर Class 11 कुमार गंधर्व ने लिखा है जहां उनके गायन का वर्णन किया गया है। गायिका पर प्रकाश डालते हुए वह कहते हैं कि ‘जब मैं एक बार बीमार था तब मैंने रेडियो लगाया और अचानक एक अद्भुत स्वर मेरे कानों से टकराई, वाकई में उसमें कुछ अलग सा जादू था।’ जब गाने का अंत हुआ तब गायिका का नाम बताया गया “लता मंगेशकर”। उस दिन से लेखक लगातार लता मंगेशकर जी को सुनते हुए आ रहे हैं। पहले के समय नूरजहां अपने संगीत के लिए प्रसिद्ध थे लेकिन लता जी तो उनसे बहुत आगे निकल गई। संगीत के क्षेत्र में ऐसे चमत्कार होते रहते हैं जैसे ख्याति प्राप्त सितारावादक विलायत खां ‌अपने पिता से काफी आगे निकल गए। लेखक ने ये बताया है कि लता मंगेशकर जैसी अद्भुत गायिका कोई और हुई नहीं हैं।

लता के कारण ही चित्रपट इतना मशहूर हुआ हैं और साथ ही शास्त्रीय संगीत की ओर नज़रिया बदला है। आजकल जो गाने घर में सुनाई देते हैं और पहले जो बच्चे घर में गाने सुनते थे बड़ा अंतर है। स्वर कोकिला के गाने कानों में पड़े तो कोई भी उन्हें सीखने का प्रयास करेने लगता है। संगीत के अलग -अलग प्रकारों से उनका परिचय हो रहा हैं । उनका संगीत का ज्ञान बढ़ता जा रहा हैं साथ ही उन्हें इसकी समझ होती जा रही हैं कि सभी प्रकार के लय भी आवश्यक हैं। इस प्रकार उन्होंने नई पीढ़ी के संगीत को संस्कारित किया है। साधारण लोगों के लिए संगीत का अभिरुचि पैदा करने में बड़ा योगदान हैं। संगीत की लोकप्रियता, उसका प्रचार और अभिरुचि बनाने से कहां कोई लता हो जाता हैं। कौन से राग में गाया जाए ,कौन सी ताल में गाया जाए यह मालूम नहीं रहता हैं। क्योंकि जिस प्रकार मनुष्यता हो तो वह मनुष्य हैं, वैसे ही गानपन हो तो वह संगीत हैं। लता के कोई भी गाना सुन लीजिए उसमें यह गानपन मौजूद मिलेगा।

लता के सुरों का जादू

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उनके गाने की एक और विशेषता है कि उनके स्वर में निर्मलता हैं। उनसे पहले नूरजहाँ एक अच्छी गायिका थी। लता के स्वरों में कोमलता और मुग्धता हैं। मैं अगर स्वयं दिग्दर्शक होता तो लता को बहुत जटिल काम दिए बिना रहा नहीं जाता। लता के गाने की एक और विशेषता हैं कि उसका यादों में उच्चार है। उनके गीत 2 शब्द विलीन होते-होते एक दूसरे में मिल जाते हैं। ऐसा माना जाता हैं कि लता के संगीत में वरुणरस विशेष प्रभावशाली रीति से व्यक्त होता है। मेरा अपना मत हैं कि लताजी ने वरुणरस के साथ इतना नया नहीं किया है। उनके गायन में एक और कमी हैं, यह कहना मुश्किल होगा इसमें लता का दोष कितना हैं और संगीत दिग्दर्शकों का दोष कितना है। Bhartiya Gayikao me Bejod Lata Mangeshkar लता का गाना समानता ऊंची पट्टी में रहता है। दिग्दर्शक अधिक ऊंची पट्टी में गाते हैं और उससे अकारण ही चिल्लवाते हैं। प्रश्न पूछा जाता है कि शास्त्र संगीत में लता का स्थान कौन सा है तो मेरे मत से यह प्रश्न खुद ही प्रयोजनहीन हैं। इसका कारण यह है कि शास्त्र संगीत और चिटपटे संगीत में तुलना हो ही नहीं सकती है। जहां गंभीर शास्त्रीय संगीत का स्थाई भाव है वही द्रुत लय और चपलता चित्रपट का मुख्य गुणधर्म हैं।

