BNYS का पूरा नाम बैचलर ऑफ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंसेज है। यह भारत में AYUSH मंत्रालय के अंतर्गत मान्यता प्राप्त 5.5 साल का अंडरग्रेजुएट मेडिकल कोर्स है, जिसमें 4.5 साल की अकादमिक पढ़ाई और 1 साल की अनिवार्य इंटर्नशिप शामिल होती है। BNYS उन छात्रों के लिए है जो मेडिकल फील्ड में रहकर दवाइयों पर आधारित एलोपैथी के बजाय योग और प्राकृतिक चिकित्सा के जरिए इलाज करना चाहते हैं।
इस कोर्स में मानव शरीर विज्ञान, पाथोलॉजी, योग चिकित्सा और नेचुरोपैथी की विभिन्न प्राकृतिक उपचार पद्धतियाँ जैसे हाइड्रोथेरेपी, डाइट थेरेपी और मड थेरेपी पढ़ाई जाती हैं। BNYS का मुख्य उद्देश्य बीमारी के इलाज के साथ-साथ शरीर को प्राकृतिक तरीकों से स्वस्थ बनाए रखना और जीवनशैली से जुड़ी समस्याओं का समाधान करना है।
कोर्स पूरा करने के बाद छात्र सरकारी या निजी अस्पतालों, योग व वेलनेस सेंटर, क्लिनिक और आयुष संस्थानों में काम कर सकते हैं। इस लेख में BNYS कोर्स की योग्यता, एडमिशन प्रोसेस, सिलेबस, फीस, करियर विकल्प और संभावित सैलरी से जुड़ी सभी जरूरी जानकारी सरल और स्पष्ट रूप में दी गई है।
| कोर्स का नाम | बैचलर ऑफ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंसेज (BNYS) |
| कोर्स लेवल | अंडरग्रेजुएट |
| कोर्स मोड | रेगुलर |
| स्पेशलाइजेशन | नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंसेज |
| योग्यता | 10+2 में मुख्य विषय के रूप में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी (PCB) |
| आयु सीमा | न्यूनतम 17 वर्ष |
| सिलेक्शन प्रोसेस | एंट्रेंस और मेरिट बेस्ड |
| जॉब प्रोफाइल | नेचुरोपैथी डॉक्टर, योग चिकित्सक, वेलनेस कंसल्टेंट, लाइफस्टाइल काउंसलर, रिसर्च असिस्टेंट, न्यूट्रिशन एवं डाइट कंसल्टेंट (रोल-आधारित) |
| रोजगार के क्षेत्र | आयुष मंत्रालय से संबद्ध संस्थान, सरकारी एवं निजी अस्पताल, योग और वेलनेस सेंटर, हेल्थकेयर क्लिनिक, नर्सिंग होम, प्राइवेट क्लिनिक या स्व-रोजगार |
This Blog Includes:
- BNYS कोर्स क्या है?
- BNYS कोर्स क्यों करें?
- BNYS कोर्स की अवधि और स्ट्रक्चर
- BNYS कोर्स के लिए आवश्यक योग्यता
- BNYS कोर्स के लिए प्रवेश परीक्षाएं
- BNYS एडमिशन प्रोसेस (स्टेप-बाय-स्टेप)
- BNYS कोर्स का सिलेबस
- BNYS कोर्स में इंटर्नशिप और क्लिनिकल ट्रेनिंग
- भारत के प्रमुख BNYS कोर्स की फीस
- BNYS बनाम BAMS क्या अंतर है?
- BNYS कोर्स के बाद करियर ऑप्शन्स
- BNYS के बाद सैलरी
- BNYS के बाद हायर एजुकेशन के विकल्प
- FAQs
BNYS कोर्स क्या है?
बैचलर ऑफ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंसेज (BNYS) एक 5.5 साल का अंडरग्रेजुएट मेडिकल कोर्स है, जिसमें दवाइयों पर आधारित इलाज के बजाय योग और नेचुरोपैथी के माध्यम से उपचार करना सिखाया जाता है। इस कोर्स में योग चिकित्सा, आहार प्रबंधन, हर्बल उपचार, वाटर थेरेपी और मड थेरेपी जैसी प्राकृतिक उपचार पद्धतियाँ शामिल होती हैं, जिनका उद्देश्य शरीर को प्राकृतिक रूप से स्वस्थ बनाए रखना है।
BNYS डिग्री पूरी करने और राज्य स्तरीय पंजीकरण के बाद ग्रेजुएट्स अपने नाम के आगे ‘डॉ.’ लिख सकते हैं, लेकिन उनकी प्रैक्टिस केवल नेचुरोपैथी और योग आधारित उपचार तक सीमित रहती है। कोर्स पूरा करने के बाद छात्र योग चिकित्सक, नेचुरोपैथिक चिकित्सक, वैलनेस काउंसलर या अस्पतालों और क्लिनिकों में योग-आधारित उपचार से जुड़े रोल्स में काम कर सकते हैं।
जो छात्र BNYS के साथ डिप्लोमा विकल्पों के बारे में जानना चाहते हैं, वे DNYS कोर्स की पूरी जानकारी यहाँ देख सकते हैं।
BNYS कोर्स क्यों करें?
