फसल को ‘हाथों के स्पर्श की गरिमा’ और ‘महिमा’ कहकर कवि क्या व्यक्त करना चाहता है?

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फसल को 'हाथों के स्पर्श की गरिमा' और 'महिमा' कहकर कवि क्या व्यक्त करना चाहता है
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‘फसल को हाथों के स्पर्श की गरिमा’ और ‘महिमा’ कहकर कवि किसानों की मेहनत के महत्व को प्रकट करना चाहता है। क्योंकि फसल को उगाने में मानव के हाथों का श्रम लगा होता है। किसान व मजदूर अपने हाथों से फसलों को उगाने से लेकर पकने तक लगातार श्रम करते हैं।

फसल के लिए भले ही पानी, मिट्टी, सूरज की किरणें तथा हवा जैसे तत्वों की आवश्यकता होती है। किंतु किसान के परिश्रम के बिना ये सभी साधन व्यर्थ हैं। यदि किसान अपनी मेहनत द्वारा इसे भली प्रकार से नहीं बोता और सींचता तब तक इन सब साधनों की सफलता नहीं होगी। इसलिए मानव श्रम फसल की पैदावार के लिए सबसे जरुरी है। यही किसानों के श्रम की गरिमा और महिमा है, जिसके कारण फसलें अच्छी तरह बढ़ती हैं।

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