12वीं के बाद वेटरनरी डॉक्टर कैसे बनें? योग्यता, कोर्स, फीस और सैलरी

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जैसे इंसानों को बीमार होने पर डॉक्टर की जरूरत पड़ती है, वैसे ही जानवरों और पक्षियों को भी इलाज के लिए विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है। ऐसे पेशेवरों को पशु चिकित्सक या वेटरनरी डॉक्टर कहा जाता है। वे पालतू जानवरों, मवेशियों और जंगली जीवों का इलाज करते हैं और उनकी सेहत बनाए रखने में योगदान देते हैं।

वेटरनरी डॉक्टर बीमारियों से बचाव के लिए वैक्सीनेशन करते हैं और पालतू जानवरों के सही पोषण, देखभाल और जीवनशैली के बारे में मार्गदर्शन देते हैं। भारत में वेटरनरी डॉक्टर बनने के बाद आप सरकारी सेवा, प्राइवेट क्लिनिक, रिसर्च, डेयरी-पोल्ट्री इंडस्ट्री और पशु कल्याण संगठनों में करियर बना सकते हैं। जो लोग जानवरों से प्रेम करते हैं और उनकी भलाई में योगदान देना चाहते हैं, उनके लिए यह करियर एक उत्कृष्ट विकल्प साबित होता है।

यदि आप यह समझना चाहते हैं कि वेटरनरी डॉक्टर कैसे बनें, तो इस लेख में आपको 12वीं के बाद जरूरी योग्यता, एडमिशन प्रक्रिया, फीस और करियर से जुड़े सभी अहम पहलुओं की स्पष्ट और उपयोगी जानकारी मिलेगी।

This Blog Includes:
  1. वेटरनरी डॉक्टर कौन होता है?
  2. वेटरनरी डॉक्टर के प्रमुख स्पेशलाइजेशन
  3. क्या 12वीं के बाद वेटरनरी डॉक्टर बन सकते हैं?
  4. वेटरनरी डॉक्टर बनने के लिए योग्यता
  5. वेटरनरी डॉक्टर बनने के लिए कौन सा कोर्स करें?
    1. अंडरग्रेजुएट (UG) कोर्स
    2. पोस्टग्रेजुएट (PG) कोर्सेज – स्पेशलाइजेशन के लिए
    3. वेटरनरी साइंस में PhD कोर्सेज
    4. वेटरनरी साइंस में डिप्लोमा कोर्सेज
  6. वेटरनरी डॉक्टर कैसे बनें (स्टेप बाय स्टेप गाइड)
  7. वेटरनरी डॉक्टर बनने के लिए आवश्यक स्किल्स
  8. वेटरनरी कोर्स की फीस
  9. भारत के टॉप वेटरनरी कॉलेज
  10. वेटरनरी डॉक्टर की सैलरी
  11. वेटरनरी डॉक्टर के रूप में कहाँ काम कर सकते हैं?
  12. वेटरनरी डॉक्टर के लिए सरकारी नौकरी
  13. FAQs 

वेटरनरी डॉक्टर कौन होता है?

एक वेटरनरी डॉक्टर जानवरों की सेहत बनाए रखने और बीमारियों का इलाज करने के लिए प्रशिक्षित होता है। वे जानवरों में छोटी-बड़ी बीमारियों का पता लगाते हैं, वैक्सीनेशन करते हैं, दवाइयाँ देते हैं, घाव और फ्रैक्चर ठीक करते हैं और जरूरत पड़ने पर छोटे-बड़े ऑपरेशन भी करते हैं। वे एक्स-रे, ECG (कुछ विशेष मामलों में), अल्ट्रासाउंड जैसे डायग्नोस्टिक टेस्ट करते हैं और पालतू जानवरों के मालिकों को पोषण, व्यवहार और ब्रीडिंग के बारे में सलाह देते हैं। वे लैब और टेक्निकल इंस्ट्रूमेंट्स के उपयोग में भी दक्ष होते हैं।

वेटरनरी डॉक्टर रोजाना रूटीन सर्जरी, मेडिकल रिकॉर्ड, हॉस्पिटल भर्ती और अपॉइंटमेंट के अलावा प्रशासनिक काम भी संभालते हैं। सभी नियमों का पालन सुनिश्चित करना और स्टाफ का प्रबंधन करना भी उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल होता है।

