जानिए साइना नेहवाल की सफलता के पीछे का संघर्ष

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साइना नेहवाल

बैडमिंटन क्वीन Saina Nehwal ने हर बार की तरह एक बार फिर भारत का गौरव बढ़ाया है। बैडमिंटन की मशहूर साइना नेहवाल उन परिवारों के लिए एक उदाहरण है जो आज के समय में भी बेटे को बहुत मानते हुए बेटे की चाहत रखते हैं। विश्व के नंबर एक बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल ने साबित कर दिया कि अगर लक्ष्य के प्रति मेहनत की जाए तो चाहे कितनी ही कठिन हो सफलता मिली जाती है।बैडमिंटन में ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय, साइना नेहवाल की एक छोटे शहर की लड़की से विश्व चैंपियन बनने की प्रेरणादायक यात्रा वास्तव में आश्चर्यजनक है! लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने से लेकर BWF वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप के पहले भारतीय विजेता बनने तक, नेहवाल ने भारत में बैडमिंटन क्रांति का मार्ग प्रशस्त किया।हालाँकि, उसे अपनी यात्रा में कई तरह की बाधाओं का सामना करना पड़ा, जैसे कि वित्तीय परेशानियों से जूझना और प्रायोजकों की कमी जो शुरुआती असफलताएं थीं, जो कि अंतरराष्ट्रीय सफलता का एक आधार था जो उसे निहारना था। नेहवाल सभी आकांक्षी भारतीय शटल विशेषकर महिलाओं के लिए एक चमकदार रोशनी बनकर उभरे। इस ब्लॉग में, हम भारत की इक्का शटलर और बैडमिंटन चैंपियन साइना नेहवाल के जीवन और यात्रा (Saina Nehwal Biography in Hindi) पर गहन प्रकाश डालते हैं!  

Saina Nehwal की जीवनी

नाम साइना नेहवाल
उपनाम स्टैफी साइना
जन्म 17 मार्च 1990
जन्म स्थल हिसार हरियाणा भारत
राष्ट्रीयता भारतीय
धर्म हिंदू
राशि मीन
पिता जी डॉक्टर हरवीर सिंह नेहवाल
माताजी उषा नेहवाल
बहन अब्बू चंद्राशु नेहवाल
पति पारुपल्ली कश्यप
विवाह 14 दिसंबर 2018
निवास स्थान हिसार हरियाणा भारत
स्कूल दिल्ली पब्लिक स्कूल ,रानीपुर हरिद्वार
शिक्षा योग्यता 12वी
पैशा भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी
अंतरराष्ट्रीय एशियन सेटेलाइट बैडमिंटन टूर्नामेंट
कोच पुलेला गोपीचंद ,नानी प्रसाद राव ,सैयद मोहम्मद आरिफ
संपत्ति 22 करोड़
साइना नेहवाल
Source – Jantatv

साइना का ऑफिशियल ट्रेलर-

Source: T- series

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Saina Nehwal प्रारंभिक जीवन और बचपन

Source: Twitter

 साइना नेहवाल को मिली शोहरत और बुलंदी के पीछे उन्होंने बहुत ही बड़ी लंबी लड़ाई है ताकि अपना लक्ष्य पा सके और अपना सपना पूरा कर सके। जब साइना नेहवाल के जन्म हुआ उस  समय उनके घर का माहौल बदल गया था, उनके जन्म के समय  दादी ने उनका चेहरा एक महीने तक नहीं देखा था। उनकी दादी को पोते की चाहत थी लड़की होने पर उन्हें बहुत ही गुस्सा आया था। साइना नेहवाल 8 साल की थी तब से उन्हें बैडमिंटन से प्यार हो गया था। सानिया नेहवाल का जन्म 17 मार्च 1990 में हिसार गांव ,हरियाणा में एक हिंदू परिवार में हुआ था । साइना नेहवाल के पिताजी का नाम डॉक्टर हरवीर सिंह नेहवाल है। माताजी का नाम उषा नेहवाल है ।