BNYS आज के समय में उन छात्रों के लिए एक प्रैक्टिकल और फ्यूचर-ओरिएंटेड करियर विकल्प है, जो हेल्थकेयर फील्ड में रहकर दवाइयों पर आधारित एलोपैथी के बजाय लाइफस्टाइल और नेचुरल ट्रीटमेंट पर काम करना चाहते हैं। इसके पीछे कुछ ठोस कारण हैं:
- प्राकृतिक और लाइफस्टाइल-बेस्ड हेल्थकेयर की बढ़ती जरूरत: डायबिटीज़, मोटापा, स्ट्रेस और अन्य लाइफस्टाइल डिसऑर्डर जैसी समस्याएँ आज दवाओं से ज़्यादा जीवनशैली से जुड़ी हैं। BNYS कोर्स योग, आहार, दिनचर्या और प्राकृतिक उपचार के माध्यम से बीमारी की जड़ को समझने और सुधारने पर फोकस करता है। यह उन छात्रों के लिए उपयुक्त है जो केवल लक्षणों का इलाज नहीं, बल्कि लॉन्ग-टर्म हेल्थ इम्प्रूवमेंट पर काम करना चाहते हैं।
- योग और नेचुरोपैथी में स्ट्रक्चर्ड मेडिकल-लेवल एजुकेशन: BNYS केवल योग सीखने का कोर्स नहीं है, बल्कि एक स्ट्रक्चर्ड मेडिकल-लेवल डिग्री प्रोग्राम है। इसमें एनाटॉमी, फिज़ियोलॉजी, पैथोलॉजी और डायग्नोस्टिक सब्जेक्ट्स के साथ योग थेरेपी और नेचुरोपैथी को साइंटिफिक फ्रेमवर्क में पढ़ाया जाता है। यही वजह है कि यह सामान्य योग सर्टिफिकेट या शॉर्ट-टर्म कोर्स से अलग और ज़्यादा प्रोफेशनल माना जाता है।
- AYUSH सिस्टम के अंतर्गत मान्यता प्राप्त डिग्री: BNYS भारत सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ आयुष (Ministry of AYUSH) के अंतर्गत आने वाली मान्यता प्राप्त डिग्री है और एनसीआईएसएम (NCISM) द्वारा रेगुलेट की जाती है। इस मान्यता के कारण BNYS ग्रेजुएट्स को स्टेट-लेवल रजिस्ट्रेशन, क्लिनिक शुरू करने और आयुष से जुड़े संस्थानों में काम करने की वैध पात्रता मिलती है, जिससे करियर की क्रेडिबिलिटी बनी रहती है।
- वेलनेस, योग और प्रिवेंटिव केयर में वाइड करियर स्कोप: BNYS के बाद करियर केवल हॉस्पिटल्स तक सीमित नहीं रहता। वेलनेस सेंटर्स, योग थेरेपी क्लिनिक्स, लाइफस्टाइल मैनेजमेंट प्रोग्राम्स, रिसॉर्ट्स और कॉरपोरेट वेलनेस जैसे सेक्टर्स में भी अवसर मिलते हैं। प्रिवेंटिव हेल्थ पर बढ़ते फोकस के साथ इन क्षेत्रों में BNYS प्रोफेशनल्स की डिमांड लगातार बढ़ रही है।
- एलोपैथी में रुचि न रखने वाले छात्रों के लिए बेहतर विकल्प: हर छात्र एमबीबीएस या एलोपैथिक प्रैक्टिस के लिए तैयार नहीं होता। BNYS उन छात्रों को एक क्लियर ऑप्शन देता है जो मेडिकल फील्ड में रहना चाहते हैं, लेकिन दवाओं और सर्जरी-बेस्ड सिस्टम में काम नहीं करना चाहते। अपेक्षाकृत कम कॉम्पिटिशन और इंटरेस्ट-बेस्ड लर्निंग इसे कई छात्रों के लिए प्रैक्टिकल बनाती है।
संक्षेप में कहें तो BNYS उन छात्रों के लिए सही है जो लॉन्ग-टर्म वेलनेस, प्रिवेंशन और पेशेंट लाइफस्टाइल इम्प्रूवमेंट के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं।
BNYS कोर्स की अवधि और स्ट्रक्चर
BNYS कोर्स की अवधि और स्ट्रक्चर भारत के अधिकांश संस्थानों में लगभग समान होता है। नीचे BNYS कोर्स की कुल अवधि, शैक्षणिक चरणों और अनिवार्य इंटर्नशिप की स्पष्ट जानकारी दी गई है, ताकि छात्र पूरे कोर्स फ्रेमवर्क को एक नज़र में समझ सकें।
| पहलू | विवरण |
| कुल कोर्स अवधि | 5.5 वर्ष |
| शैक्षणिक अध्ययन अवधि | 4.5 वर्ष की नियमित फुल-टाइम पढ़ाई |
| इंटर्नशिप अवधि | 1 वर्ष की अनिवार्य रोटेटरी इंटर्नशिप |
| कोर्स की मान्यता | मिनिस्ट्री ऑफ आयुष (Ministry of AYUSH) और एनसीआईएसएम (NCISM) द्वारा निर्धारित, पूरे भारत में मान्य |
| कोर्स का स्वरूप | यह कोई शॉर्ट-टर्म या सर्टिफिकेट कोर्स नहीं, बल्कि फुल-टाइम मेडिकल-स्टैंडर्ड अंडरग्रेजुएट डिग्री प्रोग्राम है |
| शुरुआती वर्षों की पढ़ाई | ह्यूमन एनाटॉमी, फिज़ियोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री जैसे बेसिक मेडिकल साइंस विषय |
| मध्य और अंतिम वर्षों के विषय | पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, डायग्नोस्टिक मेथड्स, न्यूट्रिशन और कम्युनिटी मेडिसिन |
| योग और नेचुरोपैथी विषय | पूरे कोर्स के दौरान योग दर्शन, योग चिकित्सा और नेचुरोपैथी की विभिन्न उपचार पद्धतियाँ |
| शैक्षणिक मूल्यांकन | प्रत्येक वर्ष यूनिवर्सिटी-लेवल परीक्षाएँ, जिन्हें पास करना अनिवार्य होता है |
