भारत में इनकम टैक्स ऑफिसर बनना सिर्फ एक सरकारी नौकरी पाना नहीं है, बल्कि यह देश की टैक्स व्यवस्था और आर्थिक अनुशासन से जुड़ा एक जिम्मेदार और महत्वपूर्ण पद है। इनकम टैक्स ऑफिसर का काम आयकर अधिनियम, 1961 के तहत टैक्स असेसमेंट, जांच और कर वसूली से जुड़ा होता है। कई छात्र यह मान लेते हैं कि इनकम टैक्स ऑफिसर बनने का सिर्फ एक ही रास्ता है, जबकि वास्तव में SSC CGL और UPSC सिविल सर्विसेज के जरिए अलग-अलग स्तर के अधिकारी इस विभाग में आते हैं। सही परीक्षा, योग्यता और भूमिका को समझे बिना तैयारी करना अक्सर छात्रों को भ्रमित कर देता है।
इस लेख में SSC CGL और UPSC के माध्यम से इनकम टैक्स ऑफिसर बनने की योग्यता, परीक्षा प्रक्रिया, सैलरी और वास्तविक भूमिका को स्पष्ट रूप से समझाया गया है।
This Blog Includes:
- इनकम टैक्स ऑफिसर कौन होता है?
- इनकम टैक्स ऑफिसर (ITO) और इंडियन रेवेन्यू सर्विस (IRS) अधिकारी में अंतर
- इनकम टैक्स ऑफिसर कैसे बनते हैं?
- इनकम टैक्स ऑफिसर बनने के लिए आवश्यक योग्यता
- SSC CGL और UPSC के माध्यम से इनकम टैक्स ऑफिसर बनने का ओवरव्यू
- इनकम टैक्स ऑफिसर की सैलरी
- इनकम टैक्स ऑफिसर की तैयारी कैसे करें?
- FAQs
इनकम टैक्स ऑफिसर कौन होता है?
इनकम टैक्स ऑफिसर भारत सरकार के आयकर विभाग (इनकम टैक्स डिपार्टमेंट) में कार्यरत एक महत्वपूर्ण अधिकारी होता है, जिसका मुख्य दायित्व देश के आयकर कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करना होता है। यह अधिकारी प्रत्यक्ष करों से जुड़े मामलों को देखता है और यह सुनिश्चित करता है कि व्यक्ति, संस्थान और कंपनियां अपनी आय के अनुसार सही मात्रा में टैक्स अदा करें।
इनकम टैक्स ऑफिसर का कार्य सिर्फ टैक्स वसूली तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह आयकर रिटर्न की जांच, टैक्स असेसमेंट, करदाताओं को नोटिस जारी करना, और टैक्स चोरी से जुड़े मामलों की प्रारंभिक जांच भी करता है। अधिकांश मामलों में इनकम टैक्स ऑफिसर का कार्य डेस्क-आधारित और सिस्टम-ड्रिवन होता है, न कि फील्ड रेड्स तक सीमित।
इनकम टैक्स ऑफिसर की जिम्मेदारियां
इनकम टैक्स ऑफिसर आयकर अधिनियम, 1961 के तहत काम करता है और उसकी हर कार्रवाई कानून व विभागीय नियमों के दायरे में होती है। आम धारणा के विपरीत, हर इनकम टैक्स ऑफिसर का काम छापेमारी या रेड करना नहीं होता। यहाँ दिए गए निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से इनकम टैक्स ऑफिसर की जिम्मेदारियों को आसानी से समझा जा सकता है।
