मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी बीमारियों का इलाज करने वाले विशेषज्ञ को न्यूरोलॉजिस्ट कहा जाता है। स्ट्रोक, मिर्गी, माइग्रेन और पार्किंसन जैसी समस्याओं के बढ़ते मामलों के कारण इस क्षेत्र में स्पेशलिस्ट की डिमांड लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यदि आप न्यूरोलॉजिस्ट बनना आपके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है। यदि आप मेडिकल फील्ड में करियर बनाना चाहते हैं और जानना चाहते हैं कि न्यूरोलॉजिस्ट कैसे बनें, तो इसके लिए सही विषय चयन, मेडिकल एंट्रेंस परीक्षा, एमबीबीएस और न्यूरोलॉजी में स्पेशलाइजेशन की प्रक्रिया को समझना जरूरी है। इस गाइड में आपके लिए न्यूरोलॉजिस्ट बनने की पूरी प्रक्रिया, योग्यता, कोर्स, स्किल्स और करियर स्कोप की जानकारी दी गई है।
This Blog Includes:
- न्यूरोलॉजिस्ट कौन होता है और उसका काम क्या होता है?
- भारत में न्यूरोलॉजिस्ट बनने के लिए योग्यता
- 12वीं के बाद न्यूरोलॉजिस्ट बनने के लिए स्टेप-बाय-स्टेप गाइड
- स्टेप 1: 12वीं (PCB) से शुरुआत करें
- स्टेप 2: NEET-UG मेडिकल एंट्रेंस क्लियर करें
- स्टेप 3: MBBS डिग्री पूरी करें
- स्टेप 4: NEET-PG देकर MD (जनरल मेडिसिन) करें
- स्टेप 5: NEET-SS (DM/MCh सुपर-स्पेशलिटी प्रवेश परीक्षा)
- स्टेप 6: DM न्यूरोलॉजी (Super-Specialization) करें
- स्टेप 7: मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन और प्रैक्टिस शुरू करें
- न्यूरोलॉजी में स्पेशलाइजेशन के विकल्प
- न्यूरोलॉजिस्ट को मिलने वाली अनुमानित सैलरी
- न्यूरोलॉजिस्ट के रूप में करियर स्कोप
- सरकारी क्षेत्र में न्यूरोलॉजिस्ट बनने के अवसर
- FAQs
न्यूरोलॉजिस्ट कौन होता है और उसका काम क्या होता है?
न्यूरोलॉजिस्ट वह विशेषज्ञ डॉक्टर होता है जो तंत्रिका तंत्र (Nervous System) से जुड़ी बीमारियों की पहचान और इलाज करता है। तंत्रिका तंत्र में मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी (स्पाइनल कॉर्ड) और शरीर की नसें शामिल होती हैं। जब इनमें किसी तरह की समस्या आती है, तो व्यक्ति को लगातार सिरदर्द, चक्कर आना, दौरे पड़ना, संतुलन बिगड़ना, याददाश्त कमजोर होना या हाथ-पैर में झनझनाहट और सुन्नपन जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।
न्यूरोलॉजिस्ट इन लक्षणों को गंभीरता से समझते हैं, मरीज की मेडिकल हिस्ट्री लेते हैं और जरूरत पड़ने पर MRI, CT स्कैन, EEG या नर्व कंडक्शन स्टडी जैसे टेस्ट की सलाह देते हैं। रिपोर्ट के आधार पर वे दवाइयों या अन्य उपचार की योजना तैयार करते हैं।
एक न्यूरोलॉजिस्ट की मुख्य जिम्मेदारियाँ निम्नलिखित होती हैं –
- न्यूरोलॉजिस्ट दिमाग और नसों से जुड़ी जटिल बीमारियों (जैसे – मिर्गी, अल्जाइमर, पार्किंसंस, मल्टिपल स्क्लेरोसिस और स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याओं) की पहचान और इलाज करते हैं।
