कोई भी अपनी आत्मकथा लिख सकता है। उसके लिए विशिष्ट या बड़ा होना जरूरी नहीं। हरियाणा राज्य के गुड़गाँव में घरेलू सहायिका के रूप में काम करने वाली बेबी हालदार की आत्मकथा “आलो आंधारि” बहुतों के द्वारा सराही गई। आत्मकथात्मक शैली में अपने बारे में कुछ लिखिए।

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आत्मकथात्मक शैली में अपने बारे में कुछ लिखिए
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मेरा नाम ______ है। मैं एक साधारण परिवार से हूँ, जहाँ मेहनत, ईमानदारी और अनुशासन को जीवन का आधार माना जाता है। मेरे माता-पिता ने मुझे बचपन से ही सही और गलत में अंतर समझाया तथा दूसरों के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता रखना सिखाया है।

मेरी प्रारंभिक शिक्षा मेरे गाँव/शहर के एक सामान्य विद्यालय से हुई। वर्तमान में मैं कक्षा दसवीं का विद्यार्थी/विद्यार्थिनी हूँ। मुझे पढ़ाई के साथ-साथ नई बातें सीखना और अपने अनुभवों से आगे बढ़ना अच्छा लगता है। शिक्षा ने मुझे आत्मविश्वास दिया है और यह समझाया है कि निरंतर प्रयास से हर लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।

मेरे जीवन की एक महत्वपूर्ण घटना वह रही जब मुझे किसी कठिन परिस्थिति का सामना करना पड़ा। उस समय मैंने हार मानने के बजाय धैर्य और मेहनत का रास्ता चुना। इस अनुभव ने मुझे मानसिक रूप से मजबूत बनाया और जीवन को सकारात्मक दृष्टि से देखने की प्रेरणा दी।

अब तक मैंने अपनी पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन करने का प्रयास किया है और विद्यालय की विभिन्न गतिविधियों में भी सक्रिय रूप से भाग लिया है। ये उपलब्धियाँ भले ही छोटी हों, लेकिन इन्होंने मुझे आगे बढ़ने का आत्मविश्वास दिया है।

मेरे जीवन का आदर्श सादा जीवन और सच्चे विचार हैं। मेरा उद्देश्य एक अच्छा इंसान बनना है, जो अपने व्यवहार, ज्ञान और कार्यों के माध्यम से समाज के लिए कुछ सकारात्मक कर सके। यही सोच मुझे निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

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