आर्किटेक्ट का काम सिर्फ खूबसूरत इमारतें बनाना नहीं होता, बल्कि सुरक्षित, उपयोगी और नियमों के अनुसार स्मार्ट डिज़ाइन तैयार करना भी होता है। अगर आपके अंदर क्रिएटिव सोच, ड्रॉइंग में रुचि और टेक्निकल चीज़ों को समझने का धैर्य है, तो आर्किटेक्चर आपके लिए एक मजबूत और सम्मानजनक करियर विकल्प बन सकता है।
आज के समय में बहुत-से छात्र यह जानना चाहते हैं कि आर्किटेक्ट कैसे बनें और इस प्रोफेशन में सही शुरुआत कहाँ से की जाए। भारत में आर्किटेक्ट बनने के लिए 12वीं में गणित (Maths) अनिवार्य होता है, इसके बाद 5 साल का B.Arch कोर्स और Council of Architecture (COA) में रजिस्ट्रेशन जरूरी होता है। यह एक रेगुलेटेड प्रोफेशन है, जहाँ बिना लाइसेंस आर्किटेक्ट के रूप में काम करना कानूनी रूप से मान्य नहीं है।
इस करियर गाइड में आपको आर्किटेक्ट बनने की पूरी प्रक्रिया स्टेप-बाय-स्टेप समझाई गई है जिसमें योग्यता, जरूरी स्किल्स, कोर्स डिटेल्स और करियर स्कोप से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी शामिल है।
This Blog Includes:
- आर्किटेक्ट कौन होता है और उसका काम क्या होता है?
- आर्किटेक्ट के प्रकार
- क्या 12वीं के बाद आर्किटेक्ट बन सकते हैं?
- भारत में आर्किटेक्ट बनने के लिए योग्यता
- आर्किटेक्ट कैसे बनें? (स्टेप-बाय-स्टेप गाइड)
- आर्किटेक्ट को मिलने वाली अनुमानित सैलरी
- आर्किटेक्ट के रूप में करियर स्कोप
- सरकारी क्षेत्र में आर्किटेक्ट बनने के अवसर
- आर्किटेक्ट बनाम सिविल इंजीनियर
- FAQs
आर्किटेक्ट कौन होता है और उसका काम क्या होता है?
आर्किटेक्ट एक प्रशिक्षित और लाइसेंस प्राप्त प्रोफेशनल होता है, जो किसी भी बिल्डिंग या स्ट्रक्चर की योजना, डिजाइन और निर्माण प्रक्रिया को वैज्ञानिक और व्यावहारिक तरीकों से तैयार करता है। भारत में आर्किटेक्ट एक रेगुलेटेड प्रोफेशन है, जिसे कॉउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर (COA) नियंत्रित करती है। बिना COA रजिस्ट्रेशन के कोई भी व्यक्ति कानूनी रूप से आर्किटेक्ट के रूप में कार्य नहीं कर सकता।
आर्किटेक्ट का काम केवल सुंदर डिजाइन बनाना नहीं होता, बल्कि सुरक्षा, उपयोगिता, पर्यावरण और बजट को ध्यान में रखते हुए पूरी इमारत की व्यावहारिक योजना तैयार करना होता है।
एक आर्किटेक्ट की मुख्य जिम्मेदारियाँ निम्नलिखित होती हैं –
- बिल्डिंग प्लानिंग और डिजाइन: साइट एनालिसिस के आधार पर लेआउट, स्पेस प्लानिंग और स्ट्रक्चर डिजाइन तैयार करना।
- बिल्डिंग बायलॉज और सेफ्टी का पालन: स्थानीय नगर निगम, फायर सेफ्टी और स्ट्रक्चरल सेफ्टी नियमों के अनुसार डिजाइन बनाना।
- लाइटिंग और वेंटिलेशन प्लानिंग: प्राकृतिक रोशनी, हवा के प्रवाह और थर्मल कम्फर्ट को संतुलित रखना।
- बजट और मटेरियल प्लानिंग: क्लाइंट के बजट के अनुसार उपयुक्त मटेरियल और निर्माण तकनीक का चयन करना।
