फार्मासिस्ट स्वास्थ्य व्यवस्था का अहम हिस्सा है, जो डॉक्टर द्वारा लिखी दवाओं को सुरक्षित, सही मात्रा और सही तरीके से मरीज को उपलब्ध करवाने का काम करता है। भारत में फार्मासिस्ट बनने के लिए 12वीं के बाद D.Pharm या B.Pharm कोर्स करना और राज्य फार्मेसी काउंसिल से पंजीकरण कराना जरूरी होता है। यह करियर केवल मेडिकल स्टोर तक सीमित नहीं है, बल्कि अस्पताल, फार्मा कंपनी, रिसर्च और सरकारी क्षेत्र में भी अवसर देता है। इस गाइड में आप जान सकेंगे कि फार्मासिस्ट कैसे बनें, इसके लिए क्या आवश्यक योग्यता अनिवार्य हैं और कौन सा कोर्स करना आपके लिए अनिवार्य है।
This Blog Includes:
- फार्मासिस्ट कौन होता है?
- फार्मासिस्ट बनने के लिए योग्यता
- फार्मासिस्ट बनने के लिए कौन-सा कोर्स करना होता है?
- फार्मासिस्ट कैसे बनें? (स्टेप-बाय-स्टेप गाइड)
- स्टेप 1: 12वीं में सही विषय चुनें और बेस मजबूत करें
- स्टेप 2: सही फार्मेसी कोर्स चुनें (डी.फार्म / बी.फार्म / फार्म.डी)
- स्टेप 3: मान्यता प्राप्त कॉलेज में एडमिशन लें
- स्टेप 4: कोर्स के दौरान जरूरी स्किल्स और प्रैक्टिकल अनुभव पर ध्यान दें
- स्टेप 5: फार्मासिस्ट लाइसेंस के लिए स्टेट फार्मेसी काउंसिल में रजिस्ट्रेशन करें
- स्टेप 6: जॉब, हॉस्पिटल, इंडस्ट्री या मेडिकल स्टोर जैसे करियर पाथ को चुनें
- फार्मासिस्ट बनने के लिए फार्मेसी कोर्सेज की फीस कितनी होती है?
- फार्मेसी कोर्स के बाद करियर विकल्प
- फार्मासिस्ट की सैलरी कितनी होती है?
- FAQs
फार्मासिस्ट कौन होता है?
फार्मासिस्ट एक प्रशिक्षित स्वास्थ्य पेशेवर होता है, जिसका काम केवल दवाइयाँ बेचना नहीं, बल्कि दवाओं के सुरक्षित और सही उपयोग को सुनिश्चित करना भी होता है। फार्मासिस्ट डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाओं को समझता है, उनकी सही मात्रा बताता है और मरीज को यह जानकारी देता है कि दवा कैसे और कब लेनी चाहिए।
भारत में फार्मासिस्ट के रूप में काम करने के लिए फार्मेसी कॉउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) से मान्यता प्राप्त कोर्स और राज्य फार्मेसी काउंसिल में पंजीकरण जरूरी होता है।
क्लिनिकल फार्मासिस्ट मरीज की दवाओं के असर, साइड-इफेक्ट और ड्रग इंटरेक्शन पर नजर रखता है, जबकि वेलनेस रॉल में फार्मासिस्ट लाइफस्टाइल, प्रिवेंटिव केयर और सामान्य स्वास्थ्य सलाह भी देता है।
अस्पताल, क्लिनिक, फार्मा इंडस्ट्री और कम्युनिटी हेल्थ में इसकी जरूरत लगातार बढ़ रही है, इसलिए फार्मेसी आज एक जिम्मेदार और विकसित होता हेल्थकेयर करियर माना जाता है।
फार्मासिस्ट बनने के लिए योग्यता
फार्मासिस्ट बनने के लिए आपके पास निम्नलिखित आवश्यक योग्यता होनी चाहिए –
- न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 12वीं विज्ञान (फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी या मैथमेटिक्स) मानी जाती है, हालांकि अधिकांश कॉलेज PCB को प्राथमिकता देते हैं। सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए 12वीं में कम से कम 45% से 50% अंक होना आवश्यक है। आरक्षित श्रेणियों (SC/ST/OBC) के लिए अंकों में 5% की छूट का प्रावधान होता है।
