टैली भारत का सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाला अकाउंटिंग सॉफ़्टवेयर है। जीएसटी रिटर्न्स फाइल करने से लेकर स्टॉक मैनेजमेंट और कर्मचारियों की सैलरी का हिसाब रखने तक ये सब काम टैली पर होते हैं।
टैली कोर्स में आप सीखते हैं कि इन्वॉइस कैसे बनाई जाती है, जीएसटी कैसे फाइल होता है, कर्मचारियों की सैलरी का हिसाब कैसे रखा जाता है और कंपनी का फाइनेंशियल रिकॉर्ड कैसे मेन्टेन किया जाता है।
इस कोर्स को करने के लिए किसी खास डिग्री की ज़रूरत नहीं है। 12वीं पास करने के बाद आप यह कोर्स शुरू कर सकते हैं। कोर्स बेसिक लेवल से शुरू होता है और आगे जाकर एडवांस्ड अकाउंटिंग तक कवर करता है।
इस लेख में आपको टैली कोर्स से जुड़ी पूरी जानकारी मिलेगी जिसमें कोर्स के प्रकार, सिलेबस, फीस, एडमिशन प्रोसेस और जॉब के ऑप्शन शामिल हैं।
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टैली कोर्स की संक्षिप्त जानकारी
| विषय | विवरण |
| कोर्स का नाम | टैली कोर्स (टैलीप्राइम / टैली ईआरपी 9) |
| कोर्स टाइप | ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों |
| कोर्स की अवधि | 2 से 3 महीने (प्रतिदिन 1-2 घंटे की प्रैक्टिस के साथ) |
| न्यूनतम योग्यता | 10वीं या 12वीं पास (किसी भी स्ट्रीम से, कॉमर्स बेहतर है) |
| प्रमुख विषय | अकाउंट्स की बुनियादी बातें, इन्वेंट्री, वाउचर एंट्री, पेरोल |
| टैक्सेशन मॉड्यूल | जीएसटी (R1, 3B), टीडीएस, टीसीएस और इनकम टैक्स की एंट्री |
| एडवांस्ड फीचर्स | बैंक रिकॉन्सिलिएशन, बैलेंस शीट फाइनल करना, ऑडिटिंग |
टैली कोर्स क्या है?
टैली कोर्स एक प्रैक्टिकल स्किल-बेस्ड ट्रेनिंग प्रोग्राम है जिसमें आप डिजिटल अकाउंटिंग, जीएसटी बिलिंग, इन्वेंट्री मैनेजमेंट और फाइनेंशियल रिपोर्ट तैयार करना सीखते हैं। यह एक ऐसा कोर्स है जो आपको छोटे और मध्यम व्यवसायों के लिए उपयोगी बनाता है। इस कोर्स को करने के बाद आप अकाउंटिंग फील्ड में प्रवेश पा सकते हैं।
कंप्यूटर टैली कोर्स: टैलीप्राइम और टैली ईआरपी 9 में क्या फ़र्क है?
