अगर आप लॉ ग्रेजुएट हैं और राज्य सरकार के अंतर्गत न्यायिक क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं, तो आप सहायक जिला अभियोजन अधिकारी (ADPO) बन सकते हैं। एडीपीओ की फुल फॉर्म ‘असिस्टेंट डिस्ट्रिक्ट पब्लिक प्रोसीक्यूशन ऑफिसर’ होती है। एडीपीओ एक सरकारी कानूनी अधिकारी होता है, जो राज्य सरकार की ओर से आपराधिक मामलों में अदालत में पैरवी करता है। यह पद अभियोजन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है तथा यह सुनिश्चित करता है कि मामले से संबंधित फाइलें, साक्ष्य और तर्क कानून के अनुसार सही ढंग से तैयार और प्रस्तुत किए जाएं। यदि आप जानना चाहते हैं कि एडीपीओ कैसे बनें, तो यह लेख आपके लिए हैं।
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सहायक जिला अभियोजन अधिकारी क्या होता है?
सहायक जिला अभियोजन अधिकारी (ADPO) राज्य सरकार के अभियोजन विभाग में नियुक्त एक लॉ ऑफिसर होता है, जो आपराधिक मामलों में राज्य की ओर से अभियोजन संचालित करता है। भारत के विभिन्न राज्यों में इस पद को अलग-अलग नामों से जाना जाता है; जैसे हरियाणा में इसे असिस्टेंट डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी (ADA), मध्य प्रदेश में सहायक जिला अभियोजन अधिकारी (ADPO), दिल्ली में असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर (APP) तथा उत्तर प्रदेश और बिहार आदि राज्यों में असिस्टेंट प्रॉसिक्यूशन ऑफिसर (APO) कहा जाता है।
सहायक जिला अभियोजन अधिकारी (ADPO) की प्रमुख जिम्मेदारियां
एक अभियोजन अधिकारी की प्रमुख जिम्मेदारियों में निम्नलिखित कार्य शामिल होते हैं:
- अभियोजन अधिकारी FIR, चार्जशीट, केस डायरी और अन्य दस्तावेज़ों की गहन समीक्षा करता है। इसके साथ ही साक्ष्यों की कमियों की पहचान करता है और केस फ़ाइल को व्यवस्थित रूप से तैयार करता है।
- साक्ष्यों का विधिक परीक्षण सुनिश्चित करना, गवाहों की तैयारी में सहायता करना तथा उन्हें समय पर न्यायालय में प्रस्तुत कराने की प्रक्रिया का समन्वय करना ADPO की जिम्मेदारी होती है।
- अभियोजन अधिकारी को अदालत में आवेदन, जवाब, याचिकाएं, लिखित प्रस्तुतियां तथा कानूनी शोध आधारित नोट्स तैयार करना और अदालत की समय-सीमाओं का पालन सुनिश्चित करना होता है।
- अदालत की कार्यवाही के दौरान केस प्रस्तुति में सहायता करना, सुनवाई की तिथियों और प्रक्रियात्मक कार्यों का समन्वय करना तथा वरिष्ठ अभियोजकों की सहायता करना अभियोजन अधिकारी की अहम जिम्मेदारी होती है।
- अभियोजन अधिकारी सरकार की ओर से रोज़मर्रा के मामलों को देखता है। इसके अलावा विभिन्न जांच एजेंसियों (जैसे पुलिस, CBI, NIA) के साथ समन्वय रखना, केस की प्रगति पर निगरानी रखना और आवश्यक रिपोर्ट व रिकॉर्ड बनाए रखना उनके प्रमुख कार्यों में शामिल है।
सहायक जिला अभियोजन अधिकारी (ADPO) बनने के लिए योग्यता
केंद्र और राज्य सरकारों में सहायक जिला अभियोजन अधिकारी बनने के लिए आपको कुछ आवश्यक योग्यताओं को पूरा करना होगा, जैसे
- नागरिकता: आपको भारत का नागरिक होना चाहिए।
- शैक्षणिक योग्यता: आपके पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से LLB में ग्रेजुएशन की डिग्री होनी चाहिए तथा बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) में एक अधिवक्ता के रूप में नामांकन होना चाहिए।
- कार्य अनुभव: कुछ राज्यों में अधिसूचना में उल्लिखित तिथि के अनुसार विशिष्ट वर्षों के लिए कानूनी प्रैक्टिस की आवश्यकता हो सकती है।
