Sandhi Viched [संधि विच्छेद]

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Sandhi Viched

सम+ धि – दो ऐसे शब्द हैं जो संधि बनाते हैं। संधि का मतलब मिलना, हिंदी भाषा में संधि को पूरे शब्दों के साथ नहीं लिखा जाता है। लेकिन संस्कृत में संधि के बिना कोई काम भी नहीं होता है। इसका मुख्य कारण है कि संस्कृत व्याकरण की एक पुरानी परंपरा है। जिसके लिए व्याकरण को पढ़ना जरूरी है। शब्द रचना के समय संधियां काम आती है। आप इस ब्लॉग में sandhi viched, sandhi in Hindi Grammar के बारे में विस्तार से जानेंगे।

उदाहरण:
हिमालय-हिम+आलय
सदानंद- सत्+आनंद

Sandhi Viched: Sandhi ke Prakar [संधि के प्रकार]

Sandhi Viched me संधि के तीन प्रकार होते हैं

  • स्वर संधि
  • व्यंजन संधि
  • विसर्ग संधि

संधि पहचानने की ट्रिक

नियमः अ और अ, अ और आ, आ और अ तथा आ और आ को मिलाने पर दीर्घ स्वर आ ही शेष बचेगा

उदाहरणः वेद+अक्षर अर्थात वेदाक्षर शोक+आतुर अर्थात शोकातुर सेवा+अर्थ अर्थात सेवार्थ विद्या+आलय अर्थात विद्यालय

Sandhi Viched: Swar Sandhi [स्वर संधि]

जब स्वर के साथ स्वर का मेल होता है तब जो परिवर्तन होता है वह स्वर संधि कहलाता है। हिंदी  संख्या में 11 स्वर होती है, बाकी के अक्षर व्यंजन के होते हैं। जब दो स्वर मिलते हैं जब उसमें से जो तीसरा स्वर बनता है वह स्वर संधि कहलाता है।

उदाहरण: विद्या+आलय -विद्यालय

Sandhi Viched me स्वर संधि के पांच प्रकार होते हैं

  • दीर्घ संधि
  • गुण संधि
  • वृद्धि संधि
  • गुण संधि
  • अयादि संधि

Dirgha Sandhi [दीर्घ संधि]

  • जब अ,आ के साथ अ,आ हो तो “आ”बनता है
  • जब इ,ई के साथ इ,ई हो तो “ई” बनता है
  • जब उ,ऊ के साथ उ,ऊ हो तो “ऊ”बनता है

अर्थात: सूत्र अक: स्वर्ण – दीर्घ मतलब अक प्रत्याहार के बाद अगर स्वर्ण हो तो दो मिलाकर दीर्घ बनता है। जब दो सुजातीय स्वर आसपास आते हैं तब जो स्वर बनता है वह सुजातीय दीर्घ स्वर कहलाता है यानी कि स्वर संधि की दीर्घ संधि कहलाता है, इसे हसव संधि भी कह सकते हैं।

उदाहरण

  • पुस्तक +आलय- पुस्तकालय
  • विद्या+अर्थी-विद्यार्थी
  • भानु+उदय-भानूदय

Guna Sandhi [गुण संधि]

  • जब अ,आ के साथ इ,ई हो तो “ए” बनता है
  • जब अ,आ के साथ उ,ऊ हो तो “ओ” बनता है
  • जब अ,आ के साथ ऋ हो तो” अर” बनता है

ऊपर दिए गए सभी गुण संधि कहलाते हैं।

उदाहरण

  • नर+इंद्र-नरेंद्र
  • ज्ञान+उपदेश-ज्ञानोपदेश
  • देव+ऋषि-देवर्षि

Vriddhi Sandhi [वृद्धि संधि]

  • जब अ,आ के साथ ए,ऐ हो तो “ऐ” बनता है
  • जब अ,आ के साथ ओ,औ हो तो ” औ” बनता है

ऊपर दिए गए सभी वृद्धि संधि कहलाते हैं।

उदाहरण:

  • मत+एकता-मतैकता
  • सदा+एव- सदैव
  • महा+ओज – महौज

Yan Sandhi [यण संधि]

  • जब इ,ई के साथ कोई अन्य स्वर हो तो ” य” बन जाता है
  • जब उ,ऊ के साथ कोई अन्य स्वर हो तो” व॒” बन जाता है
  • जब ऋ के साथ कोई अन्य स्वर हो तो” र ” बन जाता है

ऊपर दिए गए सभी यण संधि कहलाते हैं। संधि के तीन प्रकार के संधि युक्त पद होते हैं।

  • य से पूर्व आधा व्यंजन होना चाहिए
  • व से पूर्व आधा व्यंजन होना चाहिए
  • त्र शब्द होना चाहिए

उदाहरण:

  • इती+ आदि- इत्यादि
  • अनु+अय- अनवय
  • सु+ आगत- स्वागत

Ayadi Sandhi [अयादि संधि]

  • जब ए,ऐ,ओ,औ के साथ कोई अन्य स्वर हो तो ” ए- अय “, ” ऐ- आय”, “ओ- अव ” , “औ- आव”  मैं हो जाता है
  • य,वह से पहले व्यंजन पर अ,आ की मात्रा हो तो वह अयादि संधि हो सकती है परंतु अगर कोई विच्छेद ना निकलता हो तो के + बाद आने वाले भाग को वैसा ही लिखना होगा अयादि संधि कहलाता है।

उदाहरण

  • ने+अन- नयन
  • नौ+ इक- नाविक
  • भो+अन- भवन

Vyanjan Sandhi [व्यंजन संधि]

जब व्यंजन को भंजन या स्वर के साथ मिलाने से जो परिवर्तन होता है वह व्यंजन संधि कहलाता है।

उदाहरण

  • दिक+अंबर-दिगंबर
  • अभी+सेक- अभिषेक

Sandhi Viched (संधि विच्छेद) : Vyanjan Sandhi ke 13 Niyam Hote Hain [व्यंजन संधि के 13 नियम होते हैं]

1. जब किसी वर्ग के पहले वर्ण क,च,ट,तो,पर का मिलन किसी वर्ग के तीसरे या चौथे से य ,र, ल ,व ,ह से हो या किसी स्वर के साथ हो जाए तो क को ग, च को ज, ट को ड , त को द , प को ब  में बदल दिया जाता है।

उदाहरण

क के ग मैं बदलने

  • दिक + अंबर- दिगंबर
  • वाक+ ईश- वागीश

च के ज मैं बदलने

  • षट+ आनन – षडानन
  • षट+ यंत्र- षड्यंत्र
  • षट+अंग- षडंग

त के द मैं बदलने

  • तत+ उपरांत-तदुपरांत
  • उत+ घाटन- उद्घाटन
  • जगत+ अंबा- जगदंबा

प के ब मैं बदलने

  • अप+ द- अब्द
  • अप+ ज – अब्ज

2. यदि किसी वर्ग के पहले वर्ण का मिलन न या म वर्ण के साथ हो तो वह नीचे गए उदाहरण में बदल जाता है।

उदहारण 

क् के ङ् में बदलने 

  •  वाक् + मय = वाङ्मय
  • दिङ्मण्डल = दिक् + मण्डल

ट् के  ण् में बदलने

  •   षट् + मास = षण्मास
  •     षट् + मूर्ति = षण्मूर्ति

त् के  न् में बदलने 

  •    उत् + नति = उन्नति
  •    जगत् + नाथ = जगन्नाथ

प् के म् में बदलने 

  •    अप् + मय = अम्मय

3. जब त का मिलन ग,घ, द ,ध, प, म, य ,र , या किसी स्वर से हो तो द बन जाता है।और अगर म के साथ क से म तक कि किसी भी  वर्ण के मिलन पर म  की जगह पर मिलन वाले वर्ण बन  जाता है।