- मरीज की स्थिति को समझने के लिए न्यूरोलॉजिस्ट MRI, CT Scan, EEG और EMG जैसे जरूरी टेस्ट करवाते हैं और उनकी रिपोर्ट का गहराई से विश्लेषण करते हैं।
- इसके अलावा न्यूरोलॉजिस्ट ही रोगियों को बार-बार होने वाले तेज सिरदर्द, चक्कर, याददाश्त कमजोर होना, शरीर में सुन्नता या झुनझुनी और मशल्स की कमजोरी जैसे लक्षणों को भी गंभीरता से मैनेज करते हैं। इसका इलाज वे मुख्य रूप से दवाओं, सही लाइफस्टाइल और फिजिकल थेरेपी के आधार पर करते हैं।
- न्यूरोलॉजिस्ट सर्जरी नहीं करते, लेकिन जरूरत पड़ने पर मरीज को न्यूरोसर्जन के पास भेजते हैं। खास बात यह है कि वे लंबी चलने वाली बीमारियों में भी मरीज की लाइफ क्वालिटी बेहतर बनाए रखने पर फोकस करते हैं।
- अपनी मेडिकल ज़िम्मेदारियों के अलावा न्यूरोलॉजिस्ट को रेगुलरली पेशेंट्स का मेडिकल रिकॉर्ड अपडेट करना होता है ताकि किसी भी पेशेंट के इलाज के समय किसी भी गलती की संभावना से बचा जा सके। इसके अलावा वे जरुरत पड़ने पर मेडिकल स्टूडेंट्स को ट्रेनिंग भी देते हैं।
भारत में न्यूरोलॉजिस्ट बनने के लिए योग्यता
भारत में न्यूरोलॉजिस्ट बनने के लिए निम्नलिखित योग्यता जरुरी होती हैं –
- सबसे पहले आपको 12वीं कक्षा PCB से न्यूनतम 50% अंकों के साथ पास करनी अनिवार्य है, वही आरक्षित श्रेणी के छात्रों के लिए 5% की वरियता दी जा सकती है।
- NEET-UG परीक्षा: भारत में MBBS कोर्स में प्रवेश के लिए NEET-UG परीक्षा देना अनिवार्य है। इसमें प्राप्त स्कोर के आधार पर ही आपको अपने चयनित कॉलेज या संस्थान में प्रवेश मिलता है।
- MBBS और अनिवार्य इंटर्नशिप कम्प्लीट करने के बाद आपको NEET-PG परीक्षा देना अनिवार्य है, जिसमें स्कोर या रैंक के आधार पर आपको संबंधित स्पेशलाइज़ेशन में एडमिशन मिलता है। न्यूरोलॉजिस्ट बनने के लिए आपको बड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण हाई स्कोर लाना आवशयक होता है।
- NEET-PG प्रवेश परीक्षा में प्राप्त रैंक के आधार पर आपको अपने चयनित कॉलेज या संस्थान में कॉउंसलिंग राउंड में शामिल होना होता है और अपना एडमिशन कंफर्म करना होता है।
- PG डिग्री (MD या DNB) करने के बाद आपको न्यूरोलॉजी सुपर-स्पेशलिटी के लिए NEET-SS (DM/MCh सुपर-स्पेशलिटी प्रवेश परीक्षा) परीक्षा देनी अनिवार्य होती है।
- MD के बाद NEET-SS परीक्षा क्लियर करके आपको 3 वर्ष का DM न्यूरोलॉजी करना होता है, DM न्यूरोलॉजी ही न्यूरोलॉजिस्ट बनने की मुख्य योग्यता है।
- अंत में राज्य मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन जरूरी होता है, तभी आप भारत में न्यूरोलॉजिस्ट के रूप में प्रैक्टिस कर सकते हैं।
न्यूरोलॉजिस्ट बनने के लिए आवश्यक स्किल्स
एक सफल न्यूरोलॉजिस्ट बनने के लिए क्लिनिकल अंडरस्टैंडिंग, ऑब्ज़र्वेशनल स्किल और मरीज-केयर स्किल्स का संतुलन जरूरी होता है। यहाँ दी गई निम्नलिखित स्किल्स मेडिकल ट्रेनिंग (MBBS, MD, DM Neurology) के दौरान विकसित की जाती हैं और प्रैक्टिस में काम आ सकती हैं।
