आंखों का डॉक्टर कैसे बनें: कोर्स, एडमिशन और करियर गाइड

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eye ka doctor kaise bane

क्या आप मेडिकल क्षेत्र में स्थिर करियर बनाने के साथ-साथ समाज सेवा में भी योगदान देना चाहते हैं? यदि हाँ, तो आंखों का डॉक्टर अर्थात ‘ऑप्थाल्मोलॉजिस्ट’ (Ophthalmologist) आपके लिए एक उपयुक्त करियर ऑप्शन हो सकता है।ऑप्थाल्मोलॉजिस्ट केवल आंखों की बीमारियों का इलाज नहीं करता, बल्कि दृष्टि परीक्षण, आंखों की सर्जरी, दवा और उपकरणों का चयन व रोगों की रोकथाम और सुधार में भी विशेषज्ञ होता है। भारत में डिजिटल स्क्रीन के बढ़ते उपयोग और बदलते लाइफस्टाइल के कारण आंखों से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इसके परिणामस्वरूप इस क्षेत्र में योग्य ऑप्थाल्मोलॉजिस्ट की मांग लगातार बढ़ रही है। यदि आप भी यह जानना चाहते हैं कि आंखों का डॉक्टर कैसे बनें, तो यह लेख आपके लिए उपयोगी सिद्ध हो सकता है।

ऑप्थाल्मोलॉजिस्ट कौन होते हैं?

ऑप्थाल्मोलॉजिस्ट यानी आंखों का विशेषज्ञ डॉक्टर, आंखों की सेहत और दृष्टि से जुड़ी सभी समस्याओं का इलाज करता है। यह सिर्फ दृष्टि सुधारने तक सीमित नहीं है; ऑप्थाल्मोलॉजिस्ट मरीज की आंखों की पूरी जांच करता है, दवाइयाँ और दृष्टि उपकरण सुझाता है और गंभीर मामलों में सर्जरी भी करता है। ऑप्थाल्मोलॉजिस्ट की अन्य जिम्मेदारियां निम्नलिखित हैं:

  • मरीज की आंखों की नियमित जांच और रोग पहचान करना।
  • दृष्टि सुधारने के लिए चश्मा, कॉन्टैक्ट लेंस या अन्य उपकरण सलाह देना।
  • गंभीर मामलों में सर्जरी करना और ऑपरेशन के बाद देखभाल सुनिश्चित करना।
  • आंखों की बीमारियों के प्रति मरीजों को जागरूक करना।
  • नई तकनीकों और चिकित्सा उपकरणों के इस्तेमाल में अपडेट रहना।
  • बच्चों, वयस्कों और बुजुर्गों की अलग-अलग दृष्टि समस्याओं का ध्यान रखना।

आंखों के उपचार से जुड़े प्रमुख प्रोफेशन

आंखों के उपचार से जुड़े प्रमुख करियर ऑप्शन इस प्रकार है:

  • ऑप्थाल्मोलॉजिस्ट: ये एक मेडिकल डॉक्टर होते हैं, जो आंखों की गंभीर बीमारियों का इलाज करते हैं और जरूरत पड़ने पर सर्जरी भी करते हैं। ऑप्थाल्मोलॉजिस्ट मोतियाबिंद, रेटिना की समस्या, ग्लूकोमा, और कॉर्निया ट्रांसप्लांट जैसी जटिल समस्याओं का उपचार करते हैं। इनकी जिम्मेदारियों में आंखों की जांच, दवाइयाँ लिखना, ऑपरेशन करना और मरीजों को उचित सलाह देना शामिल होता है।
  • ऑप्टोमेट्रिस्ट: ये विशेषज्ञ सामान्य आंखों की जांच करते हैं, चश्मा और कॉन्टैक्ट लेंस की सलाह देते हैं। ऑप्टोमेट्रिस्ट व्यक्ति की आंखों की रोशनी मापते हैं, नजर की कमजोरी पहचानते हैं और कुछ सामान्य बीमारियों की पहचान भी करते हैं। इनका कार्य मरीजों को सही लेंस और चश्मा देना, आंखों के तनाव का पता लगाना और आगे रेफर करना होता है। बता दें कि ये डॉक्टर नहीं होते, लेकिन नेत्र परीक्षण में अच्छी तकनीकी और नैदानिक जानकारी रखते हैं।
  • ऑप्टिशियन: ऑप्टिशियन वे प्रोफेशनल होते हैं जो ऑप्थाल्मोलॉजिस्ट या ऑप्टोमेट्रिस्ट द्वारा दी गई पर्ची के आधार पर चश्मे और लेंस तैयार करते हैं। इनका काम चश्मों के फ्रेम चुनना, लेंस फिट करना और विज़न संबंधित उपकरणों को सही तरीके से ग्राहकों तक पहुंचाना होता है। ये नेत्र परीक्षण नहीं करते, लेकिन विज़न प्रोडक्ट्स को सही माप और क्वालिटी में देने की जिम्मेदारी निभाते हैं। ये आमतौर पर ऑप्टिकल शॉप्स, क्लीनिक या आईवियर कंपनियों में कार्य करते हैं।

