सिंधु घाटी सभ्यता के गौरवशाली इतिहास से जुड़े रोचक और महत्वपूर्ण तथ्य

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सिंधु घाटी सभ्यता

सिंधु घाटी सभ्यता को विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यता माना जाता है। इस सभ्यता का क्षेत्र अत्यन्त व्यापक था। इसके अवशेष भारत के पंजाब, राजस्थान और हरियाणा राज्यों के अलावा पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के कुछ इलाकों तक मिलते हैं। वास्तव में यह सभ्यता भारत के गौरवशाली इतिहास का एक हिस्सा है। यहाँ इस सभ्यता के गौरवशाली इतिहास के बारे में कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में बताया जा रहा है।  

सिंधु घाटी सभ्यता के चरण

सिंधु घाटी सभ्यता को तीन चरणों में बांटा गया है:

  • प्रारंभिक हड़प्पा चरण (3300 से 2600 ईसा पूर्व तक)
  • परिपक्व हड़प्पा चरण (2600 से 1900 ईसा पूर्व तक)
  • अंतिम हड़प्पा चरण (1900 से 1300 ईसा पूर्व तक)
सिंधु घाटी सभ्यता

सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़े प्रमुख नगर 

सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़े प्रमुख नगर इस प्रकार हैं :

  • हड़प्पा (पंजाब पाकिस्तान)
  • मोहनजोदड़ो (सिन्ध पाकिस्तान लरकाना जिला)
  • लोथल (गुजरात)
  • कालीबंगा( राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में)
  • बनवाली (हरियाणा के फतेहाबाद जनपद में)
  • आलमगीरपुर( उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में)
  • सूत कांगे डोर( पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रान्त में)
  • कोट दीजी( सिन्ध पाकिस्तान)
  • चन्हूदड़ो ( पाकिस्तान )
  • सुरकोटदा (गुजरात के कच्छ जिले में)

सिंधु घाटी सभ्यता की नगर निर्माण योजना 

सिंधु घाटी सभ्यता की नगर निर्माण योजना इस प्रकार है : 

  • सिंधु घाटी सभ्यता के दो प्रमुख नगरों हड़प्पा और मोहनजोदाड़ो में ईंटों के पक्के भवन बने होने के प्रमाण मिलते हैं।  
  • सिंधु घाटी सभ्यता की जल निकास प्रणाली अब तक की सबसे बेहतरीन जल निकास प्रणाली मानी जाती है।  
  • हर घर के प्रांगण में एक स्नानगृह होता था।  
  • हर घर के आँगन में एक कुआँ होता था।  
  • सिंधु घाटी सभ्यता के लोग अपने शौचालयों में आधुनिक फ़्लश सिस्टम से मिलती जुलती प्रणाली प्रयोग करते थे।  
  • इस सभ्यता के नगरों में चौड़ी, पक्की और साफ़ सुथरी सड़कें हुआ करती थीं।  

सिंधु घाटी सभ्यता का आर्थिक जीवन 

सिंधु घाटी सभ्यता के लोगों बहुत ही धनी और समृद्ध हुआ करते थे : 

  • सिंधु घाटी सभ्यता के लोगों की आर्थिक आय का प्रमुख साधन कृषि और पशुपालन हुआ करता था।  
  • इस सभ्यता के लोग मुख्य व्यवसाय के रूप में मिट्टी के बर्तनों का व्यापार करते थे।  
  • यहाँ के लोग आपस में पत्थर, धातु शल्क (हड्डी) आदि का व्यापार करते थे। 
  • एक बड़े भूभाग में ढेर सारी सील (मृन्मुद्रा), एकरूप लिपि और मानकीकृत माप तौल के प्रमाण मिले हैं। 
  • वे चक्के से परिचित थे और सम्भवतः आजकल के इक्के (रथ) जैसा कोई वाहन प्रयोग करते थे।
  • ये अफ़ग़ानिस्तान और ईरान (फ़ारस) से व्यापार करते थे। उन्होंने उत्तरी अफ़गानिस्तान में एक वाणिज्यिक उपनिवेश स्थापित किया जिससे उन्हें व्यापार में सहूलियत होती थी। बहुत सी हड़प्पाई सील मेसोपोटामिया में मिली हैं।  

सिंधु घाटी सभ्यता के लोगों का धार्मिक जीवन 

सिंधु घाटी सभ्यता के लोगों के जीवन से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं इस प्रकार हैं : 

