एलएलबी कोर्स डिटेल्स, सिलेबस, एडमिशन प्रोसेस और करियर स्कोप 

1 minute read
llb course details in hindi

बैचलर ऑफ लॉ (LLB) भारत में लीगल प्रैक्टिस करने के लिए एक प्रमुख ग्रेजुएशन डिग्री कोर्स है। यह सामान्यतः तीन वर्षीय प्रोग्राम है, जिसे ग्रेजुएशन डिग्री कंप्लीट करने के बाद किया जाता है। हालांकि छात्र 12वीं के बाद पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड कोर्स जैसे BA LLB, BBA LLB, BCom LLB या BSc LLB भी कर सकते हैं। इसके सिलेबस में कॉन्स्टिट्यूशनल लॉ, क्रिमिनल लॉ, सिविल लॉ, कॉर्पोरेट लॉ, प्रॉपर्टी  लॉ और कॉन्ट्रैक्ट लॉ जैसे विषय शामिल होते हैं। यह प्रोग्राम छात्रों को विधिक सिद्धांतों की समझ, रिसर्च स्किल, विश्लेषणात्मक क्षमता तथा लॉ की व्यावहारिक जानकारी प्रदान करता है।

इस प्रोग्राम की लर्निंग अप्रोच थ्योरी, प्रैक्टिकल, केस स्टडीज, मूट कोर्ट्स और इंटर्नशिप पर आधारित होती है। वहीं LLB के बाद आप LLM, MBA या विभिन्न डिप्लोमा एवं सर्टिफिकेट कोर्स भी कर सकते हैं। इस लेख में आपके लिए एलएलबी कोर्स की सभी आवश्यक जानकारी दी गई है। 

मापदंड कोर्स विवरण 
एलएलबी की फुल फॉर्म बैचलर ऑफ लॉ (LLB)
कोर्स लेवल अंडरग्रेजुएट 
एलिजिबिलिटी क्राइटेरियाकिसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से संबंधित विषय में बैचलर डिग्री।
कोर्स ड्यूरेशन LLB: 3 वर्ष, इंटीग्रेटेड BA LLB: 5 वर्ष 
एडमिशन क्राइटेरिया मेरिट बेस्ड-एंट्रेंस बेस्ड 
प्रवेश परीक्षा CLAT, AILET, SLAT, TS LAWCET, MH CET Law, APLAWCET आदि। 
प्रमुख जॉब प्रोफाइल वकील, कानूनी विश्लेषक, कॉर्पोरेट वकील, कानूनी सलाहकार, लॉ ऑफिसर, न्यायाधीश आदि। 
प्रमुख रिक्रूटर्स विधि एवं न्याय मंत्रालय, भारतीय रेल, PSUs, टाटा ग्रुप, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL), अदानी ग्रुप, ICICI बैंक, NGOs आदि। 

एलएलबी कोर्स क्यों करें?

नीचे दिए गए बिंदुओं में एलएलबी कोर्स करने के प्रमुख कारण बताए गए हैं:

  • आपको यह ज्ञात होना चाहिए कि LLB कोर्स केवल वकील बनने तक सीमित नहीं है। यह आपको कॉर्पोरेट लॉ, सरकारी सलाहकार, नीति‑निर्माण, मीडिया, शोध जैसे क्षेत्रों में भी अवसर देता है। लॉ की शिक्षा आपको कई क्षेत्रों में ट्रांसफरेबल स्किल्स देती है जो विविध करियर के लिए उपयुक्त हैं।
  • LLB में केस एनालिसिस, लॉ रिसर्च और तर्कपूर्ण निष्कर्ष पर आधारित अध्ययन होता है, जिससे कठिन समस्या समाधान, लॉजिक और निर्णय‑निर्माण क्षमता काफी बेहतर होती है। ये स्किल्स किसी भी प्रोफेशन में जरुरी होते हैं।
  • लॉ की पढ़ाई में मूट कोर्ट, आर्गुमेंट और लीगल सबमिशंस शामिल होते हैं, जिससे प्रभावी संवाद, प्रेजेंटेशन और पब्लिक स्पीकिंग स्किल्स बेहतर होते हैं, जो प्रोफेशनल लेवल पर बहुत उपयोगी हैं।
  • लॉ एजुकेशन न सिर्फ प्रोफेशनल स्किल्स डेवलप होती है बल्कि यह आपको न्याय, नैतिकता और समाजिक उत्तरदायित्व के महत्व को भी समझने में सक्षम बनाती है। 
  • आज ग्लोबलाइजेशन के साथ, कानूनी ज्ञान रखने वाले प्रोफेशनल्स के लिए अंतरराष्ट्रीय कंपनियों, विदेशी कोर्ट, अंतरराष्ट्रीय कानून अनुपालन और वैश्विक न्यायिक प्रणाली जैसे क्षेत्रों में भी अवसर बढ़ रहे हैं।