- आयकर रिटर्न और संबंधित दस्तावेजों की जांच करना।
- कर निर्धारण (टेक्स अस्सेस्मेंट) और डिमांड तय करना।
- करदाताओं को नोटिस जारी करना और जवाबों की समीक्षा करना।
- फेसलेस असेसमेंट सिस्टम के अंतर्गत फाइल-आधारित कार्य करना।
- टैक्स चोरी से जुड़े मामलों की प्रारंभिक जांच करना।
- वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों के अनुसार कार्य करना।
इनकम टैक्स ऑफिसर (ITO) और इंडियन रेवेन्यू सर्विस (IRS) अधिकारी में अंतर
इनकम टैक्स ऑफिसर (ITO) और इंडियन रेवेन्यू सर्विस (IRS) अधिकारी के बीच मुख्य अंतर उनकी भर्ती प्रक्रिया और पद के क्रम में होता है। यहाँ नीचे दी गई टेबल में इसके अंतर के बारे में बताया गया है –
| आधार | इनकम टैक्स ऑफिसर (ITO) | इंडियन रेवेन्यू सर्विस (IRS) अधिकारी |
| भर्ती परीक्षा | SSC CGL परीक्षा के माध्यम से चयन | UPSC सिविल सर्विसेज़ एग्जामिनेशन के माध्यम से चयन |
| सेवा का प्रकार | ग्रुप बी गैज़ेटेड अधिकारी | ग्रुप ए सेंट्रल सिविल सर्विसेज |
| कैडर स्थिति | कैडर सेवा नहीं होती | पूर्ण कैडर सेवा होती है |
| नियुक्ति का स्तर | मिड-लेवल अधिकारी | उच्च प्रशासनिक अधिकारी |
| प्रारंभिक पद | इनकम टैक्स ऑफिसर | असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स (ACIT) |
| रिपोर्टिंग सिस्टम | ACIT / DCIT को रिपोर्ट करता है | सीधे विभागीय नीति और उच्च प्रशासन से जुड़ा |
| प्रशिक्षण | क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्रों में सीमित अवधि का प्रशिक्षण | नेशनल अकेडमी ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज में लगभग 2 वर्ष का गहन प्रशिक्षण (Exact duration batches के अनुसार बदल सकता है) |
| कार्य का स्वरूप | असेसमेंट, नोटिस, जांच और फाइल आधारित कार्य | नीति निर्माण, बड़े टैक्स मामलों की निगरानी और प्रशासनिक निर्णय |
| शक्तियां | सीमित और आदेश-आधारित | व्यापक, लेकिन कानून और नियमों से बंधी |
| प्रमोशन प्रक्रिया | समय और विभागीय परीक्षा पर आधारित | कैडर प्रमोशन, वरिष्ठता और प्रदर्शन पर आधारित |
| करियर ग्रोथ | ITO – ACIT – DCIT (समय लगता है) | ACIT – CIT – Principal CIT – CBDT स्तर तक |
| निर्णय लेने की स्वतंत्रता | सीमित, उच्च अधिकारी की स्वीकृति आवश्यक | तुलनात्मक रूप से अधिक |
| जवाबदेही | विभागीय और कानूनी | अधिक कड़ी जवाबदेही और निगरानी |
| पोस्टिंग का दायरा | ज़्यादातर क्षेत्रीय | देशभर और नीति-स्तर पर |
इनकम टैक्स ऑफिसर कैसे बनते हैं?