- स्ट्रांग क्लिनिकल और एनालिटिकल थिंकिंग: न्यूरोलॉजिस्ट को MRI, CT-Scan, EEG और क्लिनिकल लक्षणों के आधार पर सही निदान करना होता है। गलत डायग्नोसिस से उपचार प्रभावित हो सकता है, इसलिए लॉजिकल सोच जरूरी है।
- डिटेल ऑब्जर्वेशन स्किल: न्यूरोलॉजी में छोटे-छोटे लक्षण (जैसे रिफ्लेक्स, मूवमेंट, बोलने में बदलाव) बीमारी का संकेत होते हैं। न्यूरोलॉजिस्ट में इन्हें पहचानने की स्किल जरूर होनी चाहिए।
- प्रॉब्लम-सॉल्विंग एबिलिटी: कई न्यूरोलॉजिकल रोग जटिल होते हैं, जहाँ एक ही बीमारी के कई कारण हो सकते हैं। सही कारण पहचानकर इलाज तय करना महत्वपूर्ण है।
- कम्युनिकेशन और मरीज-केयर स्किल: मरीज और उनके परिवार को बीमारी, उपचार और रिकवरी समझाना न्यूरोलॉजिस्ट की जिम्मेदारी होती है। सहानुभूति और स्पष्ट संवाद भरोसा बनाते हैं।
- लॉन्ग टर्म तक लर्निंग स्किल: न्यूरोलॉजी में लगातार नई रिसर्च और तकनीक आती रहती है, इसलिए अपडेट रहना आवश्यक है।
- मानसिक धैर्य और स्थिरता: स्ट्रोक, एपिलेप्सी और क्रॉनिक रोगों के केस संभालने के लिए मानसिक संतुलन जरूरी होता है।
12वीं के बाद न्यूरोलॉजिस्ट बनने के लिए स्टेप-बाय-स्टेप गाइड
12वीं के बाद आप नीचे दिए गए स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस को फॉलो करके आप सही गाइड के साथ एक न्यूरोलॉजिस्ट बन सकते हैं –
स्टेप 1: 12वीं (PCB) से शुरुआत करें
न्यूरोलॉजिस्ट बनने का पहला कदम 12वीं कक्षा में साइंस स्ट्रीम (फिजिक्स, केमेस्ट्री, बायोलॉजी) से पढ़ाई करना है। यही आपके मेडिकल करियर की नींव बनती है। इसमें आपको कम से कम 50% या उससे अधिक अंक जरूरी माने जाते हैं ताकि आगे मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं के लिए योग्य बन सकें। इसी दौरान बेसिक बायोलॉजी, ह्यूमन बॉडी और साइंस कॉन्सेप्ट को अच्छे से समझना जरूरी है, क्योंकि आगे की मेडिकल पढ़ाई इन्हीं पर आधारित होती है। यह स्टेप आपके पूरे मेडिकल करियर का फाउंडेशन तैयार करता है।
स्टेप 2: NEET-UG मेडिकल एंट्रेंस क्लियर करें
12वीं के बाद आपको NEET-UG जैसी मेडिकल प्रवेश परीक्षा पास करनी होती है, क्योंकि भारत में MBBS में एडमिशन इसी के आधार पर मिलता है। यह परीक्षा फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी पर आधारित होती है और आपका स्कोर तय करता है कि आपको किस मेडिकल कॉलेज में सीट मिलेगी। अच्छी रैंक के आधार पर आपको बेहतर सरकारी कॉलेज मिलता है, जहाँ आपको कम फीस देनी होती है।
स्टेप 3: MBBS डिग्री पूरी करें
NEET-UG पास करने के बाद आपको MBBS में एडमिशन लेना होता है, जिसकी अवधि लगभग 5.5 वर्ष (जिसमें 1 साल इंटर्नशिप शामिल है) होती है। इस दौरान आप एनाटॉमी, फिजियोलॉजी, मेडिसिन, न्यूरोसाइंस जैसे विषय पढ़ते हैं और अस्पताल में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग भी करते हैं। MBBS को डॉक्टर बनने की बेसिक डिग्री माना जाता है और बिना MBBS के आपका न्यूरोलॉजिस्ट बनना संभव नहीं है। इसमें आपको मेडिकल साइंस की गहरी समझ और क्लिनिकल एक्सपीरियंस मिलता है, जो आगे स्पेशलाइजेशन के लिए जरूरी होता है।
