Motivational Stories in Hindi

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Motivational Books in Hindi

जीवन में प्रेरणादायक कहानियों (Motivational Stories In Hindi) का  एक अलग ही महत्व होता है। जीवन में अक्सर ऐसे क्षण आते हैं, जब हम स्वयं को निराशा के भंवर में फंसा पाते हैं । ऐसे में किसी के बोले गए प्रेरक शब्द या कहीं लिखे प्रेरक वाक्य या फिर प्रेरणादायक कहानियाँ (Motivational Stories in Hindi) हमें निराशा के उस भंवर से बाहर निकालकर नए जोश का संचार करती हैं। इसी प्रकार के Motivational Stories In Hindi कई सारे उदाहरण के साथ आपको इस ब्लॉग में मिलेंगे। हमें जीवन में कभी भी हार नहीं माननी चाहिए , हमेशा मुश्किलों का सामना करना चाहिए। तो आइए पढ़ते हैं Motivational Stories In Hindi Leverage Edu के साथ।

How to Become a Motivational Speaker?

Motivational Story Kya Hoti Hai (मोटिवेशनल स्टोरी क्या होती है?)

मोटिवेशनल स्टोरी का अर्थ होता है कि ऐसी कहानी है जिसे पढ़कर हमारे अंदर जागरूकता आ जाती है। हमारा मन प्रफुल्लित हो जाता है, मुश्किलें के सामने लड़ने की ताकत आती है। हर किसी के जीवन में मुश्किलें आती है, परंतु हमें कभी भी हार नहीं मानना चाहिए। इसी प्रकार इस ब्लॉग में कई सारे मोटिवेशनल स्टोरी के बारे में बताया गया है जिसे पढ़कर आपके अंदर एक अलग प्रकार की जागरूकता आ जाएगी।

आखिरी प्रयास

एक समय की बात है. एक राज्य में एक प्रतापी राजा राज करता था. एक दिन उसके दरबार में एक विदेशी आगंतुक आया और उसने राजा को एक सुंदर पत्थर उपहार स्वरूप प्रदान किया। राजा वह पत्थर देख बहुत प्रसन्न हुआ. उसने उस पत्थर से भगवान विष्णु की प्रतिमा का निर्माण कर उसे राज्य के मंदिर में स्थापित करने का निर्णय लिया और प्रतिमा निर्माण का कार्य राज्य के महामंत्री को सौंप दिया।

महामंत्री गाँव के सर्वश्रेष्ठ मूर्तिकार के पास गया और उसे वह पत्थर देते हुए बोला, “महाराज मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करना चाहते हैं. सात दिवस के भीतर इस पत्थर से भगवान विष्णु की प्रतिमा तैयार कर राजमहल पहुँचा देना. इसके लिए तुम्हें ५० स्वर्ण मुद्रायें दी जायेंगी।” ५० स्वर्ण मुद्राओं की बात सुनकर मूर्तिकार ख़ुश हो गया और महामंत्री के जाने के उपरांत प्रतिमा का निर्माण कार्य प्रारंभ करने के उद्देश्य से अपने औज़ार निकाल लिए. अपने औज़ारों में से उसने एक हथौड़ा लिया और पत्थर तोड़ने के लिए उस पर हथौड़े से वार करने लगा. किंतु पत्थर जस का तस रहा. मूर्तिकार ने हथौड़े के कई वार पत्थर पर किये. किंतु पत्थर नहीं टूटा.

पचास बार प्रयास करने के उपरांत मूर्तिकार ने अंतिम बार प्रयास करने के उद्देश्य से हथौड़ा उठाया, किंतु यह सोचकर हथौड़े पर प्रहार करने के पूर्व ही उसने हाथ खींच लिया कि जब पचास बार वार करने से पत्थर नहीं टूटा, तो अब क्या टूटेगा। वह पत्थर लेकर वापस महामंत्री के पास गया और उसे यह कह वापस कर आया कि इस पत्थर को तोड़ना नामुमकिन है. इसलिए इससे भगवान विष्णु की प्रतिमा नहीं बन सकती। महामंत्री को राजा का आदेश हर स्थिति में पूर्ण करना था। इसलिए उसने भगवान विष्णु की प्रतिमा निर्मित करने का कार्य गाँव के एक साधारण से मूर्तिकार को सौंप दिया। पत्थर लेकर मूर्तिकार ने महामंत्री के सामने ही उस पर हथौड़े से प्रहार किया और वह पत्थर एक बार में ही टूट गया। पत्थर टूटने के बाद मूर्तिकार प्रतिमा बनाने में जुट गया. इधर महामंत्री सोचने लगा कि काश, पहले मूर्तिकार ने एक अंतिम प्रयास और किया होता, तो सफ़ल हो गया होता और ५० स्वर्ण मुद्राओं का हक़दार बनता।

सीख

मित्रों, हम भी अपने जीवन में ऐसी परिस्थितियों से दो-चार होते रहते हैं. कई बार किसी कार्य को करने के पूर्व या किसी समस्या के सामने आने पर उसका निराकरण करने के पूर्व ही हमारा आत्मविश्वास डगमगा जाता है और हम प्रयास किये बिना ही हार मान लेते हैं. कई बार हम एक-दो प्रयास में असफलता मिलने पर आगे प्रयास करना छोड़ देते हैं. जबकि हो सकता है कि कुछ प्रयास और करने पर कार्य पूर्ण हो जाता या समस्या का समाधान हो जाता. यदि जीवन में सफलता प्राप्त करनी है, तो बार-बार असफ़ल होने पर भी तब तक प्रयास करना नहीं छोड़ना चाहिये, जब तक सफ़लता नहीं मिल जाती. क्या पता, जिस प्रयास को करने के पूर्व हम हाथ खींच ले, वही हमारा अंतिम प्रयास हो और उसमें हमें कामयाबी प्राप्त हो जाये।

शिकंजी का स्वाद

एक प्रोफ़ेसर क्लास ले रहे थे. क्लास के सभी छात्र बड़ी ही रूचि से उनके लेक्चर को सुन रहे थे. उनके पूछे गये सवालों के जवाब दे रहे थे. लेकिन उन छात्रों के बीच कक्षा में एक छात्र ऐसा भी था, जो चुपचाप और गुमसुम बैठा हुआ था। प्रोफ़ेसर ने पहले ही दिन उस छात्र को नोटिस कर लिया, लेकिन कुछ नहीं बोले. लेकिन जब ४-५ दिन तक ऐसा ही चला, तो उन्होंने उस छात्र को क्लास के बाद अपने केबिन में बुलवाया और पूछा, “तुम हर समय उदास रहते हो. क्लास में अकेले और चुपचाप बैठे रहते हो. लेक्चर पर भी ध्यान नहीं देते. क्या बात है? कुछ परेशानी है क्या?”

