जानिए Kale Megha Pani De पाठ और उससे जुड़े प्रश्नोत्तर

Rating:
3
(10)
Kale Megha Pani De Class 12 NCERT Notes

Kale Megha Pani De को लिखा है महान कवी श्री धर्मवीर भारती जी ने। धर्मवीर जी ने ऐसी कई रचनाएं की हैं जो समाज को आइना दिखाती हैं और यह सवाल करने में बिलकुल पीछे नहीं हटती हैं। Kale Megha Pani De के इस पाठ में आप जानेंगे कि कैसे विज्ञान और अंधविश्वास अपने आप को रेस में हारने नहीं देना चाहते। तर्क सबके पास हैं, मगर अपने-अपने। जानिए क्या रहा आखिर में – 

Check out: सफल लोगों की 30 अनमोल आदतें: Habits of Successful People

लेखक परिचय  

धर्मवीर भारती हिंदी साहित्य के जाने-माने लेखक,कवी थे। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद जिले में 1926 में हुआ था। उन्होंने कई कविताएं व उपन्यास लिखे जिसमें – सूरज का सातवाँ घोड़ा, ठंडा लोहा, काले मेघा पानी दे आदि शामिल हैं। Kale Megha Pani De पाठ अपने आप में बहुत कुछ कहता है। 

Check out: Personality Development Tips in Hindi

Kale Megha Pani De पाठ का प्रतिपाद्य व सारांश

प्रतिपादय – ‘काले मेघा पानी दे’ पाठ में प्रचलित विश्वास और विज्ञान के अस्तित्व का चित्रण किया गया है। विज्ञान का अपना तर्क है और विश्वास की अपनी क्षमता। इनके महत्व के विषय में पढ़ा-लिखा वर्ग परेशानी में है। लेखक ने इसी दुविधा को लेकर पानी के संदर्भ में धारणा रची है। आषाढ़ का पहला पखवाड़ा (15 दिन), बीत चुका है। ऐसे में खेती व अन्य कार्यों के लिए पानी न हो तो जीवन चलाना मुश्किल हो जाता है। यदि विज्ञान इन चुनौतियों का निबटारा नहीं कर पाता तो भारतीय समाज किसी-न-किसी जुगाड़ में लग जाता है, छल करता है और हर कीमत पर जीवित रहने के लिए अशिक्षा तथा बेबसी के भीतर से उपाय और काट की खोज करता है। 

सारांश – लेखक बताता है कि जब वर्षा की प्रतीक्षा करते-करते लोगों की हालत खराब हो जाती है तब गाँवों में नंग-धडंग बच्चे शोर करते हुए कीचड़ में लोटते हुए गलियों में घूमते हैं। यह दस-बारह वर्ष की आयु के होते हैं तथा सिर्फ़ जाँघिया या लैंगोटी पहनकर ‘गंगा मैया की जय’ बोलकर गलियों में चल पड़ते हैं। इस मंडली को इंदर सेना या मेढक-मंडली कहते हैं। ये पुकार लगाते हैं –

