COVID बैच के विदेश में पढ़ाई करने वाले इच्छुक छात्रों के लिए राह थोड़ी मुश्किल

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विदेश में पढ़ने से बढ़ती है एशिया लिटरेसी
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पहले COVID महामारी के चलते दो साल की ऑनलाइन पढ़ाई, फिर बोर्ड परीक्षा और उनके रिजल्ट में देरी, और अब देरी से वीज़ा लगने की वजह से अंतिम मिनट के फ्लाइट के बढ़े किराए की वजह से इस साल 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने वाले छात्र, जो अपनी आगे की पढ़ाई विदेश में करने वाले हैं, उनके लिए मुश्किलें अभी खत्म होती नहीं दिखती हैं।

‘COVID बैच’ से विदेश में हायर स्टडीज़ के लिए जाने वाले छात्रों के माता पिता का कहना है कि महामारी के कारण स्कूल बंद होना छात्रों के लिए तनावपूर्ण समय था, जिसका असर उन के करियर पर भी पड़ेगा। 

एक छात्रा राधा ओसान ने कहा कि बैच शुरू से ही ‘jinxed’ है। पहले तो छात्र दो साल तक घरों के अंदर बंद होकर पढ़ते रहे, उसके बाद स्कूलों के फिर से खुलने का इंतजार किया जाने लगा। फिर बोर्ड परीक्षाओं को दो टर्म्स में रखा गया था, जो कि अपनी तरह का पहला प्रयोग था। रिजल्ट किस पैमाने पर किया जाएगा, इस पर कोई स्पष्टता नहीं थी। दूसरे टर्म में पहले से ही सामान्य समय की तुलना में देरी हो रही थी और देरी से रिजल्ट ने हमारे लिए और अधिक समस्या पैदा कर दी थी। राधा ने कनाडा में ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय में साइकोलॉजी कोर्स करने की योजना बनाई है।

राधा ओसान ने आगे कहा कि फिर रिजल्ट की घोषणा के बावजूद बोर्ड से सर्टिफिकेट्स आने में हफ्तों लग गए। इस सब के दौरान, हम वीज़ा, लास्ट मिनट की फ्लाइट बुकिंग, प्रोविशनल लोन्स की व्यवस्था करने में भी लगे हुए थे। शुक्र है कि अब हम सब तैयारी कर चुके हैं, लेकिन मेरे जाने के लिए केवल दो सप्ताह बचे हैं और मुझे अभी तक UBC से अंतिम मंजूरी नहीं मिली है।

2021 में भारत से 13.24 लाख से अधिक छात्र हायर स्टडीज़ के लिए विदेश गए, जिनमें से ज्यादातर छात्र यूएसए (4.65 लाख), उसके बाद कनाडा (1.83 लाख), यूएई (1.64 लाख) और ऑस्ट्रेलिया (1.09 लाख) शामिल हैं। .

आमतौर पर, बोर्ड परीक्षा देश में हर साल फरवरी-मार्च में आयोजित की जाती है और रिजल्ट मई तक घोषित किए जाते हैं।

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