स्टेप 4: NEET-PG देकर MD (जनरल मेडिसिन) करें
MBBS के बाद अगला कदम NEET-PG एग्जाम पास करना होता है, जिससे आपको MD (जनरल मेडिसिन या पीडियाट्रिक्स) में एडमिशन मिलता है। यह पोस्टग्रेजुएट डिग्री लगभग 3 साल की होती है और इसमें आपको एडवांस मेडिकल नॉलेज और क्लिनिकल ट्रेनिंग मिलती है। न्यूरोलॉजी सुपर-स्पेशलिटी में जाने के लिए MD एक जरूरी स्टेप है। इस दौरान आप मरीजों का डायग्नोसिस, ट्रीटमेंट और मेडिकल मैनेजमेंट सीखते हैं, जो आगे न्यूरोलॉजिस्ट बनने में बेहद काम आता है।
स्टेप 5: NEET-SS (DM/MCh सुपर-स्पेशलिटी प्रवेश परीक्षा)
MD (जनरल मेडिसिन) पूरी करने के बाद न्यूरोलॉजिस्ट बनने के लिए आपको NEET-SS (Super-Speciality) एंट्रेंस परीक्षा पास करनी होती है। यह परीक्षा खास तौर पर DM और MCh जैसे सुपर-स्पेशलिटी कोर्स में एडमिशन के लिए होती है। NEET-SS में आपके PG लेवल मेडिकल कॉन्सेप्ट, क्लिनिकल नॉलेज और स्पेशलाइजेशन से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं। अच्छी रैंक आने पर आपको DM Neurology जैसी सुपर-स्पेशलिटी सीट मिलती है। यह स्टेप बेहद क्रूशियल है क्योंकि इसी के बाद आप जनरल डॉक्टर से न्यूरो सुपर-स्पेशलिस्ट बनने की दिशा में आगे बढ़ते हैं।
स्टेप 6: DM न्यूरोलॉजी (Super-Specialization) करें
MD के बाद आपको DM न्यूरोलॉजी या DNB न्यूरोलॉजी करना होता है, जो लगभग 3 साल की सुपर-स्पेशलिटी ट्रेनिंग होती है। इसी स्टेप के बाद आप आधिकारिक रूप से न्यूरोलॉजिस्ट बनते हैं। इसमें आप ब्रेन, स्पाइनल कॉर्ड और नर्वस सिस्टम की बीमारियों जैसे स्ट्रोक, पार्किंसन, एपिलेप्सी आदि का एडवांस स्तर पर अध्ययन और इलाज सीखते हैं।
स्टेप 7: मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन और प्रैक्टिस शुरू करें
DM पूरी करने के बाद आपको मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराना होता है, जिससे आप कानूनी रूप से न्यूरोलॉजिस्ट के रूप में प्रैक्टिस कर सकते हैं। रजिस्ट्रेशन के बाद आप सरकारी या निजी अस्पताल में काम कर सकते हैं, रिसर्च कर सकते हैं या अपना न्यूरो क्लिनिक भी खोल सकते हैं। अनुभव बढ़ने के साथ आपकी स्किल, सैलरी और करियर ग्रोथ तेजी से बढ़ती है।
न्यूरोलॉजी में स्पेशलाइजेशन के विकल्प
न्यूरोलॉजी एक बहुत व्यापक मेडिकल क्षेत्र है, इसलिए सभी न्यूरोलॉजिस्ट एक ही तरह का काम नहीं करते। मरीज की बीमारी, उम्र और तंत्रिका तंत्र के प्रभावित हिस्से के आधार पर न्यूरोलॉजिस्ट अलग-अलग विशेषज्ञता में काम करते हैं। भारत में DM न्यूरोलॉजी करने के बाद डॉक्टर आगे किसी विशेष क्षेत्र में अनुभव और फेलोशिप लेकर सुपर-स्पेशलिस्ट बन सकते हैं।
