भारत में सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) एक प्रतिष्ठित प्रशासनिक अधिकारी होता है, जो जिले के एक उप-विभाग का प्रमुख होता है। एसडीएम का पद भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) (पहले CrPC, 1973 का सेक्शन 20) के नियमों से लिया गया है, जो राज्य सरकार को अलग-अलग जिलों और सब-डिवीजन में एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट नियुक्त करने का अधिकार देता है।
एसडीएम कानून-व्यवस्था, राजस्व प्रशासन और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभालता है। वह जिला मजिस्ट्रेट और जनता के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करता है। एसडीएम बनने के लिए आपको UPSC या ‘राज्य लोक सेवा आयोग’ (PCS) की परीक्षा पास करनी अनिवार्य होती है।
यह पद देश की सेवा करने का एक अवसर है, इसलिए हर साल लाखों कैंडिडेट्स इसकी तैयारी करते हैं, लेकिन केवल कुछ ही कैंडिडेट इस कठिन परीक्षा में सफलता प्राप्त कर पाते हैं। यदि आप भी SDM बनकर देश की सेवा करना चाहते हैं, तो इस लेख में एसडीएम कैसे बनें स्टेप-बाय-स्टेप बताया गया है।
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एसडीएम की जिम्मेदारियां और कार्य
सामान्यतः सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) के पद पर आईएएस या पीसीएस अधिकारी नियुक्त किए जाते हैं। वे मजिस्ट्रेट तथा कार्यकारी दोनों प्रकार की जिम्मेदारियां निभाते हैं। इस प्रकार SDM, जिला मजिस्ट्रेट के अधीनस्थ अधिकारी के रूप में कार्य करते हुए प्रदत्त वैधानिक शक्तियों और निर्धारित कानूनी दायित्वों का निर्वहन करता है। SDM के प्रमुख कर्तव्य और दायित्व निम्नलिखित हैं:
- कानून-व्यवस्था बनाए रखना: अपने क्षेत्र में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा पुलिस प्रशासन की निगरानी करना।
- राजस्व प्रशासन: भूमि रिकॉर्ड का रखरखाव, टैक्स वसूली और राजस्व विवादों का निपटारा करना।
- न्यायिक कार्य: सीमांकन, अतिक्रमण और भूमि से जुड़े मामलों का निर्णय लेना। वहीं आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC)/BNSS के तहत निवारक आदेश जारी करना जैसे कि आदेश 144/बेल बॉन्ड आदि लागू करना।
- आपदा प्रबंधन: बाढ़, सूखा या अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत एवं पुनर्वास कार्यों की देखरेख करना।
- विकास कार्यों का संचालन: सरकारी योजनाओं और विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी करना।
- लोक निर्माण और विनियमन: भवन निर्माण, भूमि उपयोग और अन्य प्रशासनिक अनुमतियों को मंजूरी देना।
- चुनाव और जनगणना: अपने उप-विभाग में चुनाव प्रक्रिया और जनगणना कार्यों का पर्यवेक्षण करना।
- प्रमाण पत्र जारी करना: SDM विभिन्न प्रमाण पत्र जारी करने के लिए अधिकृत अधिकारी होता है, जैसे जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, चरित्र प्रमाण पत्र और राष्ट्रीयता प्रमाण पत्र। इसके अलावा वह दस्तावेज़ों और भूमि अभिलेखों के पंजीकरण का कार्य भी देखता है। कुछ राज्यों में SDM भूमि राजस्व की वसूली, जमीन के बंटवारे और म्यूटेशन से जुड़े मामलों में तहसीलदारों के कार्यों की निगरानी भी करता है।
- स्थानीय निकाय की देखरेख: SDM म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन, पंचायत और ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिस के काम की निगरानी करते हैं ताकि स्थानीय शासन सही और प्रभावी ढंग से चल सके।
एसडीएम बनने के लिए योग्यता
भारत में सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) बनने के लिए सामान्य योग्यता इस प्रकार है:
- राष्ट्रीयता: कैंडिडेट भारत का नागरिक होना चाहिए।
- शैक्षणिक योग्यता: किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से किसी भी स्ट्रीम में ग्रेजुएशन की डिग्री होनी चाहिए।
