आज के समय में हेल्थकेयर फील्ड तेजी से आधुनिक तकनीकों से जुड़ती जा रही है। अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटर में बीमारियों की सही पहचान के लिए नई-नई मेडिकल तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। यदि आप भी हेल्थकेयर सेक्टर में टेक्नोलॉजी के साथ काम करने वाला करियर बनाना चाहते हैं, तो रेडियोलॉजी कोर्स आपके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है।
रेडियोलॉजी मेडिकल साइंस का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जिसमें X-Ray, CT स्कैन, MRI और अल्ट्रासाउंड जैसी इमेजिंग तकनीकों की मदद से शरीर के अंदरूनी अंगों की जांच की जाती है। इस कोर्स के माध्यम से आप यह सीखते हैं कि इन आधुनिक मशीनों का उपयोग करके बीमारियों की पहचान कैसे की जाती है और डॉक्टरों को सही डायग्नोसिस में कैसे मदद मिलती है।
आप रेडियोलॉजी कोर्स सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन लेवल पर कर सकते हैं। इस कोर्स में आपको मेडिकल इमेजिंग तकनीकों, मशीनों के संचालन और रोगों की पहचान से जुड़ी जरूरी जानकारी और प्रैक्टिकल स्किल्स सिखाई जाती हैं।
यदि आप भी रेडियोलॉजी के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं, तो इस लेख में आपके लिए रेडियोलॉजी कोर्स से जुड़ी पूरी जानकारी दी गई है, जैसे एडमिशन प्रोसेस, योग्यता, सिलेबस, फीस, टॉप कॉलेज और करियर स्कोप।
| मुख्य विवरण | विस्तृत जानकारी |
| कोर्स लेवल | सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन |
| कोर्स की फील्ड | पैरामेडिकल और मेडिकल इमेजिंग टेक्नोलॉजी |
| एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया | सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और UG डिग्री के लिए 12वीं विज्ञान (PCB या PCM) के साथ पास होना आवश्यक है। मास्टर डिग्री के लिए संबंधित विषय में ग्रेजुएशन डिग्री आवश्यक होती है। |
| कोर्स की अवधि | डिप्लोमा: 1 – 2 वर्षग्रेजुएशन डिग्री: 3-4 वर्ष (इंटर्नशिप सहित)पोस्ट ग्रेजुएशन डिग्री: 2 वर्ष |
| प्रमुख विषय | ह्यूमन एनाटोमी, रेडियो-फिजिक्स, डिजिटल इमेजिंग, MRI/CT |
| प्रवेश प्रक्रिया | मेरिट आधारित या यूनिवर्सिटी / नेशनल एंट्रेंस एग्जाम के आधार पर |
| करियर विकल्प | एक्स-रे टेकनीशियन, रेडियोग्राफर, थेरेपी रेडियोग्राफर |
| टॉप रिक्रूटर्स | एम्स, कोलंबिया एशिया, अपोलो अस्पताल, क्रिस्चन मेडिकल कॉलेज |
This Blog Includes:
- रेडियोलॉजी कोर्स के प्रकार
- रेडियोलॉजी कोर्स के लिए आवश्यक योग्यता
- रेडियोलॉजी कोर्स में एडमिशन कैसे होता है?
- रेडियोलॉजी कोर्स का सिलेबस
- रेडियोलॉजी कोर्स के लिए कॉलेज और उनकी फीस
- रेडियोलॉजी कोर्स (डिप्लोमा लेवल) के लिए सरकारी कॉलेज और उनकी अनुमानित फीस
- रेडियोलॉजी कोर्स (डिप्लोमा लेवल) के लिए प्राइवेट कॉलेज और उनकी अनुमानित फीस
- रेडियोलॉजी कोर्स (UG डिग्री लेवल) के लिए सरकारी कॉलेज और उनकी अनुमानित फीस
- रेडियोलॉजी कोर्स (UG डिग्री लेवल) के लिए प्राइवेट कॉलेज और उनकी अनुमानित फीस
- रेडियोलॉजी कोर्स (PG डिग्री लेवल) के लिए सरकारी कॉलेज और उनकी अनुमानित फीस
- रेडियोलॉजी कोर्स (PG डिग्री लेवल) के लिए प्राइवेट कॉलेज और उनकी अनुमानित फीस
- रेडियोलॉजी कोर्स के बाद करियर स्कोप और सैलरी
- रेडियोलॉजी कोर्स के बाद आगे की पढ़ाई के विकल्प
- रेडियोलॉजी बनाम लैब टेक्नोलॉजी में अंतर
- भारत और विदेश में रेडियोलॉजी कोर्स का स्कोप
- FAQs
रेडियोलॉजी की मुख्य शाखाएँ
नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन (NBE) और एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड (AERB) के मानकों के अनुसार रेडियोलॉजी की निम्नलिखित शाखाएं हैं, जिनकी जानकारी इस प्रकार है –
- डायग्नोस्टिक रेडियोलॉजी: डायग्नोस्टिक रेडियोलॉजी रेडियोलॉजी की सबसे व्यापक शाखा है, जिसमें एक्स-रे, सीटी स्कैन, एमआरआई और अल्ट्रासाउंड जैसी इमेजिंग तकनीकों से शरीर के अंदरूनी अंगों, हड्डियों और ऊतकों की स्पष्ट तस्वीरें बनाई जाती हैं। डायग्नोस्टिक रेडियोलॉजी को चुनने का एक बड़ा फायदा ये है कि इसकी आवश्यकता लगभग हर अस्पताल और डायग्नोस्टिक में होती है, जिससे चुनकर आप मेडिकल क्षेत्र में एक स्थिर और सम्मानजनक करियर की आधारशिला रख सकते हैं।
- इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी: इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी में इमेजिंग गाइडेंस की मदद से बिना बड़ी सर्जरी के उपचार किए जाते हैं, इसमें एंजियोप्लास्टी, बायोप्सी, स्टेंट प्लेसमेंट और ट्यूमर एब्लेशन जैसी मिनिमली इनवेसिव प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी को चुनने का एक बड़ा फायदा ये है कि ये एक फ़ास्ट ग्रोइंग और आधुनिक मेडिकल फील्ड है, जहाँ स्पेशलिस्ट बनने के बाद आपकी करियर ग्रोथ एक अच्छी गति से हो सकती है।
- न्यूक्लियर मेडिसिन: न्यूक्लियर मेडिसिन रेडियोलॉजी की वह शाखा है जिसमें रेडियोएक्टिव ट्रेसर पदार्थों का उपयोग करके अंगों के कार्य और रोग की पहचान की जाती है। पीईटी स्कैन और एसपीईसीटी प्रमुख तकनीकें हैं, कैंसर, थायरॉयड और हृदय रोगों के निदान व उपचार मॉनिटरिंग में यह अत्यंत उपयोगी और सटीक मानी जाती है। न्यूक्लियर मेडिसिन कैंसर और जटिल से जटिल रोगों के निदान के लिए बहुत उपयोगी माना जाता है, जिसमें आवश्यकता के अनुसार स्पेशलिस्ट की कमी के कारण प्रतिस्पर्धा कम है और इसके माध्यम से आप अच्छी करियर ग्रोथ पा सकते हैं।
- रेडिएशन ऑन्कोलॉजी: रेडिएशन ऑन्कोलॉजी कैंसर उपचार से जुड़ी विशेष शाखा है, जिसमें हाई एनर्जी रेडिएशन से कैंसर कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है। उपचार से पहले सटीक ट्यूमर लोकेशन तय करने के लिए इमेजिंग महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कैंसर जैसे रोगों के उपचार के लिए अस्पतालों में स्पेशलिस्ट की डिमांड लगातार बढ़ रही है, ऐसे में रेडिएशन ऑन्कोलॉजी को चुनकर आप अपनी स्किल और नॉलेज के आधार एक अच्छी ग्रोथ पा सकते हैं।
रेडियोलॉजी कोर्स के प्रकार
रेडियोलॉजी कोर्स के रूप से निम्नलिखित प्रकार होते हैं, जिनकी जानकारी नीचे दी गई टेबल में कोर्स स्ट्रक्चर और पात्रता मानकों के आधार पर दी गई है। कॉलेज के अनुसार कुछ कोर्सेज के नाम में बदलाव संभव है, इसलिए टेबल में दिए गए कोर्सेज को करने से पहले आप अपने द्वारा चयन किए गए कॉलेज की वेबसाइट पर कोर्स की डिटेल्स की जांच जरूर करें –
| कोर्स का प्रकार | कोर्स लेवल | अवधि | पात्रता |
| डिप्लोमा इन रेडियोलोजी / X-रे टेक्नोलॉजी | पैरामेडिकल डिप्लोमा | 1 – 2 वर्ष | 12वीं (PCB), कुछ संस्थानों में राज्यस्तरीय प्रवेश परीक्षा |
| डिप्लोमा इन रेडियोथेरेपी टेकनोलोजी | पैरामेडिकल | 2 वर्ष | 12वीं PCB, बेसिक फिजिक्स और रेडिएशन की समझ आवश्यक |
| बीएससी रेडियोलोजी / मेडिकल इमेजिंग टेक्नोलॉजी | ग्रेजुएशन | 3 – 4 वर्ष | 12वीं PCB, कई विश्वविद्यालयों में मेरिट या एंट्रेंस |
| बीएससी रेडियोग्राफ़ एंड इमेजिंग साइंस | ग्रेजुएशन | 3 वर्ष | 12वीं PCB, मेडिकल फिटनेस और लैब ट्रेनिंग अनिवार्य |
| बीएससी रेडियोथेरेपी टेक्नोलॉजी | ग्रेजुएशन | 3 – 4 वर्ष | 12वीं PCB, रेडिएशन फिजिक्स बेसिक ज्ञान |
| एमएससी रेडियोलोजी / इमेजिंग टेक्नोलॉजी | पोस्टग्रेजुएट | 2 वर्ष | बीएससी रेडियोलोजी या समान डिग्री, कुछ संस्थानों में एंट्रेंस |
| एमएससी रेडियोथेरेपी / मेडिकल इमेजिंग | पोस्टग्रेजुएट | 2 वर्ष | संबंधित बीएससी डिग्री, क्लिनिकल ट्रेनिंग आवश्यक |
| सर्टिफिकेट इन रेडियोग्राफी / इमेजिंग | सर्टिफिकेट | 6 – 12 माह | 12वीं विज्ञान के साथ, कुछ संस्थानों में केवल बेसिक साइंस |
रेडियोलॉजी कोर्स के लिए आवश्यक योग्यता
रेडियोलॉजी कोर्स के लिए आवश्यक योग्यताएं कोर्स के लेवल के आधार पर भिन्न-भिन्न होती हैं, जैसे- सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स के लिए पात्रता अलग होती है जबकि ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स के लिए पात्रता में अंतर देखा जा सकता है। यहाँ रेडियोलॉजी कोर्स के लेवल के आधार पर आवश्यक योग्यता को निम्नलिखित टेबल के माध्यम से आसान भाषा में समझाया गया है –
| रेडियोलॉजी कोर्स लेवल | रेडियोलॉजी कोर्स के लिए आवश्यक योग्यता |