- कोऑर्डिनेशन: सिविल इंजीनियर, स्ट्रक्चरल इंजीनियर और कॉन्ट्रैक्टर के साथ मिलकर काम करना।
- ड्रॉइंग और 3D विज़ुअल: टेक्निकल ड्रॉइंग, वर्किंग ड्रॉइंग और 3D मॉडल तैयार करना।
- कंस्ट्रक्शन सुपरविजन: साइट विज़िट कर निर्माण कार्य की गुणवत्ता और डिजाइन अनुपालन सुनिश्चित करना।
- सस्टेनेबल डिजाइन: ग्रीन बिल्डिंग, एनर्जी एफिशिएंसी और पर्यावरण अनुकूल समाधान अपनाना।
- अप्रूवल और टाइमलाइन मैनेजमेंट: बिल्डिंग प्लान अप्रूवल और प्रोजेक्ट शेड्यूल को मैनेज करना।
आर्किटेक्ट के प्रकार
आर्किटेक्ट अपने काम के क्षेत्र और स्पेशलाइज़ेशन के आधार पर कई प्रकार के होते हैं, जिनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित शामिल हैं-
- रेज़िडेंशियल आर्किटेक्ट: रेज़िडेंशियल आर्किटेक्ट घरों और आवासीय बिल्डिंग्स का डिज़ाइन तैयार करते हैं। ये क्लाइंट की ज़रूरत, बजट और लाइफ़स्टाइल को ध्यान में रखते हुए कमरे की प्लानिंग, स्ट्रक्चर और लाइटिंग का सही बैलेंस बनाते हैं, ताकि रहने के लिए सुरक्षित और आरामदायक स्पेस तैयार हो सके।
- कमर्शियल आर्किटेक्ट: कमर्शियल आर्किटेक्ट ऑफिस, शॉपिंग मॉल, होटल और अन्य बिज़नेस से जुड़ी बिल्डिंग्स के डिज़ाइन में एक्सपर्ट होते हैं। इनके डिज़ाइन में फ़ंक्शनैलिटी, सेफ़्टी और कमर्शियल यूज़ तीनों पर बराबर ध्यान दिया जाता है।
- लैंडस्केप आर्किटेक्ट: लैंडस्केप आर्किटेक्ट पार्क, गार्डन, सड़क किनारे के एरिया और ओपन पब्लिक स्पेसेज़ का डिज़ाइन करते हैं। ये नेचर और इंसानों की ज़रूरतों के बीच बैलेंस बनाकर एनवायरनमेंट-फ्रेंडली और यूज़फुल आउटडोर स्पेस डेवलप करते हैं।
- अर्बन / टाउन प्लानर: अर्बन या टाउन प्लानर शहरों और कस्बों की ओवरऑल प्लानिंग पर काम करते हैं। इसमें रेज़िडेंशियल, कमर्शियल और पब्लिक एरियाज़ का संतुलित विकास, रोड नेटवर्क और ट्रांसपोर्ट सिस्टम की प्लानिंग शामिल होती है। ध्यान देने वाली बात यह है कि टाउन प्लानर बनने के लिए कई मामलों में अर्बन प्लानिंग या एम.प्लान जैसे स्पेशलाइज़्ड कोर्स किए जाते हैं, न कि सिर्फ बी.आर्क।
- इंटीरियर आर्किटेक्ट / इंटीरियर डिज़ाइन से जुड़े प्रोफेशनल: इंटीरियर आर्किटेक्ट या इंटीरियर डिज़ाइन से जुड़े प्रोफेशनल बिल्डिंग के अंदरूनी हिस्सों जैसे रूम लेआउट, फर्नीचर, लाइटिंग और कलर स्कीम का डिज़ाइन करते हैं। यह आर्किटेक्चर से जुड़ी हुई लेकिन अलग प्रोफेशनल फ़ील्ड मानी जाती है, जिसके लिए अलग कोर्स और करियर पाथ होता है।
- सस्टेनेबल / ग्रीन आर्किटेक्ट: ग्रीन आर्किटेक्ट एनवायरनमेंट-फ्रेंडली बिल्डिंग डिज़ाइन पर फोकस करते हैं। ये एनर्जी सेविंग, वाटर कंज़र्वेशन और नेचुरल रिसोर्सेज़ के सही इस्तेमाल पर ध्यान देते हैं, ताकि बिल्डिंग का पर्यावरण पर नेगेटिव असर कम हो और लॉन्ग-टर्म सस्टेनेबिलिटी बनी रहे।
क्या 12वीं के बाद आर्किटेक्ट बन सकते हैं?