  • हड़प्पा में पकी मिट्टी की स्त्री मूर्तिकाएँ भारी संख्या में मिली हैं। एक मूर्ति में स्त्री के गर्भ से निकलता एक पौधा दिखाया गया है। विद्वानों के मत में यह पृथ्वी देवी की प्रतिमा है और इसका निकट सम्बन्ध पौधों के जन्म और वृद्धि से रहा होगा। 
  • सिन्धु घाटी सभ्यता के नगरों में एक सील पाया जाता है जिसमें एक योगी का चित्र है 3 या 4 मुख वाला, कई विद्वान मानते है कि यह योगी शिव है। मेवाड़ जो कभी सिन्धु घाटी सभ्यता की सीमा में था वहाँ आज भी 4 मुख वाले शिव के अवतार एकलिंगनाथ जी की पूजा होती है। 
  • लोथल, कालीबंगा आदि जगहों पर हवन कुण्ड मिले है जो की उनके वैदिक होने का प्रमाण है। यहाँ स्वास्तिक के चित्र भी मिले है।
  • कुछ विद्वान मानते है कि हिन्दू धर्म द्रविडो का मूल धर्म था और शिव द्रविडो के देवता थे जिन्हें आर्यों ने अपना लिया। 

सिंधु घाटी सभ्यता की शिल्पकला 

सिंधु घाटी सभ्यता की खुदाई में कांस्य की वस्तुएं होने के अवशेष मिले हैं। साथ ही इस सभ्यता से जुड़े लोग कांस्य की वस्तुएँ निर्मित करने की विधि, उसके उपयोग से भली भाँति परिचित थे। तांबा राजस्थान की खेतड़ी खान से प्राप्त किया जाता था और टिन अनुमानतः अफगानिस्तान से लाया जाता था। बुनाई उद्योग में प्रयोग किये जाने वाले ठप्पे बहुत सी वस्तुओं पर पाए गए हैं। बड़ी -बड़ी ईंट निर्मित संरचनाओं से राजगीरी जैसे महत्त्वपूर्ण शिल्प के साथ साथ राजमिस्त्री वर्ग के अस्तित्व का पता चलता है। हड़प्पाई नाव बनाने की विधि, मनका बनाने की विधि, मुहरें बनाने की विधि से भली- भाँति परिचित थे। टेराकोटा की मूर्तियों का निर्माण हड़प्पा सभ्यता की महत्त्वपूर्ण शिल्प विशेषता थी। जौहरी वर्ग सोने ,चांदी और कीमती पत्थरों से आभूषणों का निर्माण करते थे । मिट्टी के बर्तन बनाने की विधि पूर्णतः प्रचलन में थी,हड़प्पा वासियों की स्वयं की विशेष बर्तन बनाने की विधियाँ थीं, हड़प्पाई लोग चमकदार बर्तनों का निर्माण करते थे ।

सिंधु घाटी सभ्यता से मिले अवशेष

सिंधु घाटी सभ्यता से बहुत कम मात्रा में लिखित साक्ष्य मिले हैं, जिन्हें अभी तक पुरातत्त्वविदों तथा शोधार्थियों द्वारा पढ़ा नहीं जा सका है। एक परिणाम के अनुसार, सिंधु घाटी सभ्यता में राज्य और संस्थाओं की प्रकृति समझना काफी कठिनाई का कार्य है। हड़प्पाई स्थलों पर किसी मंदिर के प्रमाण नहीं मिले हैं। अतः हड़प्पा सभ्यता में पुजारियों के प्रुभुत्व या विद्यमानता को नकारा जा सकता है। हड़प्पा सभ्यता अनुमानतः व्यापारी वर्ग द्वारा शासित थी। अगर हम हड़प्पा सभ्यता में शक्तियों के केंद्रण की बात करें तो पुरातत्त्वीय अभिलेखों द्वारा कोई ठोस जानकारी नहीं मिलती है। कुछ पुरातत्त्वविदों की राय में हड़प्पा सभ्यता में कोई शासक वर्ग नहीं था तथा समाज के हर व्यक्ति को समान दर्जा प्राप्त था। कुछ पुरातत्त्वविदों की राय में हड़प्पा सभ्यता में कई शासक वर्ग मौजूद थे, जो विभिन्न हड़प्पाई शहरों में शासन करते थे ।

सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़ी महत्वपूर्ण खोज 

हम किताबों में पढ़ते है कि सिंधु घाटी सभ्यता सबसे प्राचीन और सबसे बड़ी सभ्यता है। जिसकी जानकारी खुदाई में प्राप्त अवशेषों से होती है। यहाँ हम आपको सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़ी महत्वपूर्ण खोज के बारे में बताएंगे। 