वेटरनरी डॉक्टर के प्रमुख स्पेशलाइजेशन

वेटरनरी डॉक्टर बनने का सही रास्ता और करियर स्कोप तभी स्पष्ट होता है, जब उम्मीदवार इस प्रोफेशन में मौजूद विभिन्न स्पेशलाइजेशन क्षेत्रों को समझे। वेटरनरी डॉक्टर अलग-अलग जानवरों और कार्यक्षेत्रों के अनुसार विशेषज्ञता विकसित करते हैं, जिनके आधार पर उनके काम और जिम्मेदारियाँ तय होती हैं। प्रमुख स्पेशलाइजेशन इस प्रकार हैं:

  • फार्म एनिमल वेटरनरी डॉक्टर: ये डॉक्टर फार्म में पाले जाने वाले जानवरों जैसे गाय, भैंस, भेड़, बकरी, सूअर और पोल्ट्री पक्षियों का इलाज करते हैं। वे पशुओं के स्वास्थ्य प्रबंधन, टीकाकरण, पोषण और उत्पादन बढ़ाने से जुड़े कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • पालतू जानवरों के वेटरनरी डॉक्टर (Companion Animal Vet): यह डॉक्टर कुत्ते, बिल्ली, खरगोश, पक्षियों और अन्य पालतू जानवरों का इलाज करते हैं। वे प्राइवेट क्लिनिक या वेटरनरी अस्पतालों में कार्य करते हैं और नियमित जांच, सर्जरी, वैक्सीनेशन तथा स्वास्थ्य परामर्श प्रदान करते हैं।
  • घोड़ों के वेटरनरी डॉक्टर (Equine Veterinarian): ये विशेषज्ञ विशेष रूप से घोड़ों के इलाज और देखभाल में प्रशिक्षित होते हैं। घोड़ों के लिए अलग प्रकार की चिकित्सा, पोषण और फिटनेस की आवश्यकता होती है, जिसके कारण यह एक विशिष्ट स्पेशलाइजेशन माना जाता है।
  • सरकारी वेटरनरी ऑफिसर (Public Health & Administration): सरकारी वेटरनरी डॉक्टर पशुपालन विभाग, नगर निगम या सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में कार्य करते हैं। इनका काम पशु रोग नियंत्रण, टीकाकरण अभियान, खाद्य सुरक्षा और पशु जनित रोगों की रोकथाम से जुड़ा होता है।
  • खाद्य सुरक्षा और निरीक्षण वेटरनरी डॉक्टर: ये वेटरनरी डॉक्टर मांस, दूध और अन्य पशु उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। वे स्लॉटरहाउस, डेयरी प्लांट और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स में निरीक्षण और परीक्षण का कार्य करते हैं।
  • वाइल्डलाइफ वेटरनरी डॉक्टर: यह स्पेशलाइजेशन जंगली जानवरों के इलाज और संरक्षण से जुड़ा होता है। ऐसे डॉक्टर चिड़ियाघरों, नेशनल पार्क और फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के साथ मिलकर कार्य करते हैं।
  • रिसर्च और लैब आधारित वेटरनरी डॉक्टर: ये डॉक्टर रिसर्च संस्थानों और लैब्स में काम करते हैं, जहाँ वे पशु रोगों, नई दवाओं, वैक्सीन और उपचार तकनीकों पर शोध करते हैं।
  • वेटरनरी पैथोलॉजिस्ट और फार्माकोलॉजिस्ट: वेटरनरी पैथोलॉजिस्ट पशु रोगों की जांच और कारणों का अध्ययन करते हैं, जबकि वेटरनरी फार्माकोलॉजिस्ट दवाओं के विकास, परीक्षण और सही उपयोग पर काम करते हैं।
  • डेयरी और पोल्ट्री स्पेशलिस्ट: ये वेटरनरी डॉक्टर डेयरी फार्म और पोल्ट्री इंडस्ट्री में पशुओं के स्वास्थ्य, उत्पादन और प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञ होते हैं।
  • अकादमिक वेटरनरी डॉक्टर: कुछ वेटरनरी डॉक्टर कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में अध्यापन और प्रशिक्षण का कार्य करते हैं। वे छात्रों को पढ़ाने के साथ-साथ रिसर्च और अकादमिक विकास में भी योगदान देते हैं।

क्या 12वीं के बाद वेटरनरी डॉक्टर बन सकते हैं?