उदहारण

म् + क ख ग घ ङ  :-

  • सम् + कल्प = संकल्प/सटड्ढन्ल्प
  •   सम् + ख्या = संख्या

म् + च, छ, ज, झ, ञ

  •   सम् + चय = संचय
  •   किम् + चित् = किंचित

म् + ट, ठ, ड, ढ, ण 

  •  दम् + ड = दण्ड/दंड
  • खम् + ड = खण्ड/खंड

म् + त, थ, द, ध, न 

  • सम् + तोष = सन्तोष/संतोष
  • किम् + नर = किन्नर

म् + प, फ, ब, भ, म 

  •    सम् + पूर्ण = सम्पूर्ण/संपूर्ण
  •     सम् + भव = सम्भव/संभव

त् + ग , घ , ध , द , ब  , भ ,य , र , व्  

  •   सत् + भावना = सद्भावना
  •   जगत् + ईश =जगदीश

4. नीचे दिए गए वर्ण पर ध्यान दीजिए

  • त् से परे च् या छ् होने पर च,
  •  ज् या झ् होने पर ज्, 
  • ट् या ठ् होने पर ट्, 
  • ड् या ढ् होने पर ड् 
  • ल होने पर ल् 
  •  म् के साथ य, र, ल, व, श, ष, स, ह में से किसी भी वर्ण का मिलन होने पर ‘म्’ की जगह पर अनुस्वार ही लगता है।

उदहारण

 म + य , र , ल , व् , श , ष , स , ह 

  •      सम् + रचना = संरचना
  •      सम् + लग्न = संलग्न

त् + च , ज , झ , ट ,  ड , ल –

  •       उत् + चारण = उच्चारण
  •       सत् + जन = सज्जन

5. नीचे दिए गए वर्ण पर ध्यान दीजिए

  • जब  त् का मिलन अगर श् से हो तो त् को च् और श् को  छ् में बदल जाता है।
  • जब  त् या द् के साथ च या छ का मिलन होता है तो त् या द् की जगह पर च् बन जाता है।

उदहारण

  •   उत् + चारण = उच्चारण
  •   शरत् + चन्द्र = शरच्चन्द्र

त् + श् 

  • उत् + श्वास = उच्छ्वास
  • उत् + शिष्ट = उच्छिष्ट

6.  नीचे दिए गए वर्ण पर ध्यान दीजिए

  • जब त् का मिलन ह् से हो तो त् को  द् और ह् को ध् में बदल  जाता है।
  •  त् या द् के साथ ज या झ का मिलन होता है तब त् या द् की जगह पर ज् बन जाता है।

उदहारण

  •    सत् + जन = सज्जन
  •   जगत् + जीवन = जगज्जीवन

त् + ह 

  •  उत् + हार = उद्धार
  •  उत् + हरण =उद्धरण

7. नीचे दिए गए वर्ण पर ध्यान दीजिए

  • स्वर के बाद अगर  छ् वर्ण आ जाए तो छ् से पहले च् वर्ण बदल  जाता है। 
  • त् या द् के साथ ट या ठ का मिलन होने पर त् या द् की पर  ट् बन जाता है।
  • जब  त् या द् के साथ ‘ड’ या ढ की मिलन होने पर  त् या द् की पर‘ड्’बन जाता है।

उदहारण

  •  तत् + टीका = तट्टीका
  •    वृहत् + टीका = वृहट्टीका

अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, + छ 

  •     स्व + छंद = स्वच्छंद
  •     आ + छादन =आच्छादन

8. नीचे दिए गए वर्ण पर ध्यान दीजिए

  • अगर म् के बाद क् से लेकर म् तक कोई व्यंजन हो तो म् अनुस्वार में बदल जाता है। 
  • त् या द् के साथ जब ल का मिलन होता है तब त् या द् की जगह पर ‘ल्’ बन जाता है।

उदहारण

  •   उत् + लास = उल्लास
  •   तत् + लीन = तल्लीन

म् + च् , क, त, ब , प 

  •    किम् + चित = किंचित
  •    किम् + कर = किंक

9. नीचे दिए गए वर्ण पर ध्यान दीजिए

  • म् के बाद म का द्वित्व हो जाता है।  
  • त् या द् के साथ ‘ह’ के मिलन पर  त् या द् की जगह पर द् 
  •  ह की जगह पर ध बन जाता है।