“सर, वो…..” छात्र कुछ हिचकिचाते हुए बोला, “….मेरे अतीत में कुछ ऐसा हुआ है, जिसकी वजह से मैं परेशान रहता हूँ. समझ नहीं आता क्या करूं?” प्रोफ़ेसर भले व्यक्ति थे. उन्होंने उस छात्र को शाम को अपने घर पर बुलवाया। शाम को जब छात्र प्रोफ़ेसर के घर पहुँचा, तो प्रोफ़ेसर ने उसे अंदर बुलाकर बैठाया. फिर स्वयं किचन में चले गये और शिकंजी बनाने लगे. उन्होंने जानबूझकर शिकंजी में ज्यादा नमक डाल दिया।

फिर किचन से बाहर आकर शिकंजी का गिलास छात्र को देकर कहा, “ये लो, शिकंजी पियो। ”छात्र ने गिलास हाथ में लेकर जैसे ही एक घूंट लिया, अधिक नमक के स्वाद के कारण उसका मुँह अजीब सा बन गया. यह देख प्रोफ़ेसर ने पूछा, “क्या हुआ? शिकंजी पसंद नहीं आई?” “नहीं सर, ऐसी बात नहीं है. बस शिकंजी में नमक थोड़ा ज्यादा है.” छात्र बोला। “अरे, अब तो ये बेकार हो गया. लाओ गिलास मुझे दो. मैं इसे फेंक देता हूँ.” प्रोफ़ेसर ने छात्र से गिलास लेने के लिए अपना हाथ बढ़ाया. लेकिन छात्र ने मना करते हुए कहा, “नहीं सर, बस नमक ही तो ज्यादा है. थोड़ी चीनी और मिलायेंगे, तो स्वाद ठीक हो जायेगा।” यह बात सुन प्रोफ़ेसर गंभीर हो गए और बोले, “सही कहा तुमने. अब इसे समझ भी जाओ. ये शिकंजी तुम्हारी जिंदगी है. इसमें घुला अधिक नमक तुम्हारे अतीत के बुरे अनुभव है. जैसे नमक को शिकंजी से बाहर नहीं निकाल सकते, वैसे ही उन बुरे अनुभवों को भी जीवन से अलग नहीं कर सकते. वे बुरे अनुभव भी जीवन का हिस्सा ही हैं. लेकिन जिस तरह हम चीनी घोलकर शिकंजी का स्वाद बदल सकते हैं. वैसे ही बुरे अनुभवों को भूलने के लिए जीवन में मिठास तो घोलनी पड़ेगी ना. इसलिए मैं चाहता हूँ कि तुम अब अपने जीवन में मिठास घोलो।” प्रोफ़ेसर की बात छात्र समझ गया और उसने निश्चय किया कि अब वह बीती बातों से परेशान नहीं होगा।

सीख

जीवन में अक्सर हम अतीत की बुरी यादों और अनुभवों को याद कर दु:खी होते रहते हैं. इस तरह हम अपने वर्तमान पर ध्यान नहीं दे पाते और कहीं न कहीं अपना भविष्य बिगाड़ लेते हैं. जो हो चुका, उसे सुधारा नहीं जा सकता. लेकिन कम से कम उसे भुलाया तो जा सकता है और उन्हें भुलाने के लिए नई मीठी यादें हमें आज बनानी होगी. जीवन में मीठे और ख़ुशनुमा लम्हों को लाइये, तभी तो जीवन में मिठास आयेगी. 

शार्क और चारा मछलियाँ

अपने शोध के दौरान एक समुद्री जीवविज्ञानी ने पानी से भरे एक बड़े टैंक में शार्क को डाला. कुछ देर बाद उसने उसमें कुछ चारा मछलियाँ डाल दी। चारा मछलियों को देखते ही शार्क (Shark) तुरंत तैरकर उनकी ओर गई और उन पर हमला कर उन्हें खा लिया. समुद्री जीवविज्ञानी ने कुछ और चारा मछलियाँ (Bait Fishes) टैंक में डाली और वे भी तुरंत शार्क का आहार बन गई। अब समुद्री जीवविज्ञानी ने एक कांच का मजबूत पारदर्शी टुकड़ा उस टैंक के बीचों-बीच डाल दिया. अब टैंक दो भागों में बंट चुका था. एक भाग में शार्क थी. दूसरे भाग में उसने कुछ चारा मछली डाल दी। विभाजक पारदर्शी कांच से शार्क चारा मछलियाँ को देख सकती थी. चारा मछलियों के देख शार्क फिर से उन पर हमला करने के लिए उस ओर तैरी. लेकिन कांच के विभाजक टुकड़े से टकरा कर रह गई. उसने फिर से कोशिश की. लेकिन कांच के टुकड़े के कारण वह चारा मछलियों तक नहीं पहुँच सकी।

शार्क ने दर्जनों बार पूरी आक्रामकता के साथ चारा मछलियों पर हमला करने की कोशिश की. लेकिन बीच में कांच का टुकड़ा आ जाने के कारण वह असफल रही. कई दिनों तक शार्क उन कांच के विभाजक के पार जाने का प्रयास करती रही. लेकिन सफल न हो सकी. अंततः थक-हारकर उसने एक दिन हमला करना छोड़ दिया और टैंक के अपने भाग में रहने लगी। कुछ दिनों बाद समुद्री जीवविज्ञानी ने टैंक से वह कांच का विभाजक हटा दिया. लेकिन शार्क ने कभी उन चारा मछलियों पर हमला नहीं किया क्योंकि एक काल्पनिक विभाजक उसने दिमाग में बस चुका था और उसने सोच लिया था कि वह उसे पार नहीं कर सकती।

सीख

जीवन में असफ़लता का सामना करते-करते कई बार हम अंदर से टूट जाते हैं और हार मान लेते हैं. हम सोच लेते हैं कि अब चाहे कितनी भी कोशिश कर लें, सफ़लता हासिल करना नामुमकिन है और उसके बाद हम कभी कोशिश ही नहीं करते। जबकि सफ़लता प्राप्ति के लिए अनवरत प्रयास आवश्यक है। परिस्तियाँ परिस्थितियाँ बदलती रहती हैं। इसलिये अतीत की असफ़लता को दिमाग पर हावी न होने दें और पूरी लगन से फिर मेहनत करें। सफलता आपके कदम चूमेगी।

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इंद्रा नूयी

Motivational Stories in Hindi
Source: Wikipedia

ऐसे समय में जहां भारतीय लड़कियों को केवल शादी करने के लिए पर्याप्त सिखाया जाता था, इंद्र नूयी सभी बाधाओं को तोड़ रहे थे और दुनिया को जीतने की तैयारी कर रहे थे। नूयी ने विज्ञान में स्नातक की डिग्री के साथ अपना करियर शुरू किया और दुनिया के सबसे बड़े निगमों में से एक, पेप्सिको की पहली महिला सीईओ बनीं। उन्होंने व्यवसाय और कॉर्पोरेट जगत में कई भारतीय महिलाओं के लिए मार्ग प्रशस्त किया। आइए इंदिरा नूई और उनकी अविश्वसनीय सफलता की कहानी के बारे में अधिक पढ़ें!

इंद्रा नूयी के बारे में

इंद्रा नूयी (पूर्व-विवाह: इंद्र कृष्णमूर्ति) का जन्म 28 अक्टूबर, 1955 को तमिलनाडु के मद्रास या चेन्नई शहर में हुआ था। वह एक प्रसिद्ध भारतीय-अमेरिकी व्यवसायी हैं, जिन्होंने बहुराष्ट्रीय निगम पेप्सिको के पूर्व अध्यक्ष (2007- 19) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी या सीईओ (2006- 18) के रूप में कार्य किया है।

इंद्रा नूयी का अद्भुत करियर

इंद्र नूयी ने कम उम्र में काम करना शुरू कर दिया था और जितना संभव हो उतना ज्ञान प्राप्त करने और जीवन के अवसर को जब्त करने के लिए दृढ़ विश्वास था। इंद्रा नूयी ने भारत में अपने करियर की शुरुआत जॉनसन एंड जॉनसन और मेट्टूर बेयर्डसेल के लिए एक उत्पाद प्रबंधक के रूप में की, जो एक कपड़ा कंपनी है। उन्होंने अमेरिका में येल स्कूल ऑफ मैनेजमेंट में भाग लेने के दौरान Booz एलन हैमिल्टन के साथ एक ग्रीष्मकालीन इंटर्नशिप भी पूरी की। 1980 के बाद, नूयी ने अगले छह वर्षों के लिए बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप के लिए एक रणनीति सलाहकार के रूप में कार्य किया। बाद में उसने मोटोरोला इंक के लिए कॉर्पोरेट रणनीति और योजना के उपाध्यक्ष और निदेशक के रूप में काम किया। बाद में वह इंजीनियरिंग फर्म Asea Brown Boveri (अब ABB) के लिए काम करने लगी।