हाँ, 12वीं कक्षा पूरी करने के बाद वेटरनरी डॉक्टर बनना संभव है, लेकिन इसके लिए सही शैक्षणिक योग्यता, प्रवेश परीक्षा और मान्यता प्राप्त कोर्स की जानकारी होना जरूरी है। नीचे इस पूरे प्रोसेस को आसान शब्दों में समझाया गया है।

  • 12वीं (PCB – फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी) के बाद वेटरनरी डॉक्टर बनने का रास्ता खुलता है।
  • भारत में वेटरनरी डॉक्टर बनने के लिए बैचलर ऑफ वेटरनरी साइंस एंड एनिमल हसबेंडरी (BVSc & AH) सबसे मुख्य और मान्यता प्राप्त डिग्री है।
  • इस कोर्स की कुल अवधि लगभग 5.5 वर्ष होती है, जिसमें पढ़ाई के साथ अनिवार्य इंटर्नशिप भी शामिल रहती है।
  • BVSc & AH कोर्स में एडमिशन के लिए 12वीं में PCB विषयों के साथ न्यूनतम अंक होना आवश्यक होता है।
  • अधिकांश सरकारी और मान्यता प्राप्त कॉलेजों में एडमिशन के लिए NEET-UG परीक्षा क्वालिफाई करना अनिवार्य होता है।
  • यह कोर्स छात्रों को पशु स्वास्थ्य, रोग निदान, सर्जरी और पशु पोषण जैसे विषयों में प्रोफेशनल प्रशिक्षण देता है।
  • 12वीं के बाद कुछ डिप्लोमा कोर्स उपलब्ध होते हैं, लेकिन वे वेटरनरी डॉक्टर की डिग्री नहीं माने जाते और उनसे प्रैक्टिस की अनुमति नहीं मिलती।
  • वेटरनरी प्रैक्टिस और आधिकारिक रजिस्ट्रेशन के लिए BVSc & AH डिग्री अनिवार्य होती है।
  • मानव चिकित्सक केवल इंसानों का इलाज करते हैं, जबकि वेटरनरी डॉक्टर विभिन्न प्रजातियों के जानवरों के स्वास्थ्य और इलाज के लिए प्रशिक्षित होते हैं।

वेटरनरी डॉक्टर बनने के लिए योग्यता

वेटरनरी डॉक्टर बनने के लिए कुछ शैक्षणिक और आयु-संबंधी योग्यताएँ निर्धारित होती हैं, जिनका पालन करना एडमिशन प्रक्रिया के लिए आवश्यक होता है। मुख्य योग्यताएँ नीचे दी गई हैं:

  • शैक्षणिक योग्यता: वेटरनरी डॉक्टर (BVSc & AH) बनने के लिए उम्मीदवार का 12वीं कक्षा फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी (PCB) और अंग्रेजी विषयों के साथ पास होना आवश्यक है। BVSc कोर्स में प्रवेश के लिए सामान्य वर्ग के छात्रों को 12वीं में कम से कम 50% अंक चाहिए, जबकि आरक्षित वर्गों के लिए नियमानुसार अंकों में छूट दी जाती है।
  • आयु सीमा: उम्मीदवार की आयु एडमिशन वाले वर्ष की 31 दिसंबर तक न्यूनतम 17 वर्ष होनी चाहिए। अधिकतम आयु सीमा NEET परीक्षा और संबंधित राज्य काउंसलिंग नियमों के अनुसार बदल सकती है, इसलिए अभ्यर्थियों को लेटेस्ट सूचना आधिकारिक नोटिफिकेशन से जरूर जांचनी चाहिए।
  • वेटरनरी एंट्रेंस एग्जाम: भारत में वेटरनरी डॉक्टर बनने के लिए BVSc & AH कोर्स में प्रवेश हेतु NEET-UG परीक्षा क्वालिफाई करना अनिवार्य माना जाता है।

वेटरनरी डॉक्टर बनने के लिए कौन सा कोर्स करें?