| इंटर्नशिप का स्वरूप | एनसीआईएसएम के दिशा-निर्देशों के अनुसार रोटेटरी इंटर्नशिप |
| प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (उद्देश्य, एक्सपोज़र व सुपरविजन) | योग थेरेपी यूनिट, नेचुरोपैथी क्लिनिक और OPD/IPD में वास्तविक मरीजों के साथ प्रशिक्षण; अनुभवी फैकल्टी और चिकित्सकों की निगरानी में |
| महत्वपूर्ण स्पष्टता | BNYS इंटर्नशिप में एलोपैथिक सर्जरी या एलोपैथिक दवाइयों की प्रैक्टिस शामिल नहीं होती |
| डिग्री और रजिस्ट्रेशन पात्रता | इंटर्नशिप पूरी करने के बाद ही छात्र BNYS डिग्री और राज्य स्तरीय पंजीकरण के लिए पात्र होते हैं |
BNYS कोर्स के लिए आवश्यक योग्यता
BNYS में एडमिशन से पहले छात्रों को शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा और प्रवेश परीक्षा से जुड़ी कुछ शर्तों को पूरा करना होता है। ये शर्तें राज्य और संस्थान के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती हैं, लेकिन सामान्य रूप से नीचे दिए गए नियम लागू होते हैं।
शैक्षणिक योग्यता
- उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10+2 (इंटरमीडिएट) उत्तीर्ण होना अनिवार्य होता है।
- 12वीं में फिजिक्स, केमेस्ट्री और बायोलॉजी (PCB) विषय होना जरूरी होता है।
- PCB विषय इसलिए आवश्यक हैं क्योंकि BNYS कोर्स में मानव शरीर रचना, फिज़ियोलॉजी और रोगों की बुनियादी मेडिकल समझ पढ़ाई जाती है।
- सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए PCB में न्यूनतम 50% अंक अपेक्षित होते हैं।
- SC, ST और OBC वर्ग के छात्रों को सरकारी नियमों के अनुसार अंक में छूट दी जाती है।
- PCB विषयों के बिना BNYS में एडमिशन संभव नहीं होता।
आयु सीमा
- BNYS कोर्स के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 17 वर्ष होनी चाहिए।
- यह आयु आमतौर पर एडमिशन वर्ष के 31 दिसंबर तक पूरी होनी चाहिए।
- अधिकतम आयु सीमा राज्यों और संस्थानों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
- अधिकांश मामलों में कोई सख्त ऊपरी आयु सीमा लागू नहीं होती, लेकिन कुछ राज्य अतिरिक्त नियम तय कर सकते हैं।
NEET-UG परीक्षा की भूमिका
- वर्तमान समय में BNYS कोर्स में प्रवेश के लिए NEET-UG परीक्षा महत्वपूर्ण मानी जाती है, खासकर सरकारी और अधिकांश निजी कॉलेजों में।
- BNYS की सीटों का आवंटन आमतौर पर राज्य-स्तरीय AYUSH काउंसलिंग के माध्यम से NEET स्कोर के आधार पर किया जाता है।
- बिना NEET के अच्छे और मान्यता प्राप्त BNYS कॉलेज में एडमिशन मिलना कठिन हो सकता है।
- NEET की कट-ऑफ हर वर्ष कैटेगरी और सीटों की उपलब्धता के अनुसार बदलती रहती है।
राष्ट्रीयता और अन्य शर्तें
- उम्मीदवार का भारतीय नागरिक होना सामान्य शर्त होती है।
- NRI, OCI या PIO उम्मीदवारों के लिए कुछ कॉलेज अलग नियम या कोटा लागू कर सकते हैं।
- उम्मीदवार का शारीरिक और मानसिक रूप से मेडिकल पढ़ाई के लिए फिट होना आवश्यक होता है।
- कुछ मामलों में मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट भी मांगा जा सकता है।
- सरकारी कॉलेजों में कई बार राज्य डोमिसाइल से जुड़े नियम लागू होते हैं।
नोट: BNYS कोर्स की योग्यता पूरी करना ही पर्याप्त नहीं होता। एडमिशन से पहले संबंधित राज्य की AYUSH काउंसलिंग सूचना और कॉलेज की आधिकारिक पात्रता शर्तों को जरूर जांचें, क्योंकि नियम समय-समय पर बदलते रहते हैं।
BNYS कोर्स के लिए प्रवेश परीक्षाएं
भारत में BNYS कोर्स में प्रवेश आमतौर पर योग्यता पूरी करने, प्रवेश परीक्षा (जहां लागू हो), काउंसलिंग और कॉलेज अलॉटमेंट की प्रक्रिया के माध्यम से होता है। यह प्रक्रिया राज्य, कॉलेज और सीट की श्रेणी के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
कुछ राज्यों में BNYS एडमिशन राष्ट्रीय या राज्य स्तर की प्रवेश परीक्षाओं के आधार पर होता है, जबकि कुछ निजी या संस्थान-स्तरीय कॉलेजों में मेरिट आधारित एडमिशन की व्यवस्था भी हो सकती है। नीचे BNYS एडमिशन से जुड़ी कुछ प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं के उदाहरण दिए गए हैं, ताकि उम्मीदवारों को प्रवेश प्रणाली की सामान्य समझ मिल सके।
| परीक्षा का नाम | संचालन संस्था | स्तर | परीक्षा की तिथि | परीक्षा का विवरण |
