ह्यूमस मिट्टी की ऊपरी परत (Topsoil) में पाया जाने वाला गहरे भूरे या काले रंग का स्थायी कार्बनिक पदार्थ है, जो पौधों और जानवरों के सड़े-गले अवशेषों के लंबे समय तक चलने वाले अपघटन (decomposition) के बाद बनता है। यह साधारण सड़ा हुआ जैविक कचरा नहीं होता, बल्कि सूक्ष्मजीवों द्वारा रूपांतरित किए गए जटिल और स्थिर कार्बनिक यौगिकों (जैसे ह्यूमिक पदार्थ) का मिश्रण होता है।
जब पत्तियाँ, टहनियाँ, जड़ें और अन्य जैविक पदार्थ मिट्टी पर गिरते हैं, तो वे पहले लीफ लिटर (leaf litter) के रूप में जमा होते हैं। समय के साथ बैक्टीरिया, कवक और अन्य सूक्ष्मजीव इन अवशेषों को तोड़ते हैं और अंततः जो गाढ़ा, काला-भूरा पदार्थ बनता है, वही ह्यूमस कहलाता है।
सरल शब्दों में कहा जाए तो, ह्यूमस मिट्टी का वह जीवांश भाग है जो मिट्टी को उपजाऊ बनाता है, पानी रोकने में मदद करता है और पौधों को पोषक तत्व उपलब्ध कराता है।
यह मिट्टी में लंबे समय तक बना रहता है और इसलिए मिट्टी की दीर्घकालिक उर्वरता और स्वास्थ्य का आधार माना जाता है।
ह्यूमस कैसे बनता है?
ह्यूमस का निर्माण एक धीमी, प्राकृतिक और जैविक प्रक्रिया के माध्यम से होता है, जिसे ह्यूमिफिकेशन कहा जाता है। यह प्रक्रिया तब शुरू होती है, जब पौधों और जानवरों के अवशेष मिट्टी की सतह पर जमा होते हैं।
- सबसे पहले पत्तियाँ, टहनियाँ, जड़ें, फसल अवशेष और मृत जीव-जंतु मिट्टी पर गिरकर लीफ लिटर बनाते हैं।
- इसके बाद बैक्टीरिया, कवक और अन्य सूक्ष्मजीव इन अवशेषों को धीरे-धीरे सड़ाना शुरू करते हैं। इस चरण में सरल कार्बनिक पदार्थ जैसे शर्करा और प्रोटीन जल्दी टूट जाते हैं, जबकि लकड़ी जैसे कठोर पदार्थों का अपघटन अधिक समय लेता है।
- अपघटन के दौरान जैविक पदार्थ कई रासायनिक परिवर्तनों से गुजरते हैं। सूक्ष्मजीवों की क्रिया से छोटे-छोटे कार्बनिक अणु बनते हैं, जो आगे चलकर आपस में जुड़कर जटिल और स्थायी कार्बनिक यौगिकों में बदल जाते हैं। यही यौगिक आगे चलकर ह्यूमस का रूप लेते हैं।
- यह पूरी प्रक्रिया मुख्य रूप से मिट्टी की ऊपरी परत (Topsoil) में होती है, जहाँ ऑक्सीजन, नमी और सूक्ष्मजीवों की सक्रियता पर्याप्त होती है। चूँकि यह एक धीमी प्रक्रिया है, इसलिए ह्यूमस बनने में कई वर्ष लग सकते हैं, लेकिन एक बार बनने के बाद यह मिट्टी में लंबे समय तक बना रहता है और उसकी उर्वरता को बनाए रखता है।
| पौधों और जानवरों के अवशेष → सूक्ष्मजीवों द्वारा अपघटन → जटिल कार्बनिक पदार्थ → ह्यूमस |
कौन से सूक्ष्मजीव ह्यूमस निर्माण को प्रभावित करते हैं?
ह्यूमस का निर्माण मिट्टी में मौजूद सूक्ष्मजीवों की सक्रिय भूमिका के बिना संभव नहीं है। मुख्य रूप से निम्न सूक्ष्मजीव इस प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं –
- बैक्टीरिया
- सरल कार्बनिक पदार्थों जैसे शर्करा और प्रोटीन को तेजी से विघटित करते हैं
- ह्यूमस निर्माण की प्रारंभिक अवस्था में सबसे अधिक सक्रिय रहते हैं
- अपघटन प्रक्रिया को तेज़ करते हैं
- कवक
- कठोर और जटिल पदार्थों जैसे लकड़ी, सेल्यूलोज और लिग्निन को तोड़ते हैं
- जंगलों और पेड़-पौधों वाली मिट्टी में विशेष रूप से महत्वपूर्ण
- ह्यूमस को अधिक स्थायी और समृद्ध बनाते हैं
- एक्टिनोमाइसीट्स
- बैक्टीरिया और कवक के बीच की भूमिका निभाते हैं
- जटिल कार्बनिक यौगिकों के अपघटन में सहायक
- मिट्टी की विशिष्ट सोंधी गंध के लिए उत्तरदायी
- केंचुए
- जैविक पदार्थों को छोटे-छोटे कणों में बदलते हैं
- ह्यूमस को मिट्टी के खनिज कणों के साथ अच्छी तरह मिलाते हैं
- मिट्टी को भुरभुरा और अधिक उपजाऊ बनाते हैं
- अन्य सूक्ष्म मिट्टी जीव (प्रोटोज़ा, छोटे कीट आदि)
- सूक्ष्मजीवों की जनसंख्या को संतुलित रखते हैं
- पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण में सहायता करते हैं
अतः बैक्टीरिया, कवक और एक्टिनोमाइसीट्स ह्यूमस निर्माण के मुख्य कारक हैं, जबकि केंचुए और अन्य मिट्टी जीव इस प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाते हैं।
ह्यूमस क्यों महत्वपूर्ण है और यह मिट्टी के स्वास्थ्य को कैसे सुधारता है?