Motivational Poems in Hindi

पेप्सीको

इंद्रा नूयी 1994 में पेप्सिको में कॉर्पोरेट रणनीति और विकास के वरिष्ठ उपाध्यक्ष बने। वह 2001 में कंपनी के अध्यक्ष और मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) बने। अक्टूबर 2006 में, उनकी कड़ी मेहनत, दूरदर्शिता, रणनीतिक संरेखण और व्यावसायिक अनुभव ने उन्हें जीत दिलाई। सीईओ का शीर्षक और अगले वर्ष, वह बोर्ड की अध्यक्ष भी बनीं। कंपनी के 42 साल के अस्तित्व में वह पेप्सिको की पांचवीं अध्यक्ष और सीईओ थीं। 

यह कहते हुए कि, नूयी सॉफ्ट-ड्रिंक और स्नैक-फूड समूह का नेतृत्व करने वाली पहली महिला थीं और फॉर्च्यून 500 में केवल 11 महिला सीईओ में से एक थीं। दुनिया भर के कई उल्लेखनीय हस्तियों, संपादकों, कंपनी हितधारकों और रणनीतिकारों ने प्रशंसा की और प्रशंसा की। उसकी क्षमताओं, साथ ही नए दृष्टिकोण और दृष्टि को वह पेप्सिको में लाया। पेप्सीको की अपने प्रमुख शीतल पेय की बिक्री पर कम निर्भरता के साथ एक अच्छी तरह से संतुलित उपभोक्ता-उत्पाद कंपनी होने की नीति नूई द्वारा जारी रखी गई थी। उसने सख्ती के साथ विदेशी विस्तार भी मांगा। 

पेप्सीको का राजस्व 2006 में 35 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2017 में लगभग 63.5 बिलियन डॉलर हो गया और उसके कार्यकाल में सालाना शुद्ध लाभ 2.7 बिलियन डॉलर से बढ़कर 6.5 बिलियन डॉलर हो गया। यह सब उसके निरंतर और सुसंगत नेतृत्व के कारण संभव हो पाया। एक दशक से अधिक समय तक, नूयी ने पेप्सीको की वैश्विक रणनीति और परिवर्तन का नेतृत्व किया, जिसमें 1997 के ट्रिकॉन को शामिल किया गया, जिसे अब यम कहा जाता है! ब्रांड, जिसमें पिज्जा हट, केएफसी और टैको बेल शामिल हैं। उन्होंने 1998 में ट्रॉपिकाना के अधिग्रहण का नेतृत्व किया और गेटोरेड के साथ 2001 में क्वेकर ओट्स कंपनी के साथ विलय कर दिया, जिससे पेप्सिको को प्रतिस्पर्धी लाभ प्राप्त करने की अनुमति मिली।

6 अगस्त, 2018 को, नूयी ने सीईओ के रूप में कदम रखा, और 3. अक्टूबर को 22 साल के पेप्सिको के एक दिग्गज रेमन लागुर्ता, जो निदेशक मंडल में भी शामिल हुए, ने उनकी जगह ली। दूसरी ओर, नूयी 2019 की शुरुआत तक कंपनी के अध्यक्ष बने रहे। वह वर्तमान में अमेज़ॅन और अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के निदेशक मंडल के सदस्य भी हैं।

Education Quotes in Hindi

उपलब्धियां और मान्यता 

इसमें कोई सवाल नहीं है कि इंद्र नूयी एक जीवित प्रभावकार और एक प्रेरणादायक व्यक्ति हैं जिन्होंने भारत और इसकी प्रतिष्ठा को लगातार ऊंचा किया है। 

  • उन्हें नियमित रूप से दुनिया की शीर्ष 100 सबसे प्रभावशाली महिलाओं में स्थान दिया गया है। 
  • 2014 में फोर्ब्स की विश्व की 100 सबसे शक्तिशाली महिलाओं की सूची में उन्हें 13 वां स्थान दिया गया था। 
  • 2009 और 2010 में, फॉर्च्यून ने उन्हें व्यवसाय में सबसे शक्तिशाली महिला का नाम दिया।
  • उन्हें 2015 और 2017 में दो बार सूची में दूसरी सबसे शक्तिशाली महिला नामित किया गया था। 
  • उन्हें 2007 और 2008 में वॉल स्ट्रीट जर्नल की 50 महिलाओं की सूची में नामित किया गया था, साथ ही दुनिया में टाइम के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों पर भी। 
  • नूयी को 2013 में NDTV के “25 ग्रेटेस्ट ग्लोबल लिविंग लीजेंड्स” में से एक नामित किया गया था।  
  • भारत के पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय श्री अब्दुल कलाम ने 2007 में राष्ट्रपति भवन में उन्हें पद्म भूषण के प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया था। 
  • CEOWORLD पत्रिका ने 2018 में नूयी को “विश्व में सर्वश्रेष्ठ सीईओ” कहा है। 
  • इंद्र नूयी को 2019 में कनेक्टिकट डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक एंड कम्युनिटी डेवलपमेंट के साथ सार्वजनिक-निजी सहयोग से कनेक्टिविटी इकोनॉमिक रिसोर्स सेंटर का सह-निदेशक नियुक्त किया गया था। 
  • कनेक्टिकट की महिला वोटरों की लीग ने फरवरी 2020 में नूयी को आउटस्टैंडिंग वुमन इन बिजनेस अवार्ड से सम्मानित किया।

UPSC Motivational Quotes in Hindi

नेल्सन मंडेला

Education Quotes in Hindi

दुनिया की सबसे बड़ी हस्तियों में से एकऔर विस्मयकारी नेताओं, नेल्सन मंडेला ने क्रांति को एक नया अर्थ दिया। रंगभेद के साथ देश की लंबी लड़ाई के बाद दक्षिण अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति चुने जाने के बाद, वह उन लोगों के लिए एक नई सुबह की शुरुआत थी, जिन्होंने इसकी सबसे खराब अभिव्यक्ति में दुर्भाग्य का सामना किया था। जीवन के लिए एक उत्साही उत्साह और एक मुस्कुराते हुए चेहरे के साथ, वह रंगभेद के खिलाफ अपनी लड़ाई में सामंजस्य बनाने के लिए एक ताकत बन गया। अमेरिका को भारी उथल-पुथल का सामना करना पड़ रहा है और नस्लीय भेदभाव के खिलाफ सक्रिय रूप से विरोध कर रहा है, काले लोगों को अभी भी एक दुनिया में समान रूप से देखने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है जो त्वचा के रंग जैसे एक पैलेट्री मुद्दे पर भेदभाव करता है। इस ब्लॉग के माध्यम से, हम नेल्सन मंडेला की शिक्षा की यात्रा का पता लगाने का लक्ष्य रखते हैं, उन्होंने अपने देश के दमनकारी श्वेत शासन के खिलाफ क्रांति का नेतृत्व किया, और जो सबक हम उनसे सीख सकते हैं वह सभी के लिए एक बेहतर और समान दुनिया बनाने के लिए है!