इनके माता-पिता दोनों हरियाणा के राज्य सिरे बैडमिंटन चैंपियन रहे हैं, साइना नेहवाल की एक बहन है जिसका नाम अबू चंद्रांशु नेहवाल है। साइना के माता-पिता हरियाणा के मशहूर बैडमिंटन खिलाड़ी  थे।साइना नेहवाल की शुरुआत की पढ़ाई हिसार में हुई। उनके  पिताजी का तबादला हैदराबाद में हो गया  फिर वहां चले गए।तब साइना नेहवाल की उम्र 8 साल की थी ।जब वह हिसार में रहते थे, तब उनके कई दोस्त हैं लेकिन हैदराबाद में आकर वह बिल्कुल अकेली हो गई थी। जब भी उनके आसपास बैडमिंटन का मैच होता था तब उनके पिताजी साइना नेहवाल को साथ में लेकर जाते थे ‌।साइना नेहवाल को बैडमिंटन मैच देखना काफी ज्यादा पसंद था।

साइना नेहवाल शिक्षा

साइना नेहवाल ने अपनी स्कूल की पढ़ाई की शुरुआत हरियाणा के हिसार के एक स्कूल से की थी, लेकिन उनके पिता का हैदराबाद ट्रांसफर हो जाने की वजह से उनके पूरे परिवार को हैदराबाद शिफ्ट होना पड़ा था। इसके बाद साइना ने अपनी 10 वीं की पढ़ाई फॉर्म सेंट ऐनी कॉलेज मेहदीपत्तनम, हैदराबाद से पास की है। साइना एक पढ़ने वाली छात्रा भी थी इसके साथ ही वे खेल गतिविधियों में भी अपने स्कूल में काफी एक्टिव रहती थीं। उन्होंने स्कूल में पढ़ाई करने के दौरान कराटे भी सीखे थे, उन्हें इसमें ब्राउन बेल्ट भी मिला हुआ है।

साइना नेहवाल बेहद कम उम्र से ही बैडमिंटन खेलने में दिलचस्पी लेने लगी थीं, उनके पिता भी हमेशा से ही साइना को दुनिया के एक सर्वश्रेष्ठ बैडमिंटन प्लेयर बनाना चाहते थे, इसलिए उनके पिता साइना को स्कूल जाने से पहले रोजाना सुबह 4 बजे उठाकर उन्हें घंटों बैडमिंटन की प्रैक्टिस करवाने के लिए ले जाते थे। इसके बाद साइना के पिता ने उन्हें प्रोफेशनल बैडमिंटन खेलने की ट्रेनिंग देने का फैसला लिया और इसके बाद हैदराबाद के लाल बहादुर खेल स्टेडियम में साइना नेहवाल बैडमिंटन के कोच ”नानी प्रसाद से मिलीं” और फिर वे उन्हीं से बैडमिंटन खेलने की ट्रेनिंग लेने लगीं,साइन को नानी प्रसाद से बैडमिंटन खेल के कुछ अद्भुत क्रियाएं सीखने को मिली, जिन्हें वे आज तक अपनाती हैं।

Saina Nehwal की शादी

बैडमिंटन स्टार साइना नेहवाल की शादी पारुपल्ली कश्यप साल 2018 में हुई थी। साइना नेहवाल ने कश्यप के साथ अपने प्रेम संबंधों के बारे में खुलकर बात की थी। साइना और पुलेला की पहली मुलाकात 2005 में पुलेला गोपीचंद के की अकादमी में ट्रेनिंग के दौरान हुई थी। 28 वर्षीय साइना और 32 वर्षीय कश्यप अब उस लीग में शामिल हो जाएंगे, जिसमें दीपिका पल्लीकल-दिनेश कार्तिक, ईशांत शर्मा-प्रतिमा सिंह और रेस्टलर गीता फोगट-पवन कुमार और साक्षी मलिक-सत्यव्रत काडियान हैं। 20 टाइटल जीत चुकी साइना ने ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीत कर देश का गौरव बढ़ाया था। वहीं पारुपल्ली कश्यप ने भी बैडमिंटन में शानदार प्रदर्शन किया था और वह छठी रैंक पर भी रहे थे।

