भारत इस समय दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा सिविल एविएशन मार्केट है और आने वाले वर्षों में यह और तेज़ी से बढ़ने वाला है। Boeing और Airbus दोनों ने भारत में MRO (मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल) सेंटर्स खोलने शुरू किए हैं। हर नए एयरक्राफ्ट को उड़ान से पहले और बाद में एक लाइसेंस्ड एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर की सर्टिफिकेशन चाहिए यानी हर नए एयरक्राफ्ट के साथ नई AME पोज़िशन्स बनती हैं। यही वजह है कि इस प्रोफेशन की माँग तेज़ी से बढ़ रही है।
अगर आप जानना चाहते हैं कि एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर कैसे बनें? तो इस गाइड में स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस और एंट्रेंस एग्जाम, कॉलेज, और करियर स्कोप के बारे में बताया गया है।
This Blog Includes:
- एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर कौन होता है?
- AME कैसे बनें?
- स्टेप 1: 10वीं के बाद सही स्ट्रीम चुनें
- स्टेप 2: 12वीं में एलिजिबिलिटी पूरी करें
- स्टेप 3: AME कोर्स में एडमिशन लें
- स्टेप 4 – सही इंस्टिट्यूट चुनें (DGCA अप्रूवल जरूर देखें)
- स्टेप 5: AME कोर्स (बेसिक ट्रेनिंग) पूरा करें
- स्टेप 6: प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OJT) पूरी करें
- स्टेप 7: DGCA के मॉड्यूल एग्जाम्स क्लियर करें
- स्टेप 8: DGCA AME License के लिए apply करें
- स्टेप 9: जॉब के लिए अप्लाई करें और करियर शुरू करें
- रोजगार क्षेत्र और प्रमुख रिक्रूटर्स
- भारत में अनुभव के आधार पर AME की सैलरी
- AME और एयरोनॉटिकल इंजीनियर में अंतर
- FAQs
एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर कौन होता है?
एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर वह लाइसेंस्ड प्रोफेशनल होता है जो किसी भी कमर्शियल एयरक्राफ्ट को उड़ान भरने से पहले यह प्रमाणित करता है कि वह उड़ने योग्य है यानी तकनीकी रूप से उड़ान के लिए सुरक्षित है। उड़ान के बाद भी एयरक्राफ्ट की जाँच और ज़रूरी मेंटेनेंस AME की ज़िम्मेदारी है।
भारत में DGCA के नियमों के अनुसार बिना लाइसेंस्ड AME के हस्ताक्षर के कोई भी कमर्शियल एयरक्राफ्ट उड़ान नहीं भर सकता। यह इस प्रोफेशन की कानूनी और तकनीकी गंभीरता को दर्शाता है। AME दो विशेषज्ञताओं में काम करते हैं।
- कैटेगरी B1 (मैकेनिकल): इसमें इंजन, एयरफ्रेम, लैंडिंग गियर और मैकेनिकल सिस्टम की मेंटेनेंस और रिपेयर शामिल है।
- कैटेगरी B2 (एवियोनिक्स): इसमें एयरक्राफ्ट की इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक, नेविगेशन और कम्युनिकेशन सिस्टम पर काम होता है।
दोनों कैटेगरी की अपनी माँग है। जिनकी रुचि मैकेनिकल सिस्टम में है वे B1 चुनें, और जिनकी दिलचस्पी इलेक्ट्रॉनिक्स और नेविगेशन में है वे B2।
AME कैसे बनें?
