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‘यह दंतुरित मुसकान’ कविता के आधार पर आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रख्यात कवि एवं लेखक नागार्जुन ने बच्चे की मुसकान के सौंदर्य को निम्न बिंबों के माध्यम से व्यक्त किया है:-
- एक बच्चे की मुसकान इतनी सुंदर होती है कि मृतक में भी प्राण फूंक देती है।
- नागार्जुन ने बच्चे की मुसकान की तुलना कमल के पुष्प से की है जो कि तालाब में न खिलकर कवि की झोपड़ी में खिल रहे हैं।
- कवि के अनुसार बच्चे का स्पर्श पाकर कठोर हृदय वाला व्यक्ति भी पिघल जाता है।
- बच्चे की प्यारी मुसकुराहट से मानो बबूल और बांस से शेफालिका के फूल झरने लगे हों। ऐसा कवि को प्रतीत हो रहा है।
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