“मुझे बैडमिंटन खेलना जितना पसंद है उससे कहीं ज्यादा मुझे जीतना पसंद है। जीतना ही सबकुछ है।”

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8 साल की बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल

साइना के पिता ने लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में 8 साल की नन्हीं साइना को बैडमिंटन ट्रेनिंग शुरू करवा दी थी । कोच ने साइना को शॉट्स खेलने का मौका दिया भी था, उसको साइना के शार्ट पसंद आ गए थे । फिर कोच ने उनके पिता को कहा कि तुम्हारी बेटी में बहुत संभावना है कि वह बैडमिंटन खेल के आगे बढ़ सकती हैं। फिर बैडमिंटन में साइना नेहवाल की ट्रेनिंग शुरू हो गई, वह रोजाना सुबह 6:00 बजे स्टेडियम पहुंच जाती थी। स्टेडियम साइना नेहवाल के घर के करीब 20 किलोमीटर दूर था। उनकी माताजी रोज सुबह साइना को 4:00 बजे जगा देती थी ,शुरुआत के समय में साइना नेहवाल को सुबह 4:00 बजे उठना बहुत ही कठिन लगता था । फिर उनकी आदत हो गई थी ।रोजाना उनके पिताजी साइना नेहवाल को स्कूटर पर बिठाकर स्टेडियम ले जाया करते थे ,कई बार तो साइना स्कूटर पर बैठे-बैठे पिता के पीठ पर सिर रखकर सो जाया भी करती थी। वर्ष 2004 में साइना ने नेशनल जूनियर चैंपियनशिप जीती थी। हार जीत का सिलसिला चल पड़ा था, वर्ष 2005 में नेशनल सीनियर  चैंपियनशिप में आई थी। साइना नेहवाल के पिता जी उनका हौसला कभी टूटने नहीं दिया था। 2006 में साइना ने सीनियर चैंपियनशिप जीत ली थी, जब बैडमिंटन का मैच बाहर होता था उनके पिताजी हमेशा उनके साथ जाते थे। उनके पिताजी की मौजूदगी ही उनका आत्मविश्वास बढ़ा देती थी।

परिणीति चोपड़ा ने साइना के लिए बहुत किया वर्कआउट जानने के लिए देखिए वीडियो-

Source: KME Studio

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साइना ने अपनी स्कूली शिक्षा कैंपस स्कूल सीसीएस एचएयू, हिसा और सेंट एन्स कॉलेज फॉर वूमेन, हैदराबाद में पूरी की। प्रारंभ में, उसने कराटे को अपनाया और एक भूरी बेल्ट अर्जित करने के लिए चली गई।

Source: Sportskeeda

साइना की बैडमिंटन ट्रेनिंग स्ट्रगल

Saina Nehwal
Courtesy: The Statesman

साइना की बैडमिंटन ट्रेनिंग को खत्म करना एक बड़ा काम साबित हुआ। साइना के पिता एक सरकारी कर्मचारी थे जिनकी एक निश्चित मासिक आय थी। उसके प्रशिक्षण की लागत INR 25,000 – 30,000 प्रति माह और सही उपकरण और यात्रा शुल्क खरीदने का अतिरिक्त खर्च है। उसके माता-पिता को उसे एक राष्ट्रीय चैंपियन बनाने और सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए बहुत सारे प्रयासों में लगाने का संकल्प लिया गया। नेहवाल ने अक्सर याद दिलाया कि उसके पिता ने पैसे उधार लिए थे और साथ ही अपने प्रशिक्षण में अपनी भविष्य निधि राशि भी डाली थी।

