First World War क्यों शुरु हुआ?

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पहला विश्व युद्ध क्यों हुआ

प्रथम विश्वयुद्ध से पहले किसी को यह अंदाज़ा नहीं होगा कि लगभग सभी देश एक साथ इस युद्ध में कूदेंगे. इस युद्ध में मरने वालों की संख्या से इस युद्ध की बर्बादी का हिसाब लगाया जा सकता था. इससे पहले सिर्फ लड़ाइयां होती थी, यह एक भीषण युद्ध था. युद्ध से सिर्फ युद्ध ही उत्पन्न हुआ और ऐसा हुआ कि आज के समय में पता नहीं तीसरा विश्वयुद्ध कब हो उठे. चलिए, देते हैं आपको First World War in Hindi के बारे में जानकारी।

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First World War कब शुरू हुआ

प्रथम विश्व युद्ध 28 जुलाई 1914 को शुरू हुआ था। इस विश्व युद्ध को ग्रेट वार या ग्लोबल वार भी कहा जाता है। उस समय ऐसा माना गया कि इस युद्ध के बाद सारे युद्ध ख़त्म हो जायेंगे, इसे ‘वॉर टू एंड आल वार्स’ भी कहा गया। कहा जा रहा था कि प्रथम विष युद्ध के बाद सब युद्ध समाप्त हो जाएँगे पर इस युद्ध के 20 साल बाद ही द्वितीय विश्व युद्ध भी हुआ। First World War in Hindi की ऐसी रही थी शरुआत।

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दो शक्तियों के बीच का युद्ध

First World War in Hindi में हम आपको बताते हैं कि किन-किन शक्तियों में यह युद्ध हुआ. इस युद्ध में एक तरफ अलाइड शक्ति और दूसरी तरफ सेंट्रल शक्ति थे। अलाइड शक्ति में रूस, फ्रांस, ब्रिटेन, संयुक्त राष्ट्र अमेरिका और जापान आदि देश थे। अमेरिका इस युद्ध में साल 1917- 18 में आया। सेंट्रल शक्ति में केवल 3 देश मौजूद थे। ये तीन देश ऑस्ट्रो- हंगेरियन, जर्मनी और ओटोमन एम्पायर था। उस समय ऑस्ट्रो- हंगरी में हब्स्बर्ग नामक वंश का शासन था. ओटोमन आज ओटोमन तुर्की का इलाक़ा है। 

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युद्ध के प्रमुख कारण

इस खतरनाक विश्व युद्ध में युद्ध का कोई एक कारण नहीं हो सकता था। इसमें कई कारण थे, जिन्होंने दुनिया को देखने और समझने का तरीका पूरी तरह से बदल दिया था। तो आइए, जानते हैं First World War in Hindi के युद्ध के कारण – 

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सैन्यवाद (Militarism)

हर देश ने खुद को आधुनिक हथियारों से लैस करने का प्रयास किया। सभी देशों ने उस समय आविष्कार होने वाले मशीन गन, टैंक, बन्दुक 3 बड़े जहाज़, बड़ी आर्मी का कांसेप्ट आदि लाया गया। इन सभी चीज़ों में ब्रिटेन और जर्मनी दोनों काफ़ी आगे थे। इनके आगे होने की वजह इन देशों में औद्योगिक क्रांति का बढ़ना था। औद्योगिक क्रांति से यह देश बहुत अधिक विकसित हुए और अपनी सैन्य क्षमता को बढाया। इन दोनों देशों ने अपने इंडस्ट्रियल कोम्प्लेक्सेस का इस्तेमाल अपनी सैन्य क्षमता को बढाने के लिए किया, जैसे बड़ी बड़ी विभिन्न कम्पनियों में मशीन गन का, टैंक आदि के निर्माण कार्य चलने लगे. यहीं से ही मॉडर्न आर्मी का कांसेप्ट शुरू हुआ था।

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विभिन्न संधीयाँ यानि गठबंधन प्रणाली

यूरोप में 19वीं शताब्दी के दौरान शक्ति में संतुलन स्थापित करने के लिए विभिन्न देशों ने अलायन्स अथवा संधियाँ बनानी शुरू की। इस समय कई तरह की संधियाँ गुप्त रूप से होती थी। तो आइए, बताते हैं आपको First World War in Hindi में हुई इन संधियों के बारे में – 

  • साल 1882 का ट्रिपल अलायन्स : 1882 में जर्मनी ऑस्ट्रिया- हंगरी और इटली के बीच संधि हुई थी।
  • साल 1907 का ट्रिपल इंटेंट : 1907 में फ्रांस, ब्रिटेन और रूस के बीच ट्रिपल इंटेंट हुआ। साल 1904 में ब्रिटेन और रूस के बीच कोर्दिअल इंटेंट नामक संधि हुई। इसके साथ रूस जुड़ने के बाद ट्रिपल इंटेंट के नाम से जाना गया।