| सर्टिफिकेट लेवल रेडियोलॉजी कोर्स | इसमें प्रवेश के लिए आपको किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से बेसिक साइंस नॉलेज के साथ 10वीं या 12वीं पास करना होता है।इसमें प्रवेश मेरिट के आधार पर होता है, जिसके लिए आपके न्यूनतम अंक 45-50% होने चाहिए, जो संस्थान के आधार पर निर्भर करता है।कुछ शॉर्ट टर्म प्रोग्राम में संस्थान के आधार पर बेसिक हेल्थकेयर एक्सपीरियंस की आवश्यकता हो सकती है। |
| डिप्लोमा लेवल रेडियोलॉजी कोर्स | इसमें प्रवेश के लिए आपकी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता के रूप में 12वीं साइंस स्ट्रीम (PCM/PCB) विषय के साथ पास होना है। इसमें आपके न्यूनतम अंक 45-50% होने चाहिए, जो संस्थान और आरक्षण नियमों के आधार पर निर्भर करता है।इसमें प्रवेश प्रक्रिया मेरिट बेस्ड होती है, जबकि कुछ जगह राज्य पैरामेडिकल एंट्रेंस टेस्ट या संस्थान स्तर की परीक्षा के आधार पर प्रवेश प्रक्रिया को पूरा किया जाता है। |
| बैचलर डिग्री लेवल रेडियोलॉजी कोर्स | इसमें प्रवेश के लिए आपकी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता के रूप में 12वीं साइंस स्ट्रीम (PCB) विषय के साथ पास करना अनिवार्य है।इसमें प्रवेश के लिए आपके न्यूनतम अंक 50% या उससे अधिक होने चाहिए, जो संस्थान और आरक्षण नियमों के आधार पर निर्भर करता है।इसमें प्रवेश के लिए आपको यूनिवर्सिटी/संस्थान प्रवेश परीक्षा या कुछ जगह पर राज्य पैरामेडिकल टेस्ट पास करना अनिवार्य होता है।इसके अलावा यदि आप ने रेडियोलॉजी में 2 साल का डिप्लोमा किया है, तो आप ‘लेटरल एंट्री’ के माध्यम से सीधे दूसरे वर्ष के सेशन में प्रवेश के लिए एलिजिबल होते हैं। |
| पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री लेवल रेडियोलॉजी कोर्स | इसमें प्रवेश के लिए आपकी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता के रूप में ग्रेजुएशन जैसे – बीएससी रेडियोलॉजी, बीएससी मेडिकल इमेजिंग टेक्नोलॉजी या इससे संबंधित डिग्री का होना अनिवार्य है।इसके लिए आपको डिग्री प्रोग्राम में न्यूनतम अंक 50-55% (संस्थान के आधार पर भिन्न भिन्न हो सकता है।) अंक लाना अनिवार्य है।MD डिग्री के लिए आपको MBBS डिग्री के साथ-साथ NEET PG परीक्षा को पास करना जरुरी होता है। जबकि कुछ यूनिवर्सिटी में एंट्रेंस एग्जाम के साथ-साथ इंटरव्यू में भी पास होना पड़ता है। |
रेडियोलॉजी कोर्स में एडमिशन कैसे होता है?
रेडियोलॉजी कोर्स में सर्टिफिकेट और डिप्लोमा लेवल के कोर्स में एडमिशन अधिकांश संस्थानों में उपलब्ध सीट के आधार पर डायरेक्ट मेरिट के आधार पर होता है, जिसमें आप आवेदन भरकर मेरिट के आधार पर अपने दस्तावेजों का सत्यापन कराने और फीस जमा करने के बाद प्रवेश पा सकते हैं। ये प्रोसेस ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही तरह से पूरी की जा सकती है। इसके अलावा ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन लेवल पर एडमिशन के लिए आप निम्नलिखित कॉमन एडमिशन प्रोसेस को फॉलो कर सकते हैं, जिनमें दिए कॉमन स्टेप्स सर्टिफिकेट और डिप्लोमा लेवल कोर्सेज के लिए भी एक जैसे रहते हैं –
ऑफलाइन आवेदन प्रक्रिया
- सबसे पहले संबंधित कॉलेज या विश्वविद्यालय जाकर आप अपने कोर्स लेवल के आधार पर अपना आवेदन फॉर्म प्राप्त करें।
- इसके बाद आप फॉर्म में मांगी गई शैक्षणिक और व्यक्तिगत जानकारी को ध्यानपूर्वक पढ़कर सही तरीके से भरें।
- इसके बाद फॉर्म के साथ लगने वाले आवश्यक दस्तावेजों की कॉपी फॉर्म के साथ जमा करें।
- यदि संस्थान में मेरिट बेस्ड एडमिशन होता है तो ऐसे ही मेरिट लिस्ट की प्रतीक्षा करें और अगर आपके कोर्स के लेवल के आधार पर प्रवेश परीक्षा का आयोजन होता है तो परीक्षा को पूरी तैयारी के साथ दें।
- इसके बाद आप मेरिट लिस्ट या प्रवेश परीक्षा के परिणाम का इंतजार करें, साथ ही परिणाम घोषित होने के बाद कॉउंसलिंग प्रक्रिया का हिस्सा बनें।
- इसके बाद अपने कोर्स लेवल के आधार पर चयनित होने पर डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन करवाएं और निर्धारित फीस जमा करके एडमिशन कन्फर्म करें।
ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया
- सबसे पहले आप जिस कॉलेज या विश्वविद्यालय में आवेदन करना चाहते हैं, उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ।
- अब अपने कोर्स लेवल के अनुसार एडमिशन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करके अपनी लॉग-इन आईडी बनाएं।
- इसके बाद अब आप अपना ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरकर संस्थान की ओर से मांगे जाने वाले आवश्यक दस्तावेजों को अपलोड करें।
- यदि किसी संस्थान में आपके कोर्स लेवल के आधार पर एंट्रेंस एग्जाम या प्रवेश के लिए इंटरव्यू आयोजित होता है, तो उसमें शामिल हों।
- फिर मेरिट/रिजल्ट जारी होने के बाद काउंसलिंग और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन पूरा करें।
- अंत में आप अपने कोर्स लेवल के आधार पर अपनी फीस जमा करने के बाद अपनी एडमिशन प्रक्रिया को पूरा करें।
प्रवेश परीक्षा
रेडियोलॉजी कोर्स में एडमिशन लेने के लिए ज्यादातर कॉलेज में मेरिट बेस्ड एडमिशन होते हैं, हालाँकि यहाँ उन एंट्रेंस एग्जाम के बारे में भी बताया गया है, जिनके आधार पर कुछ प्रमुख संस्थानों में इस कोर्स के लिए आप एडमिशन ले सकते हैं –
| प्रवेश परीक्षा का नाम | परीक्षा लेवल | परीक्षा तिथि |
| NEET UG | राष्ट्रीय स्तर | 3 मई 2026 |
| NEET PG | राष्ट्रीय स्तर | 30 अगस्त 2026 |
| INI CET | राष्ट्रीय स्तर | 16 जुलाई 2026 |
| AIIMS | AIIMS पैरामेडिकल – राष्ट्रीय स्तर | 4 जुलाई 2026 |
| SMFWBEE | राज्य स्तरीय | जुलाई 2026 (संभावित) |
| AIAPGET | राष्ट्रीय स्तर | जुलाई 2026 (संभावित) |
| CUET | राष्ट्रीय स्तर | 31 मई 2026 |
| NEET SS | राष्ट्रीय स्तर | दिसंबर 2026 (संभावित) |
रेडियोलॉजी कोर्स का सिलेबस
यहाँ दी गई टेबल में रेडियोलॉजी कोर्स के लेवल के अनुसार यहाँ यूनिट वाइज सिलेबस दिया गया है, कुछ प्रमुख संस्थानों में इसमें थोड़ा बदलाव हो सकता है। भारत के अलग-अलग विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में रेडियोलॉजी कोर्स का सिलेबस कुछ हद तक भिन्न हो सकता है, क्योंकि प्रत्येक संस्थान अपना करिकुलम और पेपर स्ट्रक्चर स्वयं निर्धारित करता है। इसलिए छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे एडमिशन से पहले संबंधित कॉलेज/विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध नवीनतम सिलेबस अवश्य जांच लें।
नीचे दिया गया सिलेबस विभिन्न स्त्रोतों से आपके लिए एक सामान्य रेफरेंस के रूप में दिया गया है, ताकि आपको पढ़ाए जाने वाले प्रमुख विषयों का स्पष्ट अंदाजा हो सके। इसमें कोर्स लेवल के आधार पर सिलेबस को अलग-अलग टेबल में दिया गया है, जिससे आपको अपने कोर्स लेवल के सिलेबस को ढूंढने में आसानी होगी –
सर्टिफिकेट इन रेडियोलॉजी कोर्स का सिलेबस
| यूनिट / विषय | इम्पोर्टेंट टॉपिक्स |
| रेडियोलॉजी का परिचय | रेडियोलॉजी का इतिहास, मेडिकल इमेजिंग की मूल अवधारणा, अस्पतालों में रेडियोलॉजी विभाग की भूमिका, रेडियोलॉजी उपकरणों का परिचय और उनके उपयोग |
| बेसिक मानव शरीर रचना (बेसिक एनाटॉमी) | मानव शरीर के प्रमुख अंगों जैसे हड्डियां, मांसपेशियां, अंग प्रणालियां और उनके कार्यों का परिचय ताकि एक्स-रे या अन्य इमेजिंग में संरचना को समझा जा सके |
| एक्स-रे तकनीक का परिचय | एक्स-रे मशीन का कार्य सिद्धांत, एक्स-रे किरणों का निर्माण, इमेजिंग के लिए सही पोजिशनिंग और बेसिक रेडियोग्राफिक तकनीक |
| रेडिएशन सेफ्टी | रेडिएशन के प्रकार, मानव शरीर पर प्रभाव, रेडिएशन से सुरक्षा के उपाय, अस्पतालों में रेडिएशन सुरक्षा नियम |
| मरीज की देखभाल | मरीज की तैयारी, सही पोजिशनिंग, जांच के दौरान मरीज से संवाद, मेडिकल एथिक्स और सुरक्षा |
| बेसिक इमेजिंग प्रैक्टिकल | एक्स-रे मशीन संचालन का प्रारंभिक प्रशिक्षण, फिल्म प्रोसेसिंग, बेसिक इमेज पढ़ने की प्रक्रिया |
डिप्लोमा इन रेडियोलॉजी कोर्स का सिलेबस
| यूनिट | इम्पोर्टेंट टॉपिक्स |
| मानव शरीर रचना एवं शरीर क्रिया | शरीर की संरचना और कार्य, हड्डियों और अंगों की पहचान, मेडिकल टर्मिनोलॉजी, पैथोलॉजी का परिचय |
| रेडिएशन फिजिक्स | रेडिएशन का सिद्धांत, एक्स-रे उत्पादन, रेडियोग्राफी में उपयोग होने वाले उपकरण, इमेजिंग तकनीक के वैज्ञानिक सिद्धांत |