| NEET-UG | NTA (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) | राष्ट्रीय | 3 मई 2026 | अधिकांश सरकारी और निजी कॉलेजों में प्रवेश का मुख्य आधार। |
| KCET | KEA (कर्नाटक एग्जामिनेशन अथॉर्टी) | राज्य (कर्नाटक) | 23 – 24 अप्रैल 2026 | कर्नाटक के प्राकृतिक चिकित्सा और योग विज्ञान कॉलेजों में प्रवेश के लिए अनिवार्य। |
| TS EAMCET | JNTU हैदराबाद | राज्य (तेलंगाना) | 4 – 5 मई 2026 | तेलंगाना के आयुष पाठ्यक्रमों (BNYS सहित) के लिए प्रवेश परीक्षा। |
| AP EAPCET | APSCHE | राज्य (आंध्र प्रदेश) | 19 – 20 मई 2026 | आंध्र प्रदेश के BNYS कॉलेजों में प्रवेश के लिए आयोजित परीक्षा। |
| CUET-UG | NTA | राष्ट्रीय | 11 – 31 मई 2026 | कुछ केंद्रीय और निजी विश्वविद्यालय BNYS के लिए इसके अंकों पर विचार कर सकते हैं। |
नोट: BNYS के लिए सभी कॉलेजों में एक समान प्रवेश परीक्षा लागू नहीं होती। प्रवेश प्रक्रिया संबंधित राज्य की AYUSH काउंसलिंग, विश्वविद्यालय की नीति और उपलब्ध सीटों पर निर्भर करती है, इसलिए उम्मीदवारों को आधिकारिक नोटिफिकेशन अवश्य जांचना चाहिए।
BNYS एडमिशन प्रोसेस (स्टेप-बाय-स्टेप)
BNYS कोर्स की आवश्यक योग्यता पूरी करने के बाद एडमिशन की प्रक्रिया कुछ स्पष्ट और तय चरणों में पूरी होती है। हालांकि राज्यों और संस्थानों के अनुसार नियमों में हल्का अंतर हो सकता है, लेकिन कुल मिलाकर BNYS एडमिशन का फ्लो नीचे दिए गए स्टेप्स के अनुसार ही चलता है।
- स्टेप 1: BNYS की योग्यता सही तरह से जांचें: एडमिशन प्रक्रिया शुरू करने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि उम्मीदवार BNYS के सभी पात्रता मानदंड पूरे करता है। सामान्य रूप से 10+2 (PCB विषयों के साथ) उत्तीर्ण होना, न्यूनतम निर्धारित प्रतिशत और 31 दिसंबर तक कम से कम 17 वर्ष की आयु पूरी होना आवश्यक होता है। योग्यता पूरी न होने पर आगे की प्रक्रिया में शामिल होना संभव नहीं होता।
- स्टेप 2: NEET-UG की भूमिका स्पष्ट करें और परीक्षा में शामिल हों (यदि लागू हो): BNYS एडमिशन को लेकर सबसे अधिक भ्रम NEET-UG को लेकर होता है। वर्तमान नियमों के अनुसार अधिकांश सरकारी BNYS कॉलेजों में NEET-UG अनिवार्य है, जबकि कुछ निजी कॉलेजों में राज्य या संस्थान स्तर पर अलग प्रक्रिया हो सकती है। यदि आपके राज्य या पसंदीदा कॉलेज में NEET आवश्यक है, तो उम्मीदवार को NEET-UG परीक्षा में शामिल होना होता है, जो NTA द्वारा आयोजित की जाती है और इसमें फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी से प्रश्न पूछे जाते हैं। इसलिए अपने राज्य की AYUSH काउंसलिंग नोटिफिकेशन ध्यान से पढ़ना बेहद जरूरी है।
- स्टेप 3: राज्य स्तरीय AYUSH काउंसलिंग में रजिस्ट्रेशन करें: NEET परिणाम घोषित होने के बाद BNYS एडमिशन की अगली प्रक्रिया राज्य स्तरीय AYUSH काउंसलिंग होती है। प्रत्येक राज्य की अपनी काउंसलिंग अथॉरिटी होती है, जहां उम्मीदवार को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना होता है। समय पर रजिस्ट्रेशन न करने पर एडमिशन का अवसर छूट सकता है।
- स्टेप 4: कॉलेज चॉइस फिलिंग और प्रेफरेंस लॉक करें: रजिस्ट्रेशन के बाद उम्मीदवार को उपलब्ध BNYS कॉलेजों की सूची दी जाती है। इस चरण में छात्र अपनी प्राथमिकता के अनुसार कॉलेज चुनता है। कॉलेज की मान्यता, अस्पताल अटैचमेंट और फीस जैसे पहलुओं को ध्यान में रखकर चॉइस भरना चाहिए, क्योंकि इसका सीधा असर भविष्य के करियर पर पड़ता है।
- स्टेप 5: सीट अलॉटमेंट और मेरिट लिस्ट देखें: काउंसलिंग अथॉरिटी उम्मीदवार के NEET स्कोर, श्रेणी और भरी गई प्रेफरेंस के आधार पर सीट अलॉटमेंट रिजल्ट जारी करती है। सीट मिलने पर उम्मीदवार उसे स्वीकार कर सकता है या बेहतर विकल्प के लिए अगले राउंड में अपग्रेड का विकल्प चुन सकता है।
- स्टेप 6: डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन पूरा करें: सीट अलॉट होने के बाद डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन BNYS एडमिशन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण चरण होता है। इसमें शैक्षणिक प्रमाण पत्र, पहचान पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच की जाती है। किसी भी दस्तावेज में कमी या गलती होने पर एडमिशन रद्द भी हो सकता है।