ह्यूमस मिट्टी का सबसे महत्वपूर्ण घटक माना जाता है, क्योंकि यह मिट्टी की उर्वरता, संरचना और जैविक संतुलन तीनों को एक साथ बेहतर बनाता है। इसकी भूमिका केवल पौधों को पोषण देने तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह मिट्टी को लंबे समय तक स्वस्थ और उपयोग योग्य बनाए रखता है।
- ह्यूमस मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों को स्थिर रूप में बाँधकर रखता है, जिससे वे पानी के साथ बह नहीं जाते और पौधों को धीरे-धीरे उपलब्ध होते रहते हैं।
- यह मिट्टी के कणों को आपस में जोड़कर मजबूत लेकिन भुरभुरी संरचना बनाता है, जिससे मिट्टी न बहुत कठोर रहती है और न ही बहुत ढीली होती है।
- ह्यूमस मिट्टी की जल-धारण क्षमता बढ़ाता है और जल-निकास को संतुलित रखता है, जिससे जड़ों को न तो पानी की कमी होती है और न ही जलभराव की समस्या आती है।
- यह मिट्टी में वायु संचार को बेहतर बनाता है, जिससे जड़ों और सूक्ष्मजीवों को आवश्यक ऑक्सीजन मिलती है।
- ह्यूमस मिट्टी के रासायनिक संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है, जिससे अत्यधिक अम्लीयता, क्षारीयता या उर्वरकों के दुष्प्रभाव कम हो जाते हैं।
- यह मिट्टी में रहने वाले लाभकारी सूक्ष्मजीवों की गतिविधि को नियंत्रित और सक्रिय रखता है, जिससे पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण लगातार होता रहता है।
- ह्यूमस मिट्टी की प्राकृतिक पुनरुत्पादन क्षमता को बनाए रखता है, जिससे बार-बार खेती करने पर भी मिट्टी कमजोर नहीं पड़ती।
इसी कारण कहा जाता है कि ह्यूमस मिट्टी की “रीढ़” है इसके बिना मिट्टी केवल कणों का ढेर होती है, जबकि ह्यूमस उसे जीवंत, संतुलित और दीर्घकाल तक उपजाऊ बनाता है।
मिट्टी में ह्यूमस की मात्रा कैसे बढ़ाई जा सकती है?
मिट्टी में ह्यूमस की मात्रा बढ़ाना एक धीमी लेकिन सतत प्रक्रिया है। इसके लिए मिट्टी में जैविक पदार्थों की निरंतर आपूर्ति और मिट्टी की प्राकृतिक संरचना का संरक्षण आवश्यक होता है। सही प्रबंधन अपनाकर समय के साथ मिट्टी में ह्यूमस की मात्रा प्रभावी रूप से बढ़ाई जा सकती है।
- खेत या बगीचे में फसल अवशेष, सूखी पत्तियाँ और पौधों के तने वापस मिट्टी में मिलाने चाहिए, ताकि जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़े और वे धीरे-धीरे ह्यूमस में परिवर्तित हो सकें।
- अच्छी तरह सड़ी हुई कम्पोस्ट और गोबर की खाद का नियमित प्रयोग मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ जोड़ता है और ह्यूमस निर्माण की प्रक्रिया को तेज़ करता है।
- मल्चिंग करने से मिट्टी की सतह ढकी रहती है, जिससे नमी बनी रहती है और जैविक पदार्थों का अपघटन अनुकूल परिस्थितियों में होता है।
- हरी खाद वाली फसलों को उगाकर बाद में मिट्टी में मिला देने से जैविक पदार्थ और नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, जो ह्यूमस निर्माण में सहायक होती है।
- अत्यधिक जुताई से बचना चाहिए, क्योंकि बार-बार जुताई करने से मिट्टी में मौजूद ह्यूमस तेजी से नष्ट हो जाता है। कम जुताई या संरक्षण जुताई अपनाना अधिक लाभकारी होता है।
- फसल अवशेषों को जलाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे मिट्टी का जैविक पदार्थ नष्ट हो जाता है और ह्यूमस बनने की प्राकृतिक प्रक्रिया बाधित होती है।