टैली सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड ने 2020 में टैलीप्राइम लॉन्च किया जो टैली ईआरपी 9 का अपग्रेडेड वर्जन है। आज अधिकतर संस्थान टैलीप्राइम पर बेस्ड कोर्स सिखाते हैं। हालाँकि कई कंपनियों में अभी भी टैली ईआरपी 9 यूज़ होता है इसलिए एक अच्छा टैली कोर्स दोनों वर्जन को कवर करता है। नए इंटरफेस के साथ टैलीप्राइम में क्लाउड एक्सेस, ई-इन्वॉइसिंग और ऑटोमेटेड जीएसटी कम्प्लायंस जैसे फीचर्स भी मिलते हैं। अगर कोई संस्थान आपको सिर्फ ईआरपी 9 सिखा रहा है तो एक बार ज़रूर पूछें कि करिकुलम अपडेटेड है या नहीं।
टैली कोर्स की अवधि और फीस
टैली कोर्स की अवधि और फीस आमतौर पर कोर्स के लेवल और संस्थान पर निर्भर करती है। यहाँ अनुमानित फीस रेंज दी गई है:
| कोर्स का लेवल | कोर्स की अवधि | अनुमानित फीस (INR) |
| बेसिक टैली कोर्स | 1 से 2 महीने | INR 3,000 से INR 8,000 |
| सर्टिफिकेट टैली कोर्स | 1 से 3 महीने | INR 5,000 से INR 10,000 |
| एडवांस्ड टैली कोर्स और जीएसटी | 2 से 4 महीने | INR 8,000 से INR 20,000 |
| प्रोफेशनल टैली कोर्स | 3 से 6 महीने | INR 10,000 से INR 25,000 |
नोट: कोर्स जॉइन करने से पहले यह ज़रूर चेक करें कि संस्थान टैली ऑथराइज्ड एजुकेशन पार्टनर (TAEP) है या नहीं। टीएईपी-सर्टिफाइड संस्थान से टैली कोर्स करने पर टैली सॉल्यूशंस की ऑफिशियल सर्टिफिकेट मिलती है जो रेज़्यूमे में ज़्यादा वैल्यू रखती है। पीएम कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) के तहत कुछ संस्थान फ्री या सब्सिडाइज़्ड टैली कोर्स भी ऑफर करते हैं।
टैली कोर्स के लिए आवश्यक योग्यता
टैली कोर्स में प्रवेश के लिए आपको निम्नलिखित आवश्यक योग्यताओं को पूरा करना होता है:
- टैली कोर्स में प्रवेश के लिए आपका किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं और 12वीं में पास होना ज़रूरी है।
- कॉमर्स स्ट्रीम से होने पर इस कोर्स के लिए आपका बेस मज़बूत हो सकता है।
- इसके लिए आपके पास बेसिक अकाउंटिंग और कंप्यूटर की समझ और नॉलेज होनी चाहिए।