“कोई भी व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति से उसकी त्वचा, या उसकी पृष्ठभूमि, या उसके धर्म के रंग के कारण घृणा पैदा नहीं करता है। लोगों को नफरत करना सीखना चाहिए, और अगर वे नफरत करना सीख सकते हैं, तो उन्हें प्यार करना सिखाया जा सकता है, क्योंकि प्यार इसके विपरीत मानव हृदय में स्वाभाविक रूप से अधिक आता है। ”

नेल्सन मंडेला, दक्षिण अफ्रीका के रंगभेद विरोधी हीरो

एक सामाजिक अधिकार कार्यकर्ता, रंगभेद विरोधी नेता और परोपकारी, नेल्सन मंडेला ने उल्लेखनीय रूप से अपने देश के सफेद उत्पीड़न से मुक्ति पाने में लंबे समय तक योगदान दिया। लेकिन उस समय के अन्य क्रांतिकारियों से उन्हें अलग करने के लिए, दक्षिण अफ्रीका की सरकार और उनकी नस्लभेद नीति के खिलाफ उनकी अहिंसक और उद्दंड अभियान था। वर्तमान समय में भी, वह एक ऐसी दुनिया में एक प्रेरणा बनी हुई है जहाँ पश्चिमी देश अभी भी अश्वेत समुदाय के लिए समान अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं।

अपने देश की स्वतंत्रता में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए और मानवाधिकार अधिवक्ता के रूप में उनके सराहनीय प्रयासों के लिए, नेल्सन मंडेला को 1993 में सम्मानित नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया और गांधी शांति पुरस्कार और लेनिन शांति पुरस्कार जैसी प्रशंसाओं के साथ उनकी प्रशंसा की गई। नेल्सन मंडेला ने अपने शुरुआती जीवन और रंगभेद के खिलाफ संघर्ष के बारे में विस्तार से लिखा। उनकी आत्मकथा ‘ लॉन्ग वॉक टू फ्रीडम ‘ उनके जीवन का एक कालक्रम है और उन्होंने जेल में बिताए वर्षों को आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना कि नस्लीय भेदभाव के खिलाफ लड़ा गया था।

“मैंने सीखा कि साहस डर की अनुपस्थिति नहीं है, बल्कि इस पर विजय है। बहादुर आदमी वह नहीं है जिसे डर नहीं लगता, बल्कि वह जो उस डर पर विजय प्राप्त करता है। ”

नेल्सन मंडेला से सीखने के लिए जीवन का सबक

सोने का दिल और जीवन के आंकड़े से बड़ा, नेल्सन मंडेला आज भी दुनिया भर के लोगों को प्रेरित करता है। ब्रिटिश शिक्षा प्रणाली की परिधि में बिताए गए अपने औपचारिक शैक्षणिक वर्षों में आदिवासी परंपरा, संस्कृतियों और मान्यताओं में निहित नेल्सन मंडेला की औपचारिक शिक्षा के साथ, यह उनकी दृष्टि और मूल्य थे जिन्होंने उन्हें राष्ट्र के प्रयासों में योगदान करने का साहस दिया। सफेद जुल्म से आजादी। नीचे हमने नेल्सन मंडेला के जीवन की कहानी से महत्वपूर्ण जीवन सबक को सूचीबद्ध किया है:

  • एक आशावादी बनें : यहां तक ​​कि सबसे अंधेरे समय में, नेल्सन मंडेला ने आशा नहीं खोई और एक दिन आगे देखा कि उनका देश वास्तव में नस्लीय अलगाव से मुक्त होगा। आपको जीवन में हमेशा आशान्वित रहना चाहिए चाहे आप पर परिस्थितियां कुछ भी क्यों न हों और यह जान लें कि आप इसे आशा और आशावाद के साथ बनाएंगे। 
  • विश्व के लिए एक अंतर बनाना : नेल्सन मंडेला का जीवन उन रूढ़िवादी मान्यताओं को बदलने और बिखरने के प्रयास को समझने के लिए एक अग्रणी उदाहरण है जो अब समाज की सेवा नहीं करते हैं। श्वेत लोगों की दमनकारी दुनिया में क्रांति लाने और वंचित समुदायों की मौजूदगी के बारे में जानने के लिए आपको उनके अथक प्रयासों से सीखना चाहिए।
  • कुछ भी असंभव नहीं है : नेल्सन मंडेला ने हमेशा माना है कि जीवन चमत्कारों से भरा है और इन चमत्कारों को केवल एक व्यक्ति की कड़ी मेहनत के साथ असंभव में बदलने के लिए लाया जा सकता है।
  • पैशनेट रहें : लक्ष्य हासिल करने के लिए सपने देखना एकमात्र कदम नहीं है, इसके लिए कड़ी मेहनत और लगन की जरूरत है। नेल्सन मंडेला का जीवन इस पाठ को दोहराने का कार्य करता है क्योंकि वह खुद को देश के स्वतंत्रता संग्राम में समर्पित करने के लिए भावुक थे।
  • परम भूमिका शिक्षा : नेल्सन मंडेला की शिक्षा ब्रिटिश शिक्षा प्रणाली के तहत किया गया था, लेकिन वह धीरे-धीरे अफ्रीकी इतिहास की दिशा में अधिक भावुक हो गया। उनकी अंग्रेजी-भाषा की शिक्षा ने उनके समुदाय के इतिहास के संदर्भ में उनमें अपर्याप्तता की भावना को बढ़ावा दिया और वे कैसे सफेद शासन के तहत लगातार दमित थे। इसने उन्हें सामाजिक विद्रोह में भाग लेने के लिए बहुत प्रेरित किया और यहां तक ​​कि अपने जेल के वर्षों के दौरान, उन्होंने खुद को शिक्षित करना जारी रखा क्योंकि उन्होंने जेल की फंसी हुई दुनिया से भागने के रूप में सीखना देखा।

100 Motivational Quotes in Hindi

मनीष मल्होत्रा

सिर्फ 500 रुपये की कमाई से लेकर स्टाइलिंग वर्ल्ड स्टार्स तक, यहां की जर्नी है मनीष मल्होत्रा ​​की

“इस साल, मैं उद्योग में 30 साल पूरे करूँगा। लेकिन एक चीज़ जो नहीं बदली है, वह यह है कि इस समय के बाद भी, मैं अभी भी फैशन शो से पहले घबरा जाती हूँ! और मैं चाहता हूं कि वह वही रहे, क्योंकि वह मेरी पहचान है-यह मुझे याद दिलाता है कि मैं कौन हूं, मैं कहां से आया हूं और क्या करने वाला हूं। ” – मनीष मल्होत्रा, बॉम्बे के आधिकारिक मनुष्यों के साथ एक साक्षात्कार में

हम सभी एक दिन मनीष मल्होत्रा ​​द्वारा डिज़ाइन किए गए पोशाक पहनने का सपना देखते हैं और बॉलीवुड और फैशन उद्योग पर उनका प्रभाव वास्तव में प्रेरणादायक है। यहां तक ​​कि जो लोग मुश्किल से फैशन का पालन करते हैं, वे प्रसिद्ध बॉलीवुड डिजाइनर के रूप में उनका नाम जानते हैं। लेकिन हम में से कुछ ही इस सफलता की कहानी के पीछे के संघर्ष को जानते हैं। 53 वर्षीय फैशन डिजाइनर ने भारत में बॉलीवुड सितारों की चार पीढ़ियों को स्टाइल किया है। वह फैशन में अपनी अनूठी शैली और स्वाद के लिए जाने जाते हैं। लेकिन जब यह फैशन मोगुल अपने सपनों का पीछा करने के लिए मुंबई आया, तो उसने जो सबसे अच्छा काम किया, वह रु। 