हाँ, 12वीं के बाद आर्किटेक्ट बनना पूरी तरह संभव है, लेकिन इसके लिए मैथ्स अनिवार्य होती है। कॉउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर (COA) के नियमों के अनुसार, छात्र ने 12वीं में फिजिक्स और मैथेमेटिक्स पढ़ी होनी चाहिए और न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक (आरक्षित वर्ग के लिए 45 प्रतिशत) होने चाहिए। इसके बाद B.Arch कोर्स में एडमिशन के लिए NATA या JEE मेन पेपर-2 क्वालिफाई करना होता है। यदि किसी छात्र ने 12वीं में मैथ्स नहीं पढ़ी है, तो वह भारत में COA-मान्य आर्किटेक्ट बनने के लिए आधिकारिक रूप से योग्य नहीं माना जाता।
यह भी समझना ज़रूरी है कि आर्किटेक्चर का फोकस मुख्य रूप से डिज़ाइन, प्लानिंग और स्पेस यूज़ पर होता है, जबकि सिविल इंजीनियरिंग में स्ट्रक्चर, कंस्ट्रक्शन और टेक्निकल एग्जीक्यूशन पर ज़्यादा ध्यान दिया जाता है। आर्किटेक्ट बनने के लिए COA रजिस्ट्रेशन आवश्यक होता है, जबकि सिविल इंजीनियरिंग में ऐसा कोई अनिवार्य लाइसेंस सिस्टम नहीं होता।
भारत में आर्किटेक्ट बनने के लिए योग्यता
भारत में COA-मान्य आर्किटेक्ट बनने के लिए उम्मीदवार को नीचे दी गई सभी योग्यता शर्तें पूरी करनी होती हैं –
- मान्यता प्राप्त B.Arch कोर्स में एडमिशन: आर्किटेक्ट बनने के लिए बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर (B.Arch) करना अनिवार्य है। यह कोर्स केवल उन्हीं कॉलेजों से मान्य होता है, जिन्हें कॉउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर (COA) द्वारा अप्रूव किया गया हो।
- 10+2 (12वीं) में मैथ्स अनिवार्य: उम्मीदवार का 12वीं पास होना जरूरी है, जिसमें मैथेमेटिक्स अनिवार्य विषय होता है। आमतौर पर फिजिक्स के साथ मैथ्स पढ़ना आवश्यक माना जाता है। जिन छात्रों ने 12वीं में मैथ्स नहीं पढ़ी है, वे भारत में B.Arch के लिए योग्य नहीं माने जाते।
- न्यूनतम अंक (Percentage Criteria): जनरल कैटेगरी: कम से कम 50% अंक, SC / ST / OBC कैटेगरी: कम से कम 45% अंक (यह मानदंड COA के दिशा-निर्देशों पर आधारित होता है)
- मान्य एंट्रेंस एग्ज़ाम क्वालिफाई करना: B.Arch में एडमिशन के लिए उम्मीदवार को NATA या JEE मेन पेपर-2 (B.Arch) जैसी मान्य प्रवेश परीक्षाओं में से किसी एक को क्वालिफाई करना होता है।
आर्किटेक्ट बनने के लिए आवश्यक स्किल्स
आर्किटेक्ट बनने के लिए केवल डिग्री ही नहीं, बल्कि कुछ जरूरी स्किल्स का होना भी बहुत अहम होता है। ये स्किल्स पढ़ाई के दौरान और प्रोफेशनल करियर में आपकी ग्रोथ को सीधे प्रभावित करती हैं –
- क्रिएटिव थिंकिंग: नए और प्रैक्टिकल डिज़ाइन सॉल्यूशंस सोचने की क्षमता, ताकि सीमित जगह और बजट में भी बेहतर स्पेस प्लानिंग की जा सके।
- ड्राइंग और डिज़ाइन स्किल्स: हैंड स्केचिंग, टेक्निकल ड्रॉइंग और डिज़ाइन सॉफ्टवेयर के ज़रिए अपने आइडियाज़ को विज़ुअल फॉर्म में पेश करने की स्किल।
- मैथ्स और स्ट्रक्चरल समझ: मेज़रमेंट, प्रपोर्शन और बेसिक स्ट्रक्चरल लॉजिक समझना, ताकि डिज़ाइन सुरक्षित और व्यवहारिक हो।
- कम्युनिकेशन स्किल्स: क्लाइंट, इंजीनियर और कॉन्ट्रैक्टर के साथ अपने डिज़ाइन आइडियाज़ को साफ़ और प्रभावी तरीके से समझा पाना।