उदहारण

  •   उत् + हार = उद्धार/उद्धार
  •  उत् + हृत = उद्धृत/उद्धृत

म् + म 

  •  सम् + मति = सम्मति
  •  सम् + मान = सम्मान

10. नीचे दिए गए वर्ण पर ध्यान दीजिए

  • म् के बाद य्, र्, ल्, व्, श्, ष्, स्, ह् में से कोई व्यंजन आने पर म् का अनुस्वार हो जाता है।
  • ‘त् या द्’ के साथ ‘श’ के मिलन पर त् या द् की जगह  पर ‘च्’ तथा ‘श’ की जगह पर ‘छ’ बन जाता है।

उदहारण

  •   उत् + श्वास = उच्छ्वास
  •   उत् + शृंखल = उच्छृंखल

म् + य, र, व्,श, ल, स, 

  • सम् + योग = संयोग
  • सम् + रक्षण = संरक्षण

11. नीचे दिए गए वर्ण पर ध्यान दीजिए

  •   ऋ, र्, ष् से परे न् का ण् हो जाता है। 
  • चवर्ग, टवर्ग, तवर्ग, श और स का व्यवधान हो जाने पर न् का ण् नहीं होता।  
  • किसी भी स्वर के साथ ‘छ’ के मिलन पर स्वर तथा ‘छ’  के बीच ‘च्’ आ जाता है।

उदहारण

  • आ + छादन = आच्छादन
  • अनु + छेद = अनुच्छेद

र् + न, म –

  • परि + नाम = परिणाम
  • प्र + मान = प्रमाण

12. नीचे दिए गए वर्ण पर ध्यान दीजिए

  • स् से पहले अ, आ से भिन्न कोई स्वर आ जाए तो स् को ष बना दिया  जाता है।

उदहारण

  • वि + सम = विषम
  • अभि + सिक्त = अभिषिक्त

भ् + स् के उदहारण :-

  •  अभि + सेक = अभिषे
  •   नि + सिद्ध = निषिद्ध

13. संधि विच्छेद (Sandhi Viched) नीचे दिए गए वर्ण पर ध्यान दीजिए

  • यदि किसी शब्द में कही भी ऋ, र या ष हो एवं उसके साथ मिलने वाले शब्द में कहीं भी ‘न’ हो तथा उन दोनों के बीच कोई भी स्वर,क, ख ग, घ, प, फ, ब, भ, म, य, र, ल, व में से कोई भी वर्ण हो तो सन्धि होने पर ‘न’ के स्थान पर ‘ण’ हो जाता है। 
  • जब द् के साथ क, ख, त, थ, प, फ, श, ष, स, ह का मिलन होता है तब  द की जगह पर  त् बन जाता है।

उदहारण

  •   राम + अयन = रामायण
  •   परि + नाम = परिणाम

व्यंजन संधि पहचानने की ट्रिक

नियमः जब क् के पीछे ग, ज, ड, द, ब, घ, झ, ढ, ध, भ, य, र, ल, व अथवा कोई स्वर हो तो प्रायः क् के स्थान में म् हो जायेगा।

उदाहरणः दिक्+गज अर्थात दिग्गज धिक्+याचना अर्थात धिग्याचना दिक्+दर्शन अर्थात दिग्दर्शन धिक्+जड अर्थात धिग्जड दिक्+अंबर अर्थात दिगम्बर वाक्+इश अर्थात वागीश।

Visarg Sandhi [विसर्ग संधि]

जब  स्वर या व्यंजन आ जाए तब जो परिवर्तन होता है ,वह विसर्ग संधि कहलाता है।

उदाहरण

  • मन: + अनुकूल = मनोनुकूल
  • नि: + पाप =निष्पाप

विसर्ग संधि पहचानने की ट्रिक

नियमः जब इ या उ युक्त अक्षर के सामने विसर्ग और हो उसके पीछे क, ख या प, फ आये तो विसर्ग ष् में बदल जाता है।

