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उत्तर: (C) गिरीश शब्द में दीर्घ संधि होती है।
गिरीश का संधि विच्छेद
गिरि + ईश = गिरीश
दीर्घ संधि की परिभाषा
जब दो सजातीय स्वर (ह्रस्व या दीर्घ) आपस में मिलते हैं, तो उनके मेल से उसी स्वर का दीर्घ रूप बनता है।
इस प्रकार बनने वाली संधि को दीर्घ संधि कहते हैं।
दीर्घ संधि का नियम
जब पहले शब्द के अंत में ह्रस्व या दीर्घ स्वर (अ, इ, उ, ऋ, आ, ई, ऊ) में से कोई स्वर आए और दूसरे शब्द के प्रारंभ में उसी वर्ग का समान स्वर आए, तो दोनों स्वर मिलकर उसी स्वर का दीर्घ रूप बना लेते हैं। इसी प्रकार बनने वाली संधि को दीर्घ संधि कहते हैं।
गिरीश शब्द में संधि कैसे हुई?
- गिरि → अंतिम स्वर इ
- ईश → प्रथम स्वर ई
- इ + ई = ई (दीर्घ)
इसी कारण गिरि + ईश मिलकर गिरीश शब्द बनता है।
दीर्घ संधि के अन्य उदाहरण
- हिम + आलय = हिमालय (अ + आ = आ)
- रवि + इंद्र = रवींद्र (इ + इ = ई)
- भानु + उदय = भानूदय (उ + उ = ऊ)
- महा + ऋषि = महर्षि (आ + ऋ = ऋ)
गिरीश का अर्थ
गिरीश = गिरि (पर्वत) + ईश (स्वामी)
अर्थात पर्वतों के स्वामी, यानी भगवान शिव।
संबंधित प्रश्न: स्वर संधि के कितने भेद होते हैं?

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