नीचे दिए गए स्टेप्स को समझकर आप एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर बनने का पूरा रास्ता शुरुआत से लेकर लाइसेंस मिलने तक का आसानी से समझ सकते हैं।
स्टेप 1: 10वीं के बाद सही स्ट्रीम चुनें
AME बनने के लिए आपको शुरुआत से ही सही सब्जेक्ट्स चुनने होते हैं। 11वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथमेटिक्स (PCM) लेना सबसे बेहतर रहता है, क्योंकि आगे चलकर एयरक्राफ्ट सिस्टम्स, इंजन और कैलकुलेशन समझने में यही सब्जेक्ट्स काम आते हैं। आप PCB से भी अप्लाई कर सकते हैं, लेकिन प्रैक्टिकली DGCA के टेक्निकल मॉड्यूल्स, खासकर B1 (मैकेनिकल) स्ट्रीम में, मैथ और फिजिक्स की जरूरत ज्यादा पड़ती है। इसलिए अगर आपने एविएशन में जाने का मन बना लिया है, तो मैथ्स जरूर रखें।
स्टेप 2: 12वीं में एलिजिबिलिटी पूरी करें
AME कोर्स में एडमिशन के लिए 12वीं PCM में कम से कम 50% अंक होना जरूरी है। इसके अलावा, अगर आपने एरोनॉटिकल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल या इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में AICTE से अप्रूव्ड 3 साल का डिप्लोमा किया है, तो आप भी एलिजिबल होते हैं। एडमिशन के समय आपकी उम्र कम से कम 16 साल होनी चाहिए और मेडिकली फिट होना जरूरी है, यानी कलर ब्लाइंडनेस या नाईट ब्लाइंडनेस नहीं होनी चाहिए। साथ ही इंग्लिश की बेसिक समझ भी जरूरी है, क्योंकि एविएशन की टेक्निकल मैनुअल्स और DGCA एग्जाम इंग्लिश में होते हैं।
स्टेप 3: AME कोर्स में एडमिशन लें
AME कोर्स में एडमिशन के लिए आप एंट्रेंस एग्जाम दे सकते हैं, जिनके जरिए अलग-अलग इंस्टीट्यूट्स में एडमिशन मिलता है। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये एग्जाम DGCA के ऑफिशियल एग्जाम नहीं होते, बल्कि इंस्टीट्यूट्स अपने एडमिशन प्रोसेस के लिए इन्हें उपयोग करते हैं। कई DGCA-अप्रूव्ड इंस्टीट्यूट्स डायरेक्ट एडमिशन भी देते हैं, जो पूरी तरह वैलिड होता है।
नीचे कुछ कॉमन एंट्रेंस एग्जाम दिए गए हैं, जिनके जरिए आप AME इंस्टीट्यूट्स में एडमिशन ले सकते हैं:
| एंट्रेंस एग्जाम | फुल फॉर्म | लेवल | उद्देश्य |
| AME CET | एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग कॉमन एंट्रेंस टेस्ट | नेशनल | प्राइवेट इंस्टीट्यूट्स में एडमिशन और स्कॉलरशिप के लिए |
| AME CEE | एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग कॉमन एंट्रेंस एग्जाम | नेशनल | एविएशन कोर्सेस में एडमिशन के लिए |
| इंस्टीट्यूट-लेवल टेस्ट्स | – | इंस्टीट्यूट स्पेसिफिक | कुछ कॉलेज अपने एंट्रेंस टेस्ट खुद आयोजित करते हैं |
स्टेप 4 – सही इंस्टिट्यूट चुनें (DGCA अप्रूवल जरूर देखें)
AME कोर्स सिर्फ उन्हीं इंस्टीट्यूट्स से वैलिड होता है जो DGCA से अप्रूव्ड होते हैं और CAR 147 नॉर्म्स को फॉलो करते हैं। इसलिए इंस्टीट्यूट चुनते समय सबसे पहले यह जरूर चेक करें कि उसका नाम DGCA की ऑफिशियल वेबसाइट dgca.gov.in की अप्रूव्ड लिस्ट में है या नहीं। अगर इंस्टीट्यूट अप्रूव्ड नहीं है, तो आगे लाइसेंस मिलने में समस्या आ सकती है।
