‘कहेउ लखन मुनि सीलु तुम्हारा। को नहि जान बिदित संसारा।।’ इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।

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'कहेउ लखन मुनि सीलु तुम्हारा। को नहि जान बिदित संसारा।।' इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।
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उत्तर: इस कथन का आशय यह है कि लक्ष्मण परशुराम के स्वभाव पर व्यंग्य करते हुए कहते हैं कि हे मुनि! आपके स्वभाव को कौन नहीं जानता? आपका क्रोधी और कठोर स्वभाव सारे संसार में प्रसिद्ध है। इसी कारण आपने पिता की आज्ञा मानकर अपनी माता का वध कर दिया था। इस कृत्य से आप अपने माता-पिता के ऋण से उऋण हो गए। यह बात जगत के लिए जानी-पहचानी है।

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