भाव स्पष्ट कीजिए –

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Bhaav spasht kijiye Ncert solutions for class 10 kshitij 2 hindi chapter 3
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(क) मिला कहाँ वह सुख जिसका मैं स्वप्न देखकर जाग गया।
आलिंगन में आते-आते मुसक्या कर जो भाग गया।

उत्तर (क) यह पंक्तियां जयशंकर प्रसाद की कविता ‘आत्मकथ्य’ से ली गई हैं, उक्त पंक्तियों में कवि जीवन में मिलने वाले सुख की क्षणभंगुरता को व्यक्त करता है। कवि कहता है कि जिस सुख का उसने स्वप्न देखा था, वह वास्तविक जीवन में उसे पूर्ण रूप से कभी प्राप्त नहीं हुआ। जब वह सुख पास आने ही वाला था, तभी वह मुस्कराकर उससे दूर चला गया। कवि के अनुसार जीवन के सुख स्थायी नहीं होते, वे क्षणिक होते हैं और मनुष्य उन्हें पूरी तरह पकड़ नहीं पाता। यह पंक्तियाँ कवि के जीवन में व्याप्त अधूरेपन और असंतोष की भावना को प्रकट करती हैं।

(ख) जिसके अरुण कपोलों की मतवाली सुंदर छाया में।
अनुरागिनी उषा लेती थी निज सुहाग मधुमाया में।

उत्तर (ख) यह पंक्तियां जयशंकर प्रसाद की कविता ‘आत्मकथ्य’ से हैं, उक्त पंक्तियों से कवि का यह भाव है कि कवि की प्रेमिका अत्यंत सुंदर थी। कवि अपनी प्रेमिका के सौंदर्य का वर्णन करते हुए कहता है कि उसके कपोल इतने लाल, सुंदर और मनोहर थे मानो भोर की बेला अपना सौंदर्य बढ़ाने के लिए उसकी प्रेमिका के कपोलों से ही लालिमा लिया करती थी अर्थात कवि की प्रेमिका उषा से भी अधिक सुंदर और मोहक थी, जो पूरे वातावरण को स्वर्णिम और प्रेम से भर देती है।

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