- प्रॉब्लम-सॉल्विंग स्किल्स: साइट से जुड़ी दिक्कतों, बजट लिमिटेशन और डिज़ाइन चेंज जैसे चैलेंजेस का तुरंत समाधान निकालने की क्षमता।
- टाइम मैनेजमेंट: प्रोजेक्ट डेडलाइन, ड्रॉइंग सबमिशन और साइट विज़िट्स को सही तरीके से मैनेज करना।
- कानूनी और रेगुलेटरी नॉलेज: बिल्डिंग बायलॉज, लोकल अप्रूवल प्रोसेस और COA से जुड़े नियमों की बेसिक समझ, ताकि डिज़ाइन कानूनी रूप से वैध रहे।
आर्किटेक्ट कैसे बनें? (स्टेप-बाय-स्टेप गाइड)
यहाँ आर्किटेक्ट बनने के लिए स्टेप-बाय-स्टेप गाइड दी गई है, जिसे ध्यानपूर्वक पढ़कर आप अपने करियर की शुरुआत कर सकते हैं –
स्टेप 1. 12वीं मैथ्स के साथ पास करें
आर्किटेक्ट बनने के लिए सबसे पहला कदम 12वीं कक्षा को गणित, फिजिक्स और केमेस्ट्री के साथ पास करना है। गणित अनिवार्य विषय है क्योंकि आर्किटेक्चर में संरचना, आकार और माप का ज्ञान आवश्यक होता है। यदि छात्र विज्ञान पृष्ठभूमि से नहीं हैं, तो वे B.Arch में प्रवेश के लिए योग्य नहीं माने जाते। इसलिए 12वीं की तैयारी के दौरान गणित पर विशेष ध्यान दें और परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करें, ताकि आगे के एंट्रेंस एग्जाम के लिए मजबूत आधार तैयार हो।
स्टेप 2. आर्किटेक्चर एंट्रेंस एग्जाम क्वालीफाई करें
B.Arch में प्रवेश के लिए एनएटीए (NATA) या जेईई मेन आर्किटेक्चर पेपर 2 पास करना अनिवार्य है। ये परीक्षा उम्मीदवार की रचनात्मक सोच, चित्रकला क्षमता और गणितीय ज्ञान की जांच करती है। एनएटीए में ड्राइंग और वास्तुकला के सामान्य ज्ञान के प्रश्न आते हैं, जबकि जेईई मेन आर्किटेक्चर में गणित पर अधिक ध्यान होता है। परीक्षा में पास होने के लिए नियमित अभ्यास और मॉक टेस्ट का सहारा लें, जिससे आपके अंक और कौशल दोनों मजबूत हों।
स्टेप 3. B.Arch कोर्स में एडमिशन लें
एनएटीए या जेईई मेन के अंकों के आधार पर छात्र देश के सरकारी या निजी कॉलेजों में B.Arch कोर्स में प्रवेश ले सकते हैं। यह कोर्स पाँच वर्षों का होता है और इसमें सैद्धांतिक शिक्षा के साथ प्रायोगिक प्रशिक्षण भी शामिल होता है। कॉलेज चुनते समय उसकी मान्यता, फैकल्टी क्वालिटी और इंटर्नशिप अवसरों पर ध्यान दें। COA द्वारा अनुमोदित कॉलेजों में ही दाखिला लेना आवश्यक है, क्योंकि इससे आगे COA रजिस्ट्रेशन और वैध प्रैक्टिस संभव होगी।
स्टेप 4. मैंडेटरी प्रैक्टिकल ट्रेनिंग / इंटर्नशिप कम्पलीट करें
B.Arch के अंतिम वर्ष में अनिवार्य इंटर्नशिप करनी पड़ती है। यह इंटर्नशिप वास्तविक साइट पर जाकर डिजाइन, निर्माण और क्लाइंट मीटिंग के अनुभव के लिए होती है। इंटर्नशिप में छात्रों को साइट निरीक्षण, ड्राइंग तैयार करना और संरचना की कार्यप्रणाली सीखने का अवसर मिलता है। इसका उद्देश्य उन्हें पेशेवर कार्य के लिए तैयार करना है। इंटर्नशिप पूरी होने के बाद ही छात्र COA में आवेदन कर सकते हैं और वैध आर्किटेक्ट बन सकते हैं।
स्टेप 5. कॉउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर (COA) में रजिस्ट्रेशन करें