एलएलबी कोर्स स्ट्रक्चर और मोड

LLB का कोर्स स्ट्रक्चर और मोड भारत में ‘बार काउंसिल ऑफ इंडिया’ (BCI) के नियमों के अनुसार निर्धारित होता है। एलएलबी 3 वर्षीय ग्रेजुएशन के बाद होता है और 6 सेमेस्टर में विभाजित होता है। ग्रेजुएट्स एडमिशन टेस्ट जैसे CLAT, DU LLB, MH CET Law, LSAT, AILET आदि पास करके LLB प्रोग्राम में एडमिशन ले सकते हैं। ध्यान रखें कि सभी LLB ग्रेजुएट्स को लीगल प्रैक्टिस के लिए बार काउंसिल की ‘अखिल भारतीय बार परीक्षा’ (AIBE) पास करना अनिवार्य होता है। 

एलएलबी कोर्स के लिए योग्यता 

एलएलबी कोर्स में एडमिशन के लिए पात्रता मानदंड कॉलेज और संस्थान के अनुसार थोड़ा अलग हो सकते हैं। इसलिए अप्लाई करने से पहले संबंधित संस्थान की आधिकारिक प्रवेश शर्तें जरूर देखनी चाहिए। सामान्य तौर पर पात्रता इस प्रकार होती है:

  • उम्मीदवार किसी भी विषय में 3-4 साल की बैचलर डिग्री धारक होना चाहिए।
  • ग्रेजुएशन में सामान्य श्रेणी के लिए न्यूनतम 55-60% अंक आवश्यक हैं, जबकि SC/ST उम्मीदवारों को 5% अंक की छूट दी जाती है। 
  • बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) की गाइडलाइन्स के अनुसार एलएलबी (LLB) प्रोग्राम में प्रवेश के लिए कोई ऊपरी आयु सीमा निर्धारित नहीं है। 

एलएलबी कोर्स का एप्लीकेशन प्रोसेस 

एलएलबी कोर्स की पात्रता पूरी करने के बाद प्रवेश प्रक्रिया कुछ तय चरणों में होती है। अलग-अलग राज्यों और संस्थानों में इसमें थोड़ा अंतर हो सकता है, क्योंकि कई कॉलेज मेरिट (ग्रेजुएशन के अंकों) के आधार पर और कुछ प्रवेश परीक्षा (जैसे CLAT, AILET, SLAT, TS LAWCET, MH CET Law आदि) के माध्यम से एडमिशन देते हैं। सामान्यतः प्रक्रिया इस प्रकार रहती है:

  • योग्यता की जांच: सबसे पहले आपको यह सुनिश्चित करना होता है कि आप अपने चयनित कॉलेज या प्रवेश परीक्षा (जैसे CLAT, AILET) की एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया पूरी करते हैं या नहीं।
  • रजिस्ट्रेशन: अगले स्टेप में आपको संबंधित कॉलेज या परीक्षा की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर लॉगिन क्रेडेंशियल प्राप्त करना होता है। 
  • एप्लीकेशन फॉर्म और फीस पेमेंट: अब आप एप्लीकेशन फॉर्म और सभी आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने के बाद ऑनलाइन फीस जमा करें। 
  • प्रवेश परीक्षा और रिजल्ट: इसके बाद आप प्रवेश परीक्षा की तैयारी करें और निर्धारित समय पर परीक्षा सेंटर में जाकर परीक्षा दें। फिर परीक्षा के रिज्लट के बाद आप अपनी रैंक और स्कोर के अनुसार  संभावित कॉलेज/यूनिवर्सिटी के लिए पात्रता सुनिश्चित करें। 
  • काउंसलिंग और एनरोलमेंट: फ़ाइनल स्टेप में आपको अपनी रैंक के आधार पर चयनित कॉलेज या यूनिवर्सिटी की काउंसलिंग में शामिल होकर LLB प्रोग्राम में एनरोलमेंट कंफर्म करना होता है। 

