जानिए प्राचीन गुरुकुल शिक्षा प्रणाली के बारे में

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गुरुकुल शिक्षा प्रणाली

दुनिया बदलने के लिए शिक्षा सबसे मजबूत हथियार है। नेल्सन मंडेला  पुरातनकाल से ही शिक्षा हर सभ्यता का जरूरी हिस्सा रही है। समय और बदलते जमाने के साथ शिक्षा का स्वरूप भी बदला है।  शिक्षा की एक ऐसी ही प्राचीन प्रणाली जो दुनिया के पूर्वी हिस्से से शुरू हुई और आज भी प्रेरणा का जरिया बनी हुई है वो है गुरुकुल शिक्षा प्रणाली । इस ब्लॉग में हम आपको प्राचीन समय में ले जाएंगे और गुरुकुल शिक्षा प्रणाली को समझाने की कोशिश करेंगे। इसमें मॉडर्न दुनिया से इसके जुड़ाव पर भी बात होगी।

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गुरुकुल शिक्षा प्रणाली क्या है?(What is the Gurukul Education System?)

गुरुकुल शिक्षा प्रणाली  रेजिडेंशियल (residential) शिक्षा प्रणाली का रूप थी, जहां छात्र टीचर या आजार्य के घर यानी गुरुकुल में रहते थे जो शिक्षा का केंद्र हुआ करता था। इस शिक्षा प्रणाली का आधार अनुशासन और मेहनत थे। छात्रों से अपेक्षा की जाती थी कि वो अपने गुरुओं से सीखें और इस जानकारी को जीवन में इस्तेमाल भी करें। इसमें छात्र और टीचर का रिश्ता बहुत पवित्र होता था और अक्सर इसमें किसी तरह का भुगतान नहीं किया जाता था। हालांकि छात्र टीचर को उनके सहयोग के लिए गुरुदक्षिणा जरूर दिया करते थे। गुरुकुल शिक्षा प्रणाली की शुरुआत वैदिक काल में हुई जब किसी भी तरह की शिक्षा प्रणाली नहीं हुआ करती थी। लेकिन स्किल बेस्ड (skill-based) शिक्षा के साथ वेद, पुराण आदि से सीखने का चलन जरूर था। ये अध्यात्मिक किताबें छात्रों को उनकी जानकारी बढ़ाने में मदद करती थीं।

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गुरुकुल का अर्थ

गुरुकुल का अर्थ है वह स्थान या क्षेत्र, जहां गुरु का कुल यानी परिवार निवास करता है। प्राचीन काल में शिक्षक को ही गुरु या आचार्य मानते थे और वहां शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को उसका परिवार माना जाता था। गुरुकुल के छात्रों को लिए आठ साल का होना अनिवार्य था और पच्चीस वर्ष की आयु तक लोग यहां रहकर शिक्षा प्राप्त और ब्रह्मचर्य का पालन करते थे।

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अहम विशेषताएं (Salient Features)

गुरुकुल शिक्षा प्रणाली अपनी खूबियों के चलते सालों से दुनिया को प्रेरित कर रही है। इस सेक्शन में इस शिक्षा प्रणाली की खासियतों और काम करने के तरीके  के बारे में भी बताया गया है। 

  • शिक्षा संस्कृति और धर्म से प्रभावित थी जो प्राचीन भारतीय समाज के अहम  तत्व थे। 
  • प्रोफेशनल, सोशल, धार्मिक  और अध्यात्मिक शिक्षा पर फोकस करते हुए  इसमें समग्र (Holistic) शिक्षा  पर  जोर दिया जाता था। 
  • गुरुकुल में चुने जाने  का आधार बच्चों का  ऐटिट्यूड यानी रवैया और मॉरल स्ट्रैंथ यानी नैतिक मजबूती थे जो छात्रों के कंडक्ट या आचरण  में नजर आते थे
  • कला, साहित्य, शास्त्र और दर्शन की जानकारी के साथ छात्रों को व्यावहारिक हुनर भी सिखाए जाते थे और उन्हें अलग-अलग कामों के लिए तैयार किया जाता था। 
  • गुरुकुल शिक्षा प्रणाली से छात्र का पूरी तरह से विकास होता था और जोर शिक्षण के साइकोलॉजिकल या मनोवैज्ञानिक तरीके पर होता था। 

