रेडॉक्स अभिक्रिया वह रासायनिक अभिक्रिया होती है जिसमें ऑक्सीकरण और अपचयन दोनों प्रक्रियाएँ एक साथ होती हैं। किसी भी अभिक्रिया में यदि एक पदार्थ इलेक्ट्रॉन खोता है, तो उसे ऑक्सीकरण कहा जाता है, और जो पदार्थ वही इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है, वह अपचयन करता है। चूँकि इलेक्ट्रॉन अकेले स्थानांतरित नहीं हो सकते, इसलिए ऑक्सीकरण और अपचयन हमेशा एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। इसी संयुक्त प्रक्रिया को रेडॉक्स अभिक्रिया कहा जाता है।
रेडॉक्स अभिक्रिया को केवल ऑक्सीजन के जुड़ने या हटने से ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण से भी समझा जाता है। जब किसी पदार्थ में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है या हाइड्रोजन हटता है, तो वह ऑक्सीकरण होता है। इसके विपरीत, जब किसी पदार्थ से ऑक्सीजन हटती है या हाइड्रोजन जुड़ता है, तो उसे अपचयन कहते हैं।
उदाहरण के रूप में, जब जस्ता (Zn) तांबा सल्फेट (CuSO₄) के विलयन में डाला जाता है, तो जस्ता इलेक्ट्रॉन छोड़कर जस्ता आयन बन जाता है। इसे जस्ता का ऑक्सीकरण कहते हैं। वहीं, तांबा आयन उन इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण कर धातु तांबे में बदल जाता है, जिसे तांबे का अपचयन कहा जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में दोनों क्रियाएँ एक साथ होने के कारण यह एक रेडॉक्स अभिक्रिया है।
Zn + CuSO₄ → ZnSO₄ + Cu
इस अभिक्रिया में
- जस्ता (Zn) इलेक्ट्रॉन खोकर Zn²⁺ बनता है, इसलिए जस्ता का ऑक्सीकरण होता है।
- तांबा आयन (Cu²⁺) इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर Cu बनता है, इसलिए तांबे का अपचयन होता है।
इस प्रकार, क्योंकि ऑक्सीकरण और अपचयन दोनों एक साथ हो रहे हैं, यह एक रेडॉक्स अभिक्रिया है।
रेडॉक्स अभिक्रियाएँ हमारे दैनिक जीवन और विज्ञान दोनों में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। लोहे में जंग लगना, कोशिकीय श्वसन, प्रकाश संश्लेषण, बैटरियों का कार्य करना और धातुओं का निष्कर्षण ये सभी रेडॉक्स अभिक्रियाओं के उदाहरण हैं। इस प्रकार, रेडॉक्स अभिक्रियाएँ ऊर्जा के स्थानांतरण और पदार्थों के परिवर्तन में मुख्य भूमिका निभाती हैं।
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