- आयु सीमा: भारत के विभिन्न राज्यों में ADPO पद के लिए आयु सीमा अलग-अलग हो सकती है। सामान्यतः आपकी आयु न्यूनतम 21 वर्ष और अधिकतम 40 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। हालांकि विभिन्न श्रेणियों, जैसे अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) तथा दिव्यांग अभ्यर्थियों को आयु में छूट प्रदान की जाती है, जो राज्यवार अलग-अलग हो सकती है।
ADPO कैसे बनें? (स्टेप-बाय-स्टेप गाइड)
सहायक जिला अभियोजन अधिकारी (ADPO) भर्ती परीक्षा का आयोजन अलग-अलग राज्यों के लोक सेवा आयोग द्वारा किया जाता है। यहां ADPO बनने की प्रक्रिया के कुछ प्रमुख चरण दिए गए हैं:
स्टेप 1: मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं पास करें
सबसे पहले आपको भारत के किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड या संस्थान से किसी भी स्ट्रीम में 12वीं कक्षा पास करनी होगी। इसके बाद ‘बार काउंसिल ऑफ इंडिया’ (BCI) से मान्यता प्राप्त संस्थानों में 5 वर्षीय इंटीग्रेटेड LLB कोर्स में एडमिशन के लिए राष्ट्रीय या राज्य स्तरीय प्रवेश परीक्षाएं जैसे CLAT, AILET, MH CET Law या TS LAWCET आदि में पास होना आवश्यक होता है। हालांकि चयनित संस्थान के अनुसार प्रवेश परीक्षा अलग-अलग हो सकती है।
स्टेप 2: LLB की डिग्री प्राप्त करें
यदि आप ग्रेजुएशन के बाद LLB करना चाहते हैं, तो आप 3 वर्षीय ‘बैचलर ऑफ लेजिसलेटिव लॉ’ (LLB) प्रोग्राम में एडमिशन ले सकते हैं। इस कोर्स में अधिकांश संस्थानों में एडमिशन के लिए प्रवेश परीक्षा पास करना आवश्यक होता है। LLB कंप्लीट करने के बाद आपको ‘बार काउंसिल ऑफ इंडिया’ (BCI) या संबंधित ‘राज्य बार काउंसिल’ में अधिवक्ता के रूप में नामांकन कराना होता है। ध्यान रखें कि ADPO भर्ती के लिए कुछ राज्यों में अधिसूचना में उल्लिखित तिथि के अनुसार विशिष्ट वर्षों के लिए कानूनी प्रैक्टिस की आवश्यकता हो सकती है।
स्टेप 3: राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) परीक्षा पास करें
भारत में प्रत्येक राज्य सहायक जिला अभियोजन अधिकारी (ADPO) भर्ती के लिए राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) परीक्षा (जैसे- MPPSC, UPPSC, BPSC, CGPSC) आयोजित करता है। आमतौर पर यह परीक्षा प्रारंभिक, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार चरणों के माध्यम से होती है।
प्रारंभिक परीक्षा एक ऑब्जेक्टिव टाइप स्क्रीनिंग परीक्षा होती है, जिसके माध्यम से आपको मुख्य परीक्षा के लिए चयनित किया जाता है। बताना चाहेंगे कि हर राज्य में ADPO परीक्षा का सिलेबस अलग-अलग होता है। किंतु मुख्य परीक्षा में लॉ सब्जेक्ट्स जैसे भारतीय दंड संहिता (IPC), आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC), भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA), नागरिक प्रक्रिया संहिता, भारतीय संविदा अधिनियम आदि लगभग सभी राज्यों के सिलेबस का हिस्सा होते हैं।
मुख्य परीक्षा में पास होने के बाद इंटरव्यू तथा पर्सनालिटी टेस्ट इस चयन प्रक्रिया का फाइनल स्टेप है, जिसे मौखिक परीक्षा भी कहा जाता है। आमतौर पर इंटरव्यू पैनल में संबंधित राज्य के माननीय उच्च न्यायालय के न्यायाधीश शामिल होते हैं। ध्यान रखें कि कुछ राज्य सिलेक्शन के लिए इस चरण में एक निर्दिष्ट योग्यता प्रतिशत भी निर्धारित कर सकते हैं।
