पहलवान की ढोलक NCERT Class 12

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पहलवान की ढोलक class 12 NCERT Solutions

पहलवान की ढोलक को लिखा है महान लेखक फणीश्वर नाथ रेणु ने। फणीश्वर नाथ रेणु जी ने ऐसी कई रचनाएं लिखी हैं। हम यहां उन्ही के द्वारा पहलवान की ढोलक पाठ से आपके सामने लेखक परिचय, पाठ का सारांश, कठिन शब्द, MCQ और प्रश्न-उत्तर आपके सामने लाएंगे। चलिए, जानते हैं पहलवान की ढोलक को इस ब्लॉग की मदद से।

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लेखक परिचय

हिंदी-साहित्य के लोकप्रिय लेखक फणीश्वर नाथ रेणु का जन्म 4 मार्च 1921 को बिहार के पूर्णिया जिले के औराही हिंगना में हुआ था। इन्होंने 1942 के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में बढ़-चढ़कर भाग लिया और 1950 में नेपाली जनता को राजशाही दमन से मुक्ति दिलाने के लिए भरपूर योगदान दिया। इन्होंने पहलवान की ढोलक जैसी कई रचनाएं की थी. इनकी साहित्य-साधना व राष्ट्रीय भावना के मद्देनजर भारत सरकार ने इन्हें पदमश्री से नवाजा था। 11 अप्रैल 1977 को 56 वर्ष की उम्र में पटना में इनका निधन हो गया था।

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पाठ प्रतिपाद्य

पहलवान की ढोलक’ कहानी व्यवस्था के बदलने के साथ लोक-कला और इसके कलाकार के अप्रासंगिक हो जाने की कहानी है। राजा साहब की जगह नए राजकुमार का आकर जम जाना सिर्फ़ व्यक्तिगत सत्ता-परिवर्तन नहीं, बल्कि जमीनी पुरानी व्यवस्था के पूरी तरह उलट जाने और उस पर सभ्यता के नाम पर एकदम नई व्यवस्था के आरोपित हो जाने का प्रतीक है। यह ‘भारत’ पर ‘इंडिया’ का छा जाना है, जो लुट्टन पहलवान को लोक-कलाकार के आसन से उठाकर पैट-भरने के लिए हाय-तौबा करने वाली नीचता की भूमि पर पटक देती है।

ऐसी स्थिति में गाँव की गरीबी पहलवानी जैसे शौक को क्या पालती? फिर भी, पहलवान जीवट ढोल के बोल में अपने आपको न सिर्फ़ जिलाए रखता है, बल्कि भूख व महामारी से दम तोड़ रहे गाँव को मौत से लड़ने की ताकत भी प्रदान करता है। कहानी के अंत में भूख-महामारी की शक्ल में आई मौत की साजिश जब लुट्टन की भरी-पूरी पहलवानी को फटे ढोल की पोल में बदल देते हैं तो इस करुणा/त्रासदी में लुट्टन हमारे सामने कई सवाल छोड़ जाता है। मनुष्यता की साधना और जीवन-सौंदर्य के लिए लोक-कलाओं को प्रासंगिक बनाए रखने हेतु हमारी क्या भूमिका हो सकती है? यह पाठ ऐसे कई प्रश्न छोड़ जाता है।

सारांश

सर्दी का मौसम था और ऊपर से गाँव में मलेरिया व हैजे का प्रकोप। अमावस्या की रात में आकाश के तारे ही रौशनी चमका रहे थे। सियारों व उल्लुओं की डरावनी आवाज गूँज रही थी। कभी किसी झोपड़ी से कराहने की आवाज तथा कभी-कभी बच्चों के रोने की आवाज आती थी। सायं या रात्रि को सब मिलकर रोते थे। इस सारे माहौल में पहलवान की ढोलक संध्या से प्रात:काल तक एक ही गति से बजती रहती थी। यह आवाज गाँव में उर्जा भरती थी।