उन्होंने अपने प्रशिक्षण की शुरुआत नानी प्रसाद के साथ कोच आरिफ़ से की जो अपने समय के प्रमुख प्रशिक्षकों में से एक थे। कहा जाता है कि प्रशिक्षण के लिए प्रसिद्ध खिलाड़ी पुलेला गोपीचंद की अकादमी में शामिल होने से पहले उन्हें पर्याप्त रूप से तैयार किया गया था। साइना नेहवाल द्वारा अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट जीतने और प्रायोजकों का ध्यान आकर्षित करने के बाद हालात बेहतर होने लगे। 

Saina Nehwal का बुरा दौर

साइना के लिए साल 2013 सबसे बुरा साल रहा। जिसकी वजह से वे एक भी टाइटल नहीं जीत सकी और मैं विश्व रैंकिंग में नंबर 9 तक भी पहुँच गयी थी। इसी के साथ उनको लगता था कि शायद अब वे कभी बेहतर नहीं खेल पाएंगी और उनका करियर वहीं खत्म हो जाएगा लेकिन ऐसा नहीं था मैंने अपने खेल में और ज्यादा मेहनत की और इसका इम्प्रूवमेंट उनको दिखा और वे फिर से गेम में अपनी वापसी की।

“बैडमिंटन ओलंपिक में मेरी जीत के बाद बड़े पैमाने पर गति प्राप्त करेगा। अधिक खिलाड़ी खेल में भाग लेंगे। ”

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परिणीति का यह लुक देखकर साइना नेहवाल बोलीं-

Saina Nehwal

साइना नेहवाल की प्रमुख उपलब्धियां

साइना नेहवाल ने दो मौकों पर एशियन सैटेलाइट बैडमिंटन टूर्नामेंट जीतने के बाद अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन सर्किट में एक घरेलू नाम बन गया। 2006 में, नेहवाल ने फिलीपींस ओपन, 2009 में अंतिम शीर्ष जीत हासिल की। ​​साइना सिर्फ 16 साल की थीं जब उन्होंने जीत हासिल की और चार-सितारा टूर्नामेंट जीतने वाली सबसे कम उम्र की एशियाई बन गईं। उन्होंने 2009 में चीन के वांग लिन के खिलाफ अपनी जीत को गिना और बीडब्ल्यूएफ सुपर सीरीज़ की पहली भारतीय विजेता बनकर एक और स्मैशिंग रिकॉर्ड बनाया। साइना कई फर्स्ट की क्वीन हैं और लगभग 24 इंटरनेशनल चैंपियनशिप जीत चुकी हैं। आइए नजर डालते हैं उनके 23 साल के करियर में कुछ महत्वपूर्ण मील के पत्थर पर।

राष्ट्रमंडल खेल, 2010

2010 में, साइना कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। उसने मलेशिया के मेव चू वोंग के साथ खेला और अपने स्वर्ण पदक को जीता। साइना नेहवाल की जीत विशेष रूप से महत्वपूर्ण थी क्योंकि उन्होंने भारत का 38 वां स्वर्ण जीतने में मदद की और इंग्लैंड को टैली में दूसरे स्थान पर धकेल दिया।

ओलंपिक 2012

दुनिया भर में जीत # 2 चीनी जिन वांग, नेहवाल बैडमिंटन में पहले भारतीय ओलंपिक पदक विजेता के रूप में उभरा। स्विट्जरलैंड की सबरीना जाकेट, क्वार्टर फाइनल में चीन में जन्मी डच सनसनी याओ जी, सेमी साइना में चीन की वांग यिहान ने बैडमिंटन के इतिहास में जगह बनाई है।

चाइना ओपन, 2014

2014 साइना के लिए कई सफलताओं का वर्ष था, उनमें से एक 2014 में चीन ओपन टूर्नामेंट में जीत थी, जिसमें उसने जापान की अकाने यामागुची को हराकर स्वर्ण पदक जीता था।