| रेडियोग्राफिक पोजिशनिंग | शरीर के विभिन्न भागों की एक्स-रे पोजिशनिंग, इमेजिंग एंगल, डायग्नोस्टिक इमेज की गुणवत्ता बनाए रखने की तकनीक |
| मेडिकल इमेजिंग तकनीक | एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, CT स्कैन और MRI तकनीक का परिचय तथा उनके उपयोग |
| रेडिएशन प्रोटेक्शन | रेडिएशन डोज नियंत्रण, सुरक्षा उपकरण, रेडिएशन मॉनिटरिंग, अस्पताल में सुरक्षा नियम |
| क्लिनिकल ट्रेनिंग | अस्पताल या डायग्नोस्टिक सेंटर में इमेजिंग उपकरणों के साथ प्रैक्टिकल प्रशिक्षण, मरीज हैंडलिंग और रिपोर्टिंग प्रक्रिया |
अंडर ग्रेजुएशन रेडियोलॉजी कोर्स का सिलेबस
| वर्ष | इम्पोर्टेंट टॉपिक्स |
| प्रथम वर्ष | ह्यूमन एनाटोमी, ह्यूमन फिजियोलॉजी, कन्वेंशनल रेडियोलॉजी, बायोकेमेस्ट्री, रेडिएशन फिजिक्स, कम्युनिकेशन स्किल्स, प्रिवेंटिव मेडिसिन, प्रयोगशाला कार्य और बेसिक मेडिकल साइंस की पढ़ाई |
| द्वितीय वर्ष | रेडियोलॉजिकल फिजिक्स, डार्करूम तकनीक, स्पेशल रेडियोग्राफी, रेडिओग्राफिक टेक्निक्स, पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, कंप्यूटर एप्लीकेशंस इन रेडियोलॉजी, रेडिएशन हज़ार्डस एंड प्रोटेक्शन |
| तृतीय वर्ष | रेडियोग्राफिक पोजिशनिंग, इमेज प्रोसेसिंग तकनीक, CT स्कैन टेक्नोलॉजी, MRI टेक्नोलॉजी, रेडियोथेरेपी, अल्ट्रासाउंड इमेजिंग, न्यूक्लियर मेडिसिन, इमेज प्रोसेसिंग, PACS सिस्टम और डिजिटल इमेजिंग तकनीक |
| इंटर्नशिप | इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी, डाइग्नोस्टिक रेडियोलॉजी प्रोसीजर्स, हॉस्पिटल मैनेजमेंट, मेडिकल एथिक्स, रिसर्च प्रोजेक्ट और अस्पताल में अनिवार्य इंटर्नशिप |
पोस्ट ग्रेजुएशन रेडियोलॉजी कोर्स का सिलेबस
| विषय | इम्पोर्टेन्ट टॉपिक्स |
| एडवांस्ड एनाटॉमी | शरीर के अंगों की उन्नत संरचना और डायग्नोस्टिक इमेजिंग में उनकी पहचान |
| रेडिएशन फिजिक्स | रेडिएशन के उन्नत सिद्धांत और इमेजिंग तकनीकों का वैज्ञानिक आधार |
| इमेजिंग प्रिंसिपल | CT, MRI और अन्य स्कैनिंग तकनीकों के कार्य सिद्धांत |
| एडवांस्ड CT | आधुनिक CT-Scan तकनीक और डायग्नोस्टिक विश्लेषण |
| MRI तकनीक | MRI इमेजिंग के उन्नत सिद्धांत और क्लिनिकल उपयोग |
| अल्ट्रासाउंड इमेजिंग | अल्ट्रासाउंड आधारित रोग पहचान तकनीक |
| इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी | इमेज-गाइडेड सर्जिकल और डायग्नोस्टिक प्रक्रियाएं |
| न्यूक्लियर मेडिसिन | रेडियोआइसोटोप आधारित डायग्नोस्टिक और उपचार तकनीक |
| रिसर्च प्रोजेक्ट | रेडियोलॉजी से संबंधित शोध कार्य और डेटा विश्लेषण |
| क्लिनिकल इंटर्नशिप | अस्पताल या डायग्नोस्टिक सेंटर में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग |
रेडियोलॉजी कोर्स के लिए कॉलेज और उनकी फीस
यहाँ रेडियोलॉजी कोर्स के लिए कोर्स लेवल के आधार पर कॉलेज के नाम दिए गए हैं, जिसमें सरकारी और प्राइवेट दोनों तरह के कॉलेज के नाम शामिल हैं। यहाँ दी गई कॉलेज की फीस एक अनुमानित फीस है, आवेदन करने से पहले आपको अपने द्वारा चुने गए कॉलेज की ऑफिशियल वेबसाइट पर इसकी जांच जरूर करनी चाहिए, क्योंकि इसमें बदलाव संभव है –
रेडियोलॉजी कोर्स (डिप्लोमा लेवल) के लिए सरकारी कॉलेज और उनकी अनुमानित फीस
| कॉलेज का पूरा नाम | स्थान | अनुमानित वार्षिक फीस (INR) |
| मद्रास मेडिकल कॉलेज | चेन्नई, तमिलनाडु | INR 10,000 – INR 20,000 |
| ग्रांट मेडिकल कॉलेज | मुंबई, महाराष्ट्र | INR 20,000 – INR 40,000 |
| कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज (सरकारी सीट) | मणिपाल, कर्नाटक | INR 30,000 – INR 50,000 |
| सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMC – नागपुर) | नागपुर, महाराष्ट्र | INR 15,000 – INR 30,000 |
| इंदिरा गांधी गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज | नागपुर, महाराष्ट्र | INR 15,000 – INR 25,000 |
| पटना मेडिकल कॉलेज | पटना, बिहार | INR 10,000 – INR 20,000 |
रेडियोलॉजी कोर्स (डिप्लोमा लेवल) के लिए प्राइवेट कॉलेज और उनकी अनुमानित फीस
| कॉलेज का नाम | स्थान | अनुमानित वार्षिक फीस (INR) |