  • लुट्टन पहलवान गाँव में प्रसिद्ध था। नौ वर्ष की आयु से वह अनाथ था। शादी हो चुकी थी। विधवा सास ने उसे पाला। वह गाय चराता, ताजा दूध पीता तथा कसरत करता था। गाँव के लोग उसकी सास को तंग किया करते थे इसलिए लुट्टन इनसे बदला लेना चाहता था।
  • कसरत के कारण वह किशोरावस्था में ही पहलवान बन गया। एक बार लुट्टन श्यामनगर मेला में ‘दंगल’ देखने गया। पहलवानों की कुश्ती व दाँव-पेंच देखकर उसने ‘शेर के बच्चे’ को चुनौती दे डाली। ‘शेर के बच्चे’ का असली नाम था-चाँद सिंह। उसका गुरु पहलवान बादल सिंह था। तीन ही दिन में उसने पंजाबी व पठान पहलवानों को हरा दिया था। श्यामनगर के दंगल व शिकार-प्रिय वृद्ध राजा साहब उसे दरबार में रखने की सोच रहे थे कि लुट्टन ने शेर के बच्चे को चुनौती दे दी।
  • चाँद सिंह बाज की तरह लुट्टन पर टूटा, लेकिन वह सफ़ाई से आक्रमण को सँभालकर उठ खड़ा हुआ। राजा ने लुट्टन को कुश्ती से हटने को कहा। सबने उसे समझाया लेकिन लुट्टन बोला कि इजाजत न मिली तो पत्थर पर माथा पटककर मर जाएगा। पंजाबी पहलवान लुट्टन को गालियों दे रहे थे। दर्शक उसे लड़ने की अनुमति देना चाहते थे। राजा साहब ने इजाजत दे दी। लुट्टन का ढोल बजने लगा था। चाँद ने उसे कसकर दबा लिया था। वह उसे चित्त करने की कोशिश में था। लुट्टन के समर्थन में सिर्फ़ ढोल की आवाज थी, जबकि चाँद के पक्ष में राजमत व बहुमत था।
  • लुट्टन की आँखें बाहर निकल रही थीं, तभी ढोल की पतली आवाज सुनाई दी ’धाक-धिना, तिरकट-तिना, धाक-धिना, तिरकट-तिना।’ इसका अर्थ था-दाँव काटो, बाहर हो जाओ। लुट्टन ने दाँव काटी तथा लपक कर चाँद की गर्दन पकड़ ली।
  • ढोल ने आवाज दी-चटाक्-चट्-धा अर्थात उठाकर पटक दे। लुट्टन ने दाँव व जोर लगाकर चाँद को जमीन पर दे मारा। ढोलक ने ‘धिना-धिना, धिक-धिना’ कहा और लुट्टन ने चाँद सिंह को चारों खाने चित्त कर दिया। ढोलक ने ‘वाह बहादुर!” की ध्वनि की तथा जनता ने माँ दुर्गा की, महावीर जी की, राजा की जय-जयकार की। लुट्टन ने सबसे पहले ढोलों को प्रणाम किया और फिर दौड़कर राजा साहब को गोद में उठा लिया और उन्होंने उसे दरबार में रख लिया।
  • चाँद सिंह की हार चौंकाने वाली थी। राजा साहब ने लुट्टन को पुरस्कृत न करके अपने दरबार में सदा के लिए रख लिया। राज पंडित व मैनेजर ने लुट्टन का विरोध किया कि वह क्षत्रिग्र नहीं है। राजा साहब नहीं माने। लुट्टन सिंह देखते-देखते लोकप्रिय होने लगा। उसने सभी नामी पहलवानों को हराया जिसमें ‘काला खाँ’ जैसा प्रसिद्ध पहलवान भी था।
  • लुट्टन सिंह मेलों में घुटने तक लंबा चोंगा पहने, अस्त-व्यस्त पगड़ी बाँधकर मतवाले हाथी की तरह झूमता चलता। हलवाई के आग्रह पर दो सेर रसगुल्ला खाता तथा मुँह में आठ-दस पान एक साथ दूँस लेता। उसके बच्चों वाले शौक थे। उससे दंगल करने वाला कोई न था। इस तरह पंद्रह वर्ष बीत गए और उसके दो पुत्र हुए। उसकी सास मर चुकी थी और पत्नी भी स्वर्ग सिधार गई। दोनों लड़के पहलवान थे। दोनों का भरण-पोषण दरबार से हो रहा था।
  • पहलवान हर रोज सुबह उनसे कसरत करवाता। दिन में उन्हें सांसारिक ज्ञान भी देता। वह बताता कि उसका गुरु ढोल है, और कोई नहीं। अचानक राजा साहब चल बसे। नए राजकुमार ने विलायत से आकर राजकाज अपने हाथ में ले लिया। उसने पहलवानों की छुट्टी कर दी।
  • लुट्टन ढोलक कंधे से लटकाकर अपने पुत्रों के साथ गाँव लौट आया। गाँव वालों ने उसकी झोपड़ी बना दी तथा वह गाँव के नौजवानों व चरवाहों को कुश्ती सिखाने लगा। खाने-पीने का खर्च गाँव वालों पर था। गरीबी से किसानों व मजदूरों के बच्चे स्कूल में आने बंद हो गए। अब वह अपने लड़कों को ही ढोल बजाकर कुश्ती सिखाता।
  • लड़के दिनभर मजदूरी करने लगे थे। गाँव पर अचानक संकट आ गया। सूखे के कारण अन्न की कमी हो गई तथा फिर मलेरिया व हैजा फैला। सभी घर खाली हो गए। प्रतिदिन दो-तीन लाशें उठने लगीं। लोग चुप रहने लगे। ऐसे समय में केवल पहलवान की ढोलक ही बजती थी जो गाँव के अधमरे, दवाई रहित व्यक्तियों में शक्ति भरती थी। एक दिन पहलवान के दोनों बेटे भी चल बसे। पहलवान ने सारी रात ढोल पीटा। दोनों पेट के बल पड़े हुए थे। उसने लंबी साँस लेकर कहा-दोनों बहादुर गिर पड़े। उस दिन उसने राजा श्यामानंद की दी हुई रेशमी जाँघिया पहनी और सारे शरीर पर मिट्टी मलकर थोड़ी कसरत की फिर दोनों पुत्रों को कंधों पर लादकर नदी में बहा आया। इस घटना से सब की हिम्मत टूट गई।
  • रात में फिर पहलवान की ढोलक बजने लगी तो लोगों की हिम्मत दुगुनी बढ़ गई। चार-पाँच दिनों के बाद एक रात ढोलक की आवाज नहीं सुनाई पड़ी। सुबह उसके शिष्यों ने देखा कि पहलवान की लाश ‘चित’ पड़ी है। शिष्यों ने बताया कि उसके गुरु ने कहा था कि उसके शरीर को चिता पर पेट के बल लिटाया जाए क्योंकि वह कभी ‘चित’ नहीं हुआ और चिता सुलगाने के समय ढोल जरूर बजाना।