जो छात्र 12वीं के बाद वेटरनरी डॉक्टर बनना चाहते हैं, उनके लिए अंडरग्रेजुएट स्तर पर एक ही मान्यता प्राप्त डिग्री कोर्स उपलब्ध होता है, जिसे पूरा करना अनिवार्य है।

अंडरग्रेजुएट (UG) कोर्स

भारत में वेटरनरी डॉक्टर बनने के लिए बैचलर ऑफ वेटरनरी साइंस एंड एनिमल हसबेंडरी (BVSc & AH) एकमात्र मान्यता प्राप्त अंडरग्रेजुएट डिग्री है। यह कोर्स लगभग 5.5 वर्ष का होता है, जिसमें पढ़ाई के साथ अनिवार्य इंटर्नशिप भी शामिल रहती है। UG स्तर पर अलग-अलग स्पेशलाइजेशन की डिग्री नहीं होती, बल्कि BVSc & AH के दौरान छात्रों को पशु पोषण, सर्जरी, मेडिसिन, पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी और अन्य विषय पढ़ाए जाते हैं।

पोस्टग्रेजुएट (PG) कोर्सेज – स्पेशलाइजेशन के लिए

BVSc & AH पूरा करने के बाद छात्र पोस्टग्रेजुएट स्तर पर स्पेशलाइजेशन चुन सकते हैं। वेटरनरी साइंस में प्रमुख PG कोर्स इस प्रकार हैं:

एम.वी.एससी. (पशु चिकित्सा विज्ञान और पशुपालन)एम.वी.एससी. (पशु जैव रसायन)
एम.वी.एससी. (पशु पोषण)एम.वी.एससी. (पशु जैव प्रौद्योगिकी)
एम.वी.एससी. (पशु सांख्यिकी)एम.एससी. (पशु चिकित्सा सार्वजनिक स्वास्थ्य)

PG कोर्स करने के बाद छात्र क्लिनिकल प्रैक्टिस के साथ-साथ रिसर्च, इंडस्ट्री और अकादमिक क्षेत्र में भी करियर बना सकते हैं।

वेटरनरी साइंस में PhD कोर्सेज

रिसर्च और अकादमिक करियर में रुचि रखने वाले उम्मीदवार वेटरनरी साइंस में PhD भी कर सकते हैं। भारत में उपलब्ध प्रमुख PhD कोर्स इस प्रकार हैं:

पीएच.डी. (पशु पोषण)पीएच.डी. (पशुपालन विस्तार शिक्षा)
पीएच.डी. (पशु विज्ञान)पीएच.डी. (पशु चिकित्सा एनाटॉमी और हिस्टोलॉजी)
पीएच.डी. (पशु चिकित्सा)पीएच.डी. (पशु चिकित्सा सर्जरी और रेडियोलॉजी)
पीएच.डी. (पशु चिकित्सा माइक्रोबायोलॉजी)पीएच.डी. (पशु चिकित्सा पैथोलॉजी)

वेटरनरी साइंस में डिप्लोमा कोर्सेज

डिप्लोमा कोर्स वेटरनरी डॉक्टर की मान्यता नहीं देते। कानूनी रूप से प्रैक्टिस करने के लिए BVSc & AH डिग्री अनिवार्य होती है। भारत में उपलब्ध कुछ डिप्लोमा कोर्स इस प्रकार हैं:

पशुपालन डिप्लोमा कार्यक्रम (AHDP)पशु चिकित्सा और पशुधन विकास में डिप्लोमा (VLDD)
पशु चिकित्सा विज्ञान में डिप्लोमा (DVSc)पशु चिकित्सा पशुधन निरीक्षक में डिप्लोमा (VLFI)
पशुधन और पशु चिकित्सा विज्ञान में डिप्लोमा (DLVSc)पशु चिकित्सा विज्ञान और पशु स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी में डिप्लोमा

वेटरनरी डॉक्टर कैसे बनें (स्टेप बाय स्टेप गाइड)