इसके बाद आप ट्रेनिंग फैसिलिटीज, उपलब्ध एयरक्राफ्ट के प्रकार और प्लेसमेंट ट्रैक रिकॉर्ड जैसी चीजों पर ध्यान दें, क्योंकि यही फैक्टर्स आपकी लर्निंग और आगे की अपॉर्च्युनिटीज पर सीधा असर डालते हैं।
भारत में कुछ जाने-माने DGCA-अप्रूव्ड AME ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट्स इस प्रकार हैं:
- हिंदुस्तान इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी, चेन्नई
- राजीव गाँधी एविएशन एकडेमी, हैदराबाद
- इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय उड़ान अकादेमी
- बॉम्बे फ्लाइंग क्लब, मुंबई
- ओरिएंट एविएशन, बैंगलोर
एडमिशन लेने से पहले हर इंस्टीट्यूट का करंट अप्रूवल स्टेटस DGCA वेबसाइट पर जरूर चेक करें, क्योंकि अप्रूवल समय-समय पर अपडेट होता रहता है।
स्टेप 5: AME कोर्स (बेसिक ट्रेनिंग) पूरा करें
इंस्टीट्यूट में एडमिशन लेने के बाद लगभग 2 साल की बेसिक ट्रेनिंग होती है। इस दौरान आपको एयरक्राफ्ट सिस्टम्स, इंजन, इलेक्ट्रिकल और एवियोनिक्स सिस्टम्स, मेंटेनेंस प्रोसीजर्स और सेफ्टी रेगुलेशंस की डिटेल्ड जानकारी दी जाती है। इसमें थ्योरी के साथ वर्कशॉप ट्रेनिंग भी शामिल होती है, ताकि कॉन्सेप्ट्स प्रैक्टिकली समझ में आएं और आपकी टेक्निकल फाउंडेशन मजबूत बन सके।
स्टेप 6: प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OJT) पूरी करें
बेसिक ट्रेनिंग के बाद आपको प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस लेना होता है, जो किसी एयरलाइन, एमआरओ (मेंटेनेंस रिपेयर ऑर्गेनाइजेशन) या DGCA-ऑथराइज्ड फैसिलिटी में होता है। इस दौरान आप रियल एयरक्राफ्ट पर काम करते हैं और इंस्पेक्शन, रिपेयर तथा मेंटेनेंस जैसी स्किल्स सीखते हैं। यही फेज आपको इंडस्ट्री-रेडी बनाता है। कुछ ऑर्गेनाइजेशन्स इस दौरान स्टाइपेंड भी देती हैं, लेकिन यह हर जगह फिक्स नहीं होता।
स्टेप 7: DGCA के मॉड्यूल एग्जाम्स क्लियर करें
ट्रेनिंग के दौरान या उसके बाद आपको DGCA के मॉड्यूल एग्जाम देने होते हैं, जिन्हें क्लियर करना AME बनने के लिए जरूरी है। B1 स्ट्रीम में मैकेनिकल और एयरक्राफ्ट स्ट्रक्चर से जुड़े मॉड्यूल्स होते हैं, जबकि B2 स्ट्रीम में एवियोनिक्स और इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स से जुड़े सब्जेक्ट्स शामिल होते हैं। ये एग्जाम आपकी टेक्निकल समझ को टेस्ट करते हैं और लाइसेंस प्रोसेस का अहम हिस्सा होते हैं।
स्टेप 8: DGCA AME License के लिए apply करें
जब आपके मॉड्यूल्स क्लियर हो जाते हैं और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग भी पूरी हो जाती है, तब आप DGCA में AME लाइसेंस के लिए अप्लाई करते हैं। लाइसेंस मिलने के बाद ही आप ऑफिशियली एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर बनते हैं और एयरक्राफ्ट को उड़ान के लिए सुरक्षित सर्टिफाई करने का अधिकार प्राप्त करते हैं।
स्टेप 9: जॉब के लिए अप्लाई करें और करियर शुरू करें
लाइसेंस मिलने के बाद आप एयरलाइन्स, एमआरओ कंपनियों या एविएशन ऑर्गेनाइजेशन्स में जॉब के लिए अप्लाई कर सकते हैं। शुरुआत में आपको ट्रेनी या जूनियर रोल्स मिलते हैं, लेकिन एक्सपीरियंस बढ़ने के साथ आपकी पोजिशन और सैलरी दोनों में अच्छा ग्रोथ होता है। समय के साथ आप सीनियर AME या स्पेशलाइज्ड रोल्स तक भी पहुंच सकते हैं।