- फार्मासिस्ट बनने के लिए आपको दो वर्षीय D.Pharma (डिप्लोमा), चार वर्षीय B.Pharma (डिग्री) या Pharm.D (डॉक्टरेट) में से कम से कम एक कोर्स पूरा करना होता है।
- फार्मासिस्ट बनने के लिए किए जाने वाले कोर्स को उस संसथान से करना अनिवार्य है जो फार्मेसी कॉउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) द्वारा अप्रूवड होना चाहिए। यदि संस्थान को PCI की मान्यता प्राप्त नहीं है, तो आपकी डिग्री या डिप्लोमा सरकारी तौर पर अमान्य होता है।
- PCI के नए नियमों के अनुसार, डिप्लोमा (D.Pharma) छात्रों को फार्मासिस्ट के रूप में रजिस्ट्रेशन प्राप्त करने के लिए अब एक ‘डिप्लोमा इन फार्मेसी एग्जिट एग्जामिनेशन (DPEE)’ को क्वालीफाई करना अनिवार्य हो गया है।
- कोर्स पूरा करने के बाद, आपको संबंधित स्टेट फार्मेसी कॉउंसिल (जैसे UP फार्मेसी कॉउंसिल) में एक ‘रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट’ के रूप में अपना नाम दर्ज कराना होता है। इसके बिना आप भारत में कानूनी रूप से फार्मासिस्ट के रूप में अभ्यास नहीं कर सकते।
फार्मासिस्ट बनने के लिए कौन-सा कोर्स करना होता है?
फार्मासिस्ट बनने के लिए मुख्य रूप से तीन कोर्स D.Pharm (डिप्लोमा इन फार्मेसी), B.Pharm (बैचलर इन फार्मेसी) और Pharm.D (डॉक्टर ऑफ़ फार्मेसी) किए जाते हैं।
| कोर्स | विवरण |
| डी.फार्म (D.Pharm) | यह एक 2 साल का एंट्री-लेवल कोर्स है, जिसके बाद स्टेट फार्मेसी काउंसिल में रजिस्ट्रेशन लेकर रिटेल या हॉस्पिटल फार्मासिस्ट के रूप में काम किया जा सकता है। इसके पहले वर्ष में फार्मास्यूटिक्स, फार्मास्यूटिकल केमिस्ट्री, ह्यूमन एनाटॉमी और फिजियोलॉजी और दूसरे वर्ष में फार्माकोलॉजी, ड्रग स्टोर मैनेजमेंट, हॉस्पिटल फार्मेसी और कम्युनिटी फार्मेसी के बारे में पढ़ाया जाता हैं। |
| बी.फार्म (B.Pharm) | यह एक 4 साल का डिग्री कोर्स है, जो फार्मा इंडस्ट्री, ड्रग मैन्युफैक्चरिंग, क्वालिटी कंट्रोल और हायर स्टडी के लिए बेहतर स्कोप देता है। इसमें फार्मास्यूटिकल ऑर्गेनिक केमिस्ट्री, बायोकेमिस्ट्री, माइक्रोबायोलॉजी और ह्यूमन एनाटॉमी, फार्माकोलॉजी, फार्मास्यूटिक्स, मेडिसिनल केमिस्ट्री, फार्मास्यूटिकल एनालिसिस और बायोफार्मास्यूटिक्स के साथ-साथ इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग, क्वालिटी कंट्रोल, गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस, और ड्रग रेगुलेटरी अफेयर्स के बारे में पढ़ाया जाता है। |