भारत में वेटरनरी डॉक्टर बनने के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया और गाइडलाइंस होती हैं, जिनका पालन करना आवश्यक है। नीचे पूरे प्रोसेस को स्टेप-बाय-स्टेप समझाया गया है:

  • स्टेप 1: 12वीं PCB के साथ पास करें: किसी भी मान्यता प्राप्त कॉलेज में वेटरनरी कोर्स में एडमिशन पाने के लिए छात्रों को 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी में कम से कम 50% अंक लाने होते हैं। इसके अलावा छात्र 10वीं पास करने के बाद डिप्लोमा कोर्स के लिए भी अप्लाई कर सकते हैं।
  • स्टेप 2: NEET UG परीक्षा पास करें: नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) एक राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा है, जिसके माध्यम से मेडिकल और वेटरनरी UG कोर्स में एडमिशन मिलता है। NEET क्वालिफाई करने के बाद छात्र BVSc & AH कोर्स के लिए पात्र होते हैं।
  • स्टेप 3: VCI तथा स्टेट काउंसलिंग के माध्यम से सीट अलॉटमेंट: वेटरनरी डॉक्टर बनने के लिए ‘भारतीय पशु चिकित्सा परिषद’ (VCI) द्वारा NEET UG रैंक के आधार पर काउंसलिंग की जाती है। उम्मीदवारों को VCI की आधिकारिक वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन कर विकल्प भरने होते हैं। राज्य स्तर पर भी अलग-अलग काउंसलिंग बोर्ड सीट अलॉटमेंट आयोजित करते हैं।
    काउंसलिंग के लिए आवश्यक दस्तावेज:
    • NEET UG स्कोरकार्ड
    • 10वीं और 12वीं की मार्कशीट व सर्टिफिकेट
    • फोटो पहचान पत्र (आधार कार्ड / पैन कार्ड)
    • पासपोर्ट साइज फोटो
    • कैटेगरी सर्टिफिकेट (यदि लागू हो)
    • राज्य डोमिसाइल सर्टिफिकेट (राज्य काउंसलिंग के लिए)
  • स्टेप 4: BVSc & AH कोर्स पूरा करें: एडमिशन के बाद छात्रों को 5.5 वर्षों का BVSc & AH कोर्स पूरा करना होता है, जिसमें एक वर्ष की अनिवार्य इंटर्नशिप शामिल होती है।
  • स्टेप 5: इंटर्नशिप और क्लिनिकल ट्रेनिंग: कोर्स के अंतिम चरण में 12 महीने की रोटेटिंग इंटर्नशिप होती है, जिसमें अस्पताल, सर्जरी, मेडिसिन, रेडियोलॉजी और इमरजेंसी सर्विस जैसे विभागों में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी जाती है।
  • स्टेप 6: राज्य पशु चिकित्सा परिषद में रजिस्ट्रेशन: डिग्री पूरी करने के बाद संबंधित राज्य पशु चिकित्सा परिषद या VCI में रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होता है। रजिस्ट्रेशन के बाद ही वेटरनरी डॉक्टर के रूप में कानूनी रूप से प्रैक्टिस की जा सकती है।
  • स्टेप 7: नौकरी या प्राइवेट प्रैक्टिस शुरू करें: रजिस्ट्रेशन के बाद वेटरनरी डॉक्टर सरकारी विभागों में नौकरी, प्राइवेट क्लिनिक, या एनिमल हेल्थ इंडस्ट्री में अपना करियर शुरू कर सकते हैं।

वेटरनरी डॉक्टर बनने के लिए आवश्यक स्किल्स

वेटरनरी डॉक्टर बनने के लिए आपके पास निम्नलिखित स्किल्स होना जरूरी है:

  • क्लिनिकल और वैज्ञानिक ज्ञान: वेटरनरी डॉक्टर को सैद्धांतिक और व्यावहारिक मेडिकल नॉलेज होनी चाहिए। बायोलॉजी, एनाटॉमी, फिजियोलॉजी और फार्माकोलॉजी में अच्छी समझ जरूरी है ताकि जानवरों की बीमारियों का सही निदान और इलाज किया जा सके।
  • डायग्नोस्टिक और टेक्निकल स्किल: उम्मीदवार को एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, लैब टेस्ट और अन्य डायग्नोस्टिक टूल्स का प्रयोग करना आना चाहिए। इसके साथ ही जानवरों की व्यवहारिक और शारीरिक प्रतिक्रियाओं को समझने की क्षमता आवश्यक है।
  • सहानुभूतिपूर्ण और कम्युनिकेशन स्किल: जानवरों और उनके मालिकों के साथ संवेदनशील और भरोसेमंद व्यवहार होना चाहिए। अच्छे सॉफ्ट स्किल्स से डॉक्टर विश्वास पैदा कर सकते हैं और जानवरों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रख सकते हैं।
  • टीम वर्क और नेतृत्व क्षमता: वेटरनरी डॉक्टर अकेले काम नहीं करते। उन्हें सर्जन, तकनीशियन और सपोर्ट स्टाफ के साथ मिलकर काम करने और टीम में भूमिका निभाने की क्षमता होनी चाहिए।
  • सीखने की प्रवृत्ति और नवीन तकनीक अपनाना: एक सफल डॉक्टर को नई दवाइयों, तकनीकों और आधुनिक मेडिकल प्रक्रियाओं को सीखने और अपनाने की उत्सुकता होनी चाहिए। यह स्किल रोगों के प्रभावी उपचार और जानवरों की भलाई में मदद करता है।

वेटरनरी कोर्स की फीस

भारत में BVSc & AH (बैचलर ऑफ वेटरनरी साइंस एंड एनिमल हसबेंडरी) कोर्स की फीस कॉलेज, राज्य, कैटेगरी और डोमिसाइल के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। नीचे दिए गए आंकड़े अनुमानित औसत फीस को दर्शाते हैं, जो कहीं वार्षिक और कहीं पूरे कोर्स के रूप में लागू होती है। इसलिए एडमिशन से पहले संबंधित कॉलेज की आधिकारिक वेबसाइट से लेटेस्ट फीस स्ट्रक्चर जरूर जांचना चाहिए।

नोट: सरकारी कॉलेजों में फीस सामान्यतः कम होती है, जबकि प्राइवेट या नॉन-डोमिसाइल सीट्स पर फीस अधिक हो सकती है

वेटरनरी साइंस कॉलेजअनुमानित फीस
गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GBPUAT), पंतनगरलगभग INR 4.75 लाख (पूरा कोर्स)
भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI), बरेलीलगभग INR 67,500 (वार्षिक)
आनंद कृषि विश्वविद्यालय (AAU), गुजरातलगभग INR 1.06 लाख (वार्षिक)
श्री वेंकटेश्वर पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय (SVVU), तिरुपतिलगभग INR 1.82 लाख (वार्षिक)
ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी (OUAT), भुवनेश्वरलगभग INR 3.67 लाख से INR 9.09 लाख (पूरा कोर्स / कैटेगरी के अनुसार)
कर्नाटक वेटरनरी, एनिमल एंड फिशरीज साइंसेज यूनिवर्सिटी (KVAFSU), बिदरलगभग INR 1.89 लाख से INR 3.14 लाख (वार्षिक)
महाराष्ट्र पशु एवं मत्स्य विज्ञान विश्वविद्यालय (MAFSU), नागपुरलगभग INR 2.96 लाख (वार्षिक)
वेस्ट बंगाल यूनिवर्सिटी ऑफ एनिमल एंड फिशरी साइंसेज (WBUAFS), कोलकातालगभग INR 18,000 से INR 53,600 (वार्षिक)

भारत के टॉप वेटरनरी कॉलेज

भारत में वेटरनरी डॉक्टर बनने के लिए मान्यता प्राप्त प्रमुख संस्थानों की सूची इस प्रकार है:-

  • तमिलनाडु पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (TANUVAS), चेन्नई
  • गुरु अंगद देव पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (GADVASU), लुधियाना
  • राजस्थान पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (RAJUVAS), बीकानेर
  • श्री वेंकटेश्वर पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय (SVVU), तिरुपति
  • नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय (NDVSU), जबलपुर
  • भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI), इज़्ज़तनगर, बरेली
  • कर्नाटक पशु चिकित्सा, पशु और मत्स्य विज्ञान विश्वविद्यालय (KVAFSU), बीदर