| संकरा नेत्रालय मेडिकल इंस्टीट्यूट | चेन्नई | INR 1.5 लाख – INR 3 लाख |
| गुलजार ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट्स | लुधियाना, पंजाब | INR 50,000 – INR 80,000 |
| ओम पैरामेडिकल एंड टेक्निकल एजुकेशन | नई दिल्ली | INR 30,000 – INR 70,000 |
| महर्षि मार्कंडेश्वर विश्वविद्यालय | अंबाला, हरियाणा | INR 60,000 – INR 1.2 लाख |
| बीएफआईटी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स | देहरादून, उत्तराखंड | INR 35,000 – INR 2.25 लाख |
रेडियोलॉजी कोर्स (UG डिग्री लेवल) के लिए सरकारी कॉलेज और उनकी अनुमानित फीस
| कॉलेज का पूरा नाम | स्थान | अनुमानित वार्षिक फीस (INR) |
| अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) | नई दिल्ली | INR 1,000 – INR 5,000 |
| जवाहरलाल स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (JIPMER) | पुडुचेरी | INR 3,000 – INR 10,000 |
| बनारस हिंदू विश्वविद्यालय – चिकित्सा विज्ञान संस्थान | वाराणसी, उत्तर प्रदेश | INR 10,000 – INR 25,000 |
| किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी | लखनऊ, उत्तर प्रदेश | INR 20,000 – INR 40,000 |
| मद्रास मेडिकल कॉलेज | चेन्नई, तमिलनाडु | INR 15,000 – INR 30,000 |
| बैंगलोर मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट | बेंगलुरु, कर्नाटक | INR 25,000 – INR 40,000 |
| सरकारी मेडिकल कॉलेज | तिरुवनंतपुरम, केरल | INR 10,000 – INR 25,000 |
रेडियोलॉजी कोर्स (UG डिग्री लेवल) के लिए प्राइवेट कॉलेज और उनकी अनुमानित फीस
| कॉलेज का नाम | स्थान | अनुमानित वार्षिक फीस (INR) |
| जामिया हमदर्द विश्वविद्यालय | नई दिल्ली | INR 1.5 लाख – INR 3.5 लाख |
| मणिपाल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन | मणिपाल, कर्नाटक | INR 2 लाख – INR 3 लाख |
| एसआरएम मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर | चेन्नई, तमिलनाडु | INR 1.8 लाख – INR 2.5 लाख |
| स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय | देहरादून, उत्तराखंड | INR 1.2 लाख – INR 2 लाख |
| उत्तरांचल विश्वविद्यालय | देहरादून, उत्तराखंड | INR 90,000 – INR 1.2 लाख |
| एमएस रामैया यूनिवर्सिटी ऑफ एप्लाइड साइंसेज | बेंगलुरु | INR 2 लाख – INR 3 लाख |
| लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी | फगवाड़ा, पंजाब | INR 1.5 लाख – INR 2.5 लाख |
| अमिटी यूनिवर्सिटी | नोएडा, उत्तर प्रदेश | INR 2 लाख – INR 3.2 लाख |
रेडियोलॉजी कोर्स (PG डिग्री लेवल) के लिए सरकारी कॉलेज और उनकी अनुमानित फीस
| कॉलेज का पूरा नाम | स्थान | अनुमानित वार्षिक फीस (INR) |
| अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान | नई दिल्ली | INR 2,000 – INR 5,000 |
| पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER) | चंडीगढ़ | INR 2,500 – INR 10,000 |
| मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज | नई दिल्ली | INR 10,000 – INR 15,000 |
| आर्म्ड फोर्सेस मेडिकल कॉलेज | पुणे, महाराष्ट्र | INR 60,000 – INR 75,000 |
| किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी | लखनऊ, उत्तर प्रदेश | INR 25,000 – INR 40,000 |
| बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) | वाराणसी, उत्तर प्रदेश | INR 15,000 – INR 20,000 |
| सेठ जीएस मेडिकल कॉलेज और KEM अस्पताल | मुंबई, महाराष्ट्र | INR 20,000 – INR 30,000 |
| बी. जे. मेडिकल कॉलेज | अहमदाबाद, गुजरात | INR 12,000 – INR 25,000 |
| स्टेनली मेडिकल कॉलेज | चेन्नई, तमिलनाडु | INR 15,000 – INR 25,000 |
| सरकारी मेडिकल कॉलेज | कोलकाता, पश्चिम बंगाल | INR 10,000 – INR 20,000 |
रेडियोलॉजी कोर्स (PG डिग्री लेवल) के लिए प्राइवेट कॉलेज और उनकी अनुमानित फीस
| कॉलेज का नाम | स्थान | अनुमानित वार्षिक फीस (INR) |
| कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज | मणिपाल, कर्नाटक | INR 5 लाख – INR 7 लाख |
| श्री रामचंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ हायर एजुकेशन एंड रिसर्च | चेन्नई | INR 6 लाख – INR 10 लाख |