इंग्लैंड ओपन वर्ल्ड चैम्पियनशिप, 2015

इंग्लैंड ओपन में, नेहवाल ने कैरोलिना मारिन के साथ फाइनल में पहुंचने का रास्ता बनाया। भले ही उसने 1 मैच जीता, लेकिन कैरोलिना ने दूसरा और निर्णायक मैच जीतकर नेहवाल को रजत दिलाया।साइना नेहवाल विश्व चैंपियनशिप का खिताब जीतने की कगार पर थीं, लेकिन स्पेन की कैरोलिना मारिन ने अपनी सुमेरू उन्नीस से हार गईं। फिर भी, उसने रजत जीता, विश्व चैम्पियनशिप टूर्नामेंट में रजत जीतने वाली पहली भारतीय बन गई।

“ओलंपिक पोडियम पर खड़े होने से बड़ा कुछ भी नहीं..यह अभी भी एक सपने जैसा लगता है, अविश्वसनीय है।” 

परिणीति ने सानिया नेहवाल के घर पर सबके साथ किया टाइम स्पेंड-

Source: Hyderabad Times

भारतीय शटलर साइना नेहवाल के 10 बेहतरीन स्मैशेज

साल  प्रतियोगिता प्रतिद्वंदी
2007 राष्ट्रमंडल युवा चैंपियनशिप N.Sikki Reddy(इंडिया )
2008 विश्व जूनियर बैडमिंटन चैंपियनशिप खिताब Sayaka Sato(जापान )
2009 इंडोनेशिया ओपन Wang Li(चाइना )
2010 दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स। Mew Choo Wong(मलेशिया)
2010 हांगकांग ओपन Wang Shixian(चाइना)
2014 ऑस्ट्रेलियाई सुपर सीरीज Carolina Marin(स्पेन)
2014 चाइना ओपन Akane Yamaguchi(जापान )
2015 सैयद मोदी इंटरनेशनल Carolina Marin(स्पेन)
2016 ऑस्ट्रेलियन ओपन Sun Yun(चाइना)
2017 मलेशिया मास्टर्स Pornpawee Chochuwong(थाईलैंड )
Source: Olympics

Saina Nehwal सम्मान और पुरस्कार

Saina Nehwal
Source: StarsUnfolded

यहाँ शीर्ष प्रशंसा और पुरस्कार हैं जो साइना नेहवाल के साथ सम्मानित किए गए हैं:

  • बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन, 2008 द्वारा मोस्ट प्रॉमिसिंग प्लेयर ऑफ़ द ईयर अवार्ड
  • अर्जुन पुरस्कार, 2009
  • पद्म श्री, 2010
  • राजीव गांधी खेल रत्न, 2019
  • पद्म भूषण, 2016

साइना नेहवाल के मन पसंदीदा चीजें

  • माधुरी दीक्षित -अभिनेत्री
  • शाहरुख खान -अभिनेता
  • आलू पराठा कीवी -भोजन
  • श्रेया घोषाल -गायक
  • सचिन तेंदुलकर- क्रिकेटर
  • नरेंद्र मोदी- नेता

विज्ञापन, टीवी उपस्थिति और नई बायोपिक ‘साइना’

साइना नेहवाल का पहला समर्थन 2002 में योनेक्स नाम के एक स्पोर्ट्स ब्रांड के लिए था, जब उन्होंने उसकी किट को प्रायोजित करने का फैसला किया।तब से, उन्हें भारत पेट्रोलियम, ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट, कम्यून बिल्डर, फॉर्च्यून कुकिंग ऑयल, एडलवाइस ग्रुप, गोदरेज नो मार्क्स, हुआवेई स्मार्टफोन, इंडियन ओवरसीज बैंक, आयोडेक्स, सहारा ग्रुप, स्टार स्पोर्ट्स टॉप जैसे विभिन्न सम्मानित संगठनों द्वारा प्रायोजित किया गया है।