काले मघा पानी द पानी दे, गुड़धानी दे
गगरी फूटी बैल पियासा काले मेधा पानी दे।

जब यह मंडली किसी घर के सामने रुककर ‘पानी’ की पुकार लगाती थी तो घरों में रखे हुए पानी से इन बच्चों को सर से पैर तक तर कर दिया जाता था। गर्मी से कुएं सूख चुके होते थे. नलों में बहुत कम पानी आता था, लू से व्यक्ति बेहोश होने लगते थे। बारिश का कहीं नामोनिशान नहीं होता था। जब पूजा-पाठ आदि काम नहीं आते थे तो इंदर सेना आखिरी उपाय के तौर पर निकलती थी और इंद्र देवता से पानी की माँग करती थी। लेखक समझ नहीं पाता था कि पानी की कमी के बावजूद लोग इकट्ठा किए पानी को इन पर क्यों फेंकते थे। ऐसे अंधविश्वासों से देश को बहुत नुकसान होता है। अगर यह सेना इंद्र की है तो वह खुद अपने लिए पानी क्यों नहीं माँग लेती? इसी कारण हम अंग्रेजों से पिछड़ गए तथा उनके गुलाम बन गए।लेखक मेढक-मंडली वालों की उम्र का ही था। वह आर्यसमाजी था, कुमार-सुधार सभा का उपमंत्री था और समाजसुधारी था। अपनी जीजी से उसे चिढ़ थी जो उम्र में उसकी माँ से बड़ी थीं। वे सभी रीति-रिवाजों, तीज-त्योहारों, पूजा-पाठों को लेखक के हाथों पूरा करवाती थीं। इन्हीं अंधविश्वासों को लेखक समाप्त करना चाहता था। लेखक को पुण्य मिलने के लिए वह यह करवाती थीं। जीजी लेखक से इंदर सेना पर पानी फेंकवाने का काम करवाना चाहती थीं। उसने साफ़ मना कर दिया। जीजी ने काँपते हाथों व डगमगाते पाँवों से इंदर सेना पर पानी फेंका। लेखक जीजी से मुँह फुलाए रहा। शाम को उसने जीजी की दी हुई लड्डू-मठरी भी नहीं खाई। पहले उन्होंने गुस्सा दिखाया, फिर उसे गोद में लेकर समझाया कि यह अंधविश्वास नहीं है। यदि हम पानी नहीं देंगे तो इंद्र भगवान हमें पानी कैसे देंगे। यह पानी की बरबादी नहीं है बल्कि यह पानी की बर्बादी है। दान में देने पर ही इच्छित वस्तु मिलती है। ऋषियों ने दान को महान बताया है। करोड़पति दो-चार रुपये दान में देदे तो वह त्याग नहीं होता। त्याग वह है जो अपनी जरूरत की चीज को जनकल्याण के लिए दे। ऐसे ही दान का फल मिलता है। लेखक जीजी के तर्कों के आगे पस्त हो गया। फिर भी वह जिद पर अड़ा रहा। जीजी ने फिर समझाया कि “तू बहुत पढ़ गया है।” वह अभी भी अनपढ़ है। “किसान भी 120-130 किलो गेहूँ उगाने के लिए 100-150 ग्राम अच्छा गेहूँ बोता है। इसी तरह हम अपने घर का पानी इन पर फेंककर बुवाई करते हैं। इसी से शहर, कस्बा, गाँव पर पानी वाले बादलों की फसल आ जाएगी। हम बीज बनाकर पानी देते हैं, फिर काले मेघा से पानी माँगते हैं।” ऋषि-मुनियों ने भी यह कहा है कि “पहले खुद दो, तभी देवता चौगुना करके लौटाएँगे।” यह आदमी का ढंग है जिससे सबका ढंग बनता है। ‘यथा राजा तथा प्रजा’ सच है। गाँधी जी महाराज भी यही कहते हैं।” लेखक कहता है कि यह बात पचास साल पुरानी होने के बावजूद आज भी उसके मन पर दर्ज है। अनेक संदर्भों में ये बातें मन को कचोटती हैं कि हम देश के लिए क्या करते हैं? हर क्षेत्र में माँगें बड़ी-बड़ी हैं, पर त्याग का कहीं नाम-निशान नहीं है। आज स्वार्थ एकमात्र लक्ष्य रह गया है। हम भ्रष्टाचार की बातें करते हैं, परंतु खुद अपनी जाँच नहीं करते। काले मेघ उमड़ते हैं, पानी बरसता है, लेकिन बात वही रहती है। यह स्थिति कब बदलेगी, यह कोई नहीं जानता?

Check out: CTET Preparation in Hindi

Class 12th NCERT Multiple Choice questions

प्रश्न 1: इंदर सेना या मेंढक-मंडली में कितनी उम्र के किशोर होते हैं?
(क) 6-7
(ख) 8-9
(ग) 10-12
(घ) 14-15 

उत्तर: (ग)

प्रश्न 2: मेंढक-मंडली से आपका क्या तात्पर्य है?
(क) होनहार बच्चे
(ख) शोर-शराबा करते बच्चे
(ग) सीधे-साधे बच्चे
(घ) फिसड्डी बच्चे

उत्तर: (ख)

प्रश्न 3: मेंढक-मंडली लोगों के घरों के बाहर रूककर किस चीज़ की मांग करती थी?
(क) चाय
(ख) दूध
(ग) खाने 
(घ) पानी

उत्तर: (घ)

प्रश्न 4. लेखक समाज की किस कुरीति को खत्म करना चाहता था?
(क) अपराध
(ख) भ्रष्टाचार
(ग) अंधविश्वास
(घ) चोरी-डकैती

उत्तर: (ग)

प्रश्न 5: लोगों की परेशानी का क्या कारण था?
(क) बारिश का न आना
(ख) पैसों की किल्लत
(ग) नौकरी का अभाव
(घ) फसल न उगना

उत्तर: (क)

प्रश्न 6: लेखक बचपन में कुमार-सुधार सभा में किस पद पर था?
(क) सेनापति
(ख) रक्षा मंत्री
(ग) सिपाही
(घ) उपमंत्री

उत्तर: (घ)

प्रश्न 7: मेंढक-मंडलीपानी डालते समय जीजी की क्या हालत थी?
(क) हाथ काँप रहे थे
(ख) गले में दर्द था
(ग) बुखार था
(घ) खुश थीं

उत्तर: (क)

प्रश्न 8: जीजी ने किस महान राजनेता का उदाहरण देकर लेखक को समझाया?
(क) ज्योति बासु
(ख) जवाहरलाल नेहरु
(ग) महात्मा गाँधी
(घ) सरदार वल्लभ भाई पटेल

उत्तर: (घ)

प्रश्न 9: लेखक ने जीजी की दी हुई क्या चीज़ नहीं खाई?
(क) दही
(ख) लड्डू-मठरी
(ग) खीर
(घ) काजू

उत्तर: (ख)

प्रश्न 10: हर क्षेत्र में माँगें बड़ी-बड़ी हैं, पर किस चीज़ का कहीं नाम-निशान नहीं है?
(क) त्याग
(ख) अहमियत
(ग) समय
(घ) सत्य

उत्तर: (क)

Check out: राजनीतिक विज्ञान में करियर कैसे बनाये?