रोजगार क्षेत्र और प्रमुख रिक्रूटर्स
AME लाइसेंस मिलने के बाद एविएशन इंडस्ट्री में आपके लिए कई अलग-अलग सेक्टर खुल जाते हैं, जहाँ आपका काम सीधे एयरक्राफ्ट की सेफ्टी और मेंटेनेंस से जुड़ा होता है। नीचे अलग-अलग रोजगार क्षेत्र और प्रमुख रिक्रूटर्स के बारे में बताया गया है:
रोजगार क्षेत्र
- एयरलाइन्स – अलग-अलग एयरक्राफ्ट टाइप्स पर काम करने का मौका मिलता है, जिससे हैंड्स-ऑन एक्सपीरियंस तेजी से बढ़ता है।
- एमआरओ ऑर्गेनाइजेशन्स (मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल) – एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस और रिपेयर में कोर टेक्निकल रोल्स मिलते हैं।
- डिफेंस एविएशन – सरकारी नौकरी, जॉब स्टेबिलिटी और अच्छे बेनिफिट्स मिलते हैं।
- इंटरनेशनल एविएशन सेक्टर – विदेशों में बेहतर सैलरी और एक्सपोजर के मौके मिलते हैं।
- फ्लाइंग क्लब्स और चार्टर सर्विसेज – छोटे सेटअप्स में प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस मजबूत करने का अच्छा मौका मिलता है।
प्रमुख रिक्रूटर्स
- एयरलाइन्स – Air India, IndiGo, SpiceJet, Akasa Air
- एमआरओ कंपनियां – Air Works India, HAMCO, Cochin International Aviation Services
- डिफेंस – Indian Air Force, Indian Army Aviation, Indian Navy
- इंटरनेशनल कंपनियां – Emirates, Qatar Airways, Lufthansa Technik, Singapore Airlines
भारत में अनुभव के आधार पर AME की सैलरी
एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर (AME) की सैलरी अनुभव के साथ धीरे-धीरे बढ़ती है। शुरुआत में सैलरी कम हो सकती है, लेकिन जैसे-जैसे आपका एक्सपीरियंस, एयरक्राफ्ट टाइप रेटिंग और जिम्मेदारी बढ़ती है, उसी के अनुसार सैलरी में भी अच्छा ग्रोथ देखने को मिलता है।
सैलरी एयरक्राफ्ट टाइप, कंपनी (एयरलाइन/एमआरओ), लोकेशन और आपके DGCA लाइसेंस कैटेगरी (B1/B2) पर भी निर्भर करती है, इसलिए इसमें बदलाव हो सकता है।
AmbitionBox पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार नीचे एक्सपीरियंस के आधार पर औसत सैलरी का अंदाजा दिया गया है:
| अनुभव | औसत वार्षिक सैलरी |
| 1 – 3 वर्ष | INR 7.1 लाख प्रति वर्ष |
| 3 – 6 वर्ष | INR 9.2 लाख प्रति वर्ष |
| 6 – 9 वर्ष | INR 11.9 लाख प्रति वर्ष |
| 9 – 12 वर्ष | INR 14.1 लाख प्रति वर्ष |
| 12+ वर्ष | INR 17.1 लाख प्रति वर्ष |
AME और एयरोनॉटिकल इंजीनियर में अंतर
AME और एयरोनॉटिकल इंजीनियर में अंतर यह अक्सर स्टूडेंट्स को कंफ्यूज करता है। दोनों एविएशन फील्ड से जुड़े हैं, लेकिन काम, ट्रेनिंग और करियर डायरेक्शन तीनों अलग हैं। नीचे दी गई तालिका से इसे समझा जा सकता है:
| एस्पेक्ट | AME (एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर) | एयरोनॉटिकल / एयरोस्पेस इंजीनियर |
| काम | एयरक्राफ्ट की मेंटेनेंस, रिपेयर और ऐरवॉर्थी सर्टिफिकेशन | एयरक्राफ्ट और स्पेसक्राफ्ट की डिज़ाइन, टेस्टिंग और डेवलपमेंट |
| योग्यता | DGCA अप्रूव्ड लाइसेंस | AICTE अप्रूव्ड B.Tech/B.E. डिग्री |