Saina Nehwal
Source: The Indian Express

उन्हें सत्यमेव जयते, कॉमेडी नाइट्स विद कपिल और द कपिल शर्मा शो जैसे लोकप्रिय टेलीविजन शो में भी आमंत्रित किया गया था। 2012 में, उन्होंने प्लेइंग टू विन: माय लाइफ ऑन और ऑफ कोर्ट शीर्षक से अपनी आत्मकथा जारी की। परिणीति चोपड़ा अभिनीत साइना नामक उनकी बायोपिक 26 मार्च 2021 को रिलीज़ हो गई है।

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साइना नेहवाल पर निबंध

राष्ट्रमण्डल खेल वर्ष 2010 के अन्तिम दिन 14 अक्टूबर को भारत 37 स्वर्ण पदकों के साथ तीसरे स्थान पर था, किन्तु जिस महिला खिलाड़ी ने अन्तिम समय में देश के लिए 38वां स्वर्ण जीतकर भारत को इन खेलों के इतिहास में पहली बार पदक तालिका में दूसरा स्थान दिलाया, वह मशहूर बैडमिण्टन सितारा आज एक परिचित नाम बन चुका है । उस होनहार खिलाड़ी का नाम सायना नेहवाल है । सायना नेहवाल आज विश्वविख्यात बैडमिण्टन खिलाड़ियों में से एक है । वे ओलम्पिक खेलों में बैडमिण्टन प्रतिस्पर्द्धा के क्वार्टर फाइनल में पहुँचने वाली प्रथम भारतीय महिला एवं विश्व जूनियर बैडमिण्टन चैम्पियनशिप जीतने वाली प्रथम भारतीय खिलाड़ी हैं ।

जून, 2010 में मात्र 20 वर्ष की उम्र में बैडमिण्टन खिलाड़ियों की विश्व रैंकिंग में दूसरा स्थान प्राप्त कर सायना ने नट स्तर पर उल्लेखनीय ख्याति अर्जित की । उनकी इस उपलब्धि से प्रसन्न होकर तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभादेवी सिंह पाटिल, प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह और सोनिया गाँधी जैसे देश के शीर्षस्थ नेताओं ने उन्हें बधाई दी । सायना का जन्म 17 मार्च 1990 को हरियाणा के हिसार में हुआ था । सायना को बैडमिण्टन का खेल विरासत में मिला है । उनके पिता डॉ. हरवीर सिंह तथा माँ ऊषा रानी हरियाणा के बैडमिण्टन चैम्पियन रहे हैं । वर्तमान में डॉ. हरवीर सिंह हैदराबाद स्थित तिलहन अनुसन्धान निदेशालय में वैज्ञानिक हैं । हरवीर सिंह चाहते थे कि उनकी बेटी बड़ी होकर बैडमिण्टन का चमकता सितारा बने ।

पिता की इच्छाओं में ही सायना को अपना कैरियर भी नजर आया । लिहाजा, सायना ने दृढ़ निश्चय किया और वर्ष 1998 में हैदराबाद के लालबहादुर स्टेडियम से अपने बैडमिण्टन कैरियर की शुरूआत कर दी, जहाँ उन्हें बैडमिण्टन कोच नीनी प्रसाद से प्रोत्साहन मिला । सायना ने आठ वर्ष की उम्र से ही कठिन परिश्रम एवं सतत अभ्यास आरम्भ कर दिया था । उन्हें प्रतिदिन प्रशिक्षण के लिए 50 किमी की यात्रा करनी पड़ती थी । सायना ने द्रोणाचार्य पुरस्कार प्राप्त एसएम आरिफ से भी प्रशिक्षण प्राप्त किया है । बाद में विश्वविख्यात बैडमिण्टन खिलाड़ी पुलेला गोपीचन्द उनके कोच बने । सायना के अपने खेल करियर में ऊँचाई हासिल करने की शुरूआत तब हुई, जब उन्होंने वर्ष 2004 में राष्ट्रीय जूनियर चैम्पियनशिप का खिताब जीता ।