वेटरनरी डॉक्टर की सैलरी

भारत में वेटरनरी डॉक्टर की सैलरी अनुभव, कार्यक्षेत्र, जॉब प्रोफाइल और कार्यस्थल (सरकारी या प्राइवेट) के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। इस प्रोफेशन में शुरुआती स्तर पर सैलरी सामान्य होती है, लेकिन अनुभव और विशेषज्ञता बढ़ने के साथ आय में अच्छी वृद्धि देखने को मिलती है।

AmbitionBox के अनुसार, भारत में वेटरनरी डॉक्टर की औसत सालाना सैलरी लगभग INR 5.1 लाख से INR 6.5 लाख के बीच पाई गई है। हालांकि, यह आंकड़ा एक औसत अनुमान है और वास्तविक सैलरी करियर स्टेज के अनुसार अलग हो सकती है।

अनुभव और कार्यक्षेत्र के अनुसार वेटरनरी डॉक्टर की सैलरी

करियर स्तर / कार्यक्षेत्रअनुमानित सालाना सैलरी
फ्रेशर वेटरनरी डॉक्टर (0–2 वर्ष)INR 3 लाख – INR 5 लाख
सरकारी वेटरनरी ऑफिसर / सर्जनINR 5 लाख – INR 8 लाख
प्राइवेट क्लिनिक या वेटरनरी हॉस्पिटलINR 4 लाख – INR 7 लाख
डेयरी, पोल्ट्री या रिसर्च सेक्टरINR 6 लाख – INR 9 लाख
स्वयं की प्राइवेट प्रैक्टिसअनुभव, लोकेशन और क्लाइंट बेस पर निर्भर

सोर्स: https://www.ambitionbox.com/profile/veterinary-doctor-salary

वेटरनरी डॉक्टर के रूप में कहाँ काम कर सकते हैं?

वेटरनरी डॉक्टर के रूप में आप निम्नलिखित क्षेत्रों में अपना सुनहरा भविष्य बना सकते हैं:

पशु चिकित्सा अस्पतालपशु आहार और फार्मास्यूटिकल कंपनियाँ
सरकारी नौकरी (वेटरनरी ऑफिसर या वेटरनरी सर्जन)शोध और अनुसंधान संस्थान:
प्राइवेट प्रैक्टिसएनिमल फार्म्स और डेयरी इंडस्ट्री
कृषि और पशुपालन विभागNGO और पशु कल्याण संगठन

वेटरनरी डॉक्टर के लिए सरकारी नौकरी

BVSc & AH की पढ़ाई पूरी करने के बाद कई वेटरनरी डॉक्टर सरकारी क्षेत्र में काम करना पसंद करते हैं, क्योंकि यहाँ नौकरी की स्थिरता और तय वेतनमान मिलता है। राज्य पशुपालन विभाग, सरकारी पशु चिकित्सा अस्पताल और ग्रामीण पशु स्वास्थ्य केंद्र ऐसे प्रमुख स्थान हैं, जहाँ वेटरनरी डॉक्टरों की नियुक्ति की जाती है।

सरकारी नौकरी में आमतौर पर वेटरनरी ऑफिसर, वेटरनरी सर्जन या असिस्टेंट वेटरनरी ऑफिसर जैसे पद होते हैं। इन पदों पर काम करते हुए डॉक्टर पशुओं के इलाज, टीकाकरण, रोग नियंत्रण और पशुपालन से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन में शामिल रहते हैं। कुछ मामलों में डेयरी, पोल्ट्री या फूड सेफ्टी से जुड़े विभागों में भी वेटरनरी डॉक्टरों की जरूरत होती है।

इन पदों के लिए भर्ती ज़्यादातर राज्य लोक सेवा आयोग या राज्य पशुपालन विभाग द्वारा की जाती है। चयन प्रक्रिया राज्य और पद के अनुसार अलग हो सकती है, लेकिन इसमें लिखित परीक्षा और इंटरव्यू शामिल होना आम बात है। नियुक्ति के बाद नियमित वेतन, भत्ते और समय के साथ प्रमोशन के अवसर मिलते हैं, जिससे यह करियर विकल्प लंबे समय के लिए स्थिर माना जाता है।

FAQs 

क्या NEET के बिना वेटरनरी कोर्स संभव है?

