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इस कविता में जयशंकर प्रसाद जी का व्यक्तित्व अत्यंत संवेदनशील, कोमल, भावुक और आत्मिक गहराई से युक्त दिखाई देता है। वे जीवन के अनुभवों को सूक्ष्म दृष्टि से देखते हैं और छोटी-छोटी बातों में भी गहरे भाव खोज लेते हैं। उनका हृदय सरल, दयालु, निश्छल और करुणा से भरा था। अतीत को स्मरण करते हुए वे कभी दुखी होते हैं तो कभी स्वयं को समझाने का प्रयास करते हैं।
प्रसाद जी दूसरों के सुख-दुख को गहराई से अनुभव करने वाले, जीवन से प्रेम करने वाले और उसे सुंदर रूप में देखने की चाह रखने वाले व्यक्ति थे। वे स्वभाव से अन्तर्मुखी, गंभीर, मर्यादित और विनम्र थे। एक महान कवि होते हुए भी स्वयं को साधारण व उपलब्धिहीन मानते थे।

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