- आयु सीमा: UPSC के लिए आमतौर पर आयु सीमा 21-32 वर्ष होती है, जबकि SC/ST, OBC, रक्षा सेवा कार्मिक, भूतपूर्व सैनिकों और विकलांग व्यक्तियों (PwD) के लिए आयु सीमा में कुछ छूट मिलती है। वहीं ‘राज्य लोक सेवा आयोग’ (PCS) के लिए आयु सीमा अलग-अलग होती है। इसलिए संबंधित राज्य में पीसीएस परीक्षा में आवेदन करने से पहले आयोग की आधिकारिक वेबसाइट से पात्रता शर्तों की जानकारी जरूर प्राप्त कर लें।
- फिजिकल और मेंटल फिटनेस: आपको संबंधित आयोग के तय किए गए खास फिटनेस स्टैंडर्ड पूरे करने होंगे।
- प्रयास की संख्या: पीसीएस परीक्षा में प्रयासों की संख्या आयोग के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। सामान्यतः आपको 6 अटेम्प्ट देने की अनुमति आयोग द्वारा जी जाती है।
- महिला उम्मीदवारों के लिए पात्रता: महिला उम्मीदवारों के लिए प्रक्रिया और जरूरी शर्तें पुरुषों के समान ही होती हैं। हालांकि कई राज्यों में प्रशासनिक सेवाओं में महिलाओं को बढ़ावा देने के लिए आरक्षण भी दिया जाता है। वहीं हाल के वर्षों में अनेक महिलाएं इन परीक्षाओं में सफल होकर एसडीएम के पद पर कार्य कर रही हैं।
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एसडीएम कैसे बनें? (स्टेप-बाय-स्टेप गाइड)
भारत में एसडीएम बनने के लिए एक निश्चित प्रक्रिया होती है, जिसे सफलतापूर्वक पूरा करने पर यह पद प्राप्त किया जा सकता है। नीचे एसडीएम बनने की प्रक्रिया के प्रमुख स्टेप्स दिए गए हैं:-
स्टेप 1: ग्रेजुएशन पूरा करें
12वीं के बाद मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से किसी भी फील्ड में ग्रेजुएशन करें। एसडीएम बनने के लिए किसी विशेष विषय या स्ट्रीम की आवश्यकता नहीं होती। यह डिग्री UPSC या PCS परीक्षा में बैठने के लिए एक सामान्य पात्रता मानदंड है।
स्टेप 2: सही परीक्षा का चयन करें
एसडीएम बनने के लिए आप UPSC सिविल सेवा परीक्षा या राज्य की PCS परीक्षा दे सकते हैं। UPSC के जरिए भर्ती होने वाले IAS अधिकारी सामान्यतः बाद में SDM बनते हैं। वहीं कई राज्यों में PCS परीक्षा के माध्यम से आप सीधे सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट के पद पर नियुक्त किए जाते हैं।
स्टेप 3: परीक्षा की तैयारी करें
UPSC और PCS परीक्षा प्रतिवर्ष आयोजित की जाती है और इसमें तीन चरण होते हैं: प्रीलिम्स, मेंस और इंटरव्यू:
- प्रीलिम्स परीक्षा: यह सिविल सेवा का पहला चरण है, जिसमें दो ऑब्जेक्टिव पेपर- जनरल स्टडीज और सिविल सर्विसेज एप्टीट्यूड टेस्ट (CSAT) होते हैं। इसे पास करने पर ही आप मेंस परीक्षा के लिए पात्र होते हैं।
- मेंस परीक्षा: यह सिविल सेवा परीक्षा का दूसरा चरण है और इसमें नौ पेपर होते हैं, जिसमें एक निबंध पेपर और दो ऑप्शनल सब्जेक्ट के पेपर शामिल होते हैं। इसके अतिरिक्त, जनरल स्टडीज के चार पेपर, एथिक्स, इनटीग्रिटी और एप्टिट्यूड पर एक पेपर और आपकी पसंद की भाषा पर दो पेपर होते हैं।
- इंटरव्यू: पर्सनालिटी टेस्ट और इंटरव्यू सिविल सेवा परीक्षा का आखिरी चरण है, जिसमें आपके व्यक्तित्व, संचार कौशल, सामान्य ज्ञान और निर्णय क्षमता का मूल्यांकन किया जाता है।
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स्टेप 4: सिलेक्शन प्रोसेस पूरा करें
सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट बनने के लिए आपको सिविल सेवा परीक्षा के सभी चरण क्लियर कर उच्च रैंक प्राप्त करनी होती है। इसके आधार पर UPSC या प्रांतीय सिविल सेवा (PCS) के माध्यम से यह पद आपको अलॉट किया जाता है।
स्टेप 5: एसडीएम के रूप में नियुक्ति
UPSC के माध्यम से चयनित प्रशासनिक अधिकारियों को ट्रेनिंग स्टेज में मसूरी स्थित ‘लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी’ (LBSNAA) या अन्य संस्थानों में प्रशासनिक कार्यों की ट्रेनिंग दी जाती है। वहीं कुछ राज्यों जैसे बिहार, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में पीसीएस परीक्षा पास करने पर ट्रेनिंग के बाद सीधे एसडीएम पद पर नियुक्त किया जाता है।