| फार्म.डी (Pharm.D) | फार्म.डी (डॉक्टर ऑफ़ फार्मेसी) एक 6 साल (5 साल कोर्स की अवधि + 1 वर्ष इंटर्नशिप) का प्रोफेशनल कोर्स है, जिसमें क्लिनिकल फार्मेसी और पेशेंट केयर पर फोकस होता है, इसलिए हॉस्पिटल और क्लिनिकल रोल के अवसर ज्यादा मिलते हैं। इसमें एनाटॉमी, फिजियोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, फार्माकोलॉजी और पैथोफिजियोलॉजी, क्लिनिकल फार्मेसी, फार्माकोथेरेप्यूटिक्स, क्लिनिकल टॉक्सिकोलॉजी, फार्माकोविजिलेंस और एविडेंस बेस्ड मेडिसिन जैसे विषय पढ़ाए जाते हैं। |
इन सभी कोर्स में इंटर्नशिप बहुत महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि यहीं पर दवाओं की सही हैंडलिंग, प्रिस्क्रिप्शन समझना, मरीज को काउंसलिंग और फार्मेसी ऑपरेशन का असली अनुभव मिलता है। प्रैक्टिकल एक्सपोज़र ही जॉब रेडी स्किल बनाता है।
फार्मासिस्ट कैसे बनें? (स्टेप-बाय-स्टेप गाइड)
फार्मासिस्ट कैसे बनें ये जानने के लिए नीचे दी गई स्टेप-बाय-स्टेप गाइड को समझें:
स्टेप 1: 12वीं में सही विषय चुनें और बेस मजबूत करें
फार्मासिस्ट बनने की शुरुआत 12वीं में स्ट्रीम के चुनाव से होती है, क्योंकि अगर आपने 12वीं में गलत स्ट्रीम का चुनाव कर लिया तो आप इस प्रक्रिया में आगे नहीं बढ़ सकते हैं। ज्यादातर फार्मेसी कॉलेज PCB (फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी) मांगते हैं, इसलिए बायोलॉजी लेना सुरक्षित विकल्प माना जाता है। कुछ कॉलेज PCM भी स्वीकार करते हैं, लेकिन ड्रग और हेल्थ साइंस समझने में बायोलॉजी मदद करती है। न्यूनतम 50% अंक सामान्यतः जरूरी होते हैं, हालांकि सरकारी कॉलेजों में कटऑफ अधिक हो सकती है। इस चरण में केमिस्ट्री और बेसिक बायोलॉजी की समझ मजबूत करना आगे के फार्मेसी विषयों को आसान बनाता है।
स्टेप 2: सही फार्मेसी कोर्स चुनें (डी.फार्म / बी.फार्म / फार्म.डी)
12वीं के बाद पहला बड़ा निर्णय सही कोर्स चुनना है। डी.फार्म दो साल का डिप्लोमा है, जिसे करने के बाद एग्जिट एग्जाम पास करने के बाद ही रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट बनना छोटा रास्ता हैं। बी.फार्म चार साल की डिग्री है जो इंडस्ट्री, हॉस्पिटल और रिसर्च के ज्यादा अवसर देती है। फार्म.डी छह साल का क्लिनिकल प्रोग्राम है जो मरीज-केंद्रित फार्मेसी पर फोकस करता है। करियर ग्रोथ, बजट और लक्ष्य देखकर की कोर्स चुनना अच्छा होता है।
स्टेप 3: मान्यता प्राप्त कॉलेज में एडमिशन लें
फार्मेसी पढ़ने के लिए PCI (फार्मेसी कॉउंसिल ऑफ इंडिया) से मान्यता प्राप्त कॉलेज चुनना जरूरी है, क्योंकि बिना PCI मान्यता डिग्री से फार्मासिस्ट रजिस्ट्रेशन संभव नहीं होता। एडमिशन मेरिट या एंट्रेंस एग्जाम (जैसे CUET, MHT-CET या स्टेट एग्जाम) से होता है। सरकारी कॉलेज सस्ते और प्रतिस्पर्धी होते हैं, जबकि प्राइवेट कॉलेज में फीस ज्यादा होती है। एडमिशन से पहले कॉलेज की PCI अप्रूवल, लैब सुविधा, इंटर्नशिप और प्लेसमेंट रिकॉर्ड जांचना जरूरी है, ताकि भविष्य में रजिस्ट्रेशन और नौकरी में समस्या न आए।
स्टेप 4: कोर्स के दौरान जरूरी स्किल्स और प्रैक्टिकल अनुभव पर ध्यान दें