B.Arch कोर्स और इंटर्नशिप पूरी करने के बाद छात्र को आर्किटेक्ट के रूप में वैध प्रैक्टिस करने के लिए COA में रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है। रजिस्ट्रेशन के लिए ऑनलाइन आवेदन, दस्तावेज़ सत्यापन और फीस जमा करना होता है। COA रजिस्ट्रेशन मिलने के बाद ही कोई व्यक्ति वास्तुकला के प्रोजेक्ट पर साइन कर सकता है और पेशेवर कार्य कर सकता है। बिना COA रजिस्ट्रेशन आर्किटेक्ट के रूप में कार्य करना कानूनन अवैध है।
स्टेप 6. जॉब जॉइन करें या प्राइवेट प्रैक्टिस शुरू करें
COA रजिस्ट्रेशन के बाद छात्र आर्किटेक्ट के रूप में किसी फर्म में नौकरी कर सकते हैं या स्वतंत्र प्रैक्टिस शुरू कर सकते हैं। नौकरी में अनुभव बढ़ाने के लिए बड़े प्रोजेक्ट्स में काम करना लाभकारी होता है। प्राइवेट प्रैक्टिस में प्रारंभिक समय में क्लाइंट और प्रोजेक्ट ढूँढना चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन लंबे समय में यह स्वतंत्रता और उच्च आय प्रदान कर सकता है। निर्णय लेने से पहले अपनी क्षमता, नेटवर्क और संसाधनों का मूल्यांकन आवश्यक है।
आर्किटेक्ट को मिलने वाली अनुमानित सैलरी
भारत में आर्किटेक्ट की सैलरी किसी एक तय पैमाने पर निर्भर नहीं करती। यह उम्मीदवार की तकनीकी स्किल्स, अनुभव, कंपनी के प्रकार और जॉब लोकेशन के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। आमतौर पर शुरुआती स्तर पर सैलरी सीमित रहती है, लेकिन जैसे-जैसे प्रैक्टिकल अनुभव और इंडस्ट्री-रेडी स्किल्स बढ़ती हैं, वैसे-वैसे आय में भी अच्छा ग्रोथ देखने को मिलता है।
नीचे भारत में आर्किटेक्ट की अनुभव-आधारित अनुमानित वार्षिक सैलरी रेंज (डेटा AmbitionBox से लिया गया है) दी गई है, जिससे छात्रों और फ्रेशर्स को एक सामान्य आइडिया मिल सके:
| अनुभव | औसतन अनुमानित वार्षिक वेतन (INR) |
| 0 – 1 साल | INR 1.8 लाख – INR 3 लाख |
| 1 साल – 3 साल | INR 3.1 लाख – INR 3.4 लाख |
| 3 साल – 6 साल | INR 6.3 लाख – INR 6.9 लाख |
| 6 साल – 9 साल | INR 13.1 लाख – INR 14.5 लाख |
| 9 साल – 12 साल | INR 28.3 लाख – INR 31.2 लाख |
| अनुभव 12 साल से अधिक होने पर सैलरी रेंज | INR 31.9 लाख – INR 35.3 लाख |
यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि सैलरी केवल डिग्री पर आधारित नहीं होती, बल्कि आपकी प्रोग्रामिंग स्किल्स, प्रोजेक्ट अनुभव, टेक्नोलॉजी स्टैक और समस्या समाधान क्षमता इसमें अहम भूमिका निभाती है। सही स्किल्स और निरंतर सीखने के साथ आर्किटेक्ट की सैलरी ग्रोथ की संभावनाएँ काफ़ी अच्छी मानी जाती हैं।
आर्किटेक्ट के रूप में करियर स्कोप
आर्किटेक्ट के रूप में आप PWD, आवास बोर्ड (हॉउसिंग बोर्ड), नगर निगम, और DDA (दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी) जैसे विभागों में निम्नलिखित पदों पर अपने करियर की शुरुआत कर सकते हैं। इसके साथ ही कुछ प्राइवेट कंपनीज जैसे – आर्किटेक्ट हाफ़िज़ कॉन्ट्रैक्टर (एएचसी), सीपी कुकरेजा आर्किटेक्ट्स (सीपीकेए) और संजय पुरी आर्किटेक्ट्स में भी नीचे दिए गए जॉब रोल्स के साथ अपने करियर को नई दिशा दे सकते हैं –
| जॉब रोल | मुख्य कार्य | आवश्यक स्किल्स |