गुरुकुल शिक्षा के उद्देश्य

Gurukul Education System कई उद्देश्य पर आधारित थी। यहाँ का मुख्य उद्देश्य ज्ञान विकसित करना और शिक्षा पर अत्यधिक ध्यान केंद्रित करना होता है। सामाजिक मानकों के बावजूद हर छात्र के साथ समान व्यवहार किया जाता है। इस शिक्षा प्रणाली से मिले निर्देश छात्रों को अपनी तरह की लाइफ बनाने में मदद करते थे। इस तरह से छात्र को जीवन के कठिन समय में भी खुद को दृढ़ता से खड़े रखने में मदद मिलती थी। गुरुकुल शिक्षा प्रणाली के कुछ खास उद्देश्य ये रहे- 

  • सम्पूर्ण विकास Holistic Development
  • व्यक्तित्व विकास Personality growth
  • आध्यात्मिक जाग्रति Spiritual Awakening
  • प्रकृति और समाज के प्रति जागरूकता Awareness about nature and society
  • पीढ़ी-दर पीढ़ी ज्ञान और कल्चर को आगे बढ़ाना Passing on of knowledge and culture through generations
  • जीवन में सेल्फ कंट्रोल और अनुशासन Self-control and discipline in life

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अनमोल शिक्षा

यहां पर धर्मशास्त्र की पढाई से लेकर अस्त्र की शिक्षा भी सिखाई जाती है। योग साधना और यज्ञ के लिए गुरुकुल को एक अभिन्न अंग माना जाता है। यहां पर हर विद्यार्थी हर प्रकार के कार्य को सीखता है और शिक्षा पूर्ण होने के बाद ही अपना काम रूचि और गुण के आधार पर चुनता था। उपनिषदों में लिखा गया है कि मातृ देवो भवः ! पितृ देवो भवः ! आचार्य देवो भवः ! अतिथि देवो भवः !

गुरु के महत्व को प्रतिपादित करने के लिए कहा गया है कि गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु गुरु देवो महेश्वर, गुरु साक्षात् परमं ब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नम:| अर्थात- गुरु ही ब्रह्मा है, गुरु ही विष्णु है और गुरु ही भगवान शंकर है. गुरु ही साक्षात परब्रह्म है। ऐसे गुरु को मैं प्रणाम करता हूं।

गुरुकुल में किस प्रकार छात्रों को विभाजित किया जाता है

छात्रों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया जाता है:

1. वासु – 24 साल की उम्र तक शिक्षा प्राप्त करने वाले। 

2. रुद्र – 36 साल की उम्र तक शिक्षा प्राप्त करने वाले।

3. आदित्य – 48 साल की उम्र तक शिक्षा प्राप्त करने वाले।

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1. गुरुओं को पता था कि किस प्रकार से चीजों को कैसे निर्देशित किया जाए यानी कैसे शिक्षा दी जाए।

2. इस परम्परा को जितना समय चाहिए होता था उतना ही समय लगता था और इसके कारण, छात्र एक सूक्ष्म रूप में बाहर निकलते थे।

3. छात्र एक विशेष शैली हासिल करने और दक्षता के उच्च स्तर पर प्रयुक्त होते थे।

4. छात्र गुरु का सम्मान करते थे और उन्हें अनुशासन पालन करना सिखाया जाता था।

5. ज्यादातर शिक्षण व्यावहारिक था और शिक्षा की इस शैली के कई फायदे थे।

6.  छात्र को इस प्रकार का वातावरण दिया जाता था कि व्यक्ति अपने पसंद के काम के साथ एक सफल व्यक्ति बन जाए।

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गुरुकुल शिक्षा प्रणाली की अहमियत (Importance of the Gurukul Education System)

तकनीक के लगातार बदलते आयामों के साथ दुनिया ने फॉरमल एजुकेशन (formal educational) की तरफ थोड़ा और आगे बढ़ा है, जो गुरुकुल शिक्षा प्रणाली से काफी अलग है। इस प्रणाली का भारतीय क्षेत्र पर एकाधिकार हुआ करता था। इस प्रणाली की अहमियत कई गुना ज्यादा थी। इससे मॉडर्न एजुकेशन सिस्टम बहुत कुछ सीख सकता है। यहां गुरुकुल शिक्षा प्रणाली की उन खासियतों की लिस्ट दी जा रही है जिनको बिलकुल भी इग्नोर नहीं किया जा सकता है-