इनकम टैक्स ऑफिसर बनने के मुख्य रूप से दो आधिकारिक रास्ते होते हैं, जिसमें आप SSC CGL और UPSC के माध्यम से आप इनकम टैक्स ऑफिसर बन सकते हैं –
SSC CGL के माध्यम से इनकम टैक्स ऑफिसर बनना
SSC CGL के जरिए जो अधिकारी इनकम टैक्स विभाग में नियुक्त होते हैं, उनका आधिकारिक पदनाम इनकम टैक्स ऑफिसर (ITO) होता है। यह ग्रुप बी स्तर की सरकारी नौकरी है और यह विभाग की रीढ़ मानी जाती है, क्योंकि ज़मीनी स्तर पर टैक्स असेसमेंट और प्रशासनिक काम इन्हीं अधिकारियों के माध्यम से होता है।
इस रास्ते में उम्मीदवार को स्टाफ सेलेक्शन कमीशन कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल (SSC CGL) परीक्षा पास करनी होती है। इस परीक्षा में किसी भी विषय से ग्रेजुएशन होना पर्याप्त है, विषय की कोई अनिवार्यता नहीं होती। चयन पूरी तरह लिखित परीक्षा के अंकों और पोस्ट प्रेफरेंस पर आधारित होता है, क्योंकि अब SSC CGL में इंटरव्यू नहीं लिया जाता।
ITO बनने के बाद अधिकारी की जिम्मेदारियां मुख्य रूप से आयकर रिटर्न की जांच, कर निर्धारण (असेसमेंट), करदाताओं को नोटिस जारी करना और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का पालन करना होती हैं। यह पद उन छात्रों के लिए उपयुक्त माना जाता है जो स्थिर करियर, निश्चित कार्य-सीमा और अपेक्षाकृत संतुलित निजी जीवन चाहते हैं। हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि यह पद नीति-निर्माण नहीं बल्कि नियमों के कार्यान्वयन से जुड़ा होता है।
UPSC के माध्यम से IRS (इनकम टैक्स) ऑफिसर बनना
UPSC सिविल सर्विसेज एग्जामिनेशन के माध्यम से इंडियन रेवेन्यू सर्विस (IRS – इनकम टैक्स) में चयन। यह ग्रुप ए कैडर सेवा है और इन अधिकारियों की भूमिका सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि नीति-निर्माण और उच्च स्तरीय निर्णयों से भी जुड़ी होती है।
UPSC के जरिए चयनित IRS अधिकारी सीधे इनकम टैक्स ऑफिसर नहीं कहलाते, बल्कि वे विभाग के उच्च पदों जैसे असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स से करियर शुरू करते हैं। इनकी ट्रेनिंग नेशनल अकेडमी ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज में होती है, जहां टैक्स लॉ, अंतरराष्ट्रीय कर व्यवस्था और प्रशासनिक निर्णयों पर विशेष जोर दिया जाता है।
यह रास्ता उन छात्रों के लिए है जो लंबे समय तक कठिन तैयारी कर सकते हैं, प्रशासनिक जिम्मेदारी उठाने के लिए मानसिक रूप से तैयार हैं और जिनका लक्ष्य केवल नौकरी नहीं, बल्कि सेवा और नीति स्तर पर काम करना है। यहां प्रमोशन, जिम्मेदारी और प्रभाव का दायरा SSC से आए ITO की तुलना में कहीं अधिक होता है, लेकिन दबाव और जवाबदेही भी उसी अनुपात में बढ़ जाती है।
इनकम टैक्स ऑफिसर के अलावा यदि आप केंद्र सरकार के अन्य Group-B प्रशासनिक पदों के बारे में भी जानना चाहते हैं, तो असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर कैसे बनें से जुड़ी जानकारी आपके लिए उपयोगी हो सकती है, जहाँ चयन प्रक्रिया, योग्यता और करियर ग्रोथ को विस्तार से समझाया गया है।
इनकम टैक्स ऑफिसर बनने के लिए आवश्यक योग्यता
