उत्तर: सही उत्तर (A) पोर्ट ब्लेयर है
विस्तृत उत्तर:
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की राजधानी पोर्ट ब्लेयर है। बताना चाहेंगे सितंबर 2024 में, भारत सरकार ने इस शहर का नाम बदलकर श्री विजया पुरम कर दिया। यह नाम चोल साम्राज्य के राजा राजेंद्र चोल प्रथम की विजयगाथा से प्रेरित है, जिन्होंने 11वीं शताब्दी में श्रीविजय साम्राज्य पर विजय प्राप्त की थी। बता दें कि यह नामकरण स्वतंत्रता संग्राम में अंडमान द्वीपों की भूमिका और उपनिवेशवादी प्रभावों से मुक्ति का प्रतीक है।
पोर्ट ब्लेयर को 1858 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा एक दंड कॉलोनी (Penal Colony) के रूप में स्थापित किया गया था। इसी समय से यह इस द्वीप समूह का महत्वपूर्ण केंद्र बन गया। जब भारत आज़ाद हुआ और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह एक केंद्र शासित प्रदेश बना, तो पोर्ट ब्लेयर को इसकी राजधानी के रूप में बरकरार रखा गया।
इसे ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने बनाया था। उन्होंने यहाँ एक बस्ती स्थापित की जिसका मुख्य उद्देश्य भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों और अन्य कैदियों को निर्वासित करके रखना था। इस बस्ती के लिए पोर्ट ब्लेयर को इसलिए चुना गया क्योंकि यह मुख्य भूभाग से दूर था और यहाँ घने जंगल थे, जिससे कैदियों का भागना मुश्किल था।
पोर्ट ब्लेयर धीरे-धीरे एक प्रशासनिक केंद्र के रूप में विकसित होता गया। यहाँ जेलें बनाई गईं, जिनमें सबसे कुख्यात ‘सेलुलर जेल’ थी, जिसे ‘काला पानी’ के नाम से भी जाना जाता था। यह जेल आज भी पोर्ट ब्लेयर में स्थित है और इसे अब एक राष्ट्रीय स्मारक के रूप में संरक्षित किया गया है। यहाँ वीर सावरकर जैसे महान क्रांतिकारियों ने अपनी ज़िंदगी के कठिनतम दिन बिताए।
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, जापान ने 1942 से 1945 तक इस द्वीप समूह पर कब्ज़ा कर लिया था। इस दौरान, नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने यहां भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराया और इसे स्वतंत्र भारत की पहली भूमि घोषित किया। इसके साथ ही उन्होंने इसे अस्थायी रूप से ‘शहीद’ और ‘स्वराज’ द्वीप समूह का नाम दिया था। भारत की स्वतंत्रता के बाद, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह भारत का एक केंद्र शासित प्रदेश बना और पोर्ट ब्लेयर इसकी राजधानी बना रहा। आज, यह शहर इस द्वीप समूह का मुख्य प्रशासनिक, वाणिज्यिक और पर्यटन केंद्र है।
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