छाती पर साँप लोटना मुहावरे का अर्थ और इसका वाक्यों में प्रयोग

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छाती पर साँप लोटना मुहावरे का अर्थ
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छाती पर साँप लोटना मुहावरे का अर्थ होता है – ईर्ष्या या जलन होना। 

[UPSC सिविल सेवा (मुख्य) परीक्षा, 2022 हिंदी अनिवार्य पेपर]

जब कोई व्यक्ति किसी दूसरे की उन्नति, सुख या सफलता को देखकर मन ही मन बहुत ज्यादा जलने लगता है, तब इस मुहावरे का प्रयोग किया जाता है।

यह मुहावरा उस बेचैनी और मानसिक कष्ट को दर्शाता है जो जलन के कारण होता है। जैसे छाती पर साँप का होना इंसान को घबराहट और भारीपन महसूस कराता है, वैसे ही ईर्ष्या इंसान के मन को अशांत कर देती है।

छाती पर साँप लोटना मुहावरे का वाक्यों में प्रयोग

  1. जब राम को ऑफिस में प्रमोशन मिला, तो उसके दुश्मनों की छाती पर साँप लोटने लगे।
  2. पड़ोसी की नई कार देखकर सोहन की छाती पर साँप लोटने लगा।
  3. जब शहर के बीचों-बीच रमेश की दुकान खूब चलने लगी, तो पुराने दुकानदारों की छाती पर साँप लोटने लगे।
  4. भारतीय टीम को विश्व कप जीतते देख विरोधी टीम के प्रशंसकों की छाती पर साँप लोटने लगा।
  5. अपनी छोटी बहू को ससुराल में इतना मान-सम्मान मिलता देख, जेठानी की छाती पर साँप लोटने लगा।
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