फार्मेसी की पढ़ाई सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं होती, इसमें प्रैक्टिकल समझ उतनी ही जरूरी होती है। कोर्स के दौरान दवा बनाना, सही डोज कैलकुलेशन करना, ड्रग इंटरैक्शन समझना, दवाओं की स्टोरेज और फार्मेसी कानून जैसे विषय सिखाए जाते हैं, ताकि दवाओं के सुरक्षित और सही इस्तेमाल की समझ विकसित हो सके।
पढ़ाई के साथ-साथ इंटर्नशिप या ट्रेनिंग बहुत अहम भूमिका निभाती है। हॉस्पिटल, मेडिकल स्टोर या फार्मा इंडस्ट्री में काम करते हुए छात्रों को असली कार्य-प्रक्रिया, दवा वितरण, रिकॉर्ड मैनेजमेंट और मरीजों से जुड़ी जिम्मेदारियों का अनुभव मिलता है। इससे आत्मविश्वास बढ़ता है और यह समझ भी बनती है कि आगे क्लिनिकल, कम्युनिटी या इंडस्ट्रियल फार्मेसी में किस क्षेत्र में जाना बेहतर रहेगा।
एक अच्छे फार्मासिस्ट के लिए कम्युनिकेशन स्किल और मरीजों को दवा की सही जानकारी समझाने की क्षमता बेहद जरूरी होती है। साथ ही छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देना, जिम्मेदारी से काम करना, डॉक्टर और अन्य हेल्थकेयर स्टाफ के साथ तालमेल बनाए रखना, मरीजों के प्रति धैर्य और संवेदनशीलता रखना भी इस पेशे का अहम हिस्सा है। लगातार नई मेडिकल जानकारी सीखते रहना ही आगे जॉब, क्लिनिकल रोल या खुद का मेडिकल स्टोर सफलतापूर्वक चलाने में मदद करता है।
स्टेप 5: फार्मासिस्ट लाइसेंस के लिए स्टेट फार्मेसी काउंसिल में रजिस्ट्रेशन करें
फार्मासिस्ट के रूप में काम करने के लिए फार्मेसी कॉउंसिल में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। बिना रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट के दवा देना या मेडिकल स्टोर चलाना कानूनन गलत माना जाता है। D.Pharm या B.Pharm पूरा करने के बाद संबंधित राज्य की फार्मेसी काउंसिल में आवेदन, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और फीस के बाद रजिस्ट्रेशन नंबर मिलता है। वर्ष 2022 से D.Pharm छात्रों के लिए Exit Exam पास करना जरूरी है, तभी रजिस्ट्रेशन मिलेगा। यही रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट आपकी प्रोफेशनल पहचान होता है। फार्मासिस्ट रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट का रजिस्ट्रेशन और रिन्यूअल स्टेट फार्मेसी कॉउंसिल करती है। इसलिए रिन्यूअल की प्रक्रिया और वैधता हर राज्य में अलग-अलग हो सकती है।
स्टेप 6: जॉब, हॉस्पिटल, इंडस्ट्री या मेडिकल स्टोर जैसे करियर पाथ को चुनें
रजिस्ट्रेशन के बाद कई करियर विकल्प खुलते हैं। आप रिटेल फार्मासिस्ट बनकर मेडिकल स्टोर चला सकते हैं, हॉस्पिटल फार्मेसी में काम कर सकते हैं या फार्मा कंपनी में प्रोडक्शन, क्वालिटी कंट्रोल और ड्रग सेफ्टी में जा सकते हैं। आगे पढ़ाई करके M.Pharm, Pharm.D या GPAT के जरिए रिसर्च और गवर्नमेंट जॉब के अवसर भी मिलते हैं। सही विकल्प आपकी रुचि, स्किल और लॉन्ग-टर्म करियर गोल्स पर निर्भर करता है।
फार्मासिस्ट बनने के लिए फार्मेसी कोर्सेज की फीस कितनी होती है?