भारत में 12वीं (PCB) के बाद वेटरनरी UG कोर्स BVSc & AH में प्रवेश के लिए NEET-UG परीक्षा क्वालीफाई करना अनिवार्य माना जाता है। बिना NEET क्वालीफाई किए सरकारी या मान्यता प्राप्त कॉलेजों में वेटरनरी डॉक्टर बनने के लिए एडमिशन संभव नहीं है।

क्या बायोलॉजी के बिना BVSc किया जा सकता है?

नहीं, BVSc & AH कोर्स में एडमिशन के लिए 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी (PCB) विषय होना अनिवार्य है। बायोलॉजी के बिना वेटरनरी डॉक्टर बनने का विकल्प उपलब्ध नहीं है।

BVSc और MBBS में क्या अंतर है?

BVSc & AH कोर्स जानवरों के इलाज, पशु स्वास्थ्य और पशुपालन पर केंद्रित होता है, जबकि MBBS कोर्स मानव चिकित्सा और स्वास्थ्य से संबंधित होता है। दोनों प्रोफेशन मेडिकल फील्ड से जुड़े हैं, लेकिन उनके कार्यक्षेत्र और विशेषज्ञता पूरी तरह अलग होती है।

प्राइवेट कॉलेज और सरकारी कॉलेज में BVSc करने में क्या अंतर है?

सरकारी कॉलेजों में BVSc कोर्स की फीस अपेक्षाकृत कम होती है और एडमिशन मेरिट व काउंसलिंग के आधार पर होता है। वहीं प्राइवेट कॉलेजों में फीस अधिक हो सकती है, लेकिन सीट उपलब्धता तुलनात्मक रूप से ज्यादा होती है। दोनों ही मामलों में कॉलेज का VCI से मान्यता प्राप्त होना जरूरी है।

VCI रजिस्ट्रेशन की वैधता कितनी होती है?

BVSc & AH पूरा करने के बाद वेटरनरी डॉक्टर को संबंधित राज्य पशु चिकित्सा परिषद या VCI में रजिस्ट्रेशन कराना होता है। यह रजिस्ट्रेशन वैध प्रैक्टिस के लिए आवश्यक है और इसे समय-समय पर नियमों के अनुसार रिन्यू कराना होता है।

क्या विदेश से की गई वेटरनरी डिग्री भारत में मान्य होती है?

विदेश से की गई वेटरनरी डिग्री तभी मान्य होती है, जब वह VCI के नियमों और शर्तों को पूरा करती हो। ऐसे उम्मीदवारों को भारत में प्रैक्टिस करने के लिए अतिरिक्त परीक्षा या प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है।

लड़कियों के लिए पशु चिकित्सा करियर कैसा है?

पशु चिकित्सा करियर लड़कियों के लिए एक सुरक्षित, सम्मानजनक और समान अवसर प्रदान करने वाला क्षेत्र है। वे क्लिनिकल प्रैक्टिस, रिसर्च, अकादमिक, सरकारी सेवा और प्राइवेट सेक्टर सहित विभिन्न क्षेत्रों में सफल करियर बना सकती हैं।

भारत में वेटरनरी डॉक्टर की डिमांड कैसी है?

भारत में वेटरनरी डॉक्टरों की मांग लगातार बनी हुई है। पशुधन क्षेत्र, पालतू जानवरों की बढ़ती संख्या और डेयरी-पोल्ट्री इंडस्ट्री के विस्तार के कारण वेटरनरी प्रोफेशनल्स की आवश्यकता बढ़ रही है।

उम्मीद है कि इस लेख से आपको वेटरनरी डॉक्टर बनने की प्रक्रिया, योग्यता और करियर से जुड़ी ज़रूरी जानकारी समझने में मदद मिली होगी। अगर आप जानवरों के इलाज और उनकी देखभाल के क्षेत्र में करियर बनाने की सोच रहे हैं, तो यह जानकारी आपके लिए उपयोगी साबित हो सकती है। ऐसे ही अन्य करियर-गाइड्स से जुड़े लेख पढ़ने के लिए Leverage Edu पर उपलब्ध लेख देख सकते हैं।

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