आंखों का डॉक्टर कैसे बनें: स्टेप-बाय-स्टेप गाइड

आंखों का डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले उम्मीदवारों के लिए यहाँ दी गई स्टेप-बाय-स्टेप गाइड उपयोगी हो सकती है –

स्टेप 1: आवश्यक योग्यता और शैक्षणिक मानदंड को पूरा करें
  • छात्रों को फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी (PCB)  विषयों के साथ न्यूनतम 50% अंकों के साथ 12वीं पास होना आवश्यक है।
  • छात्र शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना चाहिए क्योंकि प्रैक्टिकल ट्रेनिंग और फील्ड वर्क में शारीरिक सहनशक्ति की जरूरत होती है।
  • MBBS कोर्स में एडमिशन के लिए राष्ट्रीय स्तर की मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG को पास करना अनिवार्य है। इस परीक्षा के लिए न्यूनतम आयु 17 वर्ष निर्धारित की गई है (उसी वर्ष के 31 दिसंबर तक 17 वर्ष का होना आवश्यक)।

स्टेप 2: आंखों का डॉक्टर बनने के लिए जरूरी कोर्स और उनकी अवधि

  • NEET में अच्छा स्कोर लाकर छात्र सरकारी या प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में MBBS (5.5 वर्ष) में एडमिशन ले सकते हैं।
  • आंखों का डॉक्टर बनने के लिए इंटर्नशिप और व्यावहारिक अनुभव बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। MBBS के अंतिम वर्ष में छात्रों को अस्पतालों में इंटर्नशिप करने का अवसर मिलता है, जिससे उन्हें आंखों की जांच, इलाज और मरीजों से संवाद जैसी वास्तविक परिस्थितियों का अनुभव होता है। हॉस्पिटल में अनुभव लेना इसलिए जरूरी है क्योंकि इससे छात्रों को क्लीनिकल नॉलेज के साथ-साथ उपकरणों के सही उपयोग और टीमवर्क की समझ भी विकसित होती है।

स्टेप 3: ऑप्थाल्मोलॉजी में पोस्टग्रेजुएट

  • MBBS पूरा करने के बाद MS या MD में एडमिशन लेना होता है। यह स्पेशलाइजेशन कोर्स लगभग 3 साल का होता है।
  • MS व MD कोर्स में एडमिशन लेने के लिए छात्र को राष्ट्रीय स्तर की NEET PG परीक्षा पास करनी अनिवार्य होगी।  

स्टेप 4: शैक्षणिक संस्थान और प्रैक्टिकल अनुभव

  • भारत में AIIMS, AFMC, MAMC, KGMU, CMC जैसे प्रतिष्ठित संस्थान इस क्षेत्र में बेहतरीन शिक्षा प्रदान करते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में लगातार मेहनत, विषयों की गहरी समझ और क्लिनिकल प्रैक्टिस पर ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है।

स्टेप 5: MD कोर्स के बाद लाइसेंस और प्रैक्टिस प्रक्रिया का हिस्सा बनें

  • MD/MS की डिग्री पूरी करने के बाद, आपको ‘राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग’ (NMC) या राज्य चिकित्सा परिषद के साथ एक पंजीकृत ऑप्थाल्मोलॉजिस्ट के रूप में पंजीकरण करवाना होता हैं। इसके लिए आपको सही समय पर लाइसेंस और प्रैक्टिस प्रक्रिया का हिस्सा बनना जरुरी होता है। इसके बाद अब आप स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस शुरू कर सकते हैं, चाहे वह किसी अस्पताल में नौकरी हो, खुद का क्लिनिक हो या चैरिटेबल अस्पताल में सेवा हो।

भारत के प्रमुख मेडिकल संस्थानों की सूची

यहां भारत के प्रमुख मेडिकल संस्थानों की सूची दी गई है, जहां से आप MBBS कोर्स कर सकते हैं:

  • अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), नई दिल्ली
  • अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), ऋषिकेश
  • सशस्त्र बल चिकित्सा महाविद्यालय (AFMC), पुणे
  • मौलाना आज़ाद मेडिकल कॉलेज (MAMC), नई दिल्ली
  • लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज (LHMC), नई दिल्ली
  • किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU), लखनऊ
  • क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (CMC), वेल्लोर
  • SRM इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेकनोलॉजी, चेन्नई
  • शारदा यूनिवर्सिटी, ग्रेटर नोएडा
  • बनारस हिंदू विश्वविद्यालय – इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (IMS-BHU), वाराणसी
  • जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (JNMC), अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय
  • जेएसएस मेडिकल कॉलेज, मैसूर
  • ग्रांट मेडिकल कॉलेज एवं सर जे.जे. ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स, मुंबई
  • सेठ जी.एस. मेडिकल कॉलेज एवं केईएम अस्पताल, मुंबई

ऑप्टोमेट्रिस्ट बनने का पाथ

जिन छात्रों ने 12वीं कक्षा विज्ञान विषयों (फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी या मैथ्स) के साथ कम से कम 50% अंकों से उत्तीर्ण की है, वे B.Optometry या B.Sc Optometry जैसे अंडरग्रेजुएट कोर्स में प्रवेश ले सकते हैं। इस कोर्स की कुल अवधि 4 वर्ष होती है, जिसमें 3 वर्ष शैक्षणिक अध्ययन और 1 वर्ष इंटर्नशिप शामिल होती है।

इस कोर्स में आंखों की संरचना, दृष्टि परीक्षण, लेंस प्रिस्क्रिप्शन, और विज़न केयर से जुड़ी तकनीकी और क्लिनिकल ट्रेनिंग दी जाती है, जिससे छात्र एक पेशेवर ऑप्टोमेट्रिस्ट बन सकते हैं। इस कोर्स के लिए भारत के प्रमुख संस्थानों जैसे AIIMS, SRMIST, LV Prasad Eye Institute, AMU, जेएसएस मेडिकल कॉलेज और JIPMER आदि में एडमिशन लिया जा सकता है। 

भारत के प्रमुख ऑप्टोमेट्रिस्ट संस्थानों के बारे में जानें

आंखों का डॉक्टर बनने के लिए आवश्यक कोर्स के साथ भारत के प्रमुख सरकारी और प्राइवेट ऑप्टोमेट्रिस्ट संस्थानों की जानकारी होना भी जरूरी है। नीचे ऐसे प्रमुख कॉलेजों की सूची दी गई है जहाँ से आप शिक्षा और प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं:-

क्रमांकसंस्थान का नामप्रकारप्रमुख कार्यक्रमस्थान
1अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS)सरकारीबी.ऑप्टोम (4 वर्ष)नई दिल्ली
2जवाहरलाल स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (JIPMER)सरकारीबी.एससी / बी.ऑप्टोम (स्नातक कार्यक्रम)पुडुचेरी
3रीजिनल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑप्थलमोजी (RIO), तिरुवनंतपुरमसरकारीबी.एससी / बी.ऑप्टोमेट्री, स्नातकोत्तर डिप्लोमा, एम.एस कार्यक्रम (नेत्र विज्ञान / संबद्ध)तिरुवनंतपुरम, केरल
4सरकारी मेडिकल कॉलेज, कोझिकोड (कैलिकट)सरकारीबी.एससी / बी.ऑप्टोमेट्री (स्नातक + इंटर्नशिप)कोझिकोड, केरल
5रीजिनल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑप्थलमोजी (सीतापुर आई हॉस्पिटल / RIO सीतापुर)सरकारी / स्वायत्त ट्रस्ट (प्रमुख सार्वजनिक भूमिका)डिप्लोमा / बी.ऑप्टोम / फेलोशिप / प्रशिक्षण कार्यक्रमसीतापुर, उत्तर प्रदेश
6एलीट स्कूल ऑफ ऑप्टोमेट्री (ESO) – शंकरा नेत्रालय (मेडिकल रिसर्च फाउंडेशन)गैर-सरकारी (एनजीओ / निजी ट्रस्ट + शैक्षणिक संबद्धता)बी.ऑप्टोम (4 वर्ष), एम.ऑप्टोम, पीएचडी, फेलोशिपचेन्नई (मुख्य) – शाखाएँ (कोलकाता आदि)
7एल.वी. प्रसाद आई इंस्टीट्यूट (ब्रायन होल्डन इंस्टीट्यूट ऑफ ऑप्टोमेट्री एंड विज़न साइंसेज)गैर-सरकारी (एनजीओ / उत्कृष्टता संस्थान)बी.एससी / बी.ऑप्टोम, स्नातकोत्तर डिप्लोमा (PGDOVS), प्रशिक्षण और शोध कार्यक्रमहैदराबाद, तेलंगाना
8अरविंद आई केयर सिस्टम – शिक्षा और प्रशिक्षण (अरविंद स्कूल / LAICO कार्यक्रम)गैर-सरकारी (ट्रस्ट / एनजीओ)लघु पाठ्यक्रम, डिप्लोमा / रेज़िडेंसी, डिस्पेंसिंग और पैरामेडिकल प्रशिक्षण; फेलोशिप कार्यक्रममदुरै, तमिलनाडु (कई केंद्र)
9क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (CMC) वेल्लोर — बी.ऑप्टोम / संबद्ध नेत्र कार्यक्रमगैर-सरकारी (डीम्ड / निजी-परमार्थ)बी.ऑप्टोम (स्नातक), डिप्लोमा, संबद्ध प्रशिक्षण; इंटर्नशिपवेल्लोर, तमिलनाडु
10शंकरा नेत्रालय एलीट स्कूल ऑफ ऑप्टोमेट्री (कोलकाता परिसर / SN-ESO)गैर-सरकारी (एकेडमी / निजी ट्रस्ट)बी.ऑप्टोम (संबद्ध), एम.ऑप्टोम कार्यक्रम (क्षेत्रीय परिसर)कोलकाता (और चेन्नई)