| डिजाइन आर्किटेक्ट | घरों, ऑफिसों और कमर्शियल बिल्डिंग्स का मुख्य डिजाइन तैयार करना। | AutoCAD, Revit, स्केचिंग |
| अर्बन प्लानर | शहरों के बुनियादी ढांचे, पार्कों और परिवहन प्रणालियों की योजना बनाना। | GIS, सिटी प्लानिंग, डेटा एनालिसिस |
| सस्टेनेबिलिटी कंसल्टेंट | इमारतों को ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण के अनुकूल (Green Buildings) बनाना। | LEED/IGBC सर्टिफिकेशन, सोलर डिजाइन |
| BIM स्पेशलिस्ट | बिल्डिंग इंफॉर्मेशन मॉडलिंग (BIM) के जरिए डिजिटल 3D मॉडल बनाना। | BIM सॉफ्टवेयर, कोआर्डिनेशन |
| कंज़र्वेशन आर्किटेक्ट | ऐतिहासिक और विरासती इमारतों (Heritage) का संरक्षण और मरम्मत करना। | इतिहास का ज्ञान, रेस्टोरेशन तकनीक |
| लैंडस्केप आर्किटेक्ट | बाहरी स्थानों, उद्यानों और सार्वजनिक परिसरों के लैंडस्केप को डिजाइन करना। | बॉटनी ज्ञान, साइट एनालिसिस |
| इंटीरियर डिजाइनर | कमरों के अंदरूनी हिस्से, फर्नीचर और लाइटिंग को कलात्मक बनाना। | 3ds Max, मटेरियल नॉलेज |
सरकारी क्षेत्र में आर्किटेक्ट बनने के अवसर
भारत में सरकारी आर्किटेक्ट मुख्य रूप से CPWD (सेंट्रल पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट), राज्य PWD, नगर निगम, स्मार्ट सिटी मिशन, विकास प्राधिकरण (जैसे DDA, HUDA, LDA), भारतीय रेलवे, रक्षा निर्माण संगठन, NBCC (नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन) और HUDCO जैसी संस्थाओं में कार्य करते हैं। इनके कार्यों में सरकारी भवनों की प्लानिंग, मास्टर प्लान तैयार करना, ड्रॉइंग और डिज़ाइन अप्रूवल, टेंडर डॉक्यूमेंट की तकनीकी जांच, ग्रीन बिल्डिंग मानकों का पालन, और निर्माण कार्यों का साइट निरीक्षण शामिल होता है। उदाहरण के तौर पर CPWD के आर्किटेक्ट केंद्रीय सरकारी कार्यालय, AIIMS, IIT, राष्ट्रीय संग्रहालय और बड़े पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की डिज़ाइन और प्लानिंग में शामिल रहते हैं।
इसके लिए भर्ती आमतौर पर UPSC, राज्य लोक सेवा आयोग (PSC), SSC, या संबंधित PSU की आधिकारिक भर्ती प्रक्रियाओं के माध्यम से होती है, जबकि कुछ पद कॉन्ट्रैक्ट या प्रोजेक्ट बेसिस पर भी दिए जाते हैं। सरकारी क्षेत्र में क्रिएटिव स्वतंत्रता अपेक्षाकृत कम हो सकती है, लेकिन निश्चित वेतन, पेंशन/सरकारी लाभ, जॉब सिक्योरिटी और बड़े राष्ट्रीय स्तर के प्रोजेक्ट्स पर काम करने का अनुभव इसे एक विश्वसनीय और सम्मानजनक करियर विकल्प बनाता है।
आर्किटेक्ट बनाम सिविल इंजीनियर
आर्किटेक्ट बनाम सिविल इंजीनियर के अंतर को समझकर आप अपने लिए एक सही निर्णय ले सकते हैं, जिससे आपकी करियर ग्रोथ हो सकती है –
| पहलू | आर्किटेक्ट | सिविल इंजीनियर |
| काम का प्रकार | इमारत और स्थान की डिजाइन, योजना बनाना, क्लाइंट से बात करना। | इमारत और पुल आदि का निर्माण, तकनीकी योजना, साइट पर सुपरविज़न |
| पढ़ाई की अवधि | 5 साल (B.Arch) | 4 साल (B.Tech/B.E Civil) |
| एंट्रेंस एग्जाम | NATA या JEE Paper 2 | JEE Main / State CET / Direct College Admission |
| रजिस्ट्रेशन | कॉउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर में जरूरी | कोई कानूनी रजिस्ट्रेशन जरूरी नहीं |
