उत्तर: मुसकान और क्रोध दोनों ही मनुष्य के भाव हैं, लेकिन इनका प्रभाव वातावरण पर बिल्कुल अलग होता है। जब किसी के चेहरे पर मुसकान होती है, तो आसपास का माहौल अपने-आप हल्का, सहज और सकारात्मक बन जाता है। लोग खुलकर बात करते हैं, आपसी दूरी कम होती है और मन में अपनापन पैदा होता है। मुसकान तनाव को कम करती है और वातावरण में शांति व प्रसन्नता भर देती है।
इसके विपरीत, क्रोध वातावरण को बोझिल और असहज बना देता है। क्रोधित व्यक्ति के आसपास डर, चुप्पी और तनाव महसूस होने लगता है। बातचीत रुक जाती है, रिश्तों में कड़वाहट आ जाती है और माहौल नकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है। क्रोध न केवल व्यक्ति को, बल्कि पूरे परिवेश को प्रभावित करता है।
इस प्रकार स्पष्ट है कि मुसकान जहाँ वातावरण को मधुर, शांत और सुखद बनाती है, वहीं क्रोध उसी वातावरण को तनावपूर्ण और असंतुलित कर देता है। यही दोनों भावों की उपस्थिति से बने वातावरण की सबसे बड़ी भिन्नता है।

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