| डॉ. डी.वाई. पाटिल विद्यापीठ मेडिकल कॉलेज | पुणे, महाराष्ट्र | INR 2 लाख – INR 4 लाख |
| सेविथा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल | कांचीपुरम, तमिलनाडु | INR 8 लाख – INR 15 लाख |
| सेंट जॉन्स मेडिकल कॉलेज | बेंगलुरु | INR 6 लाख – INR 12 लाख |
| क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज | लुधियाना, पंजाब | INR 3 लाख – INR 6 लाख |
| केएलई जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज | बेलगावी, कर्नाटक | INR 5 लाख – INR 8 लाख |
रेडियोलॉजी कोर्स के बाद करियर स्कोप और सैलरी
रेडियोलॉजी कोर्स करने के बाद आप AIIMS, कोलंबिया एशिया, अपोलो हॉस्पिटल, CMC, मेदांता, फोर्टिस जैसे प्रमुख अस्पतालों, डायग्नोस्टिक सेंटर्स, रिसर्च लैब और हेल्थ-टेक स्टार्टअप्स में भी निम्नलिखित जॉब प्रोफाइल्स पर काम करके अपने करियर की शुरुआत कर सकते हैं –
| जॉब प्रोफाइल | अनुमानित सालाना सैलरी (INR) |
| एक्स-रे टेक्नीशियन | INR 2.3 लाख – INR 2.6 लाख |
| रेडियोग्राफर्स | INR 2.8 लाख – INR 3 लाख |
| साइंटिफिक असिस्टेंट | INR 9 लाख – INR 10.1 लाख |
| रेडियोलॉजिक टेक्नोलॉजिस्ट | INR 7 लाख – INR 8 लाख |
| न्यूक्लियर मेडिसिन टेक्नोलॉजिस्ट | INR 9.8 लाख – INR 10.9 लाख |
नोट – यहां अनुमानित सैलरी की जानकारी Ambitionbox.com. के आधार पर दी गई है जिसमें बदलाव संभव है।
रेडियोलॉजी कोर्स के बाद आगे की पढ़ाई के विकल्प
रेडियोलॉजी कोर्स में आप डिप्लोमा से लेकर पीएचडी स्तर तक की पढ़ाई कर सकते हैं। इस फील्ड में हर स्तर की पढ़ाई पूरी करने के बाद आपके लिए करियर के कई अवसर भी उपलब्ध होते हैं। यदि आप रेडियोलॉजी कोर्स के बाद आगे की पढ़ाई के विकल्पों के बारे में जानना चाहते हैं, तो नीचे दी गई टेबल में इसकी विस्तृत जानकारी देख सकते हैं।
| कोर्स का नाम | कोर्स का लेवल | न्यूनतम आवश्यक योग्यता | संभावित करियर विकल्प |
| डिप्लोमा इन रेडियोलॉजी और मेडिकल इमेजिंग टेक्नोलॉजी | डिप्लोमा | 12वीं (PCM/PCB अनिवार्य) | रेडियोलॉजी टेक्नीशियन, एक्स-रे टेक्नीशियन, डायग्नोस्टिक सेंटर टेक्नीशियन, हॉस्पिटल रेडियोलॉजी असिस्टेंट |
| बैचलर ऑफ रेडियोलॉजी और इमेजिंग टेक्नोलॉजी | अंडर ग्रेजुएट | 12वीं विज्ञान (PCB या PCM) | रेडियोलॉजी टेक्नोलॉजिस्ट, सीटी स्कैन टेक्नीशियन, एमआरआई टेक्नीशियन |
| बैचलर ऑफ मेडिकल रेडियोलॉजी और इमेजिंग टेक्नोलॉजी (BMRIT) | अंडर ग्रेजुएट | 12वीं विज्ञान (PCB) | मेडिकल इमेजिंग स्पेशलिस्ट, रेडियोलॉजी टेक्नोलॉजिस्ट, हॉस्पिटल इमेजिंग विभाग में टेक्निकल सुपरवाइजर |
| मास्टर ऑफ रेडियोलॉजी और इमेजिंग टेक्नोलॉजी | पोस्ट ग्रेजुएट | संबंधित विषय में बीएससी या BMRIT | सीनियर रेडियोलॉजी टेक्नोलॉजिस्ट, इमेजिंग विभाग मैनेजर |
| मास्टर ऑफ मेडिकल रेडियोलॉजी और इमेजिंग टेक्नोलॉजी | पोस्ट ग्रेजुएट | बैचलर ऑफ रेडियोलॉजी और इमेजिंग टेक्नोलॉजी | उन्नत इमेजिंग विशेषज्ञ, एमआरआई/सीटी विभाग प्रभारी |
| डॉक्टर ऑफ मेडिसिन इन रेडियोडायग्नोसिस | मेडिकल स्पेशलाइज़ेशन | MBBS डिग्री और मेडिकल प्रवेश परीक्षा के माध्यम से प्रवेश | रेडियोलॉजिस्ट डॉक्टर, इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी विशेषज्ञ |
रेडियोलॉजी बनाम लैब टेक्नोलॉजी में अंतर
यहाँ नीचे दी गई टेबल में आपके लिए रेडियोलॉजी बनाम लैब टेक्नोलॉजी में अंतर को संक्षिप्त और आसान भाषा में समझाया गया है –
| पैरामीटर | रेडियोलॉजी | लैब टेक्नोलॉजी |
| कार्य प्रकृति | शरीर की इमेजिंग (X-Ray, CT, MRI, अल्ट्रासाउंड) | ब्लड, यूरिन, टिश्यू सैंपल की जांच |
| मुख्य उद्देश्य | बीमारी का विजुअल डायग्नोसिस | बायोकेमिकल और माइक्रोबायोलॉजिकल डायग्नोसिस |
| उपयोग मशीन | X-Ray, CT, MRI, Ultrasound | एनालाइजर, माइक्रोस्कोप, PCR, सेंट्रीफ्यूज |
| स्किल फोकस | इमेज पोजिशनिंग, रेडिएशन सेफ्टी | सैंपल हैंडलिंग, केमिकल टेस्टिंग |
| जोखिम | रेडिएशन एक्सपोजर (नियमों से नियंत्रित) | बायोलॉजिकल इंफेक्शन रिस्क |
| रेगुलेशन | एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड | नेशनल अक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लैबोरेट्रीज |