क्या नॉन-कॉमर्स स्टूडेंट्स टैली कोर्स कर सकते हैं?
हाँ, बिल्कुल। साइंस या आर्ट्स बैकग्राउंड वाले स्टूडेंट्स भी टैली कोर्स जॉइन कर सकते हैं। बेसिक अकाउंटिंग कॉन्सेप्ट जैसे डेबिट-क्रेडिट, एसेट्स-लायबिलिटीज़ पहले हफ्ते में ही सिखाए जाते हैं। अगर आपको कंप्यूटर चलाना आता है और टाइपिंग कर सकते हैं तो आप यह कोर्स सीखने के लिए तैयार हैं।
वर्किंग प्रोफेशनल्स के लिए यह जानना ज़रूरी है कि अगर आप पहले से किसी ऑफिस में काम कर रहे हैं और टैली अपग्रेड करना चाहते हैं तो वीकेंड बैच या ईवनिंग बैच वाले संस्थान को प्रेफर करें। ये ऑप्शन अधिकतर बड़े शहरों में उपलब्ध हैं।
टैली कोर्स के लिए एडमिशन प्रोसेस
टैली कोर्स में एडमिशन के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह की प्रक्रिया उपलब्ध है जो कोर्स लेवल के आधार पर लगभग कॉमन ही होती है।
ऑफलाइन आवेदन प्रक्रिया
- सबसे पहले अपने नज़दीकी संस्थान में जाएँ जहाँ से आप टैली कोर्स करना चाहते हैं।
- संस्थान की हेल्प डेस्क से कोर्स के बारे में जानकारी प्राप्त करें।
- अपने करियर गोल्स और ज़रूरतों के अनुसार कोर्स लेवल चुनें और एडमिशन फॉर्म प्राप्त करें।
- एडमिशन फॉर्म में माँगी गई शैक्षणिक और व्यक्तिगत जानकारी सही तरीके से भरें।
- फॉर्म के साथ आवश्यक दस्तावेज़ों की कॉपी अटैच करें।
- आवेदन शुल्क जमा करने के बाद फॉर्म सबमिट करें और एडमिशन प्रोसेस पूरी करें।
ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया
- सबसे पहले अपने द्वारा चुने गए संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट विज़िट करें।
- वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन करें और मोबाइल नंबर तथा ईमेल जैसी डिटेल्स सावधानी से भरें।
- रजिस्ट्रेशन के बाद कोर्स लेवल के आधार पर एप्लिकेशन फॉर्म ध्यान से पढ़कर भरें।
- आवश्यक दस्तावेज़ स्कैन करके अपलोड करें।
- नेट बैंकिंग या ऑनलाइन पेमेंट के माध्यम से आवेदन शुल्क का भुगतान करें और एडमिशन प्रोसेस पूरी करें।
एडमिशन के समय ये ज़रूर पूछें
- क्या संस्थान टैली ऑथराइज्ड एजुकेशन पार्टनर (TAEP) है?