| रचनात्मकता | बहुत अधिक | सीमित, टेक्निकल डिज़ाइन ज्यादा |
| शुरुआती वेतन | INR 15,000 – INR 30,000 प्रति माह | INR 25,000 – INR 40,000 प्रति माह |
| करियर ग्रोथ | धीरे, प्राइवेट प्रैक्टिस के बाद अच्छा | स्थिर, सरकारी और निजी दोनों में बेहतर |
| काम का माहौल | ऑफिस + साइट का मिश्रण | ज्यादातर साइट + ऑफिस कम |
यह भी पढ़ें – सिविल इंजीनियर कैसे बनें: योग्यता, कोर्स, सैलरी और स्टेप-बाय-स्टेप गाइड
FAQs
आर्किटेक्ट बनने के लिए 12वीं PCM (फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स) से पास होना जरूरी है। इसके बाद 5 साल का B.Arch (बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर) कोर्स करना होता है। इस कोर्स में बिल्डिंग डिज़ाइन, कंस्ट्रक्शन, प्लानिंग, ड्राइंग और सॉफ्टवेयर सिखाए जाते हैं। डिग्री पूरी करने के बाद कॉउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर में रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होता है, तभी आप लीगली आर्किटेक्ट बन सकते हैं और प्रोजेक्ट्स पर काम कर सकते हैं।
नहीं, भारत में B.Arch में एडमिशन के लिए मैथ्स अनिवार्य होता है। मैथ्स की जरूरत डिज़ाइन कैलकुलेशन, स्ट्रक्चर प्लानिंग, मेज़रमेंट और स्पेस मैनेजमेंट में पड़ती है। अगर किसी छात्र के पास 12वीं में मैथ्स नहीं है तो वह भारत में आर्किटेक्ट नहीं बन सकता। हालांकि इंटीरियर डिज़ाइन जैसे रिलेटेड फील्ड में बिना मैथ्स प्रवेश संभव होता है, लेकिन वह आर्किटेक्ट क्वालिफिकेशन नहीं मानी जाती।
भारत में आर्किटेक्ट बनने में सामान्यतः 5 साल लगते हैं क्योंकि B.Arch एक प्रोफेशनल डिग्री है। इसके बाद कॉउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर में रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी करनी होती है। कुछ छात्र एक्सपीरियंस या स्पेशलाइजेशन के लिए इंटर्नशिप और हायर स्टडीज (M.Arch) भी करते हैं, जिसमें कुल 6-7 साल तक का समय लग सकता है।
भारत में फ्रेशर आर्किटेक्ट की शुरुआती सैलरी लगभग INR 20,000 से INR 40,000 प्रति माह होती है, जो एक्सपीरियंस, स्किल्स और सिटी पर निर्भर करती है। इसके अलावा 3-5 साल अनुभव के बाद एक आर्किटेक्ट को INR 50,000 से INR 1 लाख तक सैलरी मिल सकती है।
भारत में शहरीकरण और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के बढ़ने के कारण आर्किटेक्ट की मांग धीरे-धीरे बढ़ रही है। हालांकि नौकरी की प्रतिस्पर्धा अधिक है और शुरुआती वेतन अपेक्षाकृत कम होता है। निजी प्रैक्टिस में सफलता अनुभव, नेटवर्किंग और इनोवेटिव डिज़ाइन पर निर्भर करती है। यदि आप लंबे समय तक धैर्य और स्किल विकसित करते हैं तो करियर ग्रोथ अच्छी हो सकती है। सरकारी और मल्टीनेशनल कंपनियों में स्थिर रोजगार भी विकल्प हैं।
अगर आप आर्किटेक्ट के रूप में करियर की शुरुआत करने का विचार कर रहे हैं, तो उम्मीद है यह गाइड आपको सही दिशा समझने में मददगार रही होगी। ऐसे ही करियर से जुड़े और विषयों पर जानकारी के लिए आप Leverage Edu के दूसरे लेख भी देख सकते हैं।

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