  • प्राकृतिक वातावरण में अहम जानकारी जिसमें सहायक जानकारी दी जाती थी और इसका समाज पर कोई गलत प्रभाव भी नहीं पड़ता था। 
  • एक्स्ट्रा करिकुलम एक्टिविटी (extra-curricular ) जैसे खेल, योग और चहलकदमी पर फोकस जिससे छात्रों के शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होता था। 
  • लर्निंग स्किल ( learning skills) जैसे क्राफ्ट, डांसिंग या सिंगिंग पर जोर और हर छात्र को उनके पैशन को पहचानने के लिए उत्साहित करना। साथ में उनके स्किल को और विकसित करना। 
  • छात्रों को अपने रोजमर्रा के काम खुद ही करने होते थे, जिसकी वजह से वह आत्मनिर्भर बनते थे। इस तरह से उन्हें जीवन निर्वाह के लिए जरूरी स्किल सीखने में मदद मिलती थी। 
  • पर्सनालिटी डेवलपमेंट, बौद्धिकता और आत्म विश्वास पर काम किया जाता था। छात्र अपने विकास के लिए सोचने की योग्यता भी विकसित कर लेते थे। 

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आधुनिक समय से जुड़ाव (Relevance in the Modern Times)

हालांकि समकालीन समय में गुरुकुल शिक्षा नहीं पाई जाती है। पर बहुत से मॉडर्न एजुकेशन सिस्टम इससे प्रेरणा जरूर लेते हैं। गुरुकुल शिक्षा प्रणाली मॉडर्न समय के साथ भी प्रासंगिक है। चलिए उन तरीकों पर नजर डालें जिनके साथ ये प्रणाली डिजिटल एरा से जुड़ी हुई है-

  • सम्पूर्ण शिक्षा पर फोकस होने के चलते गुरुकुल शिक्षा प्रणाली आज की पीढ़ी के लिए कमाल कर सकती है। इसके साथ आज के छात्रों का सम्पूर्ण विकास हो सकता है।
  • वैल्यू बेस्ड एजुकेशन(value-based education) की अहमियत इस प्रणाली में पाई जा सकती है। जो कि मॉडर्न दुनिया में छात्रों के लिए अभिन्न शिक्षा बन सकती है। 
  • ये लोगों को अपना पैशन खोजने में भी मदद करती है और ये सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहती है बल्कि ये उनको लाइफ की असल जरूरत समझने में मदद भी करती है।

FAQ

प्रश्न 1: भारत में कुल कितने गुरुकुल हैं?

उत्तर: भारत में 4 हज़ार गुरुकुल हैं।

प्रश्न 2: गुरुकुल में क्या पढ़ाया जाता है?

उत्तर: वेदों के साथ गणित, विज्ञान, अंग्रेजी, अर्थशास्त्र की शिक्षा भी प्रदान की जाती है।

प्रश्न 3: गुरुकुल कौन सी भाषा का शब्द है?

उत्तर: गुरुकुल शब्द प्राचीन शब्द है और ये शब्द संस्कृत भाषा से लिए गया है।

प्रश्न 4: गुरुकुल में छात्रों को कितनी श्रेणियों में विभाजित किया जाता है?

उत्तर: 3 श्रेणियों में विभाजित किया गया है।

प्रश्न 5: गुरुकुल का प्रमुख उद्देश्य क्या है?

उत्तर: सामाजिक मानकों के बावजूद हर छात्र के साथ समान व्यवहार करना।

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हम आशा करते हैं कि इस ब्लॉग ने आपको गुरुकुल शिक्षा प्रणाली से जुड़े कई रंगों से रूबरू कराया होगा। आप अपनी चुनी हुई पढ़ाई की फील्ड में ग्लोबल एक्सपोजर (global exposure) पाने की चाहत रखते हैं तो Leverage Edu एक्सपर्ट आपकी मदद को तैयार हैं। एक्सपर्ट आपको बेस्ट कोर्स और युनिवर्सिटी का चुनाव करने में मदद करेंगे। इसके साथ एडमिशन की प्रक्रिया में भी ये आपकी मदद करेंगे ताकि आप एक प्रभावी एप्लिकेशन (application) भेज सकें। हमारे साथ फ्री कंसल्टेशन सेशन के लिए आज ही साइन अप करें। 

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