कवि इस पंक्ति के माध्यम से प्रकृति की सूक्ष्म सुंदरता और उसके भीतर छिपी ऊर्जा को सामने लाता है। “रूपांतर है सूरज की किरणों का” का अर्थ है कि जो शक्ति और चमक हमें सूर्य की किरणों में दिखाई देती है, वही अलग-अलग रूपों में प्रकृति के अन्य तत्वों में भी मौजूद है। वहीं “सिमटा हुआ संकोच है हवा की थिरकन का” से कवि यह बताना चाहता है कि हवा की हल्की-सी हलचल में भी एक दबा हुआ, शांत और संयमित भाव छिपा होता है।
कुल मिलाकर कवि यह कहना चाहता है कि वातावरण के ये दोनों अवयव ही फसल के योगदान में अपनी-अपनी भूमिका अदा करते हैं। फसलों की हरियाली सूरज की किरणों के प्रभाव के कारण आती है। इसके अलावा कवि का कहना है कि फसलों को बढ़ाने में हवा की थिरकन का भी महत्वपूर्ण योगदान रहता है।

One app for all your study abroad needs

60,000+ students trusted us with their dreams. Take the first step today!