प्रारंभिक जीवन

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Source: Wikipedia

मनीष मल्होत्रा ​​का जन्म एक ठेठ पंजाबी परिवार में हुआ था, जो प्यार करने वाले माता-पिता थे जिन्होंने उनके सपनों में उनका साथ दिया। उन्होंने जीवन में बहुत पहले ही अपने करियर के बीज बोना शुरू कर दिया था। बॉम्बे के ऑफिशियल ह्यूमन्स के साथ एक साक्षात्कार में , मल्होत्रा ​​ने बचपन से लेकर आज तक के जीवन की कहानी साझा की।

मैं एक सामान्य पंजाबी घराने में पला-बढ़ा हूँ, जहाँ मेरी माँ ने मुझे हमेशा वह सब करने के लिए प्रोत्साहित किया जो मैं करना चाहता था। बड़े होकर, मैं हमेशा बॉलीवुड फिल्मों पर मोहित था और यह हर एक फिल्म को देखने का एक बिंदु बना। लेकिन मैं एक बहुत अच्छा छात्र नहीं था और शिक्षाविदों को उबाऊ पाया।

6 वीं कक्षा में, मुझे एक पेंटिंग क्लास में शामिल होना याद है-मुझे इसमें बहुत मजा आया! फिल्में देखने से लेकर पेंटिंग बनाने और मां के कपड़ों से घिरे रहने के कारण मेरा फैशन के प्रति प्यार बढ़ता गया। मैं अपनी माँ को अपनी साड़ियों पर फैशन की सलाह भी देती थी! जब मैं कॉलेज में आया, तो मैंने मॉडलिंग शुरू की, और एक बुटीक में काम करना शुरू किया। ”

स्टार्ट बॉलीवुड के लिए बना रही है!

मल्होत्रा ​​को याद है कि एक फैशन बुटीक में उनकी पहली सैलरी महज 500 रुपये प्रति माह थी और इस दौरान अधिक कमाई करने के लिए, वह अपने कॉलेज के वर्षों के समय में मॉडलिंग भी कर रहे थे। उन्होंने कभी भी फैशन डिज़ाइन में पेशेवर प्रशिक्षण प्राप्त नहीं किया क्योंकि वे वित्तीय स्थिति के कारण विदेश में अध्ययन नहीं कर सकते थे। उन्होंने अपने मॉडलिंग जिग्स और बुटीक में समय के माध्यम से सब कुछ सीखा और डिजाइनिंग को पूरा करने के लिए घंटों तक स्केच किया।

बॉलीवुड का पहला बिग-ब्रेक

आखिरकार, 23 साल की उम्र में, उन्हें अभिनेत्री जूही चावला के साथ अपना बड़ा ब्रेक मिला और कोई पीछे नहीं लौटा। इसके बाद, उन्होंने रंगीला के लिए वेशभूषा तैयार की, जो उन्हें चमचमाती महिला यानी ‘बेस्ट कॉस्ट्यूम के लिए फिल्मफेयर अवार्ड’ दिलाया। अपने पहले के दिनों में, निर्माता अक्सर उन्हें फिल्म के विचार के बारे में बहुत अधिक परेशान करने के लिए उनसे चिढ़ जाते थे, जो वास्तव में डिजाइनिंग के लिए उनकी प्रक्रिया का एक हिस्सा है। लेकिन नायिका को ‘ग्लैमरस’ बनाने के लिए उन्हें केवल एक ही जानकारी मिली। मल्होत्रा ​​अभी भी कॉस्ट्यूम डिज़ाइन के साथ आगे बढ़ने से पहले एक फिल्म के कथानक के बारे में जानने पर जोर देते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे उन्हें वही पुराने डिजाइनों से परे जाने में मदद मिलती है।

उपलब्धियां की एक अंतहीन सूची

मनीष मल्होत्रा ​​ने 2005 में अपना खुद का लेबल लॉन्च किया और हाल ही में फैशन उद्योग में तीन दशक पूरे किए। उन्होंने कई ब्लॉकबस्टर जैसे कि दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे, सत्या, ओम शांति ओम, दोस्ताना, रॉकस्टार, 2 स्टेट्स के लिए कई राज्यों के लिए डिजाइन किए हैं। उन्होंने खुद माइकल जैक्सन के लिए भी कपड़े डिजाइन किए हैं। उनके ब्रांड ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर केट मॉस, नाओमी कैंपबेल और काइली मिनोग जैसी हस्तियों को अपने आउटफिट पहनाया है। उन्होंने 2018 में माइलगैम के सहयोग से सौंदर्य प्रसाधनों का अपना संग्रह भी लॉन्च किया। वह सक्रिय रूप से चैरिटी, जागरूकता अभियानों और सेव द गर्ल चाइल्ड और CRY जैसे गैर सरकारी संगठनों के साथ काम कर रहे हैं।

अच्छे विद्यार्थी के 10 गुण

आर्यन गुलाटी

आर्यन गुलाटी, उन्होंने एक COVID-19 डिटेक्शन ऐप LugAI विकसित किया था

Motivational Stories in Hindi
Source: Times now hindi

2020 की सबसे आश्चर्यजनक और प्रेरणादायक बच्चों की कहानियों में से, आर्यन गुलाटी की मशीन लर्निंग (एमएल) प्रणाली का आविष्कार जिसे लुंगाई कहा जाता है, एक अभूतपूर्व है। दिल्ली पब्लिक स्कूल आरके पुरम में पढ़ने वाले बारहवीं कक्षा के एक छात्र, गुलाटी ने न केवल सीओवीआईडी ​​-19 बल्कि अन्य व्यापक और सबसे हानिकारक फेफड़ों की विसंगतियों जैसे फेफड़ों के कैंसर, निमोनिया, तपेदिक, आदि की पहचान करने के लिए इस ऐप को बनाया है। सॉफ्टवेयर जो 2020 में बच्चों की प्रेरक कहानियों में से एक है। इस एप्लिकेशन के विकास के लिए, आर्यन ने भारत के मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित अटमा निर्भार भारत आइडेंटन जीता। उसने जो सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन बनाया है वह 90% से अधिक की सटीकता प्रदान करेगा और छाती के एक्स-रे या सीटी स्कैन के 3-5 सेकंड के भीतर पहचान करेगा।

इसके अलावा, इसमें डायग्नोसिस के साथ-साथ तस्वीर को अलग-अलग मेडिकल पेशेवरों को ऑनलाइन भेजने का विकल्प भी है, जो वेबसाइट के लिए निर्मित स्वचालित संदेश प्रणाली के माध्यम से ऑनलाइन है, यदि उपयोगकर्ता दूसरी राय प्राप्त करना चाहता है, साथ ही संपर्क करने की संभावना भी है। यदि वे COVID-19 परीक्षण सुविधाओं की खोज कर रहे हैं तो क्षेत्र के अस्पताल।

सरकारी जॉब और प्राइवेट जॉब, किसका है ज्यादा फायदा

लाइट बैग ऐप के निर्माता 16 वर्षीय जिष्णु

2020 में बच्चों की प्रेरक कहानियों की हमारी सूची में एक और आवश्यक उल्लेख, जिष्णु बरुआ जो डिब्रूगढ़, असम से एक 16 वर्षीय किशोर है, ने एक लाइट बैग ऐप विकसित किया है जो बच्चों को उनके स्कूल बैग निकालने में मदद करता है। जब वह बालवाड़ी में गए, तो उन्होंने देखा कि बच्चे हर दिन स्कूल में भारी बैग लाने की कोशिश कर रहे हैं, और उन्हें उस समस्या को हल करने के लिए एक ऐप विकसित करने का विचार आया। 