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पहलवान की ढोलक से संबंधित Class 12 NCERT Solutions

कठिन शब्द

अमावस्या अँधेरी रात
प्रात:काल सुबह
अनाथ माँ-बाप का न होना
किशोरावस्था लड़कपन
दंगल कुश्ती
शिकार-प्रिय शिकार का शौक़ीन
राजमत लोगों का समर्थन
पुरस्कृत इनाम देना
क्षत्रिग्र क्षत्रिय
सांसारिक संसार का ज्ञान
विलायत विदेश
चरवाहों पशु चराने वाले
चित हार जाना

पहलवान की ढोलक से संबंधित प्रश्नोत्तर (Questions and Answers)

प्रश्न 1: लुट्टन कौन था? उसका नाम क्यों फैला था?

उत्तर: लुट्टन के माँ-बाप उस समय मर गए थे जब वह मात्र नौ वर्ष का था। उसका पालन-पोषण उसकी विधवा सास ने किया। उसने चाँद सिंह जैसे प्रसिद्ध पहलवान को हराकर राज पहलवान बनने का गौरव प्राप्त किया था। इस कारण उसका नाम फैला था।

प्रश्न 2: कुश्ती के समय ढोल की आवाज़ से लुट्टन पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर: ढोल बजते ही लुट्टन की रगों में खून दौड़ने लगता था। उसे हर थाप में नए दाँव-पेंच सुनाई पड़ते थे। ढोल की आवाज उसे साहस प्रदान करती थी। इस वजह से वह दंगल भी जीता।

प्रश्न 3: ढोलक की आवाज़ का पूरे गाँव पर क्या असर होता था? (CBSE-2008, 2012, 2015)

उत्तर: महामारी से ग्रामीणों को ढोलक की आवाज संजीवनी शक्ति की तरह मौत से लड़ने की प्रेरणा देती थी। यह आवाज बूढ़े-बच्चों व जवानों की आँखों के आगे दंगल का दृश्य बना देती थी। उनके अंदर बिजली दौड़ जाती थी।

प्रश्न 4: महामारी फैलने के बाद गाँव में सूर्योदय और सूर्यास्त के दृश्य में क्या अंतर होता था? (CBSE-2008)

उत्तर: महामारी ने सारे गाँव को बुरी तरह से प्रभावित किया था। लोग सुर्योदय होते ही अपने मृत संबंधियों की लाशें उठाकर गाँव के श्मशान की ओर जाते थे ताकि उनका अंतिम संस्कार किया जा सके। सूर्यास्त होते ही सारे गाँव में मातम छा जाता था।

प्रश्न 5: लुट्टन पहलवान की अंतिम इच्छा क्या थी?

उत्तर: पहलवान की अंतिम इच्छा थी कि मरने के बाद उसे चिता पर पेट के बल लिटा दिया जाए क्योंकि वह जीवन में कभी ‘चित’ नहीं हुआ। इसके अलावा चिता सुलगाने के समय ढोलक बजाया जाए।

MCQs

प्रश्न 1: लुट्टन कौन सी चीज़ बजाने का आदी था?
(क) सितार
(ख) हारमोनियम
(ग) ढोलक
(घ) तानपुरा

उत्तर: (ग)

प्रश्न 2: गाँव में कौन सा मौसम था?
(क) ठंड
(ख) गर्मी
(ग) मानसून
(घ) पतझड़

उत्तर: (क)

प्रश्न 3: लुट्टन किस पहलवान से लड़ने की जिद्द कर रहा था?
(क) गब्बर सिंह
(ख) भूरा सिंह
(ग) रणवीर सिंह
(घ) चाँद सिंह

उत्तर: (घ)

प्रश्न 4: लुट्टन रोज़ सुबह क्या करता था?
(क) सोना
(ख) कसरत करना
(ग) खाना पकाना
(घ) झगड़ना

उत्तर: (ख)

प्रश्न 5: लुट्टन के कितने बच्चे थे?
(क) 4
(ख) 1
(ग) 8
(घ) 2

उत्तर: (घ)

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पहलवान की ढोलक पाठ के इस ब्लॉग में आपने इस पाठ के बारे में जाना। हमेशा आशा है कि यह ब्लॉग आपको अच्छा लगा होगा। इसी तरह और अन्य तरह के बाकी ब्लॉग पढ़ने के लिए Leverage Edu वेबसाइट पर जाकर पढ़ सकते हैं।

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