| पढ़ाई | डिप्लोमा / बीएससी रेडियोलोजी | DMLT / BMLT |
| करियर ग्रोथ | MRI/CT स्पेशलाइजेशन से बेहतर | सीमित स्पेशलाइजेशन |
| वर्कप्लेस | हॉस्पिटल, डायग्नोस्टिक इमेजिंग सेंटर | पैथोलॉजी लैब, हॉस्पिटल |
भारत और विदेश में रेडियोलॉजी कोर्स का स्कोप
भारत और विदेश दोनों ही जगह पर रेडियोलॉजी कोर्स का अच्छा स्कोप है, इसे करने के बाद भारत में सरकारी और निजी अस्पतालों में जॉब के अनेक विकल्प आपके सामने होते हैं। जबकि विदेश से रेडियोलॉजी कोर्स करने के बाद आपको निजी अस्पताल और मल्टी-स्पेशलिटी हॉस्पिटल में उच्च स्तर की इमेजिंग तकनीक के साथ काम करने का अवसर मिलता है, जिससे आप तकनीकी तौर पर इस फील्ड को और नज़दीक से जान पाते हैं। परिणामस्वरूप भारत में भी कई अस्पतालों में विदेशी ट्रेनिंग वाले प्रोफेशनल्स को प्राथमिकता दी जाती है।
भारत में पोस्ट ग्रेजुएशन लेवल के रेडियोलॉजी कोर्स के बाद आप मेडिकल इमेजिंग टेक्नोलॉजी या संबंधित स्पेशलाइजेशन को आसानी से कर सकते हैं, जिससे आपको CT, MRI या इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी में विशेषज्ञता प्राप्त हो जाती है। जबकि विदेश में मास्टर्स या एडवांस्ड सर्टिफिकेट कोर्स (जैसे – एडवांस्ड मेडिकल इमेजिंग या इंटरवेंशनल रेडियोलोजी) करके रिसर्च और तकनीकी विशेषज्ञता प्राप्त की जा सकती है।
भारत में रेडियोलॉजी कोर्स करके आप विदेशों में भी जॉब पा सकते हैं, हालाँकि इसके लिए आपको कंट्री स्पेसिफिक लाइसेंसिंग परीक्षा (जैसे UK में HCPC रजिस्ट्रेशन या USA में ARRT) पास करनी होती है। वहीं यदि आपने कोर्स विदेश (जैसे UK, USA, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा) से किया है तो आपको वहां के हेल्थकेयर सिस्टम में काम करने के अवसर अधिक मिल सकते हैं।
देखा जाए तो भारत और विदेश दोनों ही जगह से रेडियोलॉजी कोर्स करना आपके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है, हालाँकि ये इस बात पर अधिक निर्भर करता है कि आपने अपने लिए किन परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लिया है।
FAQs
रेडियोलॉजी कोर्स की अवधि कोर्स के प्रकार पर निर्भर करती है। डिप्लोमा कोर्स सामान्यतः दो वर्ष का होता है, ग्रेजुएशन लेवल का कोर्स तीन से चार वर्ष का होता है, जबकि मास्टर्स और स्पेशलाइज़ेशन कोर्स दो वर्ष अतिरिक्त लगते हैं।
हाँ, रेडियोलॉजिस्ट बनने के लिए आपको 12वीं के बाद नीट पास करके एमबीबीएस में प्रवेश लेना पड़ता है। एमबीबीएस के बाद नीट पीजी पास करके रेडियोलॉजी में एमडी या डीएनबी करने पर ही कोई व्यक्ति रेडियोलॉजिस्ट बन सकता है। हालाँकि रेडियोलॉजी सर्टिफिकेट और डिप्लोमा टाइप के कोर्सेज के लिए नीट की आवश्यकता नहीं होती है, इनमें आपका एडमिशन अधिकांश संस्थानों में मेरिट के आधार पर होता है।
हाँ, लड़कियां सफलतापूर्वक रेडियोलॉजी में काम कर सकती हैं। लड़कियां रेडियोलॉजी करके अस्पतालों और जांच केंद्रों में महिलाओं की मांग भी रहती है, खासकर महिला मरीजों की जांच में लड़कियां एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
भारत में रेडियोलॉजी का फ्यूचर स्कोप बहुत है क्योंकि अस्पतालों, जांच केंद्रों और रिमोट मेडिकल सर्विस में तेजी से विस्तार हो रहा है। कैंसर, हृदय और मस्तिष्क रोगों की जांच के लिए इमेजिंग की मांग बढ़ रही है।
एक्स-रे करने के लिए छात्र को रेडियोलॉजी या एक्स-रे तकनीशियन डिप्लोमा करना होता है। यह सबसे सामान्य कोर्स है। इसके अलावा मेडिकल इमेजिंग या रेडियोग्राफी में ग्रेजुएशन डिग्री भी की जा सकती है, जिससे नौकरी और करियर के अवसर बेहतर हो जाते हैं।
Related Reads:
| रेडियोलॉजिस्ट कैसे बनें? | BRIT कोर्स डिटेल्स |
| 12वीं के बाद NEET के बिना किए जाने वाले मेडिकल कोर्सेज की लिस्ट | MLT कोर्स डिटेल्स |
हमें उम्मीद है कि इस लेख में आपको रेडियोलॉजी कोर्स की सभी आवश्यक जानकारी मिल गई होगी। ऐसे ही अन्य कोर्स से संबंधित लेख पढ़ने के लिए Leverage Edu के साथ बने रहें।

One app for all your study abroad needs



60,000+ students trusted us with their dreams. Take the first step today!