व्हाइटहैट जूनियर के समर्थन के साथ, उन्होंने एक ऐप बनाया जो शिक्षकों को किताबों और नोटबुक के शीर्षकों को बदलने में मदद करता है जो छात्र को एक निश्चित दिन पर काम करने की आवश्यकता होती है। ऐप बैग में छात्र के वजन का अनुमान देता है, और बैग के वजन के आधार पर छात्र की निराशा को व्यक्त करने के लिए शिक्षकों के एनिमेशन को प्रदर्शित करता है। वजन माप के आधार पर, शिक्षकों को पुस्तकों की संख्या कम करनी चाहिए ताकि छात्र स्कूल में एक छोटा बैग ले जा सकें।

Source: Simerjeet Singh

स्टीव जॉब्स

“आपकी सफलता और खुशी आप में है” – हेलेन केलर। यह उद्धरण हमारे जीवन जीने के तरीके के बारे में बहुत कुछ कहता है। कई सारी Inspiring Success Stories नीचे दी गई है जो प्रेरक सफलता की कहानियों की एक सूची तैयार की है और उनकी यात्रा में सफलता और असफलता दोनों को इसमें कवर किया है।  

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Source: Pinterest

स्टीव जॉब्स उद्यमी समुदाय में सबसे प्रसिद्ध नामों में से एक है। उनकी कहानी दुनिया की सबसे प्रेरक सफलता की कहानियों में से एक है। आज उनकी कंपनी Apple के बारे में सभी जानते हैं लेकिन वास्तव में किसी को विश्वास नहीं था कि उस समय ऐसी तकनीक बनाई जा सकती है। स्टीव जॉब्स एक दूरदर्शी व्यक्ति थे जिन्हें खुद पर विश्वास था और उन्होंने अपनी कंपनी बनाने की दिशा में सब कुछ देने का फैसला किया। उनके जन्म के समय उन्हें एक मजदूर वर्ग के जोड़े ने गोद लिया था। स्टीव, एक जन्मजात प्रतिभा होने के कारण, अपने जीवन में बहुत पहले ही मशीनों और कंप्यूटरों के लिए एक स्वाद विकसित कर लिया था। हालाँकि, अगर हम स्टीव जॉब्स की शिक्षा को देखें,औपचारिक शिक्षा ने जल्द ही उन्हें बोर करना शुरू कर दिया। हालाँकि, वह कॉलेज के लिए रवाना हो गया, लेकिन पहले सेमेस्टर के बाद ही छोड़ दिया। फिर उन्होंने अटारी में नौकरी की, जहाँ से उन्होंने कुछ पैसे बचाए और भारत की यात्रा की। वे आध्यात्मिक उद्देश्यों के लिए वहां रहे और बौद्ध के रूप में 7 महीने बाद घर लौटे और एक साधारण जीवन व्यतीत किया । हालाँकि, इसके तुरंत बाद, उन्होंने स्टीव वोज्नियाक के साथ एक कंप्यूटर प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू कर दिया और उन्होंने एक गैरेज में अपना पहला सेब उत्पाद बनाया। इस तरह बनी थी दुनिया की सबसे बड़ी आईटी कंपनी। स्टीव जॉब्स ने आज एक विरासत बनाई है।

जेके रॉउलिंग

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“रॉक बॉटम वह ठोस आधार बन गया जिस पर मैंने अपने जीवन का पुनर्निर्माण किया।”

अब हम जेके राउलिंग की ओर बढ़ते हैं जिनकी कहानी अब तक की सबसे उल्लेखनीय प्रेरक सफलता की कहानी है। वह व्यक्ति हैरी पॉटर के निर्माण के लिए जिम्मेदार है, जो अब तक का सबसे प्रतिष्ठित और प्रेरक काल्पनिक पात्र है। जेके राउलिंग हमारे समय के सबसे प्रसिद्ध लेखकों में से एक हैं । हैरी पॉटर की शानदार दुनिया आज तो हर कोई जानता है लेकिन उस शख्स के बारे में हर कोई नहीं जानता जिसने उस दुनिया को जीवंत किया। अपनी माँ की मृत्यु के बाद, वह अंग्रेजी पढ़ाने के लिए पुर्तगाल चली गई। उसने वहाँ एक आदमी से शादी की और उसके साथ एक बेटी थी। हालांकि, कुछ समय बाद दोनों ने अपनी राहें अलग कर लीं और तलाक के लिए अर्जी दी। यह एक महत्वपूर्ण मोड़ थाअपने जीवन में जब वह अपनी बेटी और हैरी पॉटर के तीन अध्यायों के साथ एक अलग शहर में चली गई जो उसने पहले लिखी थी। जेके राउलिंग को इस दौरान डिप्रेशन, एंग्जायटी भी झेलनी पड़ी । लगभग दो वर्षों के बाद उसने अंततः हैरी पॉटर को पूरा किया जिसे 12 प्रकाशनों ने अस्वीकार कर दिया । इसके तुरंत बाद, पुस्तक को स्वीकार कर लिया गया और प्रकाशित किया गया और बाकी इतिहास है। उसकी कहानी उसे सिखाती है कि जीवन चाहे कुछ भी हम पर फेंके, समाधान हमेशा हमारे अंदर होता है। 

माइकल जॉर्डन

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“यदि आप एक बार छोड़ देते हैं, तो यह आदत बन जाती है। कभी छोड़ना नहीं!”

बास्केटबॉल टीम के लिए खारिज किए जाने से लेकर बास्केटबॉल के दिग्गज बनने तक , एमजे ने हमारी प्रेरक सफलता की कहानियों की सूची में अपनी कहानी बनाते हुए देखा है। माइकल जॉर्डन को उनके हाई स्कूल में उनकी ऊंचाई के कारण बास्केटबॉल टीम से खारिज कर दिया गया था। हालाँकि, खेल के प्रति उनकी पसंद ने उन्हें खेल में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए और भी दृढ़ बना दिया । वह किसी और से पहले जिम पहुंच जाते थे और शॉट्स की प्रैक्टिस करते थे। बास्केटबॉल टीम में एक स्थान के उद्घाटन के तुरंत बाद, उनका चयन किया गया । हालाँकि, उसके पास अभी भी कौशल की कमी थी लेकिन वह वैसे भी जारी रहा और पूर्णता की दिशा में हर रोज काम किया । उन्होंने बास्केटबॉल टीम के एक मूल्यवान खिलाड़ी के रूप में ख्याति प्राप्त की, जो अंततः उन्हें NBA में ले गईऔर बास्केटबॉल लेजेंड बनें जिसे हम जानते हैं कि वह है।

वॉल्ट डिज्नी

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“पहले सोचो। दूसरा, सपना। तीसरा, विश्वास करो। और अंत में, हिम्मत करो ”