महत्वपूर्ण स्थान खोजकर्त्ता वर्तमान स्थिति  महत्त्वपूर्ण खोज
हड़प्पा दयाराम साहनी (1921) पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में मोंटगोमरी जिले में रावी नदी के तट पर स्थित है। मनुष्य के शरीर की बलुआ पत्थर की बनी मूर्तियाँअन्नागारबैलगाड़ी
मोहनजोदड़ो(मृतकों का टीला) राखलदास बनर्जी (1922) पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के लरकाना जिले में सिंधु नदी के तट पर स्थित है। विशाल स्नानागर, अन्नागार कांस्य की नर्तकी की मूर्ति, पशुपति महादेव की मुहर, दाड़ी वाले मनुष्य की पत्थर की मूर्ति, बुने हुए कपडे
सुत्कान्गेडोर स्टीन (1929) पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिमी राज्य बलूचिस्तान में दाश्त नदी के किनारे पर स्थित है। हड़प्पा और बेबीलोन के बीच व्यापार का केंद्र बिंदु था।
चन्हुदड़ो एन .जी. मजूमदार (1931) सिंधु नदी के तट पर सिंध प्रांत में। मनके बनाने की दुकानें, बिल्ली का पीछा करते हुए कुत्ते के पदचिन्ह
आमरी एन .जी . मजूमदार (1935) सिंधु नदी के तट पर। हिरन के साक्ष्य
कालीबंगा  घोष (1953) राजस्थान में घग्गर नदी के किनारे। अग्नि वेदिकाएँऊंट की हड्डियाँलकड़ी का हल
लोथल आर. राव (1953) गुजरात में कैम्बे की कड़ी के नजदीक भोगवा नदी के किनारे पर स्थित। मानव निर्मित बंदरगाह, गोदीवाडा, चावल की भूसी, अग्नि वेदिकाएं, शतरंज का खेल
सुरकोतदा जे.पी. जोशी (1964) गुजरात। घोड़े की हड्डियाँ, मनके
बनावली आर.एस. विष्ट (1974) हरियाणा के हिसार जिले में स्थित। मनके, जौ, हड़प्पा पूर्व और हड़प्पा संस्कृतियों के साक्ष्य
धौलावीरा आर.एस.विष्ट (1985) गुजरात में कच्छ के रण में स्थित। जल निकासी प्रबंधन, जल कुंड

सिंधु घाटी सभ्यता का पतन

सिंधु घाटी सभ्यता का लगभग 1800 ई.पू. में पतन हो गया था, परंतु उसके पतन के कारण के बारे में अभी भी कुछ स्पष्ट नहीं कहा जा सकता है। इतिहासकारों का कहना है कि इंडो- यूरोपियन जनजातियों जैसे- आर्यों ने सिंधु घाटी सभ्यता पर आक्रमण कर दिया तथा उसे हरा दिया। लेकिन प्रमाणों से पता चलता है कि यह सभ्यता एक दम से विलुप्त नहीं हुई है। इसके बाद की संस्कृतियों में ऐसे कई तत्त्व पाए गए जिनसे भी यह सिद्ध होता है। 

हालांकि इसके पतन के कुछ प्राकृतिक कारण भी बताएं जा रहे हैं। एक प्राकृतिक कारण वर्षण प्रतिमान का बदलाव भी हो सकता है। एक अन्य कारण यह भी हो सकता है कि नदियों द्वारा अपना मार्ग बदलने के कारण खाद्य उत्पादन क्षेत्रों में बाढ़ आ गई हो। इन प्राकृतिक आपदाओं को सिंधु घाटी सभ्यता के पतन का मंद गति से हुआ, परंतु निश्चित कारण माना गया है।

FAQs 

सिंधु घाटी का जनक कौन है?

सन् 1921 ई. में सर जॉन मार्शल के नेतृत्व में रायबहादुर दयाराम साहनी ने हड़प्पा का उत्खनन किया और सिन्धु घाटी सभ्यता की खोज की।

सिंधु घाटी सभ्यता की प्रमुख विशेषता क्या है?

सिंधु घाटी सभ्यता की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता ईंटों से बनी इमारतें थी। इसे हड़प्पा सभ्यता के रूप में भी जाना जाता है। यह कहा जाता है कि कृषि व्यवस्था 4000 ईसा पूर्व के आसपास शुरू हुईं और लगभग 3000 ईसा पूर्व वहाँ शहरीकरण के पहले लक्षण दिखाई दिए।

हड़प्पा और मोहनजोदड़ो कहाँ स्थित है?

हड़प्पा और मोहनजोदड़ो वर्तमान पाकिस्तान में तथा लोथल जो कि वर्तमान में भारत के गुजरात राज्य में स्थित है।

आशा है कि सिंधु घाटी सभ्यता का यह ब्लॉग आपको अच्छा लगा होगा। इस ब्लॉग का लिखा हुआ एक-एक शब्द आपको जानकारी से भरपूर और अच्छा लगा होगा। इतिहास से जुड़े हुए ऐसे ही अन्य ब्लॉग पढ़ने के लिए हमारी वेबसाइट Leverage Edu के साथ बने रहें।

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