बच्चे की मुसकान और एक बड़े व्यक्ति की मुसकान में गहरा अंतर होता है। बच्चे की मुसकान बिल्कुल सच्ची, निश्छल और बिना किसी बनावट के होती है। वह किसी स्वार्थ, डर या सोच-समझ से नहीं जुड़ी होती, बल्कि मन की सहज खुशी का सीधा इज़हार होती है। बच्चा छोटी-छोटी बातों में भी खुलकर मुसकरा लेता है, क्योंकि उसका मन बोझ से मुक्त होता है।
इसके विपरीत, एक बड़े व्यक्ति की मुसकान अक्सर अनुभवों, जिम्मेदारियों और जीवन की जटिलताओं से घिरी होती है। कई बार यह मुसकान भीतर की खुशी से ज़्यादा परिस्थितियों के अनुसार ओढ़ी जाती है। उसमें सोच, संकोच या मजबूरी छिपी हो सकती है। इस तरह जहाँ बच्चे की मुसकान दिल से निकलती है, वहीं बड़े व्यक्ति की मुसकान अकसर हालात के हिसाब से दिखाई देती है।
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