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साम्राज्यवाद (Imperialism)

उस समय पश्चिमी यूरोपीय देश चाहते थे कि उनके कॉलोनिस या विस्तार अफ्रीका और एशिया में भी फैले। इस घटना को ‘स्क्रेम्बल ऑफ़ अफ्रीका’ यानि अफ्रीका की दौड़ भी कहा गया, मतलब था कि अफ्रिका अपने जितने अधिक क्षेत्र बचा सकता है बचा ले, क्योंकि उस समय अफ्रीका का क्षेत्र बहुत बड़ा था। यह समय 1880 के बाद का था जब सभी बड़े देश अफ्रीका पर क़ब्ज़ा कर रहे थे। इन देशों में फ्रांस, जर्मनी, होलैंड बेल्जियम आदि थे। इन सभी देशों का नेतृत्व ब्रिटेन कर रहा था। ब्रिटेन का उस समय काफी देशों पर कब्ज़ा था और वह काफ़ी सफ़ल देश था। पूरी दुनिया के 25% हिस्से पर ब्रिटिश शासन का राजस्व था। इस 25% क्षेत्र की वजह से इनके पास बहुत अधिक संसाधन आ गए थे। इसकी वजह से इनकी सैन्य क्षमता में भी खूब वृद्धि हुई।

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राष्ट्रवाद (Nationalism)

उन्नसवीं शताब्दी मे देश भक्ति की भावना ने पूरे यूरोप में थी। जर्मनी, इटली, अन्य बोल्टिक देश आदि जगह पर राष्ट्रवाद पूरी तरह से फ़ैल चूका था। इसी वजह से यह युद्ध ‘ग्लोरी ऑफ़ वार’ कहलाया था। इन देशों को लगने लगा कि कोई भी देश लड़ाई लड़ के और जीत के ही महान बन सकता है। इस तरह से देश की महानता को उसके क्षेत्रफल से जोड़ के देखा जाने लगा।

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महत्वपूर्ण कारण

आर्कड्यूक फ्रान्ज़ फर्डीनांड ऑस्ट्रिया के राजकुमार थे। इन पर जून 1914 को गर्विलो प्रिंसेप नामक आदमी ने हमला कर इन्हें मार दिया था। इस हत्या के बाद साइबेरिया को धमकियाँ मिलनी शुरू हुई। ऑस्ट्रिया को ऐसा लगता था कि साइबेरिया जो कि बोस्निया को आज़ादी दिलाने में मदद कर रहा था, इस हत्या में शामिल है। ऑस्ट्रिया ने इस हत्या के बाद साइबेरिया को अल्टीमेटम दिया कि वे जल्द ही आत्मसमर्पण कर दें और साइबेरिया ऑस्ट्रिया के अधीन हो जाए। इस मसले पर साइबेरिया ने रूस से मदद माँगी और रूस को बाल्टिक्स में हस्तक्षेप करने का एक और मौक़ा मिल गया। ऐसा होते देख धीरे-धीरे यह दो देशों की लड़ाई न होकर विश्व युद्ध में बदल गया। वहीँ दूसरी और बाल्कन छेत्र में भी अस्थिरता थी, उसे यूरोप का पाउडर केग कहा जाता है। पाउडर केग का मतलब बारूद से भरा कंटेनर होता है, जिसमे कभी भी आग लग सकती है।

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युद्ध के चरण

First World War in Hindi में यह हैं युद्ध के चरण, जिनसे हमको इस युद्ध को अच्छे से समझने में सहायता मिलेगी।

  • यूरोप, अफ्रीका और एशिया में कई मोर्चों पर संघर्ष शुरू हुआ। पश्चिमी मोर्चा में जर्मनों ने ब्रिटेन, फ्राँस और वर्ष 1917 के बाद अमेरिकियों के साथ संघर्ष किया। पूर्वी मोर्चा में रूसियों ने जर्मनी और ऑस्ट्रो-हंगेरियन सेनाओं के खिलाफ युद्ध लड़ा।
  • वर्ष 1914 में थोड़े समय के लि जर्मनी को युद्ध में बढ़त हासिल हुई, उसके बाद पश्चिमी मोर्चा स्थिर हो गया और एक लंबा तथा क्रूर युद्ध शुरू हो गया। इस बीच पूर्वी मोर्चे पर जर्मनी की स्थिति मज़बूत हो गई लेकिन निर्णायक रूप से ऐसा नहीं हुआ।
  • वर्ष 1917 में दो घटनाएँ घटित हुईं जिन्होंने संपूर्ण युद्ध का रुख ही बदल दिया। अमेरिका मित्र राष्ट्रों के बेड़े में शामिल हो गया, वहीं दूसरी ओर रूसी क्रांति के बाद रूस युद्ध से बाहर हो गया और उसने एक अलग शांति समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए।

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भारत का रोल

इस युद्ध में लगभग 13 लाख भारतीय ब्रिटिश आर्मी की तरफ़ से लड़ रहे थे. यह भारतीय सैनिक फ्रांस, इराक, ईजिप्ट आदि जगहों पर लड़े, जिसमे लगभग 50,000 सैनिकों को शहादत मिली. तीसरे एंग्लो अफ़ग़ान वार और प्रथम विश्व युद्ध में शहीद हुए सैनिकों की याद में इंडिया गेट का निर्माण किया गया. एक भारतीय पैदल सैनिक का मासिक वेतन उस समय महज़ 11 रुपए था, युद्ध में भाग लेने से यह आय बढ़ा दी गई थी। First World War in Hindi में भारत का रोल भी अहम था.