एसडीएम की अनुमानित सैलरी
भारत में एक सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट की सैलरी केंद्र और राज्य सरकार के अनुसार थोड़ा भिन्न होती है। सातवें वेतन आयोग के अनुसार, एक SDM का वेतन पे बैंड 3 के अंतर्गत आता है, जिसका ग्रेड पे लगभग 5400 रूपये है, जिससे कुल अनुमानित वेतन 56,100 से 1,32,000 रूपये प्रति माह के बीच होता है।
इसमें मकान किराया भत्ता (HRA), महंगाई भत्ता (DA), सरकारी मोबाइल व इंटरनेट, फ्री बिजली-पानी और यात्रा भत्ता (TA) जैसे विभिन्न भत्ते शामिल हैं, जो कुल वेतन में वृद्धि कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, एसडीएम को आधिकारिक आवास, वाहन+ ड्राइवर, पर्सनल स्टाफ और चिकित्सा लाभ जैसे कई लाभ भी मिलते हैं।
नोट: दी गई जानकारी विभिन्न स्रोतों से ली गई है और इसमें बदलाव हो सकता है।
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एसडीएम के बाद करियर ग्रोथ
सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट बनने के बाद अगला उच्च प्रशासनिक पद इस प्रकार होता है:
| पद | कार्य |
| अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (ADM) | एसडीएम के तौर पर कई वर्ष की सर्विस के बाद, अधिकारी ADM के पद पर प्रमोशन के लिए पात्र होते हैं। ADM कई विभागों जैसे वित्त, राजस्व आदि के प्रभारी हो सकते हैं। |
| जिला मजिस्ट्रेट (DM) | ADM के बाद अधिकारी जिले का प्रमुख अधिकारी बनते हैं। वे जिले की संपूर्ण प्रशासनिक व कानून‑व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालते हैं। |
| डिविजनल कमिश्नर | डिविजनल कमिश्नर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के एक वरिष्ठ अधिकारी होते हैं जो कई जिलों से बने प्रशासनिक डिवीजन के प्रमुख होते हैं। उनका काम भू-राजस्व, कानून‑व्यवस्था और विकास कार्यों की निगरानी करना होता है। |
| राज्य और केंद्रीय प्रशासन की भूमिकाएं | लंबे कार्य अनुभव और अच्छा प्रदर्शन होने पर, एक अधिकारी राज्य या केंद्र सरकार में उच्च प्रशासनिक पदों तक पहुंच सकता है। इसके अलावा वे विभिन्न सलाहकारी बोर्ड, सरकारी विभाग और अन्य वरिष्ठ पदों में भी शामिल हो सकते हैं। |
FAQs
12वीं के बाद सीधे एसडीएम नहीं बन सकते। इसके लिए पहले स्नातक (ग्रेजुएशन) की डिग्री आवश्यक होती है।
एक जिले में एक से अधिक एसडीएम हो सकते हैं, जो जिले के उपखंडों की संख्या पर आधारित है।
एसडीएम बनने के लिए UPSC या राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास करना अनिवार्य है।
एसडीएम से बड़ा जिला प्रशासन का प्रमुख अधिकारी जिला मजिस्ट्रेट (DM) होता है।
सब डिविजनल ऑफिसर (SDO) प्रशासनिक कार्यों में सब डिवीजनल संगठन का अधिकारी होता है, जबकि SDM प्रशासन और न्यायिक अधिकारों सहित उपखंड का प्रमुख अधिकारी होता है।
SDM को निवास और डोमिसाइल प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार प्राप्त है।
SDM को ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता’ (BNSS) के तहत पब्लिक शांति बनाए रखने के लिए प्रिवेंटिव ऑर्डर जारी करने का अधिकार है।
एसडीएम बनने के लिए परीक्षा शुल्क UPSC में लगभग INR 100 और राज्य पीसीएस में सामान्य वर्ग के लिए INR 100-INR 150 (राज्य के अनुसार अलग) होता है, जबकि कोचिंग और तैयारी का खर्च आपके ऊपर निर्भर करता है।
हमें उम्मीद है कि इस लेख के माध्यम से आपको एसडीएम बनने से जुड़ी सभी आवश्यक जानकारी मिल गई होगी। ऐसे ही अन्य करियर से जुड़े लेख पढ़ने के लिए Leverage Edu के साथ बने रहें।

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