| कोर्स की अवधि | 4 साल (2 कैंपस + 2 प्रैक्टिकल ट्रेनिंग) | 4 साल (B.Tech) + ऑप्शनल M.Tech/M.S. |
| रेगुलेटिंग बॉडी | DGCA (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ सिविल एविएशन) | AICTE |
| एलिजिबिलिटी | 12वीं PCM में 50% | 12वीं PCM में 60%+ (IIT के लिए 75%) |
| प्रवेश परीक्षा | AME CET, AME CEE | JEE Main, JEE Advanced, State CETs |
| रोजगार क्षेत्र | एयरलाइन्स, MRO ऑर्गनाइज़ेशन, डिफेन्स एविएशन, फ्लाइंग क्लब्स | एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग, डिफेन्स R&D, स्पेस रिसर्च, सिविल एविएशन |
| रिक्रूटर्स | Air India, IndiGo, SpiceJet, Akasa Air, Air Works India, HAMCO, IAF, Boeing MRO, Airbus MRO | HAL, ISRO, DRDO, Boeing India, Airbus India, Tata Advanced Systems, BEL |
| किसके लिए सही | जो हैंड्स-ऑन टेक्निकल काम चाहते हैं | जो डिज़ाइन, रिसर्च या मैन्युफैक्चरिंग में जाना चाहते हैं |
FAQs
हाँ, PCB वाले छात्र भी AME CET के लिए अप्लाई कर सकते हैं। लेकिन DGCA के B1 स्ट्रीम के टेक्निकल मॉड्यूल्स में फिजिक्स कैलकुलेशन्स की जरूरत होती है, इसलिए जिन छात्रों के पास मैथ्स होता है, वे आमतौर पर ज्यादा कम्फर्टेबल रहते हैं।
DGCA का AME लाइसेंस मुख्य रूप से भारत में वैलिड होता है। हालांकि UAE, Qatar और Singapore जैसे कुछ देशों में लाइसेंस कन्वर्जन प्रोसेस के बाद काम करने के अवसर मिल सकते हैं। हर देश की एविएशन अथॉरिटी के अपने नियम होते हैं, इसलिए किसी भी देश के लिए उसकी ऑफिशियल वेबसाइट से जानकारी लेना बेहतर रहता है।
AME और पायलट दोनों अलग-अलग प्रोफेशन हैं। AME का काम एयरक्राफ्ट की मेंटेनेंस और सेफ्टी सर्टिफिकेशन होता है, जबकि पायलट एयरक्राफ्ट उड़ाता है। पायलट बनने के लिए आपको अलग से कमर्शियल पायलट लाइसेंस (CPL) की ट्रेनिंग और DGCA एग्जाम्स देने होते हैं।
DGCA की ऑफिशियल वेबसाइट dgca.gov.in पर अप्रूव्ड AME ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट्स की अपडेटेड लिस्ट उपलब्ध होती है। एडमिशन लेने से पहले वहीं से वेरिफाई करना जरूरी है।
AME कोर्स की कुल अवधि आमतौर पर लगभग 4 साल होती है, जिसमें करीब 2 साल की बेसिक ट्रेनिंग (इंस्टीट्यूट में) और उसके बाद प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OJT) शामिल होती है। इसके साथ DGCA के मॉड्यूल एग्जाम्स क्लियर करना भी जरूरी होता है।
इसके लिए 12वीं में PCM के साथ कम से कम 50% अंक लाने के बाद DGCA-अप्रूव्ड इंस्टीट्यूट से AME कोर्स करना होता है। इसके साथ प्रैक्टिकल ट्रेनिंग और DGCA मॉड्यूल एग्जाम्स क्लियर करने होते हैं। सभी स्टेप्स पूरे होने के बाद DGCA लाइसेंस मिलने पर ही आप AME बनते हैं।
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उम्मीद है, इस ब्लॉग में एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर बनने का रास्ता आपको पूरा समझ आया होगा। अगर आपकी इस ब्लॉग से संबंधित कोई क्वेरी हो तो नीचे कमेंट सेक्शन में हमें बता सकते हैं। अन्य करियर गाइड के लिए Leverage Edu के साथ बने रहें।

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