स्टेप 4: डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन कराएं
मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू में पास होने के बाद आपको प्राप्त अंक, रिजर्वेशन नियम, कट-ऑफ और वैकेंसी के अनुरूप मेरिट लिस्ट जारी की जाती है। इसमें नाम आने पर आपको संबंधित आयोग द्वारा डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए बुलाया जाता है। ध्यान रखें कि वेरिफिकेशन के दौरान अगर आपके किसी डाक्यूमेंट्स या मेडिकल फिटनेस रिपोर्ट में कमी पाई गई तो आपकी नियुक्ति रद्द भी हो सकती है।
स्टेप 5: ADPO पद पर नियुक्ति पाएं
सभी चरण सफलतापूर्वक पास करने के बाद संबंधित आयोग द्वारा आपको अपॉइंटमेंट लेटर प्रदान किया जाता है। इसके बाद सहायक जिला अभियोजन अधिकारी के पद पर आपकी नियुक्ति संबंधित राज्य के विभिन्न जिलों की जिला अदालतों में उपलब्ध रिक्तियों के आधार पर की जाती है।
सहायक जिला अभियोजन अधिकारी (ADPO) की सैलरी
भारत में सहायक जिला अभियोजन अधिकारी (ADPO) की मासिक सैलरी राज्य के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। सामान्यतः यह 7वें वेतन आयोग के पे लेवल-10 के अंतर्गत निर्धारित की जाती है। यहां आप उदाहरण के लिए MP ADPO की अनुमानित मासिक सैलरी स्ट्रक्चर देख सकते हैं:
| विवरण | जानकारी |
| पे लेवल | लेवल 10 |
| बेसिक पे | INR 56,100 |
| ग्रेड पे | INR 4,200 |
| DA | मौजूदा रेट्स के अनुसार |
| HRA | शहर के आधार पर 8% से 24% |
| ग्रॉस सैलरी (अनुमानित) | INR 70,000 INR 85,000 |
नोट: यह जानकारी विभिन्न स्रोतों से ली गई है, इसलिए इसमें बदलाव संभव है।
ADPO को मिलने वाली सुविधाएं
नियमित सैलरी के अलावा एक सहायक जिला अभियोजन अधिकारी को चिकित्सा सुविधा, सिटी कॉम्पेनसेटरी अलाउंस (CCA), लीव ट्रैवल कंसेशन (LTC), प्रोविडेंट फंड (PF), पेंशन (NPS) और सेवानिवृत्ति लाभ जैसी अन्य सुविधाएं भी मिलती हैं।
FAQs
एडीपीओ के लिए वही अभ्यर्थी पात्र होता है, जिसके पास मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से LLB की डिग्री हो और जो संबंधित राज्य लोक सेवा आयोग द्वारा निर्धारित आयु व अन्य पात्रता शर्तों को पूरा करता हो।
ADPO की फुल फॉर्म ‘सहायक जिला अभियोजन अधिकारी’ होती है। यह राज्य के प्रॉसिक्यूशन सिस्टम में नियुक्त एक सरकारी लॉ ऑफिसर का पद है।
सहायक अभियोजन अधिकारी (APO) एक सरकारी कानूनी अधिकारी होता है, जो राज्य की ओर से आपराधिक मामलों में प्रॉसिक्यूशन चलाने और अदालत में सबूत व तर्क प्रस्तुत करने का कार्य करता है।
ADPO की सैलरी सामान्यतः 7वें वेतन आयोग के पे-लेवल-10 के अंतर्गत होती है, जिसमें बेसिक सैलरी लगभग INR 56,100 से शुरू होकर राज्य व भत्तों के अनुसार बढ़ती है।
अभियोजन अधिकारी बनने के लिए मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से LLB डिग्री प्राप्त कर संबंधित राज्य लोक सेवा आयोग (PSC) की अभियोजन सेवा परीक्षा उत्तीर्ण करनी होती है। इसमें चयन होने पर आपकी नियुक्ति संबंधित राज्य के जिला अदालतों में की जाती है।
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आशा है कि इस लेख के माध्यम से आप जान पाएं होंगे कि सहायक जिला अभियोजन अधिकारी (ADPO) कैसे बनें। ऐसे ही अन्य करियर से जुड़े लेख पढ़ने के लिए Leverage Edu के साथ बने रहें।

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