‘उज्ज्वल गाथा कैसे गाऊँ, मधुर चाँदनी रातों की’ इस कथन के माध्यम से कवि यह कहना चाहता है कि उसके जीवन में प्रेम के कुछ ऐसे सुखद और निजी क्षण रहे हैं, जो उसके लिए बहुत ही पवित्र और अमूल्य हैं। चाँदनी रातों में बिताए गए वे मधुर पल उसके जीवन की सबसे उजली यादें हैं।
वर्तमान में कवि का जीवन कष्ट और निराशा से भरा हुआ है। ऐसे समय में वही सुखद स्मृतियाँ उसके लिए आशा और सहारे का आधार बन गई हैं। कवि उन पलों को किसी उज्ज्वल गाथा की तरह सबके सामने व्यक्त नहीं करना चाहता, क्योंकि वे उसके निजी अनुभव हैं। वह उन मधुर स्मृतियों को अपने हृदय में संजोकर रखना चाहता है, क्योंकि वही उसे जीवन की कठिन राह पर आगे बढ़ने की शक्ति देती हैं।
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