एलएलबी कोर्स में एडमिशन के लिए जरूरी दस्तावेज

यहां उन प्रमुख दस्तावेजों की सूची दी गई है, जो एडमिशन के समय आमतौर पर वेरिफिकेशन के लिए कॉलेज/संस्थान द्वारा मांगे जाते हैं। अलग-अलग विश्वविद्यालयों के अनुसार इसमें थोड़ा बदलाव हो सकता है:

  • 10वीं और 12वीं की मार्कशीट तथा पासिंग सर्टिफिकेट
  • ग्रेजुएशन डिग्री और मार्कशीट 
  • प्रवेश परीक्षा का स्कोरकार्ड 
  • फोटो आईडी प्रूफ (जैसे आधार कार्ड/पैन कार्ड)
  • पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ्स
  • जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)
  • निवास/डोमिसाइल प्रमाण पत्र (जहाँ आवश्यक हो)
  • माइग्रेशन सर्टिफिकेट (दूसरे बोर्ड/विश्वविद्यालय से आने पर)
  • ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) – कई कॉलेजों में अनिवार्य होता है
  • अन्य शैक्षिक प्रमाण पत्र (यदि कोई अतिरिक्त योग्यता हो)

एलएलबी कोर्स के लिए प्रमुख लॉ प्रवेश परीक्षाएं 

एलएलबी कोर्स में एडमिशन के लिए भारत की प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं की सूची इस प्रकार है: 

लॉ प्रवेश परीक्षाएं राज्य/विश्वविद्यालय/ लेवल LLB परीक्षा की तिथि 
CLATराष्ट्रीय परीक्षा सूचित किया जाएगा। 
DU LLB एंट्रेंस टेस्टविधि संकाय, दिल्ली विश्वविद्यालयसूचित किया जाएगा।  
MHCET Lawमहाराष्ट्र (राज्य स्तरीय परीक्षा)1-2 अप्रैल, 2026 (टेंटेटिव)
PU LLB एंट्रेंस टेस्टपंजाब यूनिवर्सिटीजून, 2026 
TS LAWCETतेलंगाना (राज्य स्तरीय परीक्षा)18 मई, 2026 
AMU लॉ एंट्रेंस टेस्टअलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय26 अप्रैल, 2026 
AILETराष्ट्रीय परीक्षा14 दिसंबर, 2026 
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय BA LLB एंट्रेंस टेस्टबनारस हिंदू विश्वविद्यालय11 मई – 31 मई, 2026 
CUET for Lawराष्ट्रीय परीक्षा मार्च, 2026 
AP LAWCETआंध्र प्रदेश (राज्य स्तरीय परीक्षा)4 मई, 2026
इलाहाबाद विश्वविद्यालय LATइलाहाबाद विश्वविद्यालयसूचित किया जाएगा।  
सिम्बायोसिस लॉ एडमिशन टेस्ट (SLAT)राष्ट्रीय परीक्षासूचित किया जाएगा। 

भारत में एलएलबी कोर्स के लिए प्रमुख संस्थान और अनुमानित फीस

भारत में ‘बार काउंसिल ऑफ इंडिया’ (BCI) द्वारा मान्यता प्राप्त सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों में एलएलबी कोर्स उपलब्ध है। इसकी फीस संस्थान के प्रकार, राज्य, सीट श्रेणी और प्रवेश प्रक्रिया के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। सामान्यतः सरकारी कॉलेजों में फीस अपेक्षाकृत कम होती है, जबकि प्राइवेट संस्थानों में यह अधिक रहती है। नीचे दी गई तालिका में कुछ प्रमुख कॉलेजों के आधार पर एलएलबी कोर्स की अनुमानित फीस केवल एक सामान्य जानकारी के रूप में दी गई है:

सरकारी संस्थान 

कॉलेज और संस्थान अनुमानित कुल ट्यूशन फीस (INR)
दिल्ली विश्वविद्यालय 11,384 (प्रति वर्ष)
फैकल्टी ऑफ लॉ , बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी6,846 (प्रति वर्ष)
माणिकचंद पहाड़े लॉ कॉलेज16,495 (प्रति वर्ष)
किशनचंद चेलाराम लॉ कॉलेज20,650 (प्रति वर्ष)
गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (GNLU), गांधीनगर1,20,000 (प्रति वर्ष)
डॉ. बी.आर. अंबेडकर विधि महाविद्यालय15,600 (प्रति वर्ष)
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (CCSU), मेरठ10,000 – 15,000 (प्रति वर्ष)

प्राइवेट संस्थान 

कॉलेज और संस्थान अनुमानित कुल ट्यूशन फीस (INR)
गलगोटिया विश्वविद्यालय65,000  (प्रति वर्ष)
ILS पुणे1.14 लाख  (प्रति वर्ष)
लवली प्रोफेशनल विश्वविद्यालय1,60,000 – 1,70,000 (प्रति वर्ष)
शिक्षा ‘ओ’ अनुसंधान, भुवनेश्वर60,000 (प्रति सेमेस्टर)
सेवीथा इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल एंड टेक्निकल साइंसेज (SIMATS), चेन्नई2,25,000 (प्रति वर्ष)
एमिटी विश्वविद्यालय, नोएडा 1.73 लाख (प्रति वर्ष)

नोट: तालिका में दी गई फीस केवल अनुमानित है और समय-समय पर बदल सकती है। सटीक और नवीनतम फीस की जानकारी के लिए संबंधित कॉलेज/विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट अवश्य देखें।

एलएलबी कोर्स का सिलेबस 

भारत के अलग-अलग विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में एलएलबी का सिलेबस कुछ हद तक भिन्न हो सकता है, क्योंकि प्रत्येक संस्थान अपना करिकुलम और पेपर स्ट्रक्चर स्वयं निर्धारित करता है। इसलिए छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे एडमिशन से पहले संबंधित कॉलेज/विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध नवीनतम सिलेबस अवश्य जांच लें।

नीचे दिया गया सिलेबस चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ की आधिकारिक वेबसाइट के आधार पर एक सामान्य रेफरेंस के रूप में दिया गया है, ताकि आपको पढ़ाए जाने वाले प्रमुख विषयों का स्पष्ट अंदाजा हो सके:

सेमेस्टर 1 
ज्यूरिस्प्रूडेंस – I (लीगल थ्योरी)कॉन्स्टिट्यूशनल लॉ ऑफ इंडिया – I (नेचर ऑफ द कॉन्स्टिट्यूशन एंड फंडामेंटल राइट्स)
लॉ ऑफ टॉर्ट्सलॉ ऑफ क्राइम्स – I (इंडियन पीनल कोड)
कॉन्ट्रैक्ट – I (जनरल प्रिंसिपल्स ऑफ कॉन्ट्रैक्ट)
सेमेस्टर 2 
ज्यूरिस्प्रूडेंस – II (लीगल कॉन्सेप्ट्स)कॉन्स्टिट्यूशनल लॉ ऑफ इंडिया – II (स्ट्रक्चर एंड वर्किंग ऑफ द इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन)
फैमिली लॉ – I (हिंदू लॉ)कॉन्ट्रैक्ट – II (स्पेसिफिक कॉन्ट्रैक्ट एंड लॉ ऑफ पार्टनरशिप)
ऑप्शनल पेपर्स
इंडियन लीगल एंड कॉन्स्टिट्यूशनल हिस्ट्रीलॉ ऑफ टैक्सेशन
सेमेस्टर 3 
फैमिली लॉ – II (मुस्लिम लॉ)पब्लिक इंटरनेशनल लॉ
एडमिनिस्ट्रेटिव लॉलॉ ऑफ प्रॉपर्टी एंड ईज़मेंट
प्रोफेशनल एथिक्स, अकाउंटेबिलिटी ऑफ लॉयर्स एंड बार बेंच रिलेशन (प्रैक्टिकल ट्रेनिंग)
सेमेस्टर 4 
कंपनी लॉलेबर एंड इंडस्ट्रियल लॉ
एनवायरनमेंटल लॉ
ऑप्शनल पेपर्स
क्रिमिनोलॉजी एंड पेनोलॉजीलॉ ऑफ ट्रस्ट, इक्विटी एंड फिड्यूशियरी रिलेशन
आर्बिट्रेशन एंड कॉन्सिलिएशन एंड अल्टरनेट डिस्प्यूट रिजोल्यूशन (प्रैक्टिकल ट्रेनिंग)बैंकिंग लॉ इन्क्लूडिंग नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट
सेमेस्टर 5 
सिविल प्रोसीजर कोड एंड लिमिटेशन एक्टलॉ ऑफ क्राइम्स – II (कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर)
लॉ ऑफ एविडेंसलैंड लॉज इन्क्लूडिंग सीलिंग एंड अदर लोकल लॉज
ड्राफ्टिंग ऑफ प्लीडिंग एंड कंवेयन्सिंग (प्रैक्टिकल ट्रेनिंग)
सेमेस्टर 6 
इंटरप्रिटेशन ऑफ स्टैच्यूट्सलीगल लैंग्वेज एंड लीगल राइटिंग इन्क्लूडिंग प्रोफिशिएंसी इन जनरल इंग्लिश
लॉ ऑफ ह्यूमन राइट्स
ऑप्शनल पेपर्स
इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी लॉइन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एंड साइबर लॉ
लॉ रिलेटिंग टू वुमन एंड चाइल्डलॉ रिलेटिंग टू राइट टू इन्फॉर्मेशन
मूट कोर्ट, प्री-ट्रायल प्रिपरेशन एंड पार्टिसिपेशन इन ट्रायल प्रोसीडिंग्स (प्रैक्टिकल ट्रेनिंग)

एलएलबी के बाद रोजगार के क्षेत्र 

आप एलएलबी कंप्लीट करने के बाद इन प्रमुख क्षेत्रों में अपना सुनहरा भविष्य बना सकते हैं:

क्षेत्र कार्य 
लॉ प्रैक्टिसLLB के बाद अधिवक्ता के रूप में आपको प्रैक्टिस करने के लिए ‘बार कॉउंसिल ऑफ इंडिया’ (BCI) में नामांकन और ‘अखिल भारतीय बार परीक्षा’ (AIBE) उत्तीर्ण करना आवश्यक है। इसके बाद अधिवक्ता जिला न्यायालय, उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय में मुवक्किलों का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं।
न्यायिक और कानूनी सरकारी सेवाएंराज्य न्यायिक सेवा परीक्षाओं के माध्यम से सिविल जज या न्यायिक मजिस्ट्रेट बना जा सकता है, जिनकी भर्ती संबंधित राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) द्वारा होती है। इसके साथ ही सहायक लोक अभियोजक (APP) जैसे पदों पर नियुक्ति राज्य सरकारों द्वारा की जाती है।
लीगल एडवाइजरकंपनियां कानूनी अनुपालन, अनुबंध प्रबंधन और विवाद समाधान के लिए लीगल एडवाइजर नियुक्त करती हैं। कंपनी में विधिक पदों की भूमिका और दायित्व ‘कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय’ (MCA) के नियामकीय ढांचे और कंपनी कानून के अंतर्गत परिभाषित होते हैं।
कॉर्पोरेट लॉयरकॉर्पोरेट वकील कंपनियों के विलय-अधिग्रहण, अनुबंध, निवेश और अनुपालन मामलों पर काम करते हैं। ये कार्य ‘कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय’ के अधीन लागू कंपनी कानून व नियमों से संचालित होते हैं।
लोक नीति एवं मानवाधिकारLLB ग्रेजुएट मानवाधिकार और नीति शोध में कार्य कर सकते हैं। मानवाधिकार संरक्षण का वैधानिक ढांचा ‘राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग’ (NHRC) द्वारा संचालित है, जहां विधि विशेषज्ञों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
कानूनी शोध और शिक्षणविश्वविद्यालयों में सहायक प्रोफेसर बनने के लिए LLM या NET जैसी योग्यता अपेक्षित हो सकती है। उच्च शिक्षा संस्थानों के नियमन और पात्रता मानदंड ‘विश्वविद्यालय अनुदान आयोग’ (UGC) द्वारा निर्धारित किए जाते हैं।
लीगल प्रोसेस आउटसोर्सिंगLPO सेक्टर में अनुबंध समीक्षा, कानूनी शोध और दस्तावेज विश्लेषण जैसे कार्य होते हैं। भारत में IT-BPM/LPO उद्योग का परिदृश्य ‘नेशनल एसोसिएशन ऑफ़ सॉफ्टवेयर एंड सर्विसेज़ कंपनीज’ (NASSCOM) की उद्योग रिपोर्टों में वर्णित है।
लीगल राइटिंगकानूनी पत्रकारिता और लेखन में विधिक विश्लेषण, केस स्टडी और नीतिगत विषयों पर लेखन शामिल है। मीडिया आचार संहिता और पत्रकारिता मानकों का ढांचा ‘भारतीय प्रेस परिषद’ (PCI) द्वारा विनियमित है।
साइबर लॉ एवं बौद्धिक संपदा विशेषज्ञसाइबर कानून से संबंधित कार्य सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के अंतर्गत आते हैं। पेटेंट, ट्रेडमार्क और अन्य IP अधिकारों का पंजीकरण व प्रशासन ‘पेटेंट, डिजाइन और ट्रेडमार्क के नियंत्रक जनरल का कार्यालय’ (CGPDTM), वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत किया जाता है।
उद्यमिताLLB ग्रेजुएट स्वयं का लीगल टेक स्टार्टअप शुरू कर सकते हैं।


यह भी पढ़ें: सिविल जज कैसे बनें?

एलएलबी करने के बाद जॉब प्रोफाइल और सैलरी

एलएलबी कोर्स के बाद सैलरी आपके एक्सपीरियंस, जॉब सेक्टर, कंपनी और शहर के हिसाब से भिन्न हो सकती है। यहां कुछ प्रमुख जॉब प्रोफाइल के साथ सैलरी रेंज AmbitionBox 2025-2026 और Glassdoor के अनुसार नीचे दी गई है:

जॉब प्रोफाइलअनुमानित वार्षिक सैलरी (INR)
वकील4.7 लाख – 5.2 लाख 
कानूनी सलाहकार5.9 लाख – 6.7 लाख
कॉर्पोरेट वकील9.5 लाख – 10.9 लाख
विधि अधिकारी6.3 लाख – 6.9 लाख
विधि प्राध्यापक4 लाख- 11 लाख
कानूनी विश्लेषक4.9 लाख – 5.6 लाख
सरकारी वकील3.8 लाख – 5.5 लाख
लिटिगेशन वकील5.2 लाख – 5.7 लाख
लीगल कंसल्टेंट7.2 लाख – 7.9 लाख
असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर 6.7 लाख – 7.4 लाख

यह भी पढ़ें: कॉर्पोरेट वकील कैसे बनें?

एलएलबी करने के बाद हायर स्टडी और प्रतियोगी परीक्षा के विकल्प 

आप एलएलबी करने के बाद अपनी रूचि और करियर फील्ड के अनुसार इन विकल्पों को चुन सकते हैं:

कोर्स / परीक्षा  जानकारी 
LLMLLB के बाद विशेषज्ञता के लिए LLM किया जाता है (जैसे कॉन्स्टिट्यूशनल लॉ, क्रिमिनल लॉ, कॉर्पोरेट लॉ आदि)। भारत में LLM प्रोग्राम की मान्यता और विधि शिक्षा के मानदंड ‘बार काउंसिल ऑफ इंडिया’ (BCI) द्वारा निर्धारित किए जाते हैं।
पीएचडी इन लॉलॉ रिसर्च और अकादमिक करियर के लिए पीएचडी की जा सकता है। पीएचडी प्रोग्राम के नियमन और न्यूनतम मानदंड ‘विश्वविद्यालय अनुदान आयोग’ (UGC) द्वारा तय किए जाते हैं।
पीजी डिप्लोमा इन स्पेशलाइज्ड लॉसाइबर लॉ, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी, टैक्सेशन, ह्यूमन राइट्स जैसे क्षेत्रों में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा उपलब्ध हैं। उदाहरण स्वरूप ‘नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी’ (NLSIU), बेंगलुरु विभिन्न विधिक विषयों में पीजी डिप्लोमा कार्यक्रम संचालित करता है।
MBAकॉर्पोरेट या मैनेजमेंट करियर की ओर बढ़ने के लिए LLB के बाद MBA किया जा सकता है। भारत में प्रबंधन शिक्षा की गुणवत्ता और मान्यता ‘अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद’  (AICTE) द्वारा विनियमित की जाती है।
जज एडवोकेट जनरल (JAG)LLB ग्रेजुएट भारतीय सशस्त्र बलों में विधि अधिकारी के रूप में अप्लाई कर सकते हैं। संबंधित रिक्रूटमेंट प्रोसेस भारतीय सेना की आधिकारिक अधिसूचनाओं के अनुसार होती है।
UPSCLLB के बाद ‘संघ लोक सेवा आयोग’ (UPSC) की परीक्षाओं के माध्यम से प्रशासनिक सेवाओं में प्रवेश किया जा सकता है। परीक्षा और पात्रता मानदंड UPSC द्वारा निर्धारित किए जाते हैं।

यह भी पढ़ें: भारत में सुप्रीम कोर्ट जज कैसे बनें?

FAQs

क्या मैं LLB डिग्री पूरी करने के बाद लॉ की प्रैक्टिस कर सकता हूँ?

एलएलबी पूरी करने के बाद आप ‘बार काउंसिल ऑफ इंडिया’ में नामांकन कर और ‘ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन’ (AIBE) पास करने के पश्चात भारत में विधि प्रैक्टिस कर सकते हैं।

LLB करने के लिए क्या योग्यता होनी चाहिए?

LLB में एडमिशन के लिए 5 वर्षीय कोर्स हेतु 10+2 तथा 3-वर्षीय कोर्स हेतु स्नातक डिग्री निर्धारित न्यूनतम अंकों के साथ अनिवार्य है।

LLB में इंग्लिश जरूरी है क्या?

बार काउंसिल ऑफ इंडिया के लीगल एजुकेशन रूल्स, 2008 के अनुसार LLB में प्रवेश के लिए अंग्रेजी विषय अनिवार्य नहीं है, परंतु अधिकांश विश्वविद्यालय शिक्षण व परीक्षा माध्यम के रूप में अंग्रेजी का उपयोग करते हैं।

3 साल और 5 साल की एलएलबी में क्या अंतर है?

BCI के अनुसार 3 वर्षीय LLB प्रोग्राम ग्रेजुएशन के बाद शुरू होता है, जबकि 5 वर्षीय इंटीग्रेटेड LLB प्रोग्राम 12वीं के बाद शुरू होकर स्नातक और विधि शिक्षा दोनों को सम्मिलित करता है।

LLB करने से कौन सी नौकरी मिलती है?

BCI के अनुसार LLB के बाद उम्मीदवार अधिवक्ता, न्यायिक सेवाओं, कॉर्पोरेट लीगल एडवाइजर, सरकारी लॉ ऑफिसर और अन्य कानूनी पेशेवर भूमिकाओं में कार्य कर सकते हैं।

आशा है कि इस लेख में आपको एलएलबी कोर्स की सभी आवश्यक जानकारी मिल गई होगी। इसी तरह अन्य कोर्स गाइड्स Leverage Edu पर उपलब्ध हैं।

Leave a Reply

Required fields are marked *

*

*