उदाहरणः निः+कृति अर्थात निष्कृति निः+खलु अर्थात निष्खलु निः+फल अर्थात निष्फल।

संधि विच्छेद (Sandhi Viched) : विसर्ग संधि के 10 नियम होते हैं

  1. नीचे दी गई बातों पर ध्यान दीजिए
  • विसर्ग के साथ च या छ के मिलन  से  विसर्ग के जगह  पर ‘श्’बन जाता है।
  • विसर्ग के पहले अगर ‘अ’और बाद में भी ‘अ’ अथवा वर्गों के तीसरे, चौथे , पाँचवें वर्ण, अथवा य, र, ल, व हो तो विसर्ग का ओ हो जाता है।

उदहारण

  • मनः + अनुकूल = मनोनुकूल 
  • अधः + गति = अधोगति 

विच्छेद

  • तपश्चर्या = तपः + चर्या
  • अन्तश्चेतना = अन्तः + चेतना

2. नीचे गई बातों पर ध्यान दीजिए

  • विसर्ग से पहले अ, आ को छोड़कर कोई स्वर हो और बाद में कोई स्वर हो, वर्ग के तीसरे, चौथे, पाँचवें वर्ण अथवा य्, र, ल, व, ह में से कोई हो तो विसर्ग का र या र् हो जाता ह।
  • विसर्ग के साथ ‘श’ के मेल पर विसर्ग के स्थान पर भी ‘श्’ बन जाता है।

उदाहरण

  • दुः + शासन = दुश्शासन
  • यशः + शरीर = यशश्शरीर

विच्छेद

  • निश्श्वास = निः + श्वास
  • चतुश्श्लोकी = चतुः + श्लोकी

3. नीचे दी गई बातों पर ध्यान दीजिए

  • विसर्ग से पहले कोई स्वर हो और बाद में च, छ या श हो तो विसर्ग का श हो जाता है। 
  • विसर्ग के साथ ट, ठ या ष के मेल पर विसर्ग के स्थान पर ‘ष्’ बन जाता है।

उदाहरण

  • धनुः + टंकार = धनुष्टंकार
  • चतुः + टीका = चतुष्टीका

4. संधि विच्छेद (Sandhi Viched) नीचे दी गई बातों पर ध्यान दीजिए

  • विसर्ग के बाद यदि त या स हो तो विसर्ग स् बन जाता है। 
  • यदि विसर्ग के पहले वाले वर्ण में अ या आ के अतिरिक्त अन्य कोई स्वर हो तथा विसर्ग के साथ मिलने वाले शब्द का प्रथम वर्ण क, ख, प, फ में से कोई भी हो तो विसर्ग के स्थान पर ‘ष्’ बन जायेगा।

उदाहरण

  • निः + कलंक = निष्कलंक
  • दुः + कर = दुष्कर

विच्छेद

  • निष्काम = निः + काम
  • निष्प्रयोजन = निः + प्रयोजन

5.नीचे दी गई बातों पर ध्यान दीजिए

  • विसर्ग से पहले इ, उ और बाद में क, ख, ट, ठ, प, फ में से कोई वर्ण हो तो विसर्ग का ष हो जाता है। 
  • यदि विसर्ग के पहले वाले वर्ण में अ या आ का स्वर हो तथा विसर्ग के बाद क, ख, प, फ हो तो सन्धि होने पर विसर्ग भी ज्यों का त्यों बना रहेगा।

उदाहरण

  • अधः + पतन = अध: पतन
  • प्रातः + काल = प्रात: काल

विच्छेद

  • रज: कण = रज: + कण
  • तप: पूत = तप: + पूत

अपवाद

  • भा: + कर = भास्कर
  • बृह: + पति = बृहस्पति

6. नीचे दी गई बातों पर ध्यान दीजिए

  • विसर्ग से पहले अ, आ हो और बाद में कोई भिन्न स्वर हो तो विसर्ग का लोप हो जाता है। 
  • विसर्ग के साथ त या थ के मेल पर विसर्ग के स्थान पर ‘स्’ बन जायेगा।

 उदाहरण

  • अन्त: + तल = अन्तस्तल
  • नि: + ताप = निस्ताप

विच्छेद

  • निस्तेज = निः + तेज
  • बहिस्थल = बहि: + थल

7. नीचे दी गई बातों पर ध्यान दीजिए

  •  विसर्ग के बाद क, ख अथवा प, फ होने पर विसर्ग में कोई परिवर्तन नहीं होता। 
  • विसर्ग के साथ ‘स’ के मेल पर विसर्ग के स्थान पर ‘स्’ बन जाता है।

उदाहरण

  • नि: + सन्देह = निस्सन्देह
  • दु: + साहस = दुस्साहस

विच्छेद

  • निस्संतान = नि: + संतान
  • मनस्संताप = मन: + संताप

8. नीचे दी गई बातों पर ध्यान दीजिए

  •  यदि विसर्ग के पहले वाले वर्ण में ‘इ’ व ‘उ’ का स्वर हो तथा विसर्ग के बाद ‘र’ हो तो सन्धि होने पर विसर्ग का तो लोप हो जायेगा साथ ही ‘इ’ व ‘उ’ की मात्रा ‘ई’ व ‘ऊ’ की हो जायेगी।

उदाहरण

  • नि: + रस = नीरस
  • नि: + रव = नीरव

विच्छेद

  • नीरज = नि: + रज
  • नीरन्द्र = नि: + रन्द्र

9. नीचे दी गई बातों पर ध्यान दीजिए

  •  विसर्ग के पहले वाले वर्ण में ‘अ’ का स्वर हो तथा विसर्ग के साथ अ के अतिरिक्त अन्य किसी स्वर के मेल पर विसर्ग का लोप हो जायेगा तथा अन्य कोई परिवर्तन नहीं होगा।

उदाहरण

  • अत: + एव = अतएव
  • पय: + आदि = पयआदि

10. संधि विच्छेद (Sandhi Viched) नीचे दी गई बातों पर ध्यान दीजिए

  •  विसर्ग के पहले वाले वर्ण में ‘अ’ का स्वर हो तथा विसर्ग के साथ अ, ग, घ, ड॰, ´, झ, ज, ड, ढ़, ण, द, ध, न, ब, भ, म, य, र, ल, व, ह में से किसी भी वर्ण के मेल पर विसर्ग के स्थान पर ‘ओ’ बन जायेगा।

 उदाहरण

  • सर: + ज = सरोज
  • अध: + भाग = अधोभाग

विच्छेद

  • मनोहर = मन: + हर
  • अधोवस्त्र = अध: + वस्त्र

अपवाद

  • पुन: + अवलोकन = पुनरवलोकन
  • अन्त: + द्वन्द्व = अन्तद्र्वन्द्व

संधि विच्छेद ट्रिक-

Source: Black Board
संधि विच्छेद
Source: Pinterest

Worksheets

Sandhi Viched
Source – UP Board Guide
Sandhi Viched
Source – RBSE Guide
Sandhi Viched
Source – Learn CBSE
Sandhi Viched
Source – Brainly

FAQs 

चित्रोपम में कौन सी संधि है ?

चित्रोपम में गुण संधि है क्योंकि इसका संधि विच्छेद चित्र + उपम है।

विच्छेद में कौन सी संधि है?

व्यंजन संधि

शब्दार्थ का संधि विच्छेद क्या होगा?

शब्द + अर्थ

संधि कितने प्रकार की होती है?

संधि के तीन प्रकार होते हैं
1. स्वर संधि
2. व्यंजन संधि
3. विसर्ग संधि

स्वर संधि के कितने भेद होते है?

स्वर संधि के पांच प्रकार होते हैं

1. दीर्घ संधि
2. गुण संधि
3. वृद्धि संधि
4. गुण संधि
5. अयादि संधि

मनोनुकूल का संधि विच्छेद क्या है?

मनः + अनुकूल 

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