ऑप्टिशियन बनने का पाथ

ऑप्टिशियन बनने के लिए किसी टेक्निकल ट्रेनिंग या डिप्लोमा कोर्स की जरूरत होती है जैसे Optical Technology। ये आमतौर पर ऑप्टिकल शॉप्स, क्लीनिक या आईवियर कंपनियों में कार्य करते हैं।

करियर के अवसर और नौकरी के क्षेत्र 

ऑप्थाल्मोलॉजिस्ट बनने के बाद छात्रों के लिए करियर के कई बेहतरीन अवसर उपलब्ध होते हैं, जैसे सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटल व क्लीनिक में नौकरी करना, जहां उन्हें नियमित मरीजों की जांच और इलाज का कार्य मिलता है। इसके अलावा, योग्य डॉक्टर खुद का क्लिनिक खोलकर स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस भी कर सकते हैं, जिससे वे अपना व्यवसाय शुरू कर सकते हैं।

कई ऑप्थाल्मोलॉजिस्ट और ऑप्टोमेट्रिस्ट विभिन्न NGO और हेल्थकेयर प्रोजेक्ट्स से जुड़कर ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में नेत्र सेवाएं भी देते हैं। सरकारी स्वास्थ्य विभागों में भी समय-समय पर नेत्र विशेषज्ञों की भर्ती की जाती है, जहां स्थायी नौकरी के अवसर मिलते हैं। साथ ही, जिन छात्रों को शिक्षण और शोध कार्य में रुचि हो, वे मेडिकल कॉलेजों में टीचिंग और रिसर्च के क्षेत्र में भी उज्ज्वल करियर बना सकते हैं।

FAQs 

आंखों का डॉक्टर बनने के लिए कौन सा कोर्स करना पड़ता है?

आंखों का डॉक्टर बनने के लिए MBBS के बाद Ophthalmology में MS या MD कोर्स करना पड़ता है।

आंखों का कोर्स कितने साल का होता है?

आंखों का डॉक्टर बनने के लिए पहले 5.5 साल का MBBS करना होता है, जिसमें इंटर्नशिप भी शामिल है। इसके बाद Ophthalmology में 3 साल का MS या MD कोर्स करना होता है।

बिना नीट के आंख का डॉक्टर कैसे बने?

बिना NEET के आप MBBS आधारित ऑप्थाल्मोलॉजी डॉक्टर नहीं बन सकते; आप केवल ऑप्टोमेट्री जैसे NEET रहित कोर्स कर सकते हैं, जिससे आप दृष्टि विशेषज्ञ ऑप्टोमेट्रिस्ट बनते हैं, परन्तु यह मेडिकल डॉक्टर ऑप्टोमेट्रिस्ट नहीं है।

चश्मा बनाने के लिए कौन सा कोर्स करना पड़ता है?

चश्मा बनाने के लिए ऑप्टिशियन से जुड़ा डिप्लोमा या सर्टिफिकेट कोर्स करना पड़ता है।

आशा है कि आपको इस लेख में आंखों का डॉक्टर कैसे बनें की सभी आवश्यक जानकारी मिल गई होगी। ऐसे ही अन्य करियर से संबंधित लेख पढ़ने के लिए Leverage Edu के साथ बने रहें। 


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