चित्रपट गाने की विशेषता

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चित्रपट संगीत पाताल प्राथमिक अवस्था पाताल होता है जबकि शास्त्र संगीत में ताल अपने परिष्कृत रूप में पाया जाता है। चित्रपट संगीत में आधी तारों का उपयोग किया जाता है उसकी लेकारी बिल्कुल अलग होती है और आसान होती है। यहां गीत और आघात को ज़्यादा महत्व दिया जाता है। सुरक्षा और लोग को अलग स्थान दिया जाता है। चित्रपट संगीत गाने वालों को शास्त्रीय संगीत की उत्तम जानकारी होना आवश्यक है और वह लता के पास हैं। लेखक मानता हैं कि 3:30 मिनट के गाए हुए गाने, चित्रपट के किसी गाने का और 18 खानदानी शास्त्र गायक की तीन साढे़ 3 घंटे की महफिल इन दोनों का कलात्मक आनंदात्मक एक ही है। 3 घंटों की रंगदार महफिल का सारा रस लताजी की 3 मिनट की ध्वनि मुद्रिका में किया जा रहा है। स्वर फ्लैट शब्दार्थ का वहां त्रिवेणी संगम होता है और महफिल की बेहोशी उस में समाई रहती हैं। लेखक कहता है कि शास्त्र संगीत रंजक न हो तो संगीत बिल्कुल ही नीरस ठहरेगा और अनाकर्षक प्रतीत होगा‌ और उसमें कुछ कमी सी प्रतीत होगी। गीत जो गाने पर प्राप्त होता है वह शास्त्रीय बैठक के पक्के पन की वजह से ताल सुर के निर्दोष ज्ञान के कारण नहीं। गाने की सारी मिठास सारी ताकत उसकी रंजकता पर आवलंबित रहती है और रंजकता मर्म रसिक वर्ग के समक्ष कैसे प्रस्तुत किया जाए, किस रीती से उसकी बैठक मिठाई जाए और श्रोताओं से कैसे संवाद साथ आ जाए इसमें समाविष्ट हैं।

किसी मनुष्य का अस्थि पंजर और एक प्रतिभाशाली कलाकार द्वारा उसी मनुष्य का तैल चित्र इन दोनों में जो अंतर होगा, वही गायन के शास्त्रीय गायन और उसकी स्वरों द्वारा की गई सुसंगत अभिव्यक्ति में होगा। संगीत के क्षेत्र में लता का स्थान सबसे ऊपर है। 3 घंटे तो दूर की बात उनके 3 मिनट के गीत कोई पहली श्रेणी का गायक भी ढंग से नहीं कर सकता। खानदानी गायकों का यह आरोप है कि चित्रपट संगीत ने लोगों के कान बिगाड़ दिए है। कुछ बात तो यह है कि शास्त्रीय संगीत गायक संगीत के क्षेत्र में अपना अधिकार चाहते हैं।

संगीत का बदलता स्वरुप

भारतीय गायिकाओं में बेजोड़ लता मंगेशकर
Source: Pinterest

बदलते वक्त के साथ लोगों की  शुद्ध शास्त्र संगीत में रुचि नहीं रही है। संगीत के क्षेत्र में चित्रपट संगीत ही क्रांति लाया है। संगीत में बहुत नए गाने गाने की गुंजाइश है। संगीत के क्षेत्र में रोज नए प्रयोग किए जा रहे हैं जिससे यह क्षेत्र अधिक प्रगति कर रहा है। Bhartiya Gayikao me Bejod Lata Mangeshkar ऐसे चित्रपट की लता एकमात्र सामग्री हैं। क्षेत्र में और भी कई गायक और गायिका आए हैं लेकिन लताजी जैसी लोकप्रियता किसी को हासिल नहीं हुई है। संगीत के क्षेत्र में एक गीतकार रातभर भी अधिक समय तक टिक नहीं पाता परंतु लता आधी से अधिक शताब्दियों से इस क्षेत्र में अपना स्थान बनाए हुए हैं। यह चमत्कार से कम नहीं है कि लताजी को विदेश में भी पसंद किया जाता है। यह हमारा सौभाग्य है कि हम उन् अपनी आंखों से घूमता फिरता देख रहे हैं।