- बैच साइज़ कितनी है क्योंकि ज़्यादा स्टूडेंट्स होने पर इंडिविजुअल अटेंशन कम मिलती है।
- प्रैक्टिकल प्रैक्टिस के लिए अलग से लैब टाइम मिलेगा?
- कोर्स कम्पलीट होने पर प्लेसमेंट असिस्टेंस मिलेगी?
- सर्टिफिकेट टैली सॉल्यूशंस की होगी या सिर्फ संस्थान की?
ज़रूरी दस्तावेज़
- 10वीं और 12वीं की मार्कशीट
- आधार कार्ड
- 2 पासपोर्ट साइज़ फोटो
- कुछ संस्थानों में कैरेक्टर सर्टिफिकेट भी माँगी जाती है
टैली कोर्स का सिलेबस
टैली कोर्स का सिलेबस आमतौर पर एक जैसा ही रहता है, हालाँकि कुछ संस्थानों में इसमें थोड़ी भिन्नता देखी जा सकती है। यहाँ दिया गया सिलेबस विभिन्न स्रोतों से लिया गया है:
| मॉड्यूल / यूनिट | महत्वपूर्ण टॉपिक्स |
| कंप्यूटर और अकाउंटिंग बेसिक्स | कंप्यूटर की बेसिक जानकारी, अकाउंटिंग के सिद्धांत (एसेट्स, लायबिलिटीज़, कैपिटल), डेबिट-क्रेडिट रूल्स |
| कंपनी क्रिएशन और सेटअप | टैली में कंपनी बनाना, फाइनेंशियल ईयर सेट करना, सिक्योरिटी ऑप्शंस |
| लेजर और ग्रुप्स बनाना | अलग-अलग अकाउंट्स (कैश, बैंक, सेल्स, परचेज़) के लिए लेजर बनाना, ग्रुप्स असाइन करना |
| वाउचर एंट्री | पेमेंट, रिसीट, कॉन्ट्रा, जर्नल, सेल्स, परचेज़ वाउचर्स की एंट्री |
| इन्वेंट्री मैनेजमेंट | स्टॉक आइटम्स बनाना, यूनिट्स सेट करना, स्टॉक ग्रुप, गोडाउन मैनेजमेंट |
| जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स) | जीएसटी इनेबल करना, जीएसटी रेट सेट करना, जीएसटी इन्वॉइस बनाना, जीएसटीआर-1 और जीएसटीआर-3बी रिपोर्ट्स |
| बैंकिंग फीचर्स | बैंक रिकॉन्सिलिएशन, चेक प्रिंटिंग, ई-पेमेंट ऑप्शंस, कनेक्टेड बैंकिंग |
| पेरोल मैनेजमेंट | एम्प्लॉई डिटेल्स, सैलरी स्ट्रक्चर, पीएफ और ईएसआई बेसिक्स, पेस्लिप जनरेशन |
| रिपोर्ट्स और स्टेटमेंट्स | ट्रायल बैलेंस, प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट, बैलेंस शीट, कैश फ्लो |
| टैक्सेशन और कम्प्लायंस | टीडीएस बेसिक्स, जीएसटी रिपोर्ट्स, स्टेच्युटरी कम्प्लायंस रिपोर्ट्स |
| डेटा मैनेजमेंट और सिक्योरिटी | बैकअप, रिस्टोर, यूज़र रोल्स, डेटा सिक्योरिटी |
| टैलीप्राइम के नए फीचर्स | ई-इन्वॉइसिंग विद QR कोड, कनेक्टेड बैंकिंग, व्हाट्सएप से इन्वॉइस शेयर, मल्टी-करेंसी |
| प्रैक्टिकल केस स्टडी और प्रोजेक्ट | रियल बिज़नेस ट्रांज़ैक्शन पर प्रैक्टिस, इन्वॉइस क्रिएशन, जीएसटी कैल्कुलेशन |
जॉब के नज़रिए से सबसे ज़रूरी मॉड्यूल
अगर आप जल्दी जॉब पाना चाहते हैं तो इन चार मॉड्यूल पर सबसे ज़्यादा फोकस करें। जीएसटी, वाउचर एंट्री, बैंक रिकॉन्सिलिएशन और रिपोर्ट्स से इंटरव्यू में अधिकतर सवाल आते हैं।
टैली कोर्स के बाद करियर स्कोप और सैलरी
टैली कोर्स पूरा करने के बाद आपको मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों से लेकर अकाउंटिंग और फाइनेंस फर्म्स में विभिन्न जॉब प्रोफाइल पर काम करने के अवसर मिलते हैं। नीचे कुछ प्रमुख जॉब प्रोफाइल और उनकी अनुमानित सैलरी दी गई है:
| जॉब प्रोफाइल | अनुमानित सालाना सैलरी (INR) |
| टैली ऑपरेटर | INR 1.9 लाख से INR 2.1 लाख |
| जूनियर अकाउंटेंट | INR 2.7 लाख से INR 3 लाख |
| अकाउंटेंट | INR 3.3 लाख से INR 3.6 लाख |
| टैक्स असिस्टेंट | INR 4 लाख से INR 4.4 लाख |
| बिलिंग एग्जीक्यूटिव | INR 2.7 लाख से INR 2.9 लाख |
नोट: यहाँ अनुमानित सैलरी की जानकारी AmbitionBox.com के डेटा के आधार पर दी गई है। यह संस्थान, शहर, अनुभव और स्किल्स के अनुसार अलग–अलग हो सकती है।
किन इंडस्ट्रीज़ में टैली प्रोफेशनल्स की सबसे ज़्यादा माँग है?
