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उत्तर: ‘आत्मकथ्य’ जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित एक ऐसी कविता है जो न केवल अपनी भावनाओं के लिए, बल्कि अपनी बेहतरीन भाषा शैली के लिए भी जानी जाती है। इस कविता की काव्यभाषा की विशेषताओं को निम्नलिखित उदाहरण सहित समझा जा सकता है –
- संस्कृतनिष्ठ खड़ी बोली (तत्सम शब्द): प्रसाद जी ने इस कविता में शुद्ध और साहित्यिक खड़ी बोली का प्रयोग किया है। इसमें तत्सम शब्दों (संस्कृत के शब्द) का अधिकता से उपयोग हुआ है, जो कविता को गंभीर और सुंदर बनाता है। उदाहरण: “मधुप गुन-गुनाकर कह जाता कौन कहानी यह अपनी।”
- प्रतीकात्मकता और बिम्ब योजना: कवि ने अपनी बात सीधे-सीधे कहने के बजाय प्रतीकों का सहारा लिया है। जैसे ‘मुरझाकर गिरती पत्तियाँ’ जीवन की नश्वरता और दुखों का प्रतीक हैं। उदाहरण: “पत्तियाँ मुरझाकर गिर रही हैं, देखो कितनी आज घनी।”
- छायावादी शैली और कोमलता: छायावाद की सबसे बड़ी पहचान भावनाओं को प्रकृति के साथ जोड़ना है। इस कविता में भी भाषा बहुत ही कोमल और संगीतमय है, जो मन को छू लेती है।
- अलंकारों का सुंदर प्रयोग: कविता की भाषा को सजाने के लिए इसमें रूपक, अनुप्रास और मानवीकरण अलंकारों का बहुत ही सहज प्रयोग किया गया है। उदाहरण: “अरुणाभ कपोलों की मतवाली सुंदर छाया में” (यहाँ उपमा और रूपक का सुंदर मेल है)।
- गंभीरता और संक्षिप्तता: कवि ने बहुत कम शब्दों में जीवन के गहरे दुखों और दर्शन को समेट लिया है। इस कविता की काव्यभाषा ऐसी है जो आपको गहनता से सोचने पर मजबूर कर देती है।
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