वर्ष 2005 में उन्होंने फिर यह प्रतियोगिता जीती । इसी वर्ष वे राष्ट्रीय सीनियर चैम्पियनशिप में रनर-अप भी रहीं ।  वर्ष 2006 तथा 2007 दोनों ही वर्षों में बे इसकी विजेता रहीं । इसके अतिरिक्त सायना की अन्य उपलब्धियों में वर्ष 2005 के अखिल भारतीय टूर्नामेण्ट तथा इसी वर्ष मुम्बई में आयोजित अखिल भारतीय सीनियर रैंकिंग टूर्नामेण्ट में विजय भी उल्लेखनीय हैं । वर्ष 2005 में गुवाहाटी (असोम) में आयोजित राष्ट्रीय खेलों में सायना ने शानदार जीत हासिल की । सायना के अन्तर्राष्ट्रीय करियर की शुरूआत वर्ष 2003 में इण्डियन सैटेलाइट टूर्नामेण्ट से हुई, जिसमें वे अन्तिम 16 खिलाड़ियों में से एक रहीं । वर्ष 2004 में वे सिंगापुर में आयोजित चीयर्स एशियन सैटेलाइट टूर्नामेण्ट के क्वार्टर फाइनल दौर में पहुँची ।

इसी वर्ष इण्डियन सैटेलाइट टूर्नामेण्ट जीतकर सायना ने अपना पहला अन्तर्राष्ट्रीय पदक जीता । उन्होंने वर्ष 2006 में बिंगो बोनांजा फिलीपीन्स ओपन टाइटल तथा इण्डिया सैटेलाइट टूर्नामेण्ट, 2006 जीतकर अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी सशक्त पहचान कायम की । वर्ष 2007 में ऑल इंग्लैण्ड ओपन प्री क्वार्टर फाइनल राउण्ड में पहुँची, किन्तु यहाँ उन्हें विश्व की तीसरी वरीयता प्राप्त चीनी खिलाड़ी से शिकस्त झेलनी पड़ी । उनकी अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अन्य उपलब्धियों में मकाउ ओपन टूर्नामेण्ट (2007) तथा डच ओपन टूर्नामेण्ट (2007) के क्वार्टर फाइनल राउण्ड में पहुँचना शामिल है ।

वर्ष 2008 सायना के अन्तर्राष्ट्रीय करियर का टर्निंग प्वाइंट था । इस वर्ष उन्होंने ग्रां प्री गोल्ड टूर्नामेण्ट जीतकर लाइनिंग चाइना मास्टर्स सुपर सीरीज टूर्नामेण्ट में सेमीफाइनल दौर में पहुँचने में सफलता प्राप्त की ।  इसी वर्ष उन्होंने ओलम्पिक खेलों में अभूतपूर्व सफलता हासिल करते हुए भारतीय बैडमिण्टन के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचा । वे विश्व की पाँचवीं वरीयता प्राप्त खिलाड़ी और टूर्नामेण्ट में चौथी वरीयता प्राप्त हाँगकाँग की बैग चेन को प्री क्वार्टर में हराकर ओलम्पिक के सेमीफाइनल में प्रवेश करने वाली प्रथम भारतीय बैडमिण्टन खिलाड़ी बनी ।  वर्ष 2009 में ही इण्डोनेशिया ओपन जीतकर वे बैडमिण्टन के सर्वाधिक प्रतिष्ठित खिताब सुपर सीरीज जीतने वाली न केवल प्रथम भारतीय महिला बनीं, बल्कि उन्होंने अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भी इस खेल में अपनी सशक्त पहचान बनाई ।