इनकम टैक्स ऑफिसर बनने की योग्यता समझते समय सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि यह पद दो अलग-अलग आधिकारिक रास्तों से मिलता है। वैसे तो दोनों की योग्यता में कुछ समानताएं हैं, लेकिन दोनों में कई अहम अंतर भी होते हैं। ऐसे में यहाँ दोनों ही प्रमुख रास्तों की आवश्यक योग्यता की जानकारी दी गई है, साथ ही बता दें कि आयु सीमा और आरक्षण से संबंधित नियम समय-समय पर SSC और UPSC की आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार बदल सकते हैं। –
SSC CGL के माध्यम से इनकम टैक्स ऑफिसर (ITO) बनने की योग्यता
यहाँ SSC CGL के माध्यम से इनकम टैक्स ऑफिसर (ITO) बनने की योग्यता दी गई है –
शैक्षणिक योग्यता
- उम्मीदवार का किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक (ग्रेजुएशन) पास होना अनिवार्य है।
- किसी विशेष विषय (जैसे कॉमर्स या लॉ) की बाध्यता नहीं होती।
- अंतिम वर्ष के छात्र SSC CGL के लिए आवेदन कर सकते हैं, बशर्ते चयन से पहले डिग्री पूरी हो।
आयु सीमा
- सामान्य वर्ग: 18 से 30 वर्ष की रहती है।
- OBC: 3 वर्ष की छूट मिलती है।
- SC/ST: 5 वर्ष की छूट मिलती है।
- PwBD और अन्य वर्गों को SSC नियमों के अनुसार अतिरिक्त छूट मिलती है।
अन्य महत्वपूर्ण शर्तें
- किसी प्रकार का शारीरिक दक्षता परीक्षण (PET) नहीं होता।
- मेडिकल फिटनेस सामान्य सरकारी मानकों के अनुसार होती है।
- पोस्ट अलॉटमेंट मेरिट और उम्मीदवार की पोस्ट प्रेफरेंस पर निर्भर करता है।
UPSC के माध्यम से IRS (इनकम टैक्स) बनने की योग्यता
यहाँ UPSC के माध्यम से IRS (इनकम टैक्स) बनने की योग्यता दी गई है –
शैक्षणिक योग्यता
- किसी भी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से स्नातक डिग्री अनिवार्य होती है।
- विषय की कोई बाध्यता नहीं, लेकिन ह्यूमैनिटीज, लॉ, इकोनॉमिक्स या कॉमर्स पृष्ठभूमि सहायक हो सकती है।
आयु सीमा
- सामान्य वर्ग: 21 से 32 वर्ष की रहती है।
- OBC: 3 वर्ष की छूट मिलती है।
- SC/ST: 5 वर्ष की छूट मिलती है।
- PwBD उम्मीदवारों को नियमों के अनुसार छूट मिलती है।
अन्य जरूरी योग्यताएं
- UPSC सिविल सर्विसेज परीक्षा के तीनों चरण (प्रीलिम्स, मेंस, इंटरव्यू) पास करना अनिवार्य होता है।
- मानसिक संतुलन, निर्णय क्षमता और प्रशासनिक समझ बेहद महत्वपूर्ण होती है।
- IRS एक Group A सेवा है, इसलिए उच्च स्तर की जवाबदेही जुड़ी होती है।
इनकम टैक्स ऑफिसर के अलावा यदि आप राजस्व विभाग से जुड़ी अन्य सेवाओं में रुचि रखते हैं, तो कस्टम्स ऑफिसर कैसे बनें से संबंधित जानकारी भी आपके लिए उपयोगी हो सकती है। इसमें चयन प्रक्रिया, योग्यता और कार्य-प्रोफाइल को विस्तार से समझाया गया है।
SSC CGL और UPSC के माध्यम से इनकम टैक्स ऑफिसर बनने का ओवरव्यू
यहाँ SSC CGL और UPSC के माध्यम से इनकम टैक्स ऑफिसर बनने का ओवरव्यू दिया है, जिससे आप यह अंदाज़ा लगा सकते हैं कि कौन सा रास्ता आपके लिए सही चुनाव होगा –
| तुलना का पहलू | SSC CGL के माध्यम से (इनकम टैक्स ऑफिसर) | UPSC के माध्यम से (IRS – इनकम टैक्स) |