 कठिन शब्द

  •   स्वाभाविकता- प्राक्रतिक 
  •   प्रतिस्पर्धा- प्रतियोगिता 
  •   स्माविष्ट- व्याप्त, पूर्ण 
  •  अवलंबित- आश्रित, टिका हुआ 
  •  गानपन- मिठास, मस्ती
  •  उत्कटता- तेज़ी , उग्रता ,प्रजंड
  •  मार्मिकता- अच्छी जानकारी होना 
  •  दृष्टिकोण- नजरिया
  •  सुसंवाद- आनंददायी, शुभ 
  •  दिग्दर्शक- दिशाओं का ज्ञान 
  •  परिष्कृत- स्वच्छ, निर्मल, साफ़
      

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Bhartiya Gayikao me Bejod Lata Mangeshkar NCERT के प्रश्न-उत्तर

प्रश्न 1. लेखक ने पाठ में गानपन का उल्लेख किया है। पाठ के संदर्भ में स्पष्ट करते हुए बताएँ कि आपके विचार में इसे प्राप्त करने के लिए किस प्रकार के अभ्यास की आवश्यकता है?

उत्तर – गानपन का अर्थ हैं मीठा और सुरीला गाना जो एक इंसान को भावपूर्ण कर दें। जैसे मनुष्यता हो तो मनुष्य कहलाता है वैसे ही संगीत में गानपन होना आवश्यक है। लताजी के गानों में गानपन मौजूद हैं। इसे हासिल करने के लिए निरंतर अभ्यास करना आवश्यक हैं।

प्रश्न 2. लेखक ने लता की गायकी के किन -किन विशेषताओं को उजागर किया है ?आपको लता की गायकी में कौन सी विशेषता नज़र आती हैं ?उदाहरण सहित बताइए।

उत्तर – लेखक ने लताजी के गायकी में निम्न विशेषताओं को उजागर किया हैं।
सुरीलापन-लता के गानों  में सुरीलापन मौजूद है।
उनके स्वरों में एक मिठास और मस्ती है।
उनके गाने लोगों को बहुत पसंद आते हैं।

प्रश्न 3. लता ने करुण रस के गानों के साथ न्याय नहीं किया, जबकि श्रृंगार परक गाने में बड़ी उत्कटता से गाती है। इस कथन से आप कहां तक सहमत हैं ।

उत्तर – लेखक का यह कहना कि “लताजी ने करुण रस के गानों के साथ न्याय नहीं किया हैं ,जबकि श्रृंगार पारक गाने में बड़ी उत्कटता से गाती है।” यह बात चित पदों पर लागू नहीं होती है। लता ने कई चित्रपटों में अपनी आवाज दी है उनमे कंस के गीत बड़े मार्मिकता के साथ गए हैं जो उनकी वाणी में करुणा साफ झलकती है। मैं लेखक की इस बात से सहमत नहीं हूं कि लता जी ने केवल श्रृंगार रस के गीत ही भले प्रकार गा सकती हैं। वे सभी प्रकार के गीतों को सामान्य सुरीले पन के साथ गा सकती हैं।