यहाँ फार्मेसी कोर्स की फीस एक तय संख्या नहीं होती। यह कॉलेज (सरकारी/प्राइवेट), राज्य, सुविधाओं, लैब-इंफ्रास्ट्रक्चर और यूनिवर्सिटी नियमों पर निर्भर करती है। नीचे दी गई टेबल वास्तविक कॉलेज डेटा और आधिकारिक संस्थानों की फीस रेंज पर आधारित है ताकि छात्रों को सही अनुमान मिल सके।
| कोर्स | अवधि | सरकारी कॉलेज औसत फीस (प्रति वर्ष) | प्राइवेट कॉलेज औसत फीस (प्रति वर्ष) | पूरे कोर्स की अनुमानित कुल फीस |
| D.Pharm (डिप्लोमा इन फार्मेसी) | 2 वर्ष | INR 10,000 – INR 50,000 | INR 50,000 – INR 1.5 लाख | INR 20,000 – INR 3 लाख |
| B.Pharm (बैचलर ऑफ फार्मेसी) | 4 वर्ष | INR 40,000 – INR 1 लाख | INR 1 लाख – INR 2.5 लाख | INR 1.6 लाख – INR 10 लाख |
| Pharm.D (डॉक्टर ऑफ फार्मेसी) | 6 वर्ष | INR 70,000 – INR 1.5 लाख | INR 2 लाख – INR 3 लाख | INR 6 लाख – INR 18 लाख |
फार्मेसी कोर्स के बाद करियर विकल्प
यहाँ फार्मेसी कोर्स के बाद करियर विकल्प की जानकारी दी गई है –
| करियर विकल्प | करियर क्षेत्र | किस कोर्स के बाद |
| रिटेल फार्मासिस्ट | मेडिकल स्टोर / केमिस्ट शॉप | D.Pharm / B.Pharm + PCI |
| हॉस्पिटल फार्मासिस्ट | प्राइवेट / सरकारी अस्पताल | D.Pharm / B.Pharm |
| क्लिनिकल फार्मासिस्ट | मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल | Pharm.D / M.Pharm |
| फार्मा इंडस्ट्री जॉब | फार्मा कंपनियाँ | B.Pharm / M.Pharm |
| ड्रग सेफ्टी / फार्माकोविजिलन्स | फार्मा कंपनियाँ | B.Pharm / M.Pharm |
| मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव | फार्मा कंपनियाँ | D.Pharm / B.Pharm |
| रिसर्च / साइंटिस्ट | रिसर्च लैब / फार्मा R&D | M.Pharm / PhD |
| गवर्नमेंट फार्मासिस्ट | ESIC, रेलवे, स्टेट हेल्थ | D.Pharm / B.Pharm + एग्जाम |
| ड्रग इंस्पेक्टर | सरकारी ड्रग विभाग | B.Pharm + कॉम्पिटिटिव एग्जाम |
| मेडिकल स्टोर बिजनेस | खुद का व्यवसाय | D.Pharm / B.Pharm + लाइसेंस |
फार्मासिस्ट की सैलरी कितनी होती है?