| पद/पोस्ट का नाम | इनकम टैक्स ऑफिसर (ITO) – ग्रुप बी | इंडियन रेवेन्यू सर्विस (IRS) – ग्रुप ए (डायरेक्ट टैक्स) |
| प्रवेश परीक्षा | SSC CGL (कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल) | UPSC सिविल सर्विसेज एग्जामिनेशन |
| प्रारंभिक स्तर की योग्यता | ग्रेजुएशन (किसी भी विषय से) | ग्रेजुएशन (किसी भी विषय से) |
| आयु सीमा | 18-30 (सामान्य), OBC/SC-ST में छूट | 21-32 (सामान्य), आरक्षण के अनुसार छूट |
| प्रवेश प्रक्रिया | टियर 1 + टियर 2 (और कुछ वर्षों में टियर 3/4 के बदलाव) | प्रीलिम्स + मेंस + इंटरव्यू |
| प्रथम नियुक्ति और कैडर | ग्रुप बी ऑफिसर, नॉन-कैडर | ग्रुप ए सर्विस, कैडर-बेस्ड (डायरेक्ट टैक्स) |
| ट्रेनिंग | विभागीय प्रशिक्षण (आमतौर पर क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र/आईटीडीए/स्टेट ट्रेनिंग) | नेशनल अकेडमी ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (NADT), नागपुर – 2 साल से अधिक ट्रेनिंग |
| जिम्मेदारियाँ (शुरुआती स्तर) | अस्सेस्मेंट, रिटर्न वेरफिकेशन, नोटिस, डेस्क वर्क | पॉलिसी, एडमिनिस्ट्रेशन, कॉम्प्लेक्स अस्सेस्मेंट, लीडरशिप रोल |
| पावर/अधिकार | सीमित अधिकार; अधिकांश कार्य वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर | उच्च अधिकार, निर्णय-निर्माण और प्रशासनिक भूमिका |
| प्रमोशन की गति | विभागीय नियम + सीनियरिटी + परफॉरमेंस | फास्टर कैरियर ग्रोथ; कैडर स्ट्रक्चर के कारण स्पष्ट प्रमोशन |
| कानूनी जिम्मेदारी | इनकम टैक्स एक्ट के तहत नोटिस/असेसमेंट | हाई-लेवल लीगल/एडमिनिस्ट्रेटिव रिस्पॉन्सिबिलिटीज |
| भविष्य में पोस्टिंग | मुख्यतः विभागीय/फील्ड ऑफिसेस | पॉलिसी विंग्स, CBDT, इंटरनेशनल टैक्सेशन, सीनियर लीडरशिप |
इनकम टैक्स ऑफिसर की सैलरी
इनकम टैक्स ऑफिसर (ITO) की सैलरी 7वें वेतन आयोग के अनुसार ITO की शुरुआती बेसिक पे INR 44,900 (Pay Level 7) होती है, इसके अलावा DA, HRA और TA जैसे भत्ते मिलते हैं।
DA हर कुछ समय में बढ़ता या घटता रहता है क्योंकि यह महंगाई के अनुसार तय होता है। HRA उस शहर पर निर्भर करता है जहाँ वे पोस्टेड होते हैं। बड़े शहरों में HRA ज्यादा होता है। TA भी अलग-अलग जगह के हिसाब से मिलता है।
साधारण तौर पर, ITO की कुल सैलरी (gross) लगभग INR 70,000 से INR 85,000 प्रति माह के बीच हो सकती है, लेकिन यह आपके पोस्टिंग और भत्तों के अनुसार बढ़-घट सकती है। अगर कोई अधिकारी IRS (इनकम टैक्स) कैडर से होता है, तो उसकी शुरुआती सैलरी ITO से ज्यादा होती है, क्योंकि IRS पे लेवल 10 से शुरू होता है।
नोट: सैलरी के सही नंबर हर साल DA और भत्तों के बदलाव के कारण बदलते रहते हैं, इसलिए सबसे सही जानकारी के लिए सरकारी Pay Matrix और नोटिफिकेशन देखना जरूरी है।
इनकम टैक्स ऑफिसर की तैयारी कैसे करें?
इनकम टैक्स ऑफिसर बनने के लिए तैयारी का तरीका इस बात पर निर्भर करता है कि आप SSC CGL के माध्यम से ITO बनना चाहते हैं या UPSC के माध्यम से IRS (इनकम टैक्स) कैडर में जाना चाहते हैं। दोनों परीक्षाओं का पैटर्न और सिलेबस अलग होता है, इसलिए तैयारी भी उसी अनुसार प्लान करनी चाहिए।
SSC CGL (ITO) के लिए तैयारी कैसे करें?