आमतौर पर मांगे जाने वाले दस्तावेज़:- कक्षा 10वीं और 12वीं की मार्कशीट व सर्टिफिकेट
- NEET एडमिट कार्ड और स्कोरकार्ड
- आधार कार्ड / पासपोर्ट / वैध पहचान पत्र
- जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)
- मूल निवास प्रमाण पत्र
- ट्रांसफर और माइग्रेशन सर्टिफिकेट
- पासपोर्ट साइज फोटो
- स्टेप 7: कॉलेज रिपोर्टिंग और फीस जमा करें: डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के बाद उम्मीदवार को तय समय सीमा के भीतर अलॉट किए गए कॉलेज में रिपोर्ट करना होता है और एडमिशन फीस जमा करनी होती है। समय पर रिपोर्ट न करने पर सीट अगले राउंड में किसी अन्य उम्मीदवार को दी जा सकती है।
- स्टेप 8: प्राइवेट BNYS कॉलेजों में एडमिशन का विकल्प: यदि सरकारी कॉलेज में सीट नहीं मिलती, तो छात्र प्राइवेट BNYS कॉलेजों में एडमिशन का विकल्प देख सकते हैं। हालांकि, यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि कॉलेज NCISM और Ministry of AYUSH से मान्यता प्राप्त हो, ताकि डिग्री की वैधता पर कोई सवाल न उठे।
- स्टेप 9: आधिकारिक नोटिफिकेशन जरूर पढ़ें: BNYS एडमिशन से जुड़े नियम हर वर्ष और हर राज्य में बदल सकते हैं। इसलिए किसी भी ब्लॉग, सोशल मीडिया पोस्ट या एजेंट पर पूरी तरह निर्भर न रहें। राज्य AYUSH काउंसलिंग वेबसाइट और कॉलेज के आधिकारिक प्रॉस्पेक्टस को पढ़ना सबसे सुरक्षित तरीका होता है।
जिन कॉलेजों में BNYS के लिए NEET अनिवार्य है, वे छात्र NEET की तैयारी से जुड़ी पूरी जानकारी यहाँ देख सकते हैं।
BNYS कोर्स का सिलेबस
BNYS कोर्स का सिलेबस विश्वविद्यालय और संस्थान के अनुसार थोड़ा अलग हो सकता है। हालांकि, NCISM (National Commission for Indian System of Medicine) के दिशा-निर्देशों के अनुसार सभी मान्यता प्राप्त BNYS कॉलेजों में सिलेबस का स्ट्रक्चर ब्रॉडली एक जैसा होता है।
यहाँ केवल एक उदाहरण के रूप में JSS इंस्टीट्यूट ऑफ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंसेज (JSSINYS), कर्नाटक में पढ़ाए जाने वाले BNYS सिलेबस को प्रस्तुत किया गया है। छात्रों को सलाह दी जाती है कि एडमिशन से पहले अपने चयनित कॉलेज का ऑफिशियल सिलेबस संबंधित संस्थान की वेबसाइट से अवश्य जांच लें।
| प्रथम वर्ष (अध्ययन की अवधि: 18 महीने) | |
| फिलॉसोफी एंड प्रैक्टिस ऑफ योग | बायोकेमिस्ट्री |
| ह्यूमन एनाटोमी I एंड II | ह्यूमन फिजियोलॉजी I एंड II |
| फिलॉसोफी ऑफ नेचर क्योर I एंड II | |
| दूसरा वर्ष (अध्ययन की अवधि: 12 महीने) | |
| योग एंड फिजिकल कल्चर I | पैथोलॉजी I एंड II |
| माइक्रोबायोलॉजी | डायग्नोस्टिक मेथड्स इन नेचुरोपैथी |
| मॉर्डन डायग्नोस्टिक मेथड्स | बेसिक फार्माकोलॉजी |
| तीसरा वर्ष (अध्ययन की अवधि: 12 महीने) | |
| योग एंड फिजिकल कल्चर II | फॉरेंसिक मेडिसिन एंड टॉक्सिकोलॉजी |
| कम्युनिटी मेडिसिन | साइकोलॉजी एंड बेसिक साइकाइट्री |
| आब्सटेट्रिक्स एंड गाइनेकोलॉजी | मसाज, चिरोप्रेक्टिक, ऑस्टियोपैथी एंड अरोमाथेरपी |
| नूट्रिशन एंड हर्बोलॉजी | |
| चतुर्थ वर्ष (अध्ययन की अवधि: 12 महीने) | |
| योग थेरेपी | हाइड्रोथेरेपी एंड क्ले थेरेपी |
| फास्टिंग एंड डाइट थेरेपी | क्रोमोथेरेपी एंड मैग्नेटोथेरेपी |
| फिजियोथेरेपी | एक्यूपंक्चर, एक्यूप्रेशर एंड रिफ्लेक्सोलॉजी |
| माइनर सर्जरी, फर्स्ट ऐड और इमरजेंसी मेडिसिन | मेडिकल एथिक्स एंड हॉस्पिटल मैनेजमेंट |
| इंटर्नशिप | |
| BNYS कोर्स के अंत में 1 वर्ष की अनिवार्य रोटेटरी इंटर्नशिप होती है, जिसके बाद ही डिग्री प्रदान की जाती है। | |
BNYS कोर्स में इंटर्नशिप और क्लिनिकल ट्रेनिंग
BNYS कोर्स में इंटर्नशिप और क्लिनिकल ट्रेनिंग एक औपचारिकता नहीं, बल्कि पूरे कोर्स का सबसे व्यावहारिक और निर्णायक चरण होती है। BNYS की पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्रों को एक वर्ष की अनिवार्य रोटेटरी इंटर्नशिप करनी होती है, जो संबंधित कॉलेज या उससे संबद्ध नेचुरोपैथी अस्पताल में पूरी कराई जाती है। इस दौरान छात्रों को OPD और IPD दोनों सेट-अप में मरीजों के साथ सीधे काम करने का अवसर मिलता है।
