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कविता का शीर्षक ‘उत्साह’ इसलिए रखा गया है क्योंकि कवि इस गीत के माध्यम से समाज में जोश, ऊर्जा और चेतना भरना चाहते हैं। कविता में बादल केवल प्रकृति का चित्र नहीं हैं, बल्कि वे जनता की आवाज़ और सामूहिक शक्ति का प्रतीक हैं। कवि चाहते हैं कि जैसे बादल गरजकर वातावरण में हलचल पैदा करते हैं, वैसे ही लोग भी अपने भीतर छिपी शक्ति को पहचानें।
कवि का उद्देश्य लोगों को निष्क्रियता से बाहर निकालकर क्रांति और परिवर्तन के लिए प्रेरित करना है। वह चाहते हैं कि जनता डर और निराशा छोड़कर साहस के साथ आगे बढ़े। इसी प्रेरक भावना और परिवर्तन की पुकार के कारण कविता का शीर्षक ‘उत्साह’ रखा गया है, क्योंकि यही भावना पूरी कविता का मूल संदेश है।

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