- SSC CGL के माध्यम से इनकम टैक्स ऑफिसर (ITO) पद प्राप्त किया जाता है। इस परीक्षा की तैयारी करते समय निम्न बातों पर ध्यान देना जरूरी होता है:
- सबसे पहले यह स्पष्ट करें कि आपका लक्ष्य SSC CGL के माध्यम से ITO बनना है, क्योंकि SSC और UPSC की तैयारी की दिशा अलग होती है।
- SSC CGL टियर-1 और टियर-2 का सिलेबस SSC की आधिकारिक अधिसूचना से ही फॉलो करें। बिना आधिकारिक सिलेबस के तैयारी करना समय की बर्बादी हो सकता है।
- गणित, तार्किक क्षमता और अंग्रेजी व्याकरण के मूल नियमों का रोज़ कम से कम एक घंटा अभ्यास करें, क्योंकि यही विषय अक्सर कटऑफ तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
UPSC IRS (Income Tax) के लिए तैयारी कैसे करें?
UPSC के माध्यम से IRS (इनकम टैक्स) सेवा में चयन होता है, जो एक उच्च स्तरीय Group-A सेवा है। इसकी तैयारी अधिक गहरी और विश्लेषणात्मक होती है:
- UPSC के लिए केवल सामान्य समाचार पढ़ना पर्याप्त नहीं होता। बजट, वस्तु एवं सेवा कर (GST) में बदलाव और प्रत्यक्ष कर कानूनों में होने वाले संशोधनों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
- हर सप्ताह कम से कम दो मॉक टेस्ट दें। केवल परीक्षा देना ही नहीं, बल्कि अपनी गलतियों का विश्लेषण करना भी उतना ही जरूरी होता है।
- इनकम टैक्स सेवा के इच्छुक उम्मीदवारों को अर्थशास्त्र, भूगोल या लोक प्रशासन जैसे विषय चुनकर व्यवस्थित और संक्षिप्त नोट्स तैयार करने चाहिए, जो मेंस परीक्षा में मददगार साबित होते हैं।
FAQs
नहीं, इनकम टैक्स ऑफिसर की पोस्टिंग हमेशा फील्ड में ही हो, ऐसा जरूरी नहीं है। ITO की भूमिका डेस्क और फील्ड दोनों तरह की हो सकती है। कई मामलों में अधिकारी असेसमेंट, रिटर्न स्क्रूटनी, नोटिस जारी करने और केस एनालिसिस जैसे काम ऑफिस में बैठकर करते हैं। वहीं सर्च, सर्वे या विशेष जांच से जुड़े मामलों में फील्ड विज़िट भी करनी पड़ सकती है। पोस्टिंग का स्वरूप सेक्शन, अनुभव और विभागीय आवश्यकता पर निर्भर करता है।
SSC CGL के माध्यम से चयनित इनकम टैक्स ऑफिसर Group-B पद पर नियुक्त होते हैं, जबकि IRS एक Group-A सेवा है। विभागीय प्रमोशन के जरिए IRS स्तर तक पहुँचना सैद्धांतिक रूप से संभव है, लेकिन यह एक लंबी और सीमित अवसरों वाली प्रक्रिया होती है। इसमें कई वर्षों की सेवा, विभागीय परीक्षाएँ और रिक्त पदों की उपलब्धता अहम भूमिका निभाती है। व्यावहारिक रूप से अधिकांश अधिकारी IRS बनने के लिए UPSC सिविल सेवा परीक्षा का रास्ता ही चुनते हैं।
ITO (SSC CGL) ग्रुप बी अधिकारी होता है, जबकि IRS ग्रुप ए की सर्विस है। IRS अधिकारी को अधिक प्रशासनिक और नीति-निर्माण स्तर की जिम्मेदारी मिलती है।
ITO बनने पर विभागीय प्रशिक्षण होता है, जिसमें टैक्स लॉ, अस्सेस्मेंट, IT सिस्टम्स, फील्ड एक्सपोज़र शामिल होते हैं। यह प्रशिक्षण अधिकारी को प्रैक्टिकल काम के लिए तैयार करता है।
हमें उम्मीद है कि इस लेख से आपको इनकम टैक्स ऑफिसर बनने की प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिली होगी। यदि आप करियर से जुड़े ऐसे ही विषयों पर जानकारी पढ़ना चाहते हैं, तो Leverage Edu पर उपलब्ध अन्य लेख भी देख सकते हैं।
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