इंटर्नशिप में योग चिकित्सा, डायट थेरेपी, हाइड्रोथेरेपी, मड थेरेपी, मसाज थेरेपी और लाइफस्टाइल काउंसलिंग जैसी उपचार पद्धतियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है। साथ ही बेसिक क्लिनिकल स्किल्स जैसे केस हिस्ट्री लेना, रोगी की दिनचर्या का आकलन करना और उपचार योजना बनाना भी सिखाया जाता है। यह ट्रेनिंग छात्रों को सिर्फ डिग्री होल्डर नहीं, बल्कि प्रैक्टिकल नॉलेज वाले प्रोफेशनल BNYS चिकित्सक बनने में मदद करती है।
भारत के प्रमुख BNYS कोर्स की फीस
भारत में BNYS कोर्स की फीस कॉलेज के प्रकार (सरकारी/निजी), राज्य, कोटा और सीट की श्रेणी के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। नीचे दी गई फीस केवल अनुमान के तौर पर दी गई है। वास्तविक फीस कॉलेज, राज्य और कोटा के अनुसार बदल सकती है। इसलिए एडमिशन से पहले संबंधित कॉलेज की आधिकारिक वेबसाइट और काउंसलिंग नोटिफिकेशन अवश्य जांचें।
सरकारी संस्थान
| कॉलेज का नाम | राज्य | मान्यता / संबद्धता | वार्षिक अनुमानित फीस (INR) |
| गवर्नमेंट योगा एवं नेचुरोपैथी मेडिकल कॉलेज, चेन्नई | तमिलनाडु | TN Dr. MGR मेडिकल यूनिवर्सिटी | INR 20,000 – INR 30,000 |
| गवर्नमेंट BNYS कॉलेज, मैसूर | कर्नाटक | RGUHS, बेंगलुरु | INR 25,000 – INR 40,000 |
| श्री धर्मस्थल मंजुनाथेश्वर BNYS (Govt Quota) | कर्नाटक | RGUHS | INR 50,000 – INR 70,000 |
| गवर्नमेंट नेचुरोपैथी कॉलेज, जयपुर | राजस्थान | राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज | INR 40,000 – INR 60,000 |
| गवर्नमेंट BNYS कॉलेज, कोलकाता | पश्चिम बंगाल | राज्य स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय | INR 30,000 – INR 50,000 |
प्राइवेट संस्थान
| कॉलेज का नाम | राज्य | मान्यता / संबद्धता | वार्षिक अनुमानित फीस (INR) |
| SDM कॉलेज ऑफ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंसेज | कर्नाटक | RGUHS | INR 1.5 लाख – INR 2 लाख |
| JSS इंस्टीट्यूट ऑफ नेचुरोपैथी | कर्नाटक | JSS यूनिवर्सिटी | INR 2 लाख – INR 2.5 लाख |
| महात्मा गांधी नेचुरोपैथी कॉलेज | महाराष्ट्र | राज्य स्वास्थ्य विश्वविद्यालय | INR 1.8 लाख – INR 2.2 लाख |
| आल्वा’s BNYS कॉलेज | कर्नाटक | RGUHS | INR 1.2 लाख – INR 1.8 लाख |
| स्वरूपानंद योग एवं नेचुरोपैथी कॉलेज | मध्य प्रदेश | निजी विश्वविद्यालय | INR 1 लाख – 1.5 लाख |
BNYS बनाम BAMS क्या अंतर है?
नीचे BNYS और BAMS कोर्स के बीच मुख्य अंतर बताए गए हैं:
| तुलना का आधार | BNYS (बैचलर ऑफ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंसेज) | BAMS (बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी) |
| चिकित्सा पद्धति | प्राकृतिक चिकित्सा और योग आधारित उपचार | आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली |
| इलाज का तरीका | दवाइयों का बहुत सीमित उपयोग, जीवनशैली, योग, डाइट, थेरेपी पर जोर | आयुर्वेदिक दवाइयाँ, पंचकर्म, कुछ हद तक सर्जिकल प्रक्रिया |
| कोर्स अवधि | 5.5 वर्ष (4.5 वर्ष + 1 वर्ष इंटर्नशिप) | 5.5 वर्ष (4.5 वर्ष + 1 वर्ष इंटर्नशिप) |
| एडमिशन प्रक्रिया | कई राज्यों में NEET अनिवार्य, कुछ कॉलेजों में अलग नियम | NEET-UG अनिवार्य |
| मुख्य विषय | योग थेरेपी, नेचुरोपैथी, एनाटॉमी, फिज़ियोलॉजी, न्यूट्रिशन | आयुर्वेद, शल्य तंत्र, काय चिकित्सा, द्रव्यगुण |
| सर्जरी का अध्ययन | नहीं | सीमित स्तर पर (आयुर्वेदिक सर्जरी) |
| क्लिनिकल एक्सपोज़र | कॉलेज और अस्पताल पर निर्भर, आमतौर पर मध्यम | अपेक्षाकृत अधिक |
| सरकारी नौकरियाँ | सीमित और राज्य-निर्भर | BNYS की तुलना में अधिक अवसर |
| प्राइवेट प्रैक्टिस | वेलनेस सेंटर, योग क्लिनिक, लाइफस्टाइल क्लिनिक | आयुर्वेदिक क्लिनिक, अस्पताल |
| करियर फोकस | प्रिवेंटिव और लाइफस्टाइल मेडिसिन | क्यूरेटिव और ट्रीटमेंट-ओरिएंटेड मेडिसिन |
अगर आप आयुष के अन्य मेडिकल कोर्सेस के बारे में भी जानना चाहते हैं, तो BAMS कोर्स की पूरी जानकारी यहाँ देख सकते हैं।
BNYS कोर्स के बाद करियर ऑप्शन्स
BNYS कोर्स पूरा करने के बाद छात्र केवल एक तय रास्ते तक सीमित नहीं रहते, बल्कि हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़े कई क्षेत्रों में अपना करियर बना सकते हैं। करियर का चुनाव काफी हद तक छात्र की रुचि, इंटर्नशिप के दौरान मिले अनुभव और प्रैक्टिकल स्किल्स पर निर्भर करता है।
- योग और नेचुरोपैथी क्लिनिक में प्रैक्टिस: BNYS ग्रेजुएट योग, आहार और विभिन्न प्राकृतिक थेरेपी के माध्यम से मरीजों को सलाह और उपचार प्रदान कर सकते हैं। यह प्रैक्टिस नेचुरोपैथी और योग आधारित होती है और इसमें एलोपैथिक दवाइयों का उपयोग शामिल नहीं होता। निजी क्लिनिक या किसी स्थापित नेचुरोपैथी सेंटर से जुड़कर इस क्षेत्र में काम किया जा सकता है।
- वेलनेस और लाइफस्टाइल काउंसलिंग (हॉस्पिटल्स व वेलनेस सेंटर्स): कई हॉस्पिटल, वेलनेस सेंटर और कॉरपोरेट हेल्थ प्रोग्राम्स में BNYS ग्रेजुएट्स को लाइफस्टाइल मैनेजमेंट, स्ट्रेस मैनेजमेंट और डाइट प्लानिंग से जुड़े रोल्स मिलते हैं। इन जगहों पर वे अक्सर हेल्थ कोच, वेलनेस काउंसलर या लाइफस्टाइल कंसल्टेंट के रूप में काम करते हैं।
- योग थैरेपी: BNYS में योग विज्ञान और योग थेरेपी की मजबूत समझ विकसित होती है। इसके बाद छात्र योग थेरेपिस्ट के रूप में वेलनेस सेंटर्स, आयुर्वेद एवं योग संस्थानों, स्पा और रिहैबिलिटेशन सेंटर्स में काम कर सकते हैं, जहाँ योग को उपचार के हिस्से के रूप में अपनाया जाता है।
- हेल्थ और न्यूट्रिशन एडवाइजर: BNYS कोर्स में न्यूट्रिशन और डाइट थेरेपी की पढ़ाई होने के कारण फिटनेस सेंटर्स, वेलनेस क्लिनिक्स और हेल्थ प्रोग्राम्स में न्यूट्रिशन एडवाइजर की भूमिका मिल सकती है। हालांकि, क्लिनिकल डाइटिशियन के रूप में काम करने के लिए अलग से मान्यता प्राप्त डिग्री या रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता हो सकती है।
- शिक्षण और रिसर्च से जुड़े अवसर: BNYS ग्रेजुएट्स AYUSH, योग और नेचुरोपैथी से जुड़े संस्थानों में असिस्टेंट टीचर, इंस्ट्रक्टर या रिसर्च असिस्टेंट के रूप में काम कर सकते हैं। अकादमिक या रिसर्च फील्ड में आगे बढ़ने के लिए M.Sc या MD जैसी उच्च शिक्षा करना आवश्यक होता है।
- स्व-रोजगार और वेलनेस स्टार्टअप्स: कई BNYS ग्रेजुएट्स अपना योग या नेचुरोपैथी क्लिनिक, वेलनेस स्टूडियो या लाइफस्टाइल कंसल्टिंग सर्विस शुरू करते हैं। इसके लिए स्थानीय नियमों के अनुसार लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन और आवश्यक अनुमतियों का ध्यान रखना जरूरी होता है।
नोट: BNYS के बाद करियर तभी मजबूत बनता है जब छात्र डिग्री के साथ-साथ प्रैक्टिकल स्किल्स, इंटर्नशिप और फील्ड एक्सपीरियंस पर भी ध्यान देता है। आज के हेल्थ और वेलनेस सेक्टर में सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि प्रैक्टिकल स्किल्स भी जरूरी हैं।
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BNYS के बाद सरकारी नौकरी के अवसर
BNYS कोर्स के बाद सरकारी क्षेत्र में करियर के अवसर मौजूद होते हैं, लेकिन यह समझना जरूरी है कि ये अवसर सीमित, राज्य-निर्भर और नीति-आधारित होते हैं। BNYS ग्रेजुएट्स को मुख्य रूप से AYUSH से जुड़े सरकारी विभागों और योजनाओं के तहत नियुक्तियाँ मिलती हैं, न कि मुख्यधारा के एलोपैथिक मेडिकल कैडर में।
सरकारी स्तर पर BNYS ग्रेजुएट्स को आमतौर पर इन क्षेत्रों में अवसर मिल सकते हैं:
- राज्य आयुष विभाग के अंतर्गत योग या नेचुरोपैथी चिकित्सक के पद
- सरकारी आयुष अस्पतालों, योग एवं वेलनेस सेंटरों में नियुक्तियाँ (राज्य-विशेष नियमों के अनुसार)
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) और राज्य सरकार की प्रिवेंटिव हेल्थ योजनाओं के अंतर्गत कॉन्ट्रैक्ट पद
- जिला या ब्लॉक स्तर के वेलनेस प्रोग्राम्स में लाइफस्टाइल और योग से जुड़े रोल
- सरकारी योग संस्थानों, स्कूलों और प्रशिक्षण केंद्रों में इंस्ट्रक्टर या कंसल्टेंट की भूमिका
यह भी ध्यान देने योग्य है कि BNYS से जुड़े अधिकांश सरकारी पद कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर होते हैं और इनकी संख्या सीमित रहती है। स्थायी (परमानेंट) सरकारी पद हर वर्ष या हर राज्य में उपलब्ध नहीं होते। इसके अलावा, अलग-अलग राज्यों में BNYS की सरकारी भर्ती से जुड़ी पात्रता और पदों की प्रकृति भी अलग हो सकती है।
इसलिए, यदि कोई छात्र BNYS को केवल स्थायी सरकारी नौकरी के उद्देश्य से चुन रहा है, तो उसे पहले अपने राज्य की आयुष भर्ती नीतियों, विज्ञापन पैटर्न और नियुक्ति प्रक्रिया को समझना चाहिए। BNYS में सरकारी क्षेत्र के अवसर मौजूद हैं, लेकिन यह करियर पथ मुख्य रूप से वेलनेस, प्रिवेंटिव हेल्थ और लाइफस्टाइल मेडिसिन पर केंद्रित रहता है।
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BNYS के बाद सैलरी
BNYS कोर्स के बाद सैलरी आपके एक्सपीरियंस, जॉब सेक्टर, कंपनी और शहर के हिसाब से भिन्न हो सकती है। यहां कुछ प्रमुख जॉब प्रोफाइल के साथ सैलरी रेंज AmbitionBox 2026 के अनुसार नीचे दी गई है, ये आंकड़े अनुमानित हैं और स्थान, संस्थान और क्लाइंट बेस पर निर्भर करते हैं।
| जॉब प्रोफाइल | अनुभव स्तर | अनुमानित वार्षिक सैलरी रेंज (INR) |
| योग चिकित्सक / योग थेरेपिस्ट | 0 – 1 वर्ष | INR 2.6 लाख – INR 3.7 लाख |
| वेलनेस कंसल्टेंट | 2 – 6 वर्ष | INR 3.2 लाख – INR 8.5 लाख |
| योग थेरेपिस्ट | 4 – 8 वर्ष | INR 3.7 लाख – INR 5.7 लाख |
BNYS के बाद हायर एजुकेशन के विकल्प
BNYS कोर्स पूरा करने के बाद छात्र अपनी रुचि, करियर लक्ष्य और स्पेशलाइजेशन के अनुसार भारत और विदेश दोनों जगह हायर एजुकेशन के कई विकल्प चुन सकते हैं। हायर स्टडी के माध्यम से छात्र क्लिनिकल प्रैक्टिस, रिसर्च, टीचिंग, न्यूट्रिशन, योग थेरेपी या हेल्थकेयर मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ सकते हैं।
मेडिकल और थेरेपी आधारित पोस्टग्रेजुएट विकल्प
- एमडी इन नेचुरोपैथी
- एमडी इन योगिक साइंसेज
- एमडी इन एक्यूपंक्चर
- एमडी इन डाइटेटिक्स एंड न्यूट्रिशन
साइंस, न्यूट्रिशन और बिहेवियरल स्टडीज़ के विकल्प
- एमएससी इन ह्यूमन फिजियोलॉजी
- एमएससी इन न्यूट्रिशन एंड डाइटेटिक्स
- एमएससी इन साइकोलॉजी
- एमएससी इन हेल्थकेयर मैनेजमेंट / एडमिनिस्ट्रेशन
पीजी डिप्लोमा और स्पेशलाइजेशन कोर्स
- पीजी डिप्लोमा इन एक्यूपंक्चर
- पीजी डिप्लोमा इन क्लीनिकल न्यूट्रिशन एंड डाइटेटिक्स
- पीजी डिप्लोमा इन योगा थेरेपी
- पीजी डिप्लोमा इन हर्बल मेडिसिन
विदेश में हायर स्टडी और करियर के अवसर
BNYS ग्रेजुएट्स के लिए कुछ देशों में योग थेरेपी, वेलनेस, न्यूट्रिशन और अल्टरनेटिव मेडिसिन से जुड़े कोर्स उपलब्ध होते हैं। हालांकि, विदेश में पढ़ाई या प्रैक्टिस के लिए देश-विशेष की मान्यता, लाइसेंसिंग नियम और एलिजिबिलिटी अलग-अलग हो सकती है। इसलिए विदेश में हायर स्टडी या करियर की योजना बनाते समय संबंधित विश्वविद्यालय और रेगुलेटरी बॉडी की आधिकारिक जानकारी जांचना आवश्यक होता है।
FAQs
नहीं, BNYS और MBBS बराबर नहीं हैं। MBBS एलोपैथिक मेडिकल सिस्टम पर आधारित होता है, जिसमें दवाइयों और सर्जरी के जरिए इलाज किया जाता है, जबकि BNYS योग और नेचुरोपैथी पर आधारित कोर्स है, जिसमें जीवनशैली, आहार और प्राकृतिक उपचार के माध्यम से स्वास्थ्य सुधार पर ध्यान दिया जाता है। दोनों का करियर और प्रैक्टिस एरिया अलग होता है।
BNYS की डिग्री भारत में AYUSH सिस्टम के अंतर्गत मान्यता प्राप्त है, लेकिन विदेशों में इसे सीधे मेडिकल डिग्री के रूप में मान्यता नहीं दी जाती। हालांकि, कई देशों में BNYS ग्रेजुएट्स योग, वेलनेस, न्यूट्रिशन और लाइफस्टाइल काउंसलिंग जैसे क्षेत्रों में काम कर सकते हैं, जिसके लिए देश-विशेष नियमों और अतिरिक्त सर्टिफिकेशन की आवश्यकता हो सकती है।
BNYS कोर्स पूरा करने और राज्य स्तरीय पंजीकरण (registration) के बाद उम्मीदवार अपने नाम के आगे “डॉ.” लिख सकते हैं। हालांकि, उनकी पहचान और प्रैक्टिस नेचुरोपैथी और योग चिकित्सा तक सीमित होती है। उन्हें एलोपैथिक डॉक्टर की तरह दवाइयाँ लिखने या सर्जरी करने का अधिकार नहीं होता।
नहीं, BNYS डॉक्टर एलोपैथी की प्रैक्टिस नहीं कर सकते। उनकी प्रैक्टिस केवल नेचुरोपैथी, योग, डाइट, लाइफस्टाइल मैनेजमेंट और प्राकृतिक उपचार पद्धतियों तक सीमित होती है। एलोपैथिक दवाइयाँ लिखना या एलोपैथिक इलाज करना कानूनी रूप से अनुमत नहीं है।
हमें उम्मीद है कि इस लेख में आपको BNYS कोर्स से जुड़ी सभी आवश्यक जानकारी मिल गई होगी। ऐसे ही अन्य कोर्स से संबंधित लेख पढ़ने के लिए Leverage Edu के साथ बने रहें।
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