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युद्ध समाप्ति और परिणाम

First World War in Hindi में युद्ध की समाप्ति और परिणाम बहुत ही भयावह रहे थे. 1918 में जर्मन आक्रमण के बाद मित्र देशों के पलटवार ने जर्मन सेना को निर्णायक वापसी हेतु मजबूर कर दिया। अक्तूबर-नवंबर 1918 में क्रमशः तुर्की और ऑस्ट्रिया ने आत्मसमर्पण कर दिया, जिससे जर्मनी अकेला पड़ गया। बाद में जर्मनी की हार हुई और वहां सत्ता भी बदली, नई सत्ता के आने से जर्मनी ने युद्धविराम के घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए और यह प्रथम विश्वयुद्ध 11 नवंबर 1918 को जाकर खत्म हुआ। इस विश्वयुद्ध में एक करोड़ दस लाख सिपाही और लगभग 60 लाख आम नागरिक मारे गए। इसमें मरने वालों की संख्या एक करोड़ सत्तर लाख थी वहीं 2 करोड़ घायल हुए थे। इस युद्ध ने पूरी दुनिया को आर्थिक मंदी में भी ला दिया था। इस युद्ध के बाद अमेरिका एक विश्व शक्ति बन के उभरा था।

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विश्वयुद्ध के बाद संधियां

प्रथम विश्वयुद्ध के बाद भाईचारा और शांति बनी रहे इसलिए कुछ शांति समझौते हुए थे. आइए First World War in Hindi में जानते हैं कौन सी संधियां हुई थीं।

पेरिस शांति सम्मेलन

विश्व युद्ध में जर्मनी एवं उसके सहयोगी देश ऑस्ट्रिया, तुर्की, हंगरी आदि की हार हुई तथा इस युद्ध का अंत पेरिस शांति सम्मेलन के साथ हुआ जिसमें पराजित राष्ट्रों के साथ समझौते के रूप में पाचँ संधियां की गई।

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वर्साय की संधि

सभी संधियों में सबसे महत्वपूर्ण थी वर्साय की संधि, जिसे ब्रिटेन ने जर्मनी के साथ किया। इसकी सभी शर्तों को जर्मनी के लिए स्वीकार करना अनिवार्य कर दिया। 

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दूसरा विश्वयुद्ध होने के कारण

दूसरे विश्वयुद्ध होने के कई कारण थे. कोई एक कारण ऐसे में नहीं हो सकता था। प्रथम विश्वयुद्ध के बाद दुनिया में आए आर्थिक संकट के साथ और भी कारण थे। आइए, जानते हैं First World War in Hindi में दूसरे विश्वयुद्ध होने के कारण – 

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वर्साय की संधि (1919)

  • प्रथम विश्व युद्ध के बाद विजयी मित्र राष्ट्रों ने जर्मनी के भविष्य का फैसला किया। जर्मनी को वर्साय की संधि पर हस्ताक्षर करने के लिये मज़बूर किया गया था।
  • इस संधि के तहत जर्मनी को युद्ध का दोषी मानकर उस पर आर्थिक दंड लगाया गया।

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राष्ट्र संघ (League of Nations) की विफलता

  • राष्ट्र संघ की स्थापना वर्ष 1919 में एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन के रूप में विश्व शांति को बनाए रखने के लिए की गई थी।
  • इसमें सभी देश इसमें शामिल नहीं हो सके।

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1929 की महामंदी

  • वर्ष 1930 के दशक की विश्वव्यापी आर्थिक मंदी ने यूरोप और एशिया में अलग-अलग तरीकों से अपना प्रभाव डाला।
  • यूरोप की अधिकांश राजनीतिक शक्तियाँ जैसे- जर्मनी, इटली, स्पेन आदि अधिनायकवादी और साम्राज्यवादी सरकारों में स्थानांतरित हो गईं।

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आशा करते हैंं कि आपको First World War in Hindi का यह ब्लॉग पसंद आया होगा। हमें ऐसी उम्मीद है इस ब्लॉग से आप प्रथम विश्वयुद्ध के बारे में परिचित हो गए होंगे। बाकि और टॉपिक पर ब्लॉग पढ़ने के लिए आप Leverage Edu पर जाकर उन्हें पढ़ सकते हैं।

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