वर्ष 2010 में सायना ने उबेर कप फाइनल में अपने सभी मैच जीतकर महिला टीम का सफल नेतृत्व किया । वे ऑल इंग्लैण्ड सुपर श्रृंखला में पूर्व चैम्पियन टीना रासमुसेन को पराजित कर सेमीफाइनल में पहुँचने वाली प्रथम भारतीय महिला हैं । सायना ने योनेक्स सनराइज बैडमिण्टन एशिया चैम्पियन, 2010 के सेमीफाइनल में भी अपनी भागीदारी दर्ज कराई । उन्होंने इण्डिया ओपन ग्रां प्री गोल्ड प्रतिस्पर्द्धा, 2010 में मलेशिया के म्यू चू वांग को पराजित कर स्वर्णिम जीत हासिल की । वर्ष 2010 में उन्होंने चीनी खिलाड़ी त्सू यिंग ताई को हराकर सिंगापुर ओपन सीरीज खिताब जीता । सायना के करियर का सबसे शानदार पड़ाव 27 जून, 2010 को इण्डोनेशियन ओपन सुपर सीरीज में रहा, जिसमें उन्होंने सायका सातो को पराजित कर सीरीज अपने नाम की । सायना की उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें देश का सर्वोच्च खेल सम्मान ‘राजीव गाँधी खेल रत्न पुरस्कार’ (वर्ष 2009-10) प्रदान किया गया । उन्हें वर्ष 2009 में देश के चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान ‘पद्मश्री’ से भी नवाजा गया था ।

Saina Nehwal Social Media Profile

Interesting Facts About Saina Nehwal

  • साइना नेहवाल का जन्म हरियाणा में हुआ था और जब उनकी उम्र 5 वर्ष की थी उनका परिवार हरियाणा से हैदराबाद आ गया था।
  • साइना नेहवाल की दादी पोता चाहती थी इसलिए वह साइना नेहवाल के जन्म से खुश नहीं थी।
  • साइना नेहवाल के माता-पिता हरियाणा के लिए राज्य स्तरीय बैडमिंटन चैंपियन थे।
  • उन्होंने 8 वर्ष की उम्र में बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया था। 
  • वर्ष 2009 में उन्हें प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार, वर्ष 2010 में, राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार और वर्ष 2010 में, पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  • वर्ष 2012 में, उन्होंने लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीता।
  • साइना ने गोपीचंद बैडमिंटन अकादमी से बैडमिंटन की ट्रेनिंग ली है।
  • उनको कराटे में एक ब्राउन बेल्ट भी मिला है।

Saina Nehwal Biography PPT

Saina Nehwal Sketch

Saina Nehwal Biography in Hindi
Source : Pinterest

FAQs

Saina Nehwal कौन सा खेल खेलती है?

बैडमिंटन

साइना नेहवाल का जन्म कब हुआ?

17 मार्च 1990

साइना नेहवाल ने ओलंपिक पदक कब जीता था?

साल 2012 में लंदन ओलंपिक में साइना नेहवाल ने ओलंपिक पदक जीता।

विश्व बैडमिंटन में नंबर 1 रैंकिंग की वरीयता प्राप्त करने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी कौन है?

पहली भारतीय महिला खिलाड़ी साइना नेहवाल

बैडमिंटन खेलों में ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला कौन थी?

साइना नेहवाल

साइना नेहवाल के पति का नाम क्या है?

साइना नेहवाल के पति का नाम पी. कश्यप है।

भारत की ओर से प्रथम महिला खिलाड़ी ओलंपिक में सम्मिलित होने वाली कौन है?

कर्णम मल्लेश्वरी

कौन सा भारतीय बैडमिंटन में विश्व खिताब जीतने वाला पहला खिलाड़ी था?

पीवी सिंधु 

ओलंपिक खेलों में सबसे ज्यादा पदक जीतने वाली महिला का नाम क्या है?

लारिसा लैतिनीना

एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला कौन थी?

कमलजीत संधू

विश्व बैडमिंटन में दो कांस्य पदक जीतने वाला एकमात्र खिलाड़ी कौन है?

Saina Nehwal

भारत ने ओलंपिक में पहला स्वर्ण पदक कब जीता?

1928 में

बैडमिंटन में कितने खिलाडी होते है?

इसमें ग्यारह खिलाड़ी हो सकते है।

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