सफलता की प्रेरक कहानियों की हमारी सूची में अगला वाल्टर एलियास डिज़्नी की कहानी है जिसे दुनिया के सबसे महान एनिमेटर के रूप में जाना जाता है, जो शुरू से ही इतना आसान नहीं था। वह अपने स्कूल के दिनों में एक दिवास्वप्न हुआ करता था और यादृच्छिक रेखाचित्र बनाता था । प्रथम विश्व युद्ध में रेड क्रॉस स्वयंसेवक के रूप में सेवा करने के बाद , उन्होंने कार्टून मोशन पिक्चर्स बनाने का फैसला किया और 19 साल की उम्र में एक कार्टून कंपनी शुरू की। वह बुरी तरह विफल रहे और 22 साल की उम्र में दिवालिया हो गए और उन्हें अपनी अखबार एजेंसी से भी निकाल दिया गया। कल्पना की कमी। उसके बाद वे कई बार दिवालिया हुए और 1928 में कंपनी पूरी तरह से बिखर गई । तभी उन्होंने अपना सबसे प्रसिद्ध कार्टून चरित्र मिकी माउस बनाया. आगे क्या हुआ सबको पता है।

कर्नल सैंडर्स

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“किसी को यह याद रखना होगा कि हर असफलता कुछ बेहतर करने के लिए एक कदम हो सकती है।”

कर्नल हार्बर सैंडर्स को केंटकी फ्राइड चिकन टी ओडे के निर्माण के लिए प्रसिद्ध रूप से जाना जाता है, लेकिन बहुत से लोग यह नहीं जानते हैं कि ऐसा करने के लिए और अपनी कहानी को दुनिया की सबसे प्रेरक सफलता की कहानियों में बदलने के लिए उन्होंने कितना संघर्ष किया। उन्हें अपने जीवन में लगातार अस्वीकृति का सामना करना पड़ा । जब वह सिर्फ 6 साल के थे, तब उनके पिता का निधन हो गया, जिसने उन्हें अपने भाई-बहनों के लिए खाना बनाना छोड़ दिया। इसके तुरंत बाद उन्होंने स्कूल छोड़ दिया और पूरे समय काम करना शुरू कर दिया। उम्र का झांसा देकर उन्हें सेना में नौकरी मिल गई, जहां से एक साल बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई। उन्हें अपनी अगली नौकरी से भी निकाल दिया गया। बाद में, उन्होंने एक फेरी बोट कंपनी की स्थापना की और उसमें भी असफल रहे । उन्होंने 40 साल की उम्र में एक सर्विस स्टेशन पर अपना तला हुआ चिकन बेचना शुरू कर दिया था ।हालाँकि, जैसे-जैसे वह बढ़ने लगा, उसका अपने प्रतिद्वंद्वी के साथ शूटआउट हो गया। उन्होंने चार साल बाद एक मोटल शुरू किया, जो विश्व युद्ध 2 के कारण फिर से बंद हो गया । उन्होंने उसके बाद अपने रेस्तरां को फ्रेंचाइजी देने की कोशिश की और केएफसी के उनके ‘गुप्त नुस्खा’ के चयन से पहले हजारों बार खारिज कर दिया गया। वर्षों की असफलताओं के बाद , कर्नल सैंडर्स ने केएफसी को इस तरह से विकसित किया कि उन्होंने इसे 2 मिलियन डॉलर में बेच दिया। अपने जीवन में इतने सारे रिजेक्शन का सामना करने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और दुनिया उन्हें आज केएफसी के चेहरे के रूप में जानती है। 

हेनरी फोर्ड

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“गलती मत ढूंढो, उपाय ढूंढो। कोई भी शिकायत कर सकता है।”

हेनरी फोर्ड ऑटोमोबाइल उद्योग में सबसे प्रसिद्ध उद्यमी हैं। उन्होंने ऑटोमोबाइल उद्योग में पूरी तरह से क्रांति ला दी और सुनिश्चित किया कि उनकी कहानी दुनिया की सबसे प्रेरक सफलता की कहानियों में से एक है। अपनी कंपनी शुरू करने के बाद, वह एक व्यवसायी से वित्त पोषण के लिए गया, जिसने बाद में कंपनी को भंग कर दिया और उसके पास कुछ भी नहीं था। हालांकि, उन्होंने जो कुछ भी शुरू किया था और पूर्णता के लिए लक्ष्य निर्धारित किया था। वह फिर से उसी निवेशक के पास गया और उससे एक और मौका देने का अनुरोध किया लेकिन वह फिर से विफल हो गया। इन लगातार असफलताओं के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और आखिरकार 1904 में मॉडल ए को पेश किया और फिर उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

स्टीफन किंग

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“क्या बहादुरी हमेशा खूबसूरत नहीं होती?”

स्टीफन किंग दुनिया के सबसे प्रसिद्ध लेखकों में से एक हैं और उनकी अब तक की सबसे प्रेरक सफलता की कहानियों में से एक है। लेखक को विज्ञान कथा, डरावनी और रहस्य की शैली में लिखने के लिए जाना जाता है। स्टीफन को बचपन से ही लिखने की आदत थी और उन्हें अपनी स्कूल पत्रिका के लिए लेखों का योगदान करते देखा गया था । उन्होंने कला स्नातक की डिग्री के साथ स्नातक की उपाधि प्राप्त की और विभिन्न पत्रिकाओं को अपनी लघु कथाएँ बेचने के साथ-साथ एक शिक्षक के रूप में काम करना शुरू किया । वह अपने उपन्यास ‘कैरी’ को पूरा करने पर काम कर रहे थे, लेकिन उन्होंने अवसाद और चिंता के कारण इसे बीच में ही छोड़ दिया । हालांकि, उनकी पत्नी का प्रोत्साहनउनके जीवन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जिसने उन्हें कई सफल किताबें दीं, जिनमें से कुछ फिल्मों में भी बदल गईं। वह अब तक की सबसे महान फिल्म ‘द शशांक रिडेम्पशन’ के लेखक हैं । अपनी असफलताओं और संघर्षों के बावजूद उन्होंने एक लेखक के रूप में अपने कौशल में विश्वास किया और महानता की ओर बढ़ते रहे।

थॉमस एडीसन

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“जीवन की कई असफलताएं वे लोग हैं जिन्हें यह नहीं पता था कि वे सफलता के कितने करीब थे जब उन्होंने हार मान ली”

थॉमस एडिसन कौन हैं, इसका परिचय देने की कोई आवश्यकता नहीं है। वह अपने समय के सबसे महान वैज्ञानिक और बल्ब के आविष्कारक भी थे। अगर हम थॉमस एल्वा एडिसन की शिक्षा को देखें ,वह मानसिक रूप से अस्थिर बच्चा था और इस वजह से उसे स्कूल से बाहर कर दिया गया था। हालांकि, वह एक मेहनती व्यक्ति था और उसने अपने सपनों को कभी नहीं छोड़ा और यह सुनिश्चित किया कि उसकी कड़ी मेहनत ने उसकी कहानी को दुनिया की सबसे प्रेरक सफलता की कहानियों में से एक बना दिया। उनकी मां भी एक सच्ची योद्धा थीं, जिन्होंने थॉमस पर अपना पूरा भरोसा दिखाया और उन्हें कभी निराश नहीं किया। वह 12 साल की उम्र में फल और अखबार बेचते थे। उन्होंने अलग-अलग आविष्कारों पर काम करना जारी रखा और टेलीग्राफ का आविष्कार करने के बाद उन्होंने न्यूयॉर्क में एक प्रयोगशाला स्थापित की। बल्ब का आविष्कार करने से पहले, वह हजारों बार असफल रहा, लेकिन जारी रखा और अंत में बल्ब का आविष्कार किया।

धीरू भाई अंबानी

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Source: indohindi.in

“यदि आप अपने सपने का निर्माण नहीं करते हैं, तो कोई और आपको उनके सपने को पूरा करने में मदद करने के लिए काम पर रखेगा।”