प्रश्न 4 . संगीत का क्षेत्र विस्तीर्ण  है। वहां अब तक अलक्षित, असंशोधित,अहष्टपूर्व ऐसा खूब बड़ा प्रांत है, तथापि बड़े जोश से इनकी खोज और उपयोग चित्रपट के लोग करते चले आ रहे हैं-इस कथन का वर्तमान फिल्मी संगीत को संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – संगीत का क्षेत्र काफी विस्तृत है इसमें राख स्वर ताल तूने ऐसी हैं जिनमें बहुत सुधार होने बाकी हैं। वर्तमान फिल्मी संगीत में रोज नहीं धुने और स्वर का प्रयोग किया जा रहा हैं। संगीतकार निरंतर कुछ नया करने का प्रयास करते ही रहते हैं। आजकल के संगीत में पॉप संगीत का मिश्रण किया जा रहा हैं तो कभी सुखी और कभी लोक संगीत का। इनका जोरों शोरों से प्रचार भी किया जाता है। इस प्रकार वर्तमान फिल्मी संगीत में विस्तार हो रहा है।

प्रश्न 5. शास्त्री एवं चित्रपट पर दोनों तरह के संगीतों के महत्व का आधार क्या होना चाहिए? कुमार गंधर्व की इस संबंध में क्या राय है स्वयं आप क्या सोचते हैं?

उत्तर – शास्त्र एवं चित्रपट दोनों तरह के संगीतों में रंजकता होनी चाहिए। लेखक मानते हैं चाहे शास्त्र संगीत हो या फिल्मी संगीत वही संगीत अधिक बेहतर माना जाए जो शैतान को अधिक आनंद प्राप्त कर आता है। क्योंकि संगीत का मूल ही आनंद है जिसकी उत्पत्ति उल्लास से हुई है। लोक संगीत अपने मनोरंजन के लिए सुनते हैं ना कि ज्ञान के लिए इसलिए संगीत का उद्देश्य है आनंद।

प्रश्न 6. ‘चित्रपट संगीत में लोगों के कान बिगाड़ दिए’-अक्सर आरोप लगाया जाता रहा हैं। इस संदर्भ में कुमार गंधर्व की राय और अपनी राय लिखें।

उत्तर -कुमार गंधर्व इस बात से सहमत नहीं है कि चित्रपट संगीत ने लोगों के कान बिगाड़ दिए हैं। चित्रपट संगीत, संगीत के क्षेत्र में कई सुधार लाया है। आज इसी वजह से लोगों ने संगीत को समझा है। वर्तमान परिपेक्ष में मेरे हिसाब से चित्रपट संगीत शोर से भरा हुआ और बेतुके शब्दावली का प्रयोग करके तनाव पैदा करता है। जहां पुराने संगीतो में सुरीलापन शब्दों का कुछ अर्थ होता था, वहीं आज संगीत में अश्लीलता और अभद्र भाषा का उपयोग किया जाता हैं। संगीत ऐसा होना चाहिए जो हमारे मन को सुकून और आनंद की अनुभूति कराता हो ना कि उसे और विचलित करता हो।

भारतीय गायिकाओं में बेजोड़ लता मंगेशकर Class 11 MCQ

1. भारतीय गायिकाओं में बेजोड़-लता मंगेशकर के लेखक कौन हैं?
a कुमार गंधर्व
b कुमार विश्वास
c कुमार 
d कुमार भारत

उत्तर-(a)  कुमार गंधर्व

2. लता के पिता का नाम था?
a दीनानाथ मंगेशकर
b देवदास मंगेशकर
c दिवनन मंगेशकर
d देवेंद्र मंगेशकर

उत्तर-(a) दीनानाथ मंगेशकर

3. यह अद्भुत स्वर  किसका क्या है?
a लता
b आशा
c नूरजहां
d अल्का

उत्तर-(a) लता

4. लता से पहले किस गायकी का चित्रपट संगीत अधिकार था?
a नूरी
b नूरजहां
c नूतन
d नूरबेगम

उत्तर-(b) नूरजहां

5. लेखक के अनुसार कौन बीमार था?
a नूरजहां
b लता
c लेखक
d विलायत खां

उत्तर-(c) लेखक

Source:MUNIL SIR CLASSES

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