मैन्युफैक्चरिंग कंपनियाँ, ट्रेडिंग फर्म्स, सीए फर्म्स, रिटेल चेन्स, रियल एस्टेट कंपनियाँ और हॉस्पिटल्स जैसे सभी सेक्टर्स में टैली ऑपरेटर्स की लगातार ज़रूरत रहती है क्योंकि इन्हें रोज़ाना बड़ी संख्या में ट्रांज़ैक्शन रिकॉर्ड करने होते हैं।
करियर ग्रोथ पाथ
टैली कोर्स के बाद आपकी करियर ग्रोथ इस तरह हो सकती है:
- शुरुआत: टैली ऑपरेटर या डेटा एंट्री एग्जीक्यूटिव
- 1 से 3 साल: जूनियर अकाउंटेंट या बिलिंग एग्जीक्यूटिव
- 3 से 5 साल: अकाउंटेंट या जीएसटी एग्जीक्यूटिव
- 5 साल से ज़्यादा: सीनियर अकाउंटेंट या अकाउंट्स मैनेजर
टैली कोर्स के बाद आप 2 से 3 छोटे बिज़नेसेज़ को फ्रीलांस अकाउंटिंग सर्विसेज़ भी दे सकते हैं। बहुत से जीएसटी कंसल्टेंट्स इसी तरह शुरू करते हैं और एक क्लाइंट से दूसरे क्लाइंट तक वर्ड-ऑफ-माउथ से काम बढ़ता है।
FAQs
टैली कोर्स में आप बेसिक अकाउंटिंग कॉन्सेप्ट जैसे लेजर, जर्नल, डेबिट-क्रेडिट के नियम और अकाउंट्स के प्रकार सीखते हैं। इसके बाद सॉफ़्टवेयर का इंटरफेस समझाया जाता है जिसमें कंपनी बनाना, डेटा एंट्री करना और शॉर्टकट कीज़ का उपयोग करना शामिल है। जीएसटी फाइलिंग, टीडीएस, पेरोल मैनेजमेंट और बैंक रिकॉन्सिलिएशन भी इसी कोर्स में कवर होते हैं।
टैली कोर्स करने के बाद आपको अकाउंटेंट, जूनियर अकाउंटेंट, बिलिंग एग्जीक्यूटिव, टैक्स असिस्टेंट या टैली ऑपरेटर के रूप में करियर की शुरुआत करने का अवसर मिलता है। इसके अलावा आप अपने क्लाइंट्स को फ्रीलांस अकाउंटिंग सर्विसेज़ देकर भी करियर शुरू कर सकते हैं।
टैली कोर्स की फीस कोर्स के लेवल और संस्थान पर निर्भर करती है। बेसिक टैली कोर्स की फीस INR 3,000 से INR 8,000 तक होती है जबकि एडवांस्ड टैली कोर्स की फीस INR 8,000 से INR 20,000 तक हो सकती है। प्रोफेशनल लेवल के कोर्स की फीस INR 10,000 से INR 25,000 तक जाती है।
बेसिक टैली कोर्स को 1 से 3 महीने में और एडवांस्ड टैली कोर्स को 3 से 6 महीने में पूरा किया जा सकता है। अगर आप रोज़ 1 से 2 घंटे प्रैक्टिस करते हैं तो बेसिक टैली 30 से 45 दिनों में सीखा जा सकता है।
यह आपके गोल पर निर्भर करता है। अगर आप सिर्फ जॉब के लिए सीखना चाहते हैं तो एडवांस्ड टैली कोर्स और जीएसटी सबसे अच्छा ऑप्शन है। अगर आप अकाउंटिंग फील्ड में लॉन्ग-टर्म करियर बनाना चाहते हैं तो प्रोफेशनल टैली कोर्स चुनें। हमेशा टैली ऑथराइज्ड एजुकेशन पार्टनर (TAEP) संस्थान से ही कोर्स करें।
टैली कोर्स के बाद एक फ्रेशर की शुरुआती सैलरी INR 1.9 लाख से INR 3 लाख सालाना हो सकती है। अनुभव और स्किल्स बढ़ने के साथ यह INR 4 लाख से INR 4.4 लाख तक पहुँच सकती है। सैलरी शहर, कंपनी साइज़ और अनुभव के हिसाब से अलग-अलग होती है।
आजकल अधिकतर कंपनियों में जीएसटी रिटर्न फाइलिंग और टैक्स कैल्कुलेशन का काम होता है जिसके लिए टैली कोर्स के साथ जीएसटी सीखना ज़रूरी हो जाता है। इससे आपकी करियर ग्रोथ बेहतर होती है।
बिगिनर्स के लिए ऑफलाइन बेहतर है क्योंकि प्रैक्टिकल डाउट्स तुरंत सॉल्व होते हैं और लैब में रियल सॉफ़्टवेयर पर प्रैक्टिस मिलती है। अगर आपके पास घर पर टैली सॉफ़्टवेयर है और आप सेल्फ-डिसिप्लिंड हैं तो ऑनलाइन भी ठीक है।
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