हमारी प्रेरक सफलता की कहानियों की सूची में अगला है धीरूभाई अंबानी। रिलायंस के संस्थापक धीरूभाई अंबानी की कहानी अमीरी की सच्ची कहानी है। उनका जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था और उन्होंने सीढ़ी पर चढ़ने का काम किया। वह 16 साल की उम्र में एक पेट्रोल पंप पर काम करने के लिए यमन चले गए थे । वह 1958 में भारत लौट आए और अपना कपड़ा व्यवसाय शुरू किया । इस व्यवसाय में काम करते हुए उन्हें मार्केटिंग का अच्छा ज्ञान प्राप्त हुआ। इस कपड़ा व्यवसाय को समाप्त करने के बाद उन्होंने 1996 में रिलायंस कॉर्पोरेशन लॉन्च किया, जिसे आज रिलायंस इंडस्ट्रीज के नाम से जाना जाता है । उनके नाम पर अब धीरूभाई अंबानी स्कॉलरशिप के नाम से एक स्कॉलरशिप भी है ।

स्टीवन स्पीलबर्ग

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“मैं रात में सपने नहीं देखता, मैं दिन में सपने देखता हूं। मैं सारा दिन सपने देखता हूं। मैं जीने का सपना देख रहा हूं।”

अंतिम लेकिन कम से कम हमारे पास प्रेरक सफलता की कहानियों की सूची में स्टीवन स्पीलबर्ग की कहानी है। वह एक फिल्म निर्माता थे , जिन्हें उनके स्कूल में खराब ग्रेड के कारण यूएससी स्कूल ऑफ थिएटर, फिल्म और टेलीविजन से तीन बार खारिज कर दिया गया था । हालांकि, इसने उन्हें फिल्म निर्माता बनने के अपने सपने को पूरा करने से नहीं रोका । उन्होंने बेहतरीन फिल्में दीं और यहां तक ​​कि लगातार तीन बार ऑस्कर पुरस्कार भी जीते। जीवन में इतनी असफलताओं का सामना करने के बाद भी, उन्होंने फिल्म उद्योग में कुछ बेहतरीन फिल्में दीं। यूएससी से खारिज होने के बाद उन्हें जॉज़, जुरासिक पार्क, द कलर पर्पल आदि जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों के लिए जाना जाता है, आज वह स्कूल के निदेशक मंडल में से एक हैं। 

रंजीत रामचंद्रन की संघर्ष की कहानी

Ranjith Ramachandran

दुनिया में ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने अपने संघर्ष की मिसाल पेश की है। कई ऐसे साधारण लोग भारत देश में जन्मे हैं जिन्होंने बाधाओं और कठिनाइयों को पीछे छोड़ सफलता हासिल की है। कुछ लोगों की संघर्ष कहानियां इतनी प्रेरित करने वाली होती है कि उनकी कहानी सुनते ही हमारी आंखों में आंसू छलक उठते हैं। कुछ लोग ऐसा सोचते हैं की एक साधारण आदमी कुछ हासिल नहीं कर सकता परंतु यह कहने से पहले हम यह नहीं सोचते है कि सफलता की सीढ़ी पर बैठा हुआ आदमी भी किसी ना किसी प्रकार वहां पहुंचा होगा वह भी एक मनुष्य है यदि वह सफलता हासिल कर सकता है कोई साधारण आदमी ऐसा क्यों नहीं कर सकता। आए दिन रोज हम एक नया सपना देखते हैं कि हम यह करेंगे ऐसे करेंगे इत्यादि परंतु उनमें से कुछ लोग होते हैं जो उस सपने को पूरा करने के लिए उसमें अपनी जान डाल देते हैं। इसी पर एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा भी है कि-“सपने वो नहीं होते हैं जो नींद में देखे जाते हैं, सपने वो होते हैं जो आपको नींद ही नहीं आने देते हैं । इसी तरह है रंजीत रामचंद्रन की संघर्ष की कहानी जिन्होंने एक साधारण आदमी से सफलता की ऊंचाइयों पर अपना नाम सुनहरे अक्षरों में लिखा दिया है।

आज रंजीत रामचंद्रन की संघर्ष की कहानी से रूबरू कराने हम यह ब्लॉग लेकर आए हैं।रंजीत रामचंद्रन की संघर्ष की कहानी उन कहानियों में से हैं जो हमें प्रेरित तो करती हैं परंतु कहीं ना कहीं हमें भावुक भी कर देती हैं। और जिंदगी में कुछ करने पर जोर देती हैं। रंजीत रामचंद्रन की संघर्ष की कहानी ऐसी कहानी है जिसे सुनते ही हमारे मन में रंजीत रामचंद्रन के प्रति आदर सम्मान और भी बढ़ जाता है।

रंजीत रामचंद्रन की संघर्ष की कहानी में खुलासा करने वाला दिन के उजाले में रात का सपना

रंजीत रामचंद्रन का प्रत्येक दिन अंतहीन संभावनाओं के साथ शुरू होता है।लेकिन रामचंद्रन की रातें महत्वाकांक्षाओं, आशाओं और विशाल सपनों से भरी थीं। अपने विनम्र घर से आकर, रामचंद्रन के पिता एक दर्जी थे और उनकी माँ एक MGNREGS कार्यकर्ता थीं।रामचंद्रन ने कासरगोड के पनाथुर में एक बीएसएनएल टेलीफोन एक्सचेंज में एक रात के चौकीदार के रूप में काम किया और एक जिला कॉलेज- सेंट पियस एक्स कॉलेज से अपनी अर्थशास्त्र की डिग्री हासिल की।

अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद, रामचंद्रन IIT, मद्रास में चले गए। उसने अध्ययन करना मुश्किल पाया क्योंकि वह केवल मलयालम में धाराप्रवाह था। वह निराश हो गए और उन्होंने पीएचडी छोड़ने का फैसला किया। कार्यक्रम। उनके गुरु और मार्गदर्शक ने तब उन्हें आश्वस्त किया और अपने लक्ष्य के बारे में निर्धारित होने के लिए राजी किया ।उनके आकर्षक पोस्ट के बारे में पूछे जाने पर रामचंद्रन ने कहा,

“मैंने कभी नहीं सोचा था कि पोस्ट वायरल होगी। मैंने अपनी जीवन कहानी पोस्ट की, उम्मीद है कि यह कुछ अन्य लोगों को प्रेरित करेगी। मैं चाहता हूं कि हर कोई अच्छे सपने देखे और अपने सपनों के लिए लड़े। मैं चाहता हूं कि अन्य लोग इससे प्रेरित हों और सफलता पाएं। ”

“मेरे मार्गदर्शक (डॉ। सुभाष) को यकीन था कि मेरा निर्णय गलत था, और मुझे असफल होने और पीछे हटने से पहले लड़ने के लिए कहा। मुझे ऐसा लगा जैसे मैंने हारना शुरू कर दिया है, मुझे उस दिन से जीतने की जिद थी। ”

आशा करते हैं कि आपको Motivational Stories In Hindi (मोटिवेशनल स्टोरी इन हिंदी ) का ब्लॉग अच्छा लगा होगा। जितना हो सके अपने दोस्तों और बाकी सब को शेयर करें ताकि वह भी Motivational Stories In Hindi का  लाभ उठा सकें और  उसकी जानकारी प्राप्त कर सके और अपने लक्ष्य को पूरा कर सकें। हमारे Leverage Edu में आपको ऐसे कई प्रकार के ब्लॉग मिलेंगे जहां आप अलग-अलग विषय की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं ।अगर आपको किसी भी प्रकार के सवाल में दिक्कत हो रही हो तो हमारी विशेषज्ञ आपकी सहायता भी करेंगे।

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