- क्लिनिकल न्यूरोलॉजिस्ट – यह सबसे सामान्य प्रकार है। ये डॉक्टर माइग्रेन, मिर्गी, स्ट्रोक, पार्किंसंस और नसों की कमजोरी जैसी बीमारियों का निदान और इलाज करते हैं।
- पेडियाट्रिक न्यूरोलॉजिस्ट – बच्चों के दिमाग और नसों से जुड़ी समस्याओं, जैसे सेरेब्रल पाल्सी, डेवलपमेंटल डिसऑर्डर और बचपन की मिर्गी का इलाज करते हैं।
- न्यूरोफिज़ियोलॉजिस्ट – EEG, EMG और नर्व कंडक्शन टेस्ट जैसे डायग्नोस्टिक टेस्ट के माध्यम से नसों और दिमाग की कार्यप्रणाली का अध्ययन करते हैं।
- स्ट्रोक स्पेशलिस्ट (वैस्कुलर न्यूरोलॉजिस्ट) – स्ट्रोक, ब्रेन ब्लड सप्लाई और ब्लड क्लॉट से जुड़ी स्थितियों के इलाज में विशेषज्ञ होते हैं।
- न्यूरोमस्कुलर स्पेशलिस्ट – मांसपेशियों और नसों की बीमारियों, जैसे मस्कुलर डिस्ट्रॉफी और मायोपैथी का इलाज करते हैं।
- इंटरवेंशनल न्यूरोलॉजिस्ट – आधुनिक तकनीक और कैथेटर-आधारित प्रक्रियाओं से ब्रेन ब्लॉकेज और स्ट्रोक का इलाज करते हैं।
न्यूरोलॉजिस्ट को मिलने वाली अनुमानित सैलरी
भारत में न्यूरोलॉजिस्ट की सैलरी किसी एक तय पैमाने पर निर्भर नहीं करती। यह उम्मीदवार की तकनीकी स्किल्स, अनुभव, कंपनी के प्रकार और जॉब लोकेशन के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। आमतौर पर शुरुआती स्तर पर सैलरी सीमित रहती है, लेकिन जैसे-जैसे प्रैक्टिकल अनुभव और इंडस्ट्री-रेडी स्किल्स बढ़ती हैं, वैसे-वैसे आय में भी अच्छा ग्रोथ देखने को मिलता है।
नीचे भारत में न्यूरोलॉजिस्ट की अनुभव-आधारित अनुमानित वार्षिक सैलरी रेंज (डेटा – AmbitionBox से लिया गया है) दी गई है, जिससे छात्रों और फ्रेशर्स को एक सामान्य आइडिया मिल सके:
| अनुभव | अनुमानित औसत वार्षिक वेतन (INR) |
| 0 – 1 साल | INR 4 लाख |
| 1 साल – 3 साल | INR 12.2 लाख |
| 3 साल – 6 साल | INR 15.3 लाख |
| 6 साल – 9 साल | INR 53.5 लाख |
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न्यूरोलॉजिस्ट के रूप में करियर स्कोप
भारत और विश्वभर में न्यूरोलॉजिकल विकारों की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए, न्यूरोलॉजिस्ट की मांग लगातार बढ़ रही है। न्यूरोलॉजिस्ट विभिन्न सेटिंग्स में काम कर सकते हैं – सरकारी और निजी अस्पतालों में, विशेष न्यूरोलॉजी क्लीनिक्स में या अपना खुद का प्रैक्टिस शुरू कर सकते हैं। मेडिकल कॉलेजों और अनुसंधान संस्थानों में शिक्षण और अनुसंधान के अवसर भी उपलब्ध हैं। कुछ न्यूरोलॉजिस्ट फार्मास्युटिकल कंपनियों या स्वास्थ्य सेवा उद्योग में सलाहकार के रूप में भी काम करते हैं।
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सरकारी क्षेत्र में न्यूरोलॉजिस्ट बनने के अवसर