Class 12th NCERT- Kale Megha Pani De -प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1: ‘यथा राजा तथा प्रजा’ व ‘यथा प्रजा तथा राजा’ में क्या अंतर है ?
उत्तर:
‘यथा राजा तथा प्रजा’ का अर्थ है-राजा के आचरण के अनुसार ही प्रजा का आचरण होना। ‘यथा प्रजा तथा राजा’ का आशय है-जिस देश की जनता जैसी होती है, वहाँ का राजा वैसा ही होता है।

प्रश्न 2: जीजी ने दान के पक्ष में क्या तर्क दिए?

उत्तर: जीजी ने दान के पक्ष में यह तर्क दिया कि यदि हम इंदर सेना को पानी नहीं देंगे तो इंद्र भगवान हमें पानी कैसे देगा। यह पानी की बरबादी नहीं है। यह बादलों पर अध्र्य चढ़ाना है। जो हम पाना चाहते हैं, उसे पहले दान देना पड़ता है। तभी हमें वह बढ़कर मिलता है। ऋषि-मुनियों ने दान को सबसे ऊँचा स्थान दिया है

प्रश्न 3: मेढ़क-सडली में कैसे लड़के होते थे?

उत्तर: मेढक-मंडली में दस-बारह वर्ष से सोलह-अठारह वर्ष के लड़के होते थे। इनका रंग साँवला होता था तथा ये वस्त्र के नाम पर सिर्फ़ एक जाँधिया या कभी-कभी सिर्फ़ लैंगोटी पहनते थे।

प्रश्न 4: कौन कहता है इन्हे इंद्र की सेना ? – इस कथन का व्यग्य स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: इस कथन से लेखक ने इंदर सेना और मेढक-मंडली पर व्यंग्य किया है। ये लोग पानी की बरबादी करते हैं तथा पाखंड फैलाते हैं। यदि ये इंद्र से औरों को पानी दिलवा सकते हैं तो अपने लिए ही क्यों नहीं माँग लेते।

प्रश्न 5:जीजी द्वारा गांधी जी का नाम लेने के पीछे क्या कारण था?

उत्तर: जीजी के लड़के को राष्ट्रीय आंदोलन में भाग लेने के लिए पुलिस की लाठियाँ खानी पड़ी थीं। उसके बाद से जीजी गांधी महाराज की बात करने लगी थीं।

प्रश्न 6: गगरी तथा बैल के उल्लख से लखक क्या कहना चाहता हैं?

उत्तर: गगरी और बैल के माध्यम से लेखक कहना चाहता है कि आज हमारे देश में संसाधनों की कमी नहीं है परंतु भ्रष्टाचार के कारण वे साधन लोगों के पास तक नहीं पहुँच पाते। इससे देश की जनता की जरूरतें पूरी नहीं हो पातीं।

Source – Knowledge Hunt

हमें उम्मीद हैं कि आपको हमारा Kale Megha Pani De का यह ब्लॉग अच्छा लगा होगा. अपने दोस्तों और बाकी जानने वालों को जितना हो सके यह शेयर करें जिससे उन्हें भी Kale Megha Pani De के बारे में जानकारी मिले। हमारे Leverage Edu में इस प्रकार के ऐसे कई सारे ब्लॉग हैं, जहां आप अलग-अलग विषय की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। यदि, आपको किसी ब्लॉग में कठिनाई आ रही है तो हमारी टीम आपकी सहायता करेगी।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

10,000+ students realised their study abroad dream with us. Take the first step today.

+91
Talk to an expert for FREE

You May Also Like

Ras Hindi Grammar
Read More

मियाँ नसीरुद्दीन Class 11 : पाठ का सारांश, प्रश्न उत्तर, MCQ

मियाँ नसीरुद्दीन शब्दचित्र हम-हशमत नामक संग्रह से लिया गया है। इसमें खानदानी नानबाई मियाँ नसीरुद्दीन के व्यक्तित्व, रुचियों…
Bajar Darshan
Read More

Bajar Darshan Class 12 NCERT Solutions

बाजार दर्शन’ (Bajar Darshan) श्री जैनेंद्र कुमार द्वारा रचित एक महत्त्वपूर्ण निबंध है जिसमें गहन वैचारिकता और साहित्य…
आर्ट्स सब्जेक्ट
Read More

आर्ट्स सब्जेक्ट

दसवीं के बाद आप कुछ रचनात्मक करना चाहते हैं तो आर्ट्स स्ट्रीम आप के लिए ही है। 11वीं…
Namak Ka Daroga
Read More

Namak Ka Daroga Class 11

यहाँ हम हिंदी कक्षा 11 “आरोह भाग- ” के पाठ-1 “Namak Ka Daroga Class″ कहानी के  के सार…