- खेत में विविध फसलों और पेड़-पौधों का समावेश करने से मिट्टी में जैविक अवशेषों की निरंतर आपूर्ति बनी रहती है, जिससे ह्यूमस का स्तर धीरे-धीरे बढ़ता है।
इन उपायों को नियमित रूप से अपनाने पर मिट्टी में ह्यूमस की मात्रा बढ़ती है और मिट्टी लंबे समय तक उपजाऊ, संतुलित और स्वस्थ बनी रहती है।
ह्यूमस और कम्पोस्ट में अंतर
ह्यूमस और कम्पोस्ट दोनों ही मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने से जुड़े हुए हैं, लेकिन ये एक-दूसरे के समान नहीं हैं। कम्पोस्ट सड़े-गले जैविक पदार्थ का वह रूप है जिसे मनुष्य तैयार करता है, जबकि ह्यूमस उसी जैविक पदार्थ का मिट्टी में बनने वाला अंतिम और स्थायी रूप होता है। दोनों के बीच का अंतर नीचे दी गई तालिका से स्पष्ट किया जा सकता है।
| आधार | ह्यूमस | कम्पोस्ट |
| परिभाषा | मिट्टी में पाया जाने वाला स्थायी, गहरे रंग का कार्बनिक पदार्थ | सड़े-गले जैविक पदार्थ से बनी खाद |
| निर्माण प्रक्रिया | प्राकृतिक रूप से लंबे समय में बनता है | नियंत्रित रूप से मनुष्य द्वारा तैयार किया जाता है |
| अवस्था | अत्यंत जटिल और स्थायी रूप | आंशिक रूप से विघटित जैविक पदार्थ |
| मिट्टी में स्थायित्व | बहुत अधिक, वर्षों तक बना रहता है | अपेक्षाकृत कम, धीरे-धीरे समाप्त हो जाता है |
| पोषक तत्व उपलब्धता | पोषक तत्व धीरे-धीरे प्रदान करता है | पोषक तत्व अपेक्षाकृत जल्दी उपलब्ध कराता है |
| मिट्टी पर प्रभाव | मिट्टी की संरचना और दीर्घकालिक स्वास्थ्य सुधारता है | मिट्टी में जैविक पदार्थ और पोषण बढ़ाता है |
| उपयोग | मिट्टी में स्वतः उपस्थित रहता है | मिट्टी में मिलाया जाता है |
| भूमिका | दीर्घकालिक उर्वरता का आधार | ह्यूमस बनने की प्रक्रिया का प्रारंभिक चरण |
ह्यूमस, ह्यूमिक एसिड और फुल्विक एसिड में अंतर
ह्यूमस मिट्टी में पाए जाने वाले स्थायी कार्बनिक पदार्थों का समग्र रूप है, जबकि ह्यूमिक एसिड और फुल्विक एसिड उसी ह्यूमस के प्रमुख घटक होते हैं। इन तीनों का स्वरूप, घुलनशीलता और भूमिका अलग-अलग होती है, जिसे नीचे तालिका से समझा जा सकता है।
| आधार | ह्यूमस | ह्यूमिक एसिड | फुल्विक एसिड |
| प्रकृति | मिट्टी में पाया जाने वाला स्थायी कार्बनिक पदार्थ | ह्यूमस का एक प्रमुख घटक | ह्यूमस का सबसे सक्रिय घटक |
| घुलनशीलता | पानी में अघुलनशील | क्षारीय घोल में घुलनशील, अम्लीय में अघुलनशील | पानी में सभी pH पर घुलनशील |
| रंग | गहरा भूरा या काला | गहरा भूरा या काला | हल्का पीला या सुनहरा |
| आणविक आकार | सबसे जटिल और बड़ा | अपेक्षाकृत बड़ा | सबसे छोटा |
| मिट्टी में स्थायित्व | बहुत अधिक, वर्षों तक | मध्यम से अधिक | कम, लेकिन अत्यंत सक्रिय |
| मुख्य भूमिका | मिट्टी की दीर्घकालिक उर्वरता और संरचना सुधार | पोषक तत्वों को बाँधकर मिट्टी में रोकना | पोषक तत्वों को पौधों तक शीघ्र पहुँचाना |
| पौधों पर प्रभाव | अप्रत्यक्ष लेकिन स्थायी | जड़ों के विकास में सहायक | पोषक तत्वों का त्वरित अवशोषण |
| कार्य का स्वरूप | दीर्घकालिक | मध्यम अवधि | शीघ्र प्रभाव |
अर्थात
- ह्यूमस = मिट्टी का स्थायी जैविक आधार
- ह्यूमिक एसिड = पोषक तत्वों को मिट्टी में पकड़कर रखने वाला भाग
- फुल्विक एसिड = पोषक तत्वों को पौधों तक जल्दी पहुँचाने वाला भाग
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