भारत में AIIMS, PGIMER, JIPMER, ESIC अस्पताल, राज्य मेडिकल कॉलेज और जिला सुपर-स्पेशलिटी अस्पतालों में न्यूरोलॉजिस्ट बनने के अच्छे मौके हैं। DM न्यूरोलॉजी पूरी करने के बाद UPSC CMS, राज्य PSC या सीधी भर्ती के माध्यम से इन संस्थानों में शामिल हो सकते हैं। सरकारी न्यूरोलॉजिस्ट का वेतन 7वें वेतन आयोग के अनुसार लेवल 11-13 पे-स्केल (बेसिक और भत्ते मिलाकर लगभग INR 1,18,000 – INR 2,15,000) होता है, जो संस्थान और आपके पद पर विशेष रूप से निर्भर करता है।
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FAQs
न्यूरोलॉजी में स्पेशलाइजेशन के लिए MBBS के बाद MD मेडिसिन/DNB मेडिसिन की पढ़ाई करें, जिसके लिए 3 साल का समय लगता है। इसके बाद DM न्यूरोलॉजी/DNB न्यूरोलॉजी के लिए NEET‑PG/NEET‑SS परीक्षा पास करें। DM न्यूरोलॉजी आमतौर पर 3 साल की होती है। इस दौरान आपको न्यूरोलॉजी संबंधित प्रशिक्षण और क्लिनिकल एक्सपीरियंस मिलता है।
नहीं, न्यूरोलॉजिस्ट सारी नर्वस सिस्टम से जुड़ी बीमारियाँ जैसे – पार्किन्सन, माइलाइटिस, न्यूरोपैथी, स्ट्रोक के बाद रिकवरी, माइग्रेन, एड्स के न्यूरोलॉजिकल प्रभाव आदि को देखते हैं।
न्यूरोलॉजिस्ट नर्वस सिस्टम रोगों का इलाज दवाओं और थेरपी से करता है। जबकि न्यूरोसर्जन का काम सर्जरी (जैसे ब्रेन ट्यूमर ऑपरेशन, स्पाइनल सर्जरी) करना होता है। दोनों की प्रैक्टिस अलग होती है। न्यूरोलॉजिस्ट MD/DM करता है, जबकि न्यूरोसर्जन MS / M.Ch कोर्स के माध्यम से होता है।
हाँ, विदेश में न्यूरोलॉजिस्ट बना जा सकता है लेकिन हर देश का अपना मेडिकल लाइसेंस सिस्टम होता है, जैसे – USA में न्यूरोलॉजिस्ट बनने के लिए USMLE के सभी स्टेप्स क्लियर करने होते हैं, फिर रेजीडेंसी और बोर्ड सर्टिफिकेशन पूरा करना पड़ता है। वहीं UK और कनाडा में PLAB या MCCQE जैसी लाइसेंस परीक्षाएं देनी होती हैं, उसके बाद रेजीडेंसी ट्रेनिंग अनिवार्य होती है।
भारत में प्रवेश NEET PG के माध्यम से होता है, जिसके ज़रिये आप MD/MDS कोर्स में दाखिला पाते हैं। MD की बाद DM/DNB न्यूरोलॉजी स्पेशलिटी में इंटरव्यू/काउंसलिंग आधारित सीटें मिलती हैं। अलग-अलग संस्थानों के लिए क्वालिफिकेशन कट-ऑफ, रैंक और काउंसलिंग अलग हो सकते हैं। कुछ सरकारी कॉलेजों में स्टेट बेसिस, कुछ में ऑल इंडिया काउंसलिंग होती है। इसलिए रैंक, स्कोर और तैयारी रणनीति बहुत मायने रखती है।
नहीं, 12वीं के बाद सीधे न्यूरोलॉजिस्ट नहीं बना जा सकता क्योंकि यह सुपर-स्पेशलिटी डॉक्टर की श्रेणी है। सबसे पहले छात्र को PCB के साथ 12वीं पास करके NEET-UG के माध्यम से MBBS में प्रवेश लेना होता है। MBBS के बाद PG (MD/जनरल मेडिसिन) करना आवश्यक है, और उसके बाद ही DM न्यूरोलॉजी जैसे सुपर-स्पेशलिटी कोर्स में प्रवेश मिलता है। DM न्यूरोलॉजी पूरा करने पर ही व्यक्ति न्यूरोलॉजिस्ट बनता है।
अगर आप न्यूरोलॉजिस्ट के रूप में करियर की शुरुआत करने का विचार कर रहे हैं, तो उम्मीद है यह गाइड आपको सही दिशा समझने में मददगार रही होगी। ऐसे ही करियर से जुड़े और विषयों पर जानकारी के लिए आप Leverage Edu के दूसरे लेख भी देख सकते हैं।

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