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उत्तर: ‘सेवकु सो जो करै सेवकाई’ का अर्थ है – सेवक वही होता है जो पूरे मन से सेवा करता है। परशुराम के पूछने पर कि धनुष किसने तोड़ा है, श्रीराम ने कहा कि धनुष तो आपका सेवक ही तोड़ सकता है। इस पर परशुराम ने क्रोधपूर्ण स्वर में जवाब दिया कि जो केवल सेवा करता है वही सेवक होता है, जो शत्रु जैसा व्यवहार करता है, वह सेवक नहीं, बल्कि लड़ाई करने वाला होता है। इस प्रकार परशुराम सेवा और शत्रुता में स्पष्ट अंतर बताते हैं।
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