भारत में औसत वार्षिक सैलरी 2.6 लाख – 2.8 लाख तक हो सकती है। हालाँकि फार्मासिस्ट की सैलरी किसी एक तय पैमाने पर निर्भर नहीं करती। यह उम्मीदवार की तकनीकी स्किल्स, अनुभव और जॉब लोकेशन के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। आमतौर पर शुरुआती स्तर पर सैलरी सीमित रहती है, लेकिन जैसे-जैसे प्रैक्टिकल अनुभव और इंडस्ट्री-रेडी स्किल्स बढ़ती हैं, वैसे-वैसे आय में भी अच्छा ग्रोथ देखने को मिलता है।
नीचे AmbitionBox पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार भारत में फार्मासिस्ट की अनुभव-आधारित अनुमानित वार्षिक सैलरी रेंज दी गई है, जिससे आपको एक सामान्य आइडिया मिल सके:
| अनुभव स्तर | औसत वार्षिक सैलरी (INR) |
| फ्रेशर (0-1 वर्ष) | INR 2.5 लाख |
| 1-3 वर्ष अनुभव | INR 2.6 लाख |
| 3-6 वर्ष अनुभव | INR 2.9 लाख |
| 6-9 वर्ष अनुभव | INR 3.3 लाख |
FAQs
नहीं, फार्मासिस्ट बनने के लिए NEET अनिवार्य नहीं है। भारत में D.Pharm या B.Pharm कोर्स में प्रवेश अधिकतर मेरिट या राज्य/विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा से होता है। कुछ संस्थान अपनी अलग परीक्षा लेते हैं। NEET मुख्यतः MBBS और BDS प्रोग्राम के लिए जरुरी होता है।
नहीं, भारत में बिना रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट के मेडिकल स्टोर चलाना कानूनी रूप से गलत है। फार्मेसी कॉउंसिल में रजिस्ट्रेशन और ड्रग लाइसेंस अनिवार्य होता है। इसमें रिटेल और होलसेल लाइसेंस अलग-अलग होते हैं।
मिनिमम लेवल पर D.Pharm से फार्मासिस्ट बन सकते हैं, लेकिन बेहतर करियर के लिए B.Pharm ज्यादा उपयोगी माना जाता है। B.Pharm से हॉस्पिटल, फार्मा इंडस्ट्री, रिसर्च और सरकारी नौकरी के अवसर बढ़ते हैं। क्लीनिकल और एडवांस्ड रोल्स के लिए Pharm.D या M.Pharm फायदेमंद होते हैं।
हाँ, क्लिनिकल फार्मेसी और फार्मा रिसर्च का महत्व बढ़ने से अस्पताल, दवा कंपनियों, रिसर्च, ड्रग सेफ्टी और सरकारी क्षेत्र में इसकी लगातार डिमांड रहती है। हालांकि केवल मेडिकल स्टोर पर निर्भर रहना सीमित ग्रोथ दे सकता है। बेहतर भविष्य के लिए स्किल, अनुभव और सही स्पेशलाइजेशन जरूरी होता है।
हाँ, 12वीं के बाद फार्मासिस्ट बनना संभव है, लेकिन इसके लिए सही कोर्स और कानूनी प्रक्रिया समझना जरूरी है। भारत में फार्मासिस्ट बनने के लिए 12वीं कक्षा के बाद D.Pharm (डिप्लोमा इन फार्मेसी) या B.Pharm (बैचलर इन फार्मेसी) जैसे मान्यता प्राप्त कोर्स करना अनिवार्य होता है। इसके बाद राज्य फार्मेसी काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है, तभी व्यक्ति कानूनी रूप से फार्मासिस्ट के रूप में काम कर सकता है।
उम्मीद है कि इस लेख से आपको फार्मासिस्ट कैसे बनें से जुड़ी जरूरी जानकारी समझने में मदद मिली होगी। करियर से सम्बंधित अन्य